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शुक्ल पक्ष · एकादशी तिथि · मार्गशीर्ष

मोक्षदा एकादशी 2026 कब है?

मोक्षदा एकादशी 2026

54 दिन बाद

रवि, 20 दिसंबर

2026 में मोक्षदा एकादशी रविवार, 20 दिसंबर को है। नई दिल्ली में पारण 21 दिसंबर को सुबह 7:09 से सुबह 9:13 तक है; एकादशी तिथि 19 दिसंबर, रात 10:10 से 20 दिसंबर, रात 8:15 तक रहेगी।

2027: गुरुवार, 9 दिसंबर 2027

पारण

सुबह 7:09 – सुबह 9:13

नई दिल्ली

मोक्षदा एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

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नई दिल्ली के लिए गणना

मोक्षदा एकादशी 2026: तारीख और तिथि का समय

रविवार, 20 दिसंबर 2026

तिथि
एकादशी, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
मार्गशीर्ष
तिथि आरंभ
19 दिसंबर, रात 10:10
तिथि समाप्त
20 दिसंबर, रात 8:15
दिन का निर्णय
सूर्योदय
नई दिल्ली में सूर्योदय
20 दिसंबर, सुबह 7:08

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: मोक्षदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

मोक्षदा एकादशी 2026 के सभी मुहूर्त · नई दिल्ली

मोक्षदा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जो मोक्ष देने वाले भगवान विष्णु के लिए रखी जाती है, और यही गीता जयंती भी है, वह दिन जब श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता का उपदेश दिया माना जाता है। नई दिल्ली में यह रविवार, 20 दिसंबर 2026 को है: व्रत सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है, पारण का समय 21 दिसंबर, सुबह 7:09 से सुबह 9:13 तक है, और दिन भर गीता का पाठ होता है।

मोक्षदा एकादशी 2026 के सभी मुहूर्त — नई दिल्ली
मुहूर्तनई दिल्ली में समयकिसके लिए
पारण का समय21 दिसंबर, सुबह 7:09 से सुबह 9:13 तकद्वादशी की सुबह (दिन का पहला पाँचवाँ भाग); हरि वासर रात में ही समाप्त हो चुका है।

द्वादशी का वह समय, जिसमें मोक्षदा एकादशी का व्रत पूरा किया जाता है। यह हरि वासर बीतने के बाद शुरू होता है और सामान्यतः सुबह के पहले भाग तक रहता है; हरि वासर देर तक चले तो पारण दोपहर के बाद होता है, और द्वादशी समाप्त होने के बाद कभी नहीं। यहाँ दिया समय नई दिल्ली के लिए गणना करके दिया गया है।

हरि वासर समाप्ति21 दिसंबर, रात 1:35द्वादशी के पहले चौथाई भाग का अंत; इसके भीतर व्रत नहीं खोला जाता।

हरि वासर द्वादशी का पहला चौथाई भाग है। इसमें व्रत नहीं खोला जाता, चाहे सुबह हो चुकी हो, इसलिए नई दिल्ली में इसकी समाप्ति ही पारण का सबसे पहला क्षण है।

ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:19 से सुबह 6:14 तकरात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, जो सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले ख़त्म होता है।

एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले का समय: उठने, स्नान करने और व्रत का संकल्प लेने का पारंपरिक समय।

सूर्योदयसुबह 7:08क्षितिज पर सूर्य का ऊपरी किनारा दिखने का समय।

व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक गिना जाता है, और सुबह की पूजा इसके बाद होती है।

शुभ चौघड़िया (दिन)
  • चर सुबह 8:26 से सुबह 9:43 तक
  • लाभ सुबह 9:43 से सुबह 11:01 तक
  • अमृत सुबह 11:01 से दोपहर 12:18 तक
  • शुभ दोपहर 1:36 से दोपहर 2:53 तक
दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया।

दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया। जो परिवार भोर में पूजा नहीं कर पाते, वे मुख्य पूजा के लिए इनमें से कोई समय चुनते हैं।

प्रदोष काल: संध्या दीपशाम 5:28 से रात 8:12 तकसूर्यास्त से रात के तीन मुहूर्त (रात का पाँचवाँ भाग)।

