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कृष्ण पक्ष · त्रयोदशी तिथि · कार्तिक (पूर्णिमांत) / आश्विन (अमांत)

धनतेरस 2026 कब है?

धनतेरस 2026

11 दिन बाद

शुक्र, 6 नवंबर

2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को है। नई दिल्ली में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:02 से शाम 7:58 तक (वृषभ काल) है।

2027: बुधवार, 27 अक्टूबर 2027

धनतेरस पूजा (वृषभ काल)

शाम 6:02 – शाम 7:58

नई दिल्ली

धनतेरस कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में यही तिथि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी कहलाती है — दिन वही है, केवल महीने का नाम अलग। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

दिवाली 2026 — दिन-ब-दिन

  1. धनतेरस पूजा मुहूर्त शाम 6:02 से शाम 7:58
  2. नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) अभ्यंग स्नान सुबह 5:36 से सुबह 6:37
  3. दिवाली (लक्ष्मी पूजा) लक्ष्मी पूजा शाम 5:54 से शाम 7:50
  4. काली पूजा
  5. मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र का समय अभी घोषित नहीं
  6. गोवर्धन पूजा प्रातः मुहूर्त सुबह 6:39 से सुबह 8:49
  7. भाई दूज तिलक का समय दोपहर 1:09 से दोपहर 3:19

शुक्रवार, 6 नवंबर · 20 शहर

धनतेरस पूजा मुहूर्त 2026: शहर के अनुसार

प्रदोष काल में स्थिर वृषभ लग्न, जब तक त्रयोदशी चल रही हो — हर शहर के अपने सूर्यास्त और लग्न से गणना। पूर्व से पश्चिम भारत तक यह समय आधे घंटे से ज़्यादा खिसकता है, इसलिए अपने शहर की पंक्ति देखें।

धनतेरस पूजा मुहूर्त 2026: शहर के अनुसार
शहरधनतेरस पूजा मुहूर्त
नई दिल्लीशाम 6:02–7:58
मुंबईशाम 6:35–रात 8:34
बेंगलुरुशाम 6:26–रात 8:20
कोलकाताशाम 5:28–7:26
चेन्नईशाम 6:15–रात 8:09
हैदराबादशाम 6:16–रात 8:13
पुणेशाम 6:32–रात 8:31
अहमदाबादशाम 6:30–रात 8:29
जयपुरशाम 6:11–रात 8:07
लखनऊशाम 5:50–7:47
पटनाशाम 5:36–7:33
इंदौरशाम 6:18–रात 8:16
भोपालशाम 6:11–रात 8:09
चंडीगढ़शाम 6:00–7:55
सूरतशाम 6:32–रात 8:31
नागपुरशाम 6:07–रात 8:06
वाराणसीशाम 5:45–7:42
कानपुरशाम 5:54–7:50
नोएडाशाम 6:02–7:57
गुरुग्रामशाम 6:03–7:59

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नई दिल्ली के लिए गणना

धनतेरस 2026: तारीख और तिथि का समय

शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

तिथि
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
हिंदू मास
कार्तिक (पूर्णिमांत) / आश्विन (अमांत)
तिथि आरंभ
6 नवंबर, सुबह 10:31
तिथि समाप्त
7 नवंबर, सुबह 10:48
दिन का निर्णय
प्रदोष काल
नई दिल्ली में प्रदोष काल
शाम 5:32 से रात 8:09

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: धनतेरस का निर्णय सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके प्रदोष काल पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

