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ग्यारहवीं तिथि · दोनों पक्ष · साल में 24 से 26 बार

अगली एकादशी कब है?

अगली एकादशी

10 दिन बाद

गुरु, 5 नवंबर

रमा एकादशी · चंद्रोदय रात 2:42

अगली एकादशी गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को है। नई दिल्ली में व्रत का पारण शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को सुबह 6:36 से सुबह 8:47 तक है। एकादशी तिथि 4 नवंबर, सुबह 11:04 से 5 नवंबर, सुबह 10:36 तक रहेगी।

उसके बाद: शुक्र, 20 नवंबर

तिथि: 4 नवंबर, सुबह 11:04 → 5 नवंबर, सुबह 10:36

पारण: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026, सुबह 6:36 से सुबह 8:47

नई दिल्ली

अगली एकादशी · नई दिल्ली

अगली एकादशी: तारीख और तिथि का समय

गुरुवार, 5 नवंबर 2026

रमा एकादशी · 10 दिन बाद · चंद्रोदय रात 2:42

तिथि आरंभ
4 नवंबर, सुबह 11:04
तिथि समाप्त
5 नवंबर, सुबह 10:36
पक्ष
कृष्ण
हिंदू मास
कार्तिक (पूर्णिमांत) / आश्विन (अमांत)
इस तिथि का पर्व
रमा एकादशी

पारण — व्रत खोलने का समय

शुक्रवार, 6 नवंबर 2026, सुबह 6:36 से सुबह 8:47

पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 5 नवंबर, शाम 4:35 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।

व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

उत्तर भारत की पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत की अमांत पद्धति में कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा अलग महीने के नाम से जाना जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष में दोनों का नाम एक रहता है। जहाँ ऊपर दो नाम दिखें, वहाँ दोनों सही हैं — दो कैलेंडरों के तारीख पर असहमत दिखने का यह भी एक ईमानदार कारण है।

एकादशी हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, इसलिए यह हर चंद्र मास में दो बार आती है। नीचे की तारीख आपके शहर के सूर्योदय और चंद्रमा-सूर्य की स्थिति से निकाली गई है, और तिथि का आरंभ और समाप्ति समय भी साथ दिया है — वे क्षण खगोल हैं, और दिन उनकी व्याख्या।

2026 · नई दिल्ली

एकादशी 2026: सभी तारीखें

2026 में नई दिल्ली के लिए 24 एकादशी हैं। यह संख्या हर साल बदलती है: बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, और अधिक मास वाले साल में संख्या बढ़ जाती है।