सूर्यास्त के बाद का समय, जब भगवान विष्णु के आगे और तुलसी के पास दीप जलाए जाते हैं और फिर से आरती होती है।

निशीथ काल: रात्रि जागरणरात 11:51 से रात 12:46 (21 दिसंबर) तकरात के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, आधी रात के आसपास।

आधी रात का समय, जागरण का केंद्र। जो रात भर जागते हैं, वे यह भाग कीर्तन और जप को देते हैं।

राहु काल (वर्जित समय)इस समय टाला जाता हैशाम 4:11 से शाम 5:28 तकदिन का वह आठवाँ भाग जो वार के अनुसार राहु का है: इसमें पूजा, खरीदारी या यात्रा शुरू नहीं की जाती।

नई दिल्ली में एकादशी के दिन का राहु काल। बहुत से परिवार संकल्प या मुख्य पूजा इसके भीतर शुरू नहीं करते; इससे व्रत या पारण का समय नहीं बदलता।

उस दिन के शुभ समय

उस दिन के शुभ समय
मुहूर्तनई दिल्ली में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्तसुबह 11:57 से दोपहर 12:39शुभ
अमृत कालसुबह 8:02 से सुबह 9:34सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:19 से सुबह 6:14शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
अवधिनई दिल्ली में समय
राहु कालशाम 4:11 से शाम 5:28
यमगण्ड कालदोपहर 12:18 से दोपहर 1:36
दुर्मुहूर्त (पहला)शाम 4:05 से शाम 4:47
वर्ज्यम्सुबह 11:06 से दोपहर 12:38
वर्ज्यम् (दूसरा)रात 11:49 से रात 1:18

ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए रविवार, 20 दिसंबर 2026 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।

पारण · नई दिल्ली

मोक्षदा एकादशी 2026 पारण का समय

सोमवार, 21 दिसंबर 2026, सुबह 7:09 से सुबह 9:13

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 21 दिसंबर, रात 1:35 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

शुक्ल पक्ष · मार्गशीर्ष

मोक्षदा एकादशी 2026: स्मार्त और वैष्णव तारीख

इस बार यह एकादशी सूर्य के धनु राशि में रहते पड़ती है — तमिल मार्गऴि मास — इसलिए दक्षिण भारत में रविवार, 20 दिसंबर 2026 को यही वैकुंठ एकादशी के रूप में मनाई जाती है, जब श्रीरंगम, तिरुपति और अन्य विष्णु मंदिरों में वैकुंठ द्वार खोला जाता है।

इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
रविवार, 20 दिसंबर 2026 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
रविवार, 20 दिसंबर 2026 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; रविवार, 20 दिसंबर 2026 का अरुणोदय (20 दिस, सुबह 5:32) एकादशी में है, दशमी में नहीं।

ऊपर का हर दिन नई दिल्ली के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।

महत्व और व्रत कथा

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा और महत्व

मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी है — वही मास जिसे श्रीकृष्ण गीता में अपना बताते हैं ("मासानां मार्गशीर्षोऽहम्")। मोक्षदा का अर्थ है मोक्ष देने वाली। इस दिन भगवान विष्णु और गीता के वक्ता श्रीकृष्ण की पूजा होती है, और परंपरा में व्रत का पुण्य पितरों के लिए अर्पित किया जाता है — इसकी कथा भी इसी की है।

गीता जयंती इसी एकादशी को मनाई जाती है। परंपरा के अनुसार इसी दिन श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को भगवद गीता का उपदेश दिया था। इस दिन गीता का पाठ — प्रायः पूरे अठारह अध्याय — होता है, और मंदिरों में, विशेषकर स्वयं कुरुक्षेत्र में, गीता पाठ के आयोजन होते हैं। गीता जयंती की कोई अलग तारीख नहीं है: वह मोक्षदा एकादशी ही है, इसलिए वह इसी पेज पर है।

मोक्षदा एकादशी की कथा

संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: ब्रह्मांड पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य।