धनतेरस 2026 के सभी मुहूर्त · नई दिल्ली

धनतेरस 2026 धनतेरस पूजा मुहूर्त

धनतेरस दिवाली का पहला दिन है, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी: इस दिन परिवार घर के लिए कुछ नया खरीदते हैं, धन्वंतरि, कुबेर और लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं और दक्षिण की ओर यम का दीपक जलाते हैं। नई दिल्ली में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है; पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:02 से शाम 7:58 तक है, यानी स्थिर लग्न वृषभ वाला प्रदोष काल, और यम दीपदान प्रदोष काल (शाम 5:32 से शाम 6:51 तक) में होता है। खरीदारी के लिए त्रयोदशी रहते दिन के शुभ चौघड़िया अमृत: सुबह 10:31 से सुबह 10:42 तक; शुभ: दोपहर 12:04 से दोपहर 1:26 तक; चर: शाम 4:10 से शाम 5:32 तक; लाभ: रात 8:48 से रात 10:26 तक; शुभ: 7 नवंबर, रात 12:04 से रात 1:43 तक; अमृत: 7 नवंबर, रात 1:43 से रात 3:21 तक; चर: 7 नवंबर, रात 3:21 से सुबह 4:59 तक; शुभ: 7 नवंबर, सुबह 7:59 से सुबह 9:20 तक हैं।

धनतेरस 2026 के सभी मुहूर्त — नई दिल्ली
मुहूर्तनई दिल्ली में समयकिसके लिए
धनतेरस पूजा मुहूर्तशाम 6:02 से शाम 7:58 तकप्रदोष काल में स्थिर वृषभ लग्न, जब तक त्रयोदशी रहे।

लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की पारिवारिक पूजा का शाम का समय: प्रदोष काल, जब स्थिर लग्न वृषभ उदित हो और त्रयोदशी चल रही हो। तर्क वही है जो दिवाली की लक्ष्मी पूजा का: स्थिर लग्न इसलिए कि जो घर आए, वह टिके।

यम दीपदानशाम 5:32 से शाम 6:51 तकधनतेरस की सायं संध्या — सूर्यास्त के बाद तीन घटी — जब यम के लिए दक्षिण दिशा में दीपक जलाया जाता है।

यम का दीपक त्रयोदशी की संध्या, प्रदोष काल में जलाकर मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर रखा जाता है। यह परिवार की लंबी आयु और कुशलता की प्रार्थना है, जिसे उत्तर भारत के अधिकतर घर इसी शाम निभाते हैं।

खरीदारी चौघड़िया (सोना, चाँदी, बर्तन)
  • अमृत सुबह 10:31 से सुबह 10:42 तक
  • शुभ दोपहर 12:04 से दोपहर 1:26 तक
  • चर शाम 4:10 से शाम 5:32 तक
  • लाभ रात 8:48 से रात 10:26 तक
  • शुभ 7 नवंबर, रात 12:04 से रात 1:43 तक
  • अमृत 7 नवंबर, रात 1:43 से रात 3:21 तक
  • चर 7 नवंबर, रात 3:21 से सुबह 4:59 तक
  • शुभ 7 नवंबर, सुबह 7:59 से सुबह 9:20 तक
त्रयोदशी रहते दिन और रात के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया।

त्रयोदशी रहते धनतेरस के दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया। बर्तन, सिक्का, गहना, झाड़ू या वाहन की खरीदारी इन्हीं में की जाती है, और दिन के राहुकाल से बचा जाता है, जो पंचांग में दिया होता है।

वृषभ काल (स्थिर लग्न)शाम 6:02 से शाम 7:58 तकशाम को उदित स्थिर (वृषभ) लग्न।

शाम को वृषभ लग्न के उदय का पूरा समय। जो परिवार प्रदोष के भीतर पूजा पूरी न कर पाएँ, वे इसके बाकी भाग में पूजा जारी रखते हैं।

प्रदोष कालशाम 5:32 से रात 8:09 तकसूर्यास्त से रात के तीन मुहूर्त (रात का पाँचवाँ भाग)।

सूर्यास्त के बाद रात के पहले तीन मुहूर्त। यम दीपदान और शाम की पूजा दोनों इसी में होते हैं; वृषभ वाला समय छोटा हो, तो त्रयोदशी रहते प्रदोष का कोई भी भाग मान्य है।

अभिजीत मुहूर्तसुबह 11:42 से दोपहर 12:26 तकदिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय दोपहर के आसपास।