एकादशी 2026: सभी तारीखें
तारीखपक्षमास (पूर्णिमांत)तिथि आरंभतिथि समाप्तपारणपर्व
14 जनवरी, बुधवारकृष्णमाघ13 जनवरी, दोपहर 3:1814 जनवरी, शाम 5:5315 जनवरी, सुबह 7:14–सुबह 9:21षटतिला एकादशी
29 जनवरी, गुरुवारशुक्लमाघ28 जनवरी, शाम 4:3629 जनवरी, दोपहर 1:5530 जनवरी, सुबह 7:10–सुबह 9:19जया एकादशी
13 फरवरी, शुक्रवारकृष्णफाल्गुन12 फरवरी, दोपहर 12:2313 फरवरी, दोपहर 2:2614 फरवरी, सुबह 7:00–सुबह 9:14विजया एकादशी
27 फरवरी, शुक्रवारशुक्लफाल्गुन27 फरवरी, रात 12:3427 फरवरी, रात 10:3328 फरवरी, सुबह 6:47–सुबह 9:05आमलकी एकादशी
15 मार्च, रविवारकृष्णचैत्र14 मार्च, सुबह 8:1115 मार्च, सुबह 9:1716 मार्च, सुबह 6:29–सुबह 8:53पापमोचनी एकादशी
29 मार्च, रविवारशुक्लचैत्र28 मार्च, सुबह 8:4629 मार्च, सुबह 7:4730 मार्च, सुबह 6:13–सुबह 7:10कामदा एकादशी
13 अप्रैल, सोमवारकृष्णवैशाख13 अप्रैल, रात 1:1814 अप्रैल, रात 1:0914 अप्रैल, सुबह 6:55–सुबह 8:30वरूथिनी एकादशी
27 अप्रैल, सोमवारशुक्लवैशाख26 अप्रैल, शाम 6:0727 अप्रैल, शाम 6:1628 अप्रैल, सुबह 5:43–सुबह 8:21मोहिनी एकादशी
13 मई, बुधवारकृष्णज्येष्ठ12 मई, दोपहर 2:5313 मई, दोपहर 1:3014 मई, सुबह 5:30–सुबह 8:13अपरा एकादशी
27 मई, बुधवार · एकादशी मंगलवार, 26 मई 2026 के सूर्योदय पर भी है; व्रत दूसरे दिन दिया गया है, कुछ स्मार्त गृहस्थ पहले दिन रखते हैंशुक्लअधिक ज्येष्ठ26 मई, सुबह 5:1127 मई, सुबह 6:2228 मई, सुबह 5:24–सुबह 7:57पद्मिनी एकादशी
11 जून, गुरुवारकृष्णअधिक ज्येष्ठ11 जून, रात 12:5811 जून, रात 10:3712 जून, सुबह 5:22–सुबह 8:09परमा एकादशी
25 जून, गुरुवारशुक्लज्येष्ठ24 जून, शाम 6:1325 जून, रात 8:1026 जून, सुबह 5:24–सुबह 8:12निर्जला एकादशी
10 जुलाई, शुक्रवार · क्षय तिथिकृष्णआषाढ़10 जुलाई, सुबह 8:1711 जुलाई, सुबह 5:2311 जुलाई, दोपहर 1:49–शाम 4:35योगिनी एकादशी
25 जुलाई, शनिवारशुक्लआषाढ़24 जुलाई, सुबह 9:1325 जुलाई, सुबह 11:3426 जुलाई, सुबह 5:38–सुबह 8:22चातुर्मास देवशयनी एकादशी
9 अगस्त, रविवारकृष्णश्रावण8 अगस्त, दोपहर 2:009 अगस्त, सुबह 11:0610 अगस्त, सुबह 5:47–सुबह 8:01कामिका एकादशी
23 अगस्त, रविवारशुक्लश्रावण23 अगस्त, रात 2:0024 अगस्त, सुबह 4:1924 अगस्त, दोपहर 1:41–शाम 4:16श्रावण पुत्रदा एकादशी
7 सितंबर, सोमवारकृष्णभाद्रपद6 सितंबर, शाम 7:297 सितंबर, शाम 5:048 सितंबर, सुबह 6:02–सुबह 8:32अजा एकादशी
22 सितंबर, मंगलवारशुक्लभाद्रपद21 सितंबर, रात 8:0122 सितंबर, रात 9:4423 सितंबर, सुबह 6:09–सुबह 8:35परिवर्तिनी एकादशी
6 अक्टूबर, मंगलवारकृष्णआश्विन6 अक्टूबर, रात 2:087 अक्टूबर, रात 12:357 अक्टूबर, सुबह 6:17–सुबह 8:37इंदिरा एकादशी
22 अक्टूबर, गुरुवारशुक्लआश्विन21 अक्टूबर, दोपहर 2:1222 अक्टूबर, दोपहर 2:4823 अक्टूबर, सुबह 6:26–सुबह 8:42पापांकुशा एकादशी
5 नवंबर, गुरुवारअगलीकृष्णकार्तिक4 नवंबर, सुबह 11:045 नवंबर, सुबह 10:366 नवंबर, सुबह 6:36–सुबह 8:47रमा एकादशी
20 नवंबर, शुक्रवार · क्षय तिथिशुक्लकार्तिक20 नवंबर, सुबह 7:1621 नवंबर, सुबह 6:3221 नवंबर, दोपहर 1:10–दोपहर 3:18देवउठनी एकादशी
4 दिसंबर, शुक्रवारकृष्णमार्गशीर्ष3 दिसंबर, रात 11:044 दिसंबर, रात 11:455 दिसंबर, सुबह 6:58–सुबह 9:04उत्पन्ना एकादशी
20 दिसंबर, रविवारशुक्लमार्गशीर्ष19 दिसंबर, रात 10:1020 दिसंबर, रात 8:1521 दिसंबर, सुबह 7:09–सुबह 9:13मोक्षदा एकादशी

समय नई दिल्ली के अनुसार हैं। क्षय तिथि वाली पंक्ति की तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं थी — वह एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले से पहले समाप्त हो गई, और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। अगले दिन भी मान्य वाली पंक्ति में तिथि दो सूर्योदय तक चलती है, इसलिए दो परंपराएँ दो अलग दिन लेती हैं।