राजा वैखानस चंपक नगर पर राज करते थे और प्रजा का पालन पिता की तरह करते थे। एक रात उन्होंने सपने में देखा कि उनके पिता अधोलोक में कष्ट भोग रहे हैं और उनसे सहायता माँग रहे हैं। व्याकुल होकर उन्होंने सुबह अपने दरबार के विद्वान ब्राह्मणों से उपाय पूछा।

उन्होंने राजा को पर्वत मुनि के आश्रम भेजा, जो भूत, वर्तमान और भविष्य जानते थे। पर्वत मुनि ने ध्यान लगाया और बताया कि राजा के पिता ने अपने जीवन में अपनी एक पत्नी के साथ अन्याय किया था, और वही कर्म उन्हें अब बाँधे हुए है।

मुनि ने कहा कि उपाय निकट ही है। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी — मोक्षदा, मोक्ष देने वाली — का व्रत पूरे परिवार के साथ रखो, और उसका पुण्य अपने पिता को अर्पित कर दो।

वैखानस ने रानी, संतान और मंत्रियों के साथ ऐसा ही किया। पुराण कहता है कि पुण्य अर्पित करते ही आकाश से फूल बरसे और मुक्त होकर उनके पिता स्वर्ग जाते हुए पुत्र को आशीर्वाद दे गए। कथा के अंत में श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि यह व्रत चिंतामणि के समान है, और इसकी कथा सुनना भी पुण्य है।

व्रत कैसे रखा जाता है

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
  • एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
  • भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
  • पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।

उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सभी 26 · नई दिल्ली

सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख

साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।

अगली एकादशी और उसका पारण · 2026 की सभी एकादशी — तिथि और पारण के समय के साथ

पूजा विधि · घर पर, क्रम से

मोक्षदा एकादशी पूजा विधि

हर एकादशी का व्रत एक ही ढंग से रखा जाता है: दशमी को एक समय सात्विक भोजन, सुबह संकल्प, तुलसी के साथ विष्णु पूजा, कथा और आरती, शाम को दीप, रात्रि जागरण और द्वादशी को पारण। ये चरण एकादशी व्रत विधि में हैं। नीचे वे चरण हैं जो मोक्षदा एकादशी में जुड़ते हैं या अलग ढंग से किए जाते हैं।

  1. व्रत का संकल्प

    पूजा स्थान के सामने बैठकर दाहिने हाथ में थोड़ा जल और एक फूल लें और व्रत का संकल्प करें: अपना नाम लें, कहें कि आप भगवान विष्णु के लिए मोक्षदा एकादशी का व्रत रख रहे हैं, और यह भी कि व्रत कैसा होगा, निर्जल, केवल जल पर, फलाहार पर या एक समय के फलाहारी भोजन के साथ। फिर जल धरती पर छोड़ दें। मंत्र वाले भाग का एकादशी संकल्प श्लोक यहाँ बोला जा सकता है।

  2. कथा और आरती

    नीचे दी गई मोक्षदा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें, और हो सके तो विष्णु सहस्रनाम या गीता का एक अध्याय भी। फिर घी के दीपक या कपूर से 'ॐ जय जगदीश हरे' आरती गाएँ और पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा माँगें।

  3. गीता जयंती का गीता पाठ

    मोक्षदा ही गीता जयंती है। भगवद्गीता की प्रति चौकी पर रखें, उसे फूल और दीप अर्पित करें और पाठ करें: हो सके तो पूरे अठारह अध्याय, अकेले या परिवार में बाँटकर, नहीं तो कोई एक अध्याय, जैसे भक्ति का बारहवाँ या अठारहवाँ।

  4. व्रत का पुण्य पितरों को

    कथा में राजा वैखानस की तरह बहुत से परिवार मोक्षदा का पुण्य अपने पितरों को अर्पित करते हैं। द्वादशी की सुबह पारण से पहले हाथ में जल, एक फूल और थोड़े तिल लें, जिन्हें याद करते हैं उनका नाम लें और उनकी शांति की प्रार्थना के साथ जल छोड़ दें।