स्थानीय दोपहर के आसपास का मुहूर्त, जो त्रयोदशी के भीतर पड़े तो खरीदारी और नई शुरुआत के लिए खूब लिया जाता है। परंपरा से बुधवार को इसे नहीं लिया जाता।

शुभ चौघड़िया (रात)
  • लाभ रात 8:48 से रात 10:26 तक
  • शुभ 7 नवंबर, रात 12:04 से रात 1:43 तक
  • अमृत 7 नवंबर, रात 1:43 से रात 3:21 तक
  • चर 7 नवंबर, रात 3:21 से सुबह 4:59 तक
रात के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया।

रात के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया, उन परिवारों के लिए जो सूर्यास्त के बाद, त्रयोदशी रहते, खरीदारी या दुकान पर पूजा करते हैं।

सूर्यास्तशाम 5:32सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज से ओझल होने का समय।

दिन के दीये, तेरह दीये और यम का दीपक, नई दिल्ली में सूर्यास्त के बाद जलाए जाते हैं।

उस दिन के शुभ समय

उस दिन के शुभ समय
मुहूर्तनई दिल्ली में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्तसुबह 11:42 से दोपहर 12:26शुभ
अमृत कालरात 10:31 से रात 12:10सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:52 से सुबह 5:44शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
अवधिनई दिल्ली में समय
राहु कालसुबह 10:42 से दोपहर 12:04
यमगण्ड कालदोपहर 2:48 से शाम 4:10
दुर्मुहूर्त (पहला)सुबह 8:47 से सुबह 9:31
दुर्मुहूर्त (दूसरा)दोपहर 12:26 से दोपहर 1:10
वर्ज्यम्दोपहर 12:36 से दोपहर 2:15

ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।

पूजा विधि · घर पर, क्रम से

धनतेरस पूजा विधि

  1. सफाई और सजावट

    धनतेरस से दिवाली शुरू होती है, इसलिए घर और द्वार की सफाई पूरी करें, तोरण लगाएँ, रंगोली बनाएँ और भीतर आते लक्ष्मी जी के पदचिह्न बनाएँ।

  2. शुभ समय में खरीदारी

    त्रयोदशी रहते अमृत, शुभ, लाभ या चर चौघड़िया में घर के लिए कुछ नया खरीदें: पीतल, तांबे या चाँदी का बर्तन, चाँदी या सोने का सिक्का, झाड़ू, साबुत धनिया। नया बर्तन घर में खाली न लाएँ, उसमें पानी, चावल, शक्कर या मिठाई भरकर लाएँ।

  3. संध्या को चौकी सजाएँ

    सूर्यास्त से पहले स्नान करें और कमरे के उत्तर या ईशान में लाल या पीले कपड़े वाली चौकी रखें। उस पर गणेश जी, लक्ष्मी जी, कुबेर जी (चित्र, यंत्र या तिजोरी) और धन्वंतरि जी का चित्र रखें, और सामने दिन की खरीदी हुई चीज़ें।

  4. दीपक जलाएँ

    देवताओं के सामने घी का दीपक जलाएँ और घर के लिए मिट्टी के तेरह दीये तैयार रखें, त्रयोदशी तक की हर तिथि का एक, जैसा बहुत से परिवार करते हैं।

  5. संकल्प और गणेश पूजा

    स्वयं पर और सामग्री पर गंगाजल छिड़कें, धनतेरस पूजा का संकल्प लें और 'ॐ गं गणपतये नमः' बोलते हुए पहले गणेश जी को रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल और लड्डू अर्पित करें।

  6. धन्वंतरि पूजा

    भगवान धन्वंतरि को चंदन, अक्षत, पीले फूल और तुलसी अर्पित करें, धूप जलाएँ और उनका मंत्र 11 या 108 बार जपते हुए परिवार के हर सदस्य के स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।