पर्व वाले कॉलम के बारे में: नाम केवल उन पंक्तियों पर है जिन पर हमारी गणना का कोई पर्व — जैसे देवउठनी एकादशी — उसी तिथि पर पड़ता है। हर एकादशी का अपना पारंपरिक नाम होता है, पर वे नाम अभी हमारी गणना के नियमों में दर्ज नहीं हैं, और बिना नियम के नाम हम अनुमान से नहीं लिखते।

एकादशी 2026 की पूरी सूची

एकादशी 2027 की पूरी सूची

पंचांगों में एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है

तिथि चंद्र मास का तीसवाँ भाग है — चंद्रमा का सूर्य से 12° आगे बढ़ना — इसलिए यह औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है और लगभग कभी सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। यह पेज सामान्य नियम मानता है: सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, दिन उसी का है। इसके दो परिणाम ऊपर की तालिका में दिखते हैं, और दोनों भूल नहीं हैं।

  1. दो सूर्योदय पर तिथि। जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय पर चलती है, तब दोनों दिन सचमुच उसके होते हैं और परंपराएँ बँट जाती हैं।
  2. क्षय तिथि। जब तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती, तब वह क्षय है, और व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली।
  3. शहर। सूर्योदय भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा बदलता है, इसलिए एक शहर में जो तिथि सूर्योदय के ठीक बाद ख़त्म होती है, वह दूसरे में ठीक पहले ख़त्म हो सकती है — और दिन बदल जाता है।

आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं; दिन उनकी व्याख्या है। यह पेज बताता है कि उसने कौन-सा नियम माना, ताकि आप अपने पंचांग से मिलान कर सकें।

एकादशी से जुड़े सामान्य प्रश्न

अगली एकादशी कब है?

अगली एकादशी गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को है। नई दिल्ली में व्रत का पारण शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को सुबह 6:36 से सुबह 8:47 तक है। एकादशी तिथि 4 नवंबर, सुबह 11:04 से 5 नवंबर, सुबह 10:36 तक रहेगी।

2026 में कितनी एकादशी हैं?

नई दिल्ली के लिए 2026 में 24। यह संख्या हर साल बदलती है, क्योंकि बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, और अधिक मास वाले साल में एक-दो और जुड़ जाती हैं।

मेरे कैलेंडर में एकादशी की तारीख अलग क्यों है?

क्योंकि तिथि बहुत कम ही सूर्योदय पर शुरू या ख़त्म होती है। जब वह दो दिन सूर्योदय पर चलती है, या किसी दिन नहीं, तब परंपराएँ बँट जाती हैं: कुछ सूर्योदय वाला दिन लेती हैं, कुछ वह दिन जब तिथि शुरू हुई। ऊपर दिए आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं — दिन उनकी व्याख्या है, और यह पेज बताता है कि उसने कौन-सा नियम माना।

एकादशी का व्रत कब खोलें (पारण कब करें)?

द्वादशी को, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीत जाने के बाद। सामान्यतः पारण प्रातःकाल में होता है; अगर हरि वासर उससे आगे तक चले तो मध्याह्न के बाद। अगली एकादशी का पारण शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को सुबह 6:36 से सुबह 8:47 तक है।

2026 में एकादशी पर कौन-से पर्व पड़ते हैं?

षटतिला एकादशी (14 जनवरी), जया एकादशी (29 जनवरी), विजया एकादशी (13 फरवरी), आमलकी एकादशी (27 फरवरी), पापमोचनी एकादशी (15 मार्च), कामदा एकादशी (29 मार्च), वरूथिनी एकादशी (13 अप्रैल), मोहिनी एकादशी (27 अप्रैल), अपरा एकादशी (13 मई), पद्मिनी एकादशी (27 मई), परमा एकादशी (11 जून), निर्जला एकादशी (25 जून), योगिनी एकादशी (10 जुलाई), चातुर्मास (25 जुलाई), देवशयनी एकादशी (25 जुलाई), कामिका एकादशी (9 अगस्त), श्रावण पुत्रदा एकादशी (23 अगस्त), अजा एकादशी (7 सितंबर), परिवर्तिनी एकादशी (22 सितंबर), इंदिरा एकादशी (6 अक्टूबर), पापांकुशा एकादशी (22 अक्टूबर), रमा एकादशी (5 नवंबर), देवउठनी एकादशी (20 नवंबर), उत्पन्ना एकादशी (4 दिसंबर), मोक्षदा एकादशी (20 दिसंबर)। तारीखें नई दिल्ली के लिए हैं; हर पर्व का अपना पेज उसका मुहूर्त और निर्णय का नियम बताता है।