सामग्री · पहले से तैयार रखें

मोक्षदा एकादशी पूजा सामग्री सूची

हर एकादशी की पूजा सामग्री (विष्णु की प्रतिमा, दशमी को तोड़े तुलसी के पत्ते, घी का दीपक, पीले फूल, पंचामृत, गंगाजल आदि) एकादशी पूजा सामग्री सूची में है। मोक्षदा एकादशी के लिए इसके साथ:

  • भगवद्गीता की प्रति गीता जयंती के पाठ के लिए; पढ़ने से पहले उसे फूल अर्पित किया जाता है।
  • काले तिल और कुश द्वादशी को व्रत का पुण्य पितरों को अर्पित करने के लिए।

मंत्र · अर्थ के साथ

मोक्षदा एकादशी के मंत्र और आरती

हर एकादशी में पढ़े जाने वाले श्लोक — ध्यान और संकल्प से लेकर पारण के श्लोक तक — और ॐ जय जगदीश हरे आरती एकादशी गाइड के एकादशी के मंत्र और आरती वाले हिस्से में हैं। मोक्षदा एकादशी के अपने:

भगवद्गीता, अध्याय 18, श्लोक 66

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥

Sarva-dharman parityajya mam ekam sharanam vraja
Aham tva sarva-papebhyo mokshayishyami ma shuchah

अर्थ: सब धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा; शोक मत करो। गीता के अंत के पास श्रीकृष्ण का अर्जुन को दिया गया सार उपदेश।

कब और कैसे: पूजा के बाद अकेले या गीता के किसी अध्याय के अंत में पढ़ें; बहुत से लोग पूरे अठारह अध्याय पढ़ते हैं।

भगवद्गीता, अध्याय 10, श्लोक 35

बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् ।
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥

Brihat-sama tatha samnam gayatri chhandasam aham
Masanam margashirsho'ham ritunam kusumakarah

अर्थ: सामवेद के गीतों में मैं बृहत्साम हूँ, छंदों में गायत्री; महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ और ऋतुओं में वसंत। इसी श्लोक में श्रीकृष्ण इस मास को अपना बताते हैं।

कब और कैसे: मार्गशीर्ष की एकादशी पर सुबह की पूजा में एक बार।

महत्व

मोक्षदा एकादशी का महत्व

यह दिन दो बातें माँगता है: अतीत को छोड़ना, और दिवंगतों को केवल शोक से नहीं, किसी कर्म से याद करना। पिता के कष्ट का सपना देखकर विचलित राजा वैखानस ने पूरे परिवार के साथ उपवास किया और उसका फल पिता को सौंप दिया, और पुराण बताता है कि पिता मुक्त हो गए। बहुत से परिवार आज भी ऐसे ही रखते हैं, संकल्प में माता-पिता या दादा-दादी का नाम लेकर। पुराण इस उपवास को चिंतामणि जैसा बताता है, और कथा सुनना भी सार्थक मानता है।

इसी दिन गीता जयंती भी होती है, इसलिए बहुत से लोग उपवास के साथ गीता का एक अध्याय, या पूरे अठारह, पढ़ते हैं। राम-सीता के विवाह का दिन, विवाह पंचमी, कुछ दिन पहले आता है, और पूर्णिमा को दत्त जयंती कुछ दिन बाद। किसी साल इस दिन सूर्य धनु राशि में होता है, और तब दक्षिण भारत में यही वैकुंठ एकादशी भी होती है; ऐसे वर्ष यह पेज बताता है।

उपाय · परंपरा

मोक्षदा एकादशी के पारंपरिक उपाय

दिन भर गीता पाठ

गीता जयंती सबसे बढ़कर गीता पढ़कर मनाई जाती है: पूरी गीता, ज़रूरत हो तो परिवार में बाँटकर, या दिन की हर पूजा में एक अध्याय। जो पढ़ न सकें, वे ध्यान से सुनें।

व्रत का पुण्य पितरों को

कथा के अनुसार द्वादशी की सुबह, पारण से पहले, जल, फूल और तिल के साथ व्रत का पुण्य अपने माता-पिता और पूर्वजों को अर्पित करें।

गीता का दान

पाने वाला जिस भाषा में पढ़ता हो, उस भाषा में गीता की प्रति देना गीता जयंती से सबसे अधिक जुड़ा दान है; बहुत से मंदिर और परिवार इस दिन गीता बाँटते हैं।