  7. कुबेर और लक्ष्मी पूजा

    नए बर्तन, सिक्कों और तिजोरी पर रोली-अक्षत लगाकर उन्हें कुबेर जी और लक्ष्मी जी के सामने रखें। कुमकुम, फूल, कमलगट्टा और साबुत धनिया अर्पित करें और कुबेर मंत्र तथा 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का जप करें।

  8. नैवेद्य

    मिठाई, खीर, फल और गुड़ के साथ धनिया का भोग लगाएँ, हो सके तो नए बर्तन में, साथ में पान, सुपारी, लौंग और आचमन के लिए जल।

  9. आरती

    कपूर या घी के दीपक से 'ॐ जय लक्ष्मी माता' आरती गाएँ और हाथ जोड़कर पुष्पांजलि दें।

  10. यम दीपदान

    प्रदोष काल में मिट्टी के चौमुखे दीपक में सरसों या तिल का तेल भरें, उसे मुख्य द्वार के बाहर थोड़े से गेहूँ या चावल पर रखें, लौ दक्षिण की ओर हो, और यम दीपदान का श्लोक एक बार बोलें। यह परिवार की लंबी आयु के लिए यमराज से प्रार्थना है।

  11. घर भर में दीये

    तेरह दीये मुख्य द्वार, रसोई, पानी के स्थान, तुलसी और घर के कोनों में रखें।

  12. खरीदारी दिवाली के लिए रखें

    प्रसाद बाँटें। सिक्का और नया बर्तन चौकी के पास ही रखें: दिवाली की रात लक्ष्मी पूजा में इनकी फिर पूजा होती है।

सामग्री · पहले से तैयार रखें

धनतेरस पूजा सामग्री सूची

  • गणेश, लक्ष्मी और कुबेर की मूर्ति या चित्र कुबेर जी के स्थान पर कुबेर यंत्र या घर की तिजोरी भी रखी जा सकती है।
  • भगवान धन्वंतरि का चित्र देवताओं के वैद्य, अमृत कलश लिए हुए; न हो तो भगवान विष्णु का चित्र।
  • चौकी और लाल या पीला कपड़ा शाम की पूजा की वेदी।
  • उस दिन खरीदा नया बर्तन, सिक्का या गहना पीतल, तांबा या चाँदी पारंपरिक है; आज और फिर दिवाली पर इसकी पूजा होती है।
  • रोली, हल्दी, चंदन और अक्षत तिलक के लिए और बर्तन, सिक्कों और तिजोरी पर लगाने के लिए।
  • मौली (कलावा) कलाई और कलश पर बाँधने के लिए।
  • फूल और माला गेंदा और कमल; धन्वंतरि जी के लिए पीले फूल।
  • तुलसी के पत्ते विष्णु रूप धन्वंतरि जी के लिए; गणेश जी को नहीं।
  • मिट्टी के तेरह दीये, तेल और बत्ती त्रयोदशी के लिए परंपरागत संख्या।
  • घी का दीपक पूजा के समय देवताओं के सामने।
  • मिट्टी का चौमुखा दीपक यम दीपदान के लिए, सरसों या तिल के तेल के साथ; न मिले तो चार बत्तियों वाला बड़ा दीया।
  • मुट्ठी भर गेहूँ या चावल द्वार के बाहर यम का दीपक इसी पर रखा जाता है।
  • धूप, अगरबत्ती और कपूर पूजा और आरती के लिए।
  • गंगाजल या साफ पानी, पवित्रीकरण के लिए।
  • पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और शक्कर, अगर धातु की मूर्ति को स्नान कराएँ।
  • साबुत धनिया उसी दिन खरीदा जाता है, लक्ष्मी जी को अर्पित होता है और बाद में गमले में बोया जाता है।
  • गुड़ धनिये के साथ; महाराष्ट्र के बहुत से घरों में धनत्रयोदशी का नैवेद्य।
  • कमलगट्टा लक्ष्मी जी की पारंपरिक भेंट।
  • मिठाई, खीर और फल घर की बनी कोई भी मिठाई; मौसमी फल।
  • पान, सुपारी, लौंग और इलायची नैवेद्य के अंत में।
  • चाँदी के या सामान्य सिक्के धोकर पूजे जाते हैं और दिवाली पूजा के लिए रखे जाते हैं।
  • नई झाड़ू वैकल्पिक; बहुत से परिवार इसे खरीदकर लक्ष्मी का रूप मानकर पूजते हैं।
  • कौड़ियाँ या गोमती चक्र वैकल्पिक लोक-परंपरा, तिजोरी के लिए।
  • रंगोली के रंग और तोरण द्वार के लिए।
  • थाली, लोटा और कटोरियाँ भेंट और आचमन के लिए।

मंत्र · अर्थ के साथ

धनतेरस के मंत्र और आरती

गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

Om Gam Ganapataye Namah

अर्थ: ॐ, गं: गणों के स्वामी गणपति को नमस्कार।

कब और कैसे: पूजा की शुरुआत में 11 या 21 बार।

धन्वंतरि मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः ॥

Om namo bhagavate Vasudevaya Dhanvantaraye amritakalasha-hastaya sarvamaya-vinashanaya trailokyanathaya Shri Mahavishnave namah

अर्थ: ॐ, धन्वंतरि रूप भगवान वासुदेव को नमस्कार, जो हाथ में अमृत कलश लिए हैं, सब रोगों का नाश करने वाले, तीनों लोकों के स्वामी श्री महाविष्णु हैं।

कब और कैसे: धन्वंतरि पूजा में 11 या 108 बार, परिवार के स्वास्थ्य की प्रार्थना के रूप में। यह भक्ति है, इलाज का विकल्प नहीं।

कुबेर मंत्र (वैदिक)

ॐ राजाधिराजाय प्रसह्यसाहिने ।
नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे ।
स मे कामान्कामकामाय मह्यम् ।
कामेश्वरो वैश्रवणो ददातु ।
कुबेराय वैश्रवणाय ।
महाराजाय नमः ॥

Om rajadhirajaya prasahyasahine
Namo vayam Vaishravanaya kurmahe
Sa me kaman kamakamaya mahyam
Kameshvaro Vaishravano dadatu
Kuberaya Vaishravanaya
Maharajaya namah

अर्थ: राजाओं के राजा, अपने बल से विजयी वैश्रवण को हम नमस्कार करते हैं। कामनाओं के स्वामी वैश्रवण मुझ कामना करने वाले की कामनाएँ पूरी करें। कुबेर, वैश्रवण, महाराज को नमस्कार।

कब और कैसे: तैत्तिरीय आरण्यक से, मंत्रपुष्पांजलि में पढ़ा जाता है। तिजोरी और नई खरीदारी के सामने एक बार बोलें।

कुबेर मंत्र (लघु)

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा ॥

Om yakshaya Kuberaya Vaishravanaya dhanadhanyadhipataye dhanadhanyasamriddhim me dehi dapaya svaha

अर्थ: ॐ, यक्ष कुबेर, वैश्रवण, धन-धान्य के स्वामी: मुझे धन-धान्य की समृद्धि दें, दिलाएँ; स्वाहा।

कब और कैसे: अनुष्ठान-ग्रंथों का प्रचलित कुबेर मंत्र, कुबेर पूजा में 11 या 108 बार।

महालक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

Om Shreem Mahalakshmyai Namah

अर्थ: ॐ, श्रीं: महालक्ष्मी को नमस्कार। 'श्रीं' लक्ष्मी जी का बीज अक्षर है।

कब और कैसे: पूजा के लक्ष्मी वाले भाग में 108 बार।

यम दीपदान श्लोक

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह ।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम ॥

Mrityuna pashadandabhyam kalena shyamaya saha
Trayodashyam deepadanat suryajah priyatam mama

अर्थ: त्रयोदशी के इस दीपदान से मृत्यु, पाश और दंड, काल और श्यामा के साथ सूर्यपुत्र यमराज मुझ पर प्रसन्न हों।

कब और कैसे: प्रदोष काल में यम का दीपक मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर रखते समय एक बार।

आरती लक्ष्मी जी की आरती: ॐ जय लक्ष्मी माता पूरी आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

Om jai Lakshmi Mata, maiya jai Lakshmi Mata.
Tumko nishidin sevat, Hari Vishnu Vidhata.
Om jai Lakshmi Mata.