श्रीकृष्ण के आगे घी का दीपक

गीता के वक्ता होने के कारण आज श्रीकृष्ण की पूजा भी भगवान विष्णु के साथ होती है; शाम को उनके चित्र के आगे घी का दीपक जलाएँ और उनके नाम गाएँ।

एक श्लोक कंठस्थ करें

आज गीता का एक श्लोक याद करें, जैसे मंत्र वाले भाग का श्लोक, और अगली गीता जयंती तक उसे हर सुबह बोलें।

कुरुक्षेत्र या कृष्ण मंदिर

जो जा सकें, वे कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर और ज्योतिसर के दर्शन करें, जहाँ परंपरा गीता का उपदेश मानती है, या पास के किसी कृष्ण मंदिर के गीता पाठ में शामिल हों।

पारण से पहले किसी को भोजन

द्वादशी की सुबह अपना व्रत खोलने से पहले किसी ज़रूरतमंद को भोजन, या अन्न और फल दें; व्रत का पारंपरिक समापन यही है।

परंपरा, संक्षेप में

मोक्षदा एकादशी पर क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • दशमी को सूर्यास्त से पहले एक बार हल्का सात्विक भोजन करें।
  • सुबह संकल्प लें और जैसा व्रत तय किया, वैसा ही निभाएँ।
  • हर भोग पर एक दिन पहले तोड़ा गया तुलसी दल रखें।
  • 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करें और कथा पढ़ें या सुनें।
  • शाम को भगवान विष्णु के सामने और तुलसी के पास दीपक जलाएँ।
  • रात का कम से कम कुछ भाग कीर्तन या जप में जागें।
  • ज़रूरतमंद को भोजन या जल दें, और द्वादशी को पारण से पहले दान करें।
  • द्वादशी को पारण के समय के भीतर ही व्रत खोलें।
  • गीता जयंती के लिए भगवद्गीता, या कम से कम उसका एक अध्याय, पढ़ें।
  • व्रत का पुण्य पितरों को देना हो, तो द्वादशी को पारण से पहले दें।

क्या न करें

  • एकादशी को चावल, गेहूँ, दाल या कोई भी अन्न न खाएँ।
  • एकादशी को तुलसी दल न तोड़ें।
  • दशमी से द्वादशी तक प्याज़, लहसुन, मांस, अंडा और मदिरा से दूर रहें।
  • दिन में न सोएँ।
  • झगड़ा, झूठ और कटु वचन से बचें।
  • हरि वासर में व्रत न खोलें, और द्वादशी बीतने से पहले पारण कर लें।
  • बीमार, बुज़ुर्ग, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं और बच्चों पर कठोर व्रत का दबाव न डालें; डायबिटीज़ या किसी और बीमारी वाले, या रोज़ दवा लेने वाले लोग व्रत से पहले डॉक्टर से पूछ लें।
  • गीता को ज़मीन पर न रखें; पाठ पूरा होने पर छोटी-सी प्रार्थना के साथ बंद करें।

देश भर में

मोक्षदा एकादशी की क्षेत्रीय परंपराएँ और भोग

क्षेत्र के अनुसार

कुरुक्षेत्र, हरियाणा
गीता जयंती के आसपास कई दिनों तक अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव होता है: गीता पाठ, ब्रह्म सरोवर पर आरती और ज्योतिसर पर तीर्थयात्री।
तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक
जिन वर्षों में इस दिन सूर्य धनु राशि में हो, उनमें यही वैकुंठ एकादशी होती है, और श्रीरंगम, तिरुपति व अन्य विष्णु मंदिरों में भोर से पहले वैकुंठ द्वार खोला जाता है।
इस्कॉन मंदिर
गीता जयंती गीता पाठ, कीर्तन और गीता की प्रतियाँ बाँटकर मनाई जाती है।

भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन

किसी भी एकादशी पर क्या खाया जा सकता है — फल और साबूदाने से लेकर समा के चावल और पारण के भोजन तक — यह एकादशी व्रत के भोजन की सूची में है।

आने वाले वर्षों में मोक्षदा एकादशी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

आने वाले वर्षों में मोक्षदा एकादशी की तारीख
वर्षतारीखस्थिति
2026इस वर्षरविवार, 20 दिसंबर 2026आने वाली
2027गुरुवार, 9 दिसंबर 2027आने वाली
2028सोमवार, 27 नवंबर 2028आने वाली

पंचांगों में मोक्षदा एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग मोक्षदा एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: मोक्षदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

मोक्षदा एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2026 में मोक्षदा एकादशी कब है?

नई दिल्ली में मोक्षदा एकादशी रविवार, 20 दिसंबर 2026 को है, और एकादशी तिथि रात 10:09 (19 दिसंबर) से रात 8:15 तक रहेगी। यह मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी है; शुक्ल पक्ष होने से पूर्णिमांत और अमांत दोनों गणनाओं में इसका महीना एक ही है, और यह नवंबर के अंत से दिसंबर के अंत के बीच आती है।

मोक्षदा एकादशी की तिथि क्या है?

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। नई दिल्ली में यह तिथि 19 दिसंबर, रात 10:10 से 20 दिसंबर, रात 8:15 तक है, और मोक्षदा एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

मोक्षदा एकादशी का पारण कब करें?

सोमवार, 21 दिसंबर 2026 को सुबह 7:09 से सुबह 9:13 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

दूसरे कैलेंडर में मोक्षदा एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल मोक्षदा एकादशी कब है?

2027 में गुरुवार, 9 दिसंबर; 2028 में सोमवार, 27 नवंबर।

मोक्षदा एकादशी क्यों रखी जाती है?

मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी है — वही मास जिसे श्रीकृष्ण गीता में अपना बताते हैं ("मासानां मार्गशीर्षोऽहम्")। मोक्षदा का अर्थ है मोक्ष देने वाली। इस दिन भगवान विष्णु और गीता के वक्ता श्रीकृष्ण की पूजा होती है, और परंपरा में व्रत का पुण्य पितरों के लिए अर्पित किया जाता है — इसकी कथा भी इसी की है।

मोक्षदा एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?

कथा ब्रह्मांड पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

क्या स्मार्त और वैष्णव मोक्षदा एकादशी अलग दिन है?

नहीं, इस बार दोनों रविवार, 20 दिसंबर 2026 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।

गीता जयंती कब है, क्या यह मोक्षदा एकादशी के दिन ही है?

हाँ। गीता जयंती की अपनी अलग तारीख नहीं होती: परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण ने मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था, और यही मोक्षदा एकादशी है। इसलिए नई दिल्ली में गीता जयंती भी रविवार, 20 दिसंबर 2026 को है। जो व्रत नहीं रखते, वे गीता पाठ से यह दिन मनाते हैं, और व्रती पाठ को व्रत का अंग बनाते हैं।

मोक्षदा एकादशी का पारण कब है?

पारण अगली सुबह, द्वादशी को होता है। नई दिल्ली में पारण का समय 21 दिसंबर, सुबह 7:09 से सुबह 9:13 तक है, जो हरि वासर समाप्त होने (21 दिसंबर, रात 1:35) के बाद शुरू होता है। बहुत से परिवार व्रत खोलने से पहले किसी को भोजन या गीता की प्रति देते हैं, और जो व्रत का पुण्य पितरों को अर्पित करते हैं, वे यह पारण से ठीक पहले करते हैं।

मोक्षदा एकादशी की व्रत कथा क्या है?

चंपक नगर के राजा वैखानस ने सपने में देखा कि उनके दिवंगत पिता अधोलोक में कष्ट भोग रहे हैं। पर्वत मुनि ने ध्यान में देखा कि पिता अपनी एक पत्नी के साथ किए अन्याय से बँधे हैं, और राजा से कहा कि परिवार सहित मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का व्रत रखकर उसका पुण्य पिता को दें। पुराण कहता है कि ऐसा करते ही आकाश से फूल बरसे और पिता मुक्त हो गए। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

मोक्षदा का अर्थ क्या है?

मोक्षदा का अर्थ है मोक्ष देने वाली। यह नाम इसकी कथा से आया है, जिसमें पुत्र का व्रत पिता को मुक्त करता है, और इस विश्वास से भी कि यह व्रत अपने बीते कर्मों के बंधन भी ढीले करता है। यह मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जो भगवान विष्णु और गीता के वक्ता श्रीकृष्ण के लिए रखी जाती है।

गीता जयंती क्यों मनाई जाती है?

परंपरा के अनुसार इसी दिन श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था, जब युद्ध से पहले अर्जुन ने धनुष रख दिया था। इस दिन घरों और मंदिरों में कर्तव्य, भक्ति और आत्मा पर गीता के अठारह अध्याय पढ़े जाते हैं, गीता की प्रतियाँ बाँटी जाती हैं, और बहुत से लोग रोज़ थोड़ी-सी गीता पढ़ने का नियम लेते हैं।

कुरुक्षेत्र में गीता जयंती कैसे मनाई जाती है?

जिस कुरुक्षेत्र को परंपरा गीता के उपदेश का स्थान मानती है, वहाँ गीता जयंती के आसपास कई दिनों का अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव होता है: गीता पाठ, ब्रह्म सरोवर पर आरती और ज्योतिसर के दर्शन, जिसे उपदेश का स्थल माना जाता है। महोत्सव के आरंभ और समापन की तारीखें आयोजक हर साल घोषित करते हैं; उसके केंद्र की एकादशी की तारीख इस पेज पर है।

मोक्षदा एकादशी पर कौन सा मंत्र पढ़ें?

मुख्य जप 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' है, तुलसी की माला पर 108 बार। गीता जयंती के लिए बहुत से लोग गीता का 'सर्वधर्मान्परित्यज्य' श्लोक पढ़ते हैं, जिसमें श्रीकृष्ण अर्जुन को सब पापों से मुक्त करने का वचन देते हैं, और वह श्लोक भी जिसमें वे मार्गशीर्ष को अपना मास बताते हैं। दोनों अर्थ सहित मंत्र वाले भाग में हैं।

क्या मोक्षदा एकादशी का पुण्य पितरों को दिया जा सकता है?

हाँ, और इसकी कथा यही है: राजा वैखानस ने परिवार के साथ व्रत रखकर उसका पुण्य अपने पिता को दिया था। द्वादशी की सुबह पारण से पहले हाथ में जल, एक फूल और थोड़े तिल लें, जिन पूर्वजों को याद करते हैं उनका नाम लें और उनकी शांति की प्रार्थना के साथ जल छोड़ दें। यह श्रद्धा का अर्पण है, जिसे घर पर बिना पुरोहित के भी किया जा सकता है।

मोक्षदा एकादशी पर क्या करना चाहिए?

बिना अन्न का व्रत रखें, तुलसी, पीले फूल और घी के दीपक से भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करें, मोक्षदा की कथा और गीता पढ़ें, किसी को भोजन या गीता की प्रति दें, रात का कुछ भाग जागें और पारण के समय में व्रत खोलें। चावल, प्याज़-लहसुन, दिन में सोने और कटु वचन से बचें।

मोक्षदा एकादशी के व्रत में क्या खाएँ?

जल का व्रत न हो तो केवल फलाहार: फल, दूध, दही, मखाने, साबूदाना, आलू, शकरकंद, और परिवार की परंपरा हो तो सिंघाड़े या कुट्टू का आटा। सर्दी में छिलके सहित भुना शकरकंद, सिंघाड़े का हलवा और मेवे डला गरम दूध सबसे आम हैं। अन्न और दाल पारण के साथ ही लौटते हैं।

क्या मोक्षदा एकादशी ही वैकुंठ एकादशी है?

कुछ वर्षों में। वैकुंठ एकादशी, जब श्रीरंगम और तिरुपति में वैकुंठ द्वार खोला जाता है, वह शुक्ल एकादशी है जो सूर्य के धनु राशि में रहते, यानी तमिल मार्गऴि मास में, पड़ती है। इसलिए किसी साल यह मोक्षदा होती है और किसी साल पौष पुत्रदा; जिस साल यह मोक्षदा हो, यह पेज बताता है।