Uma, Rama, Brahmani, tum hi jag-mata.
Surya-Chandrama dhyavat, Narad rishi gata.
Om jai Lakshmi Mata.

Durga roop niranjani, sukh sampatti data.
Jo koi tumko dhyavat, riddhi-siddhi dhan pata.
Om jai Lakshmi Mata.

Tum patal-nivasini, tum hi shubhdata.
Karm-prabhav-prakashini, bhavnidhi ki trata.
Om jai Lakshmi Mata.

Jis ghar mein tum rahtin, sab sadgun aata.
Sab sambhav ho jata, man nahin ghabrata.
Om jai Lakshmi Mata.

Tum bin yagya na hote, vastra na koi pata.
Khan-paan ka vaibhav, sab tumse aata.
Om jai Lakshmi Mata.

Shubh-gun mandir sundar, kshirodadhi-jata.
Ratna chaturdash tum bin, koi nahin pata.
Om jai Lakshmi Mata.

Mahalakshmi ji ki aarti, jo koi jan gata.
Ur anand samata, paap utar jata.
Om jai Lakshmi Mata.

यह आरती उसी रूप में है जैसे आम तौर पर गाई जाती है। गीता प्रेस के 'आरती-संग्रह' में 'हरि विष्णु विधाता' की जगह 'हर-विष्णू-धाता', 'जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता' की जगह 'जिस घर तुम रहती, तहँ सब सद्गुण आता', 'वस्त्र न कोई पाता' की जगह 'वस्त्र न हो पाता' और 'जो कोई जन गाता' की जगह 'जो कोई नर गाता' छपा है। छपा पाठ

कथा · कहानी और उसका अर्थ

धनतेरस की कथा और महत्व

कथा

एक प्रचलित कथा राजा हिम की है, जिनके पुत्र के बारे में भविष्यवाणी थी कि विवाह की चौथी रात साँप के डसने से उसकी मृत्यु होगी। उस रात नवविवाहिता पत्नी ने पति को सोने नहीं दिया। उसने अपने सोने-चाँदी के सारे गहने कमरे के द्वार पर ढेर कर दिए, चारों ओर दीये जला दिए और पूरी रात कहानियाँ सुनाती और गीत गाती रही।

जब यमराज साँप के रूप में आए, तो दीयों की रोशनी और गहनों की चमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं। वे गहनों के ढेर पर बैठकर सुबह तक उसके गीत सुनते रहे और भोर होते ही राजकुमार को लिए बिना लौट गए। तभी से त्रयोदशी की संध्या यम के लिए दीया जलाया जाता है, और इस दिन सोना, चाँदी और नए बर्तन घर लाए जाते हैं।

यह दिन भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य का भी है। क्षीरसागर के मंथन में वे सबसे अंत में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए; भागवत पुराण उन्हें विष्णु का अंश और आयुर्वेद का प्रवर्तक बताता है। लोक-परंपरा उनका प्राकट्य इसी त्रयोदशी को मानती है, अमावस्या की लक्ष्मी पूजा से दो दिन पहले।

महत्व

धनतेरस 'धन' और 'तेरस', यानी तेरहवीं तिथि, से मिलकर बना है। यह दो तरह के धन का पर्व है: स्वास्थ्य, देवताओं के वैद्य धन्वंतरि के रूप में, और समृद्धि, खजाने के रक्षक कुबेर और लक्ष्मी जी के रूप में। घर लाया गया नया बर्तन या सिक्का पूरे साल की समृद्धि का प्रतीक है, और दिवाली की रात फिर से पूजा जाता है।

शाम का यम दीपक इस दिन को परिवार की लंबी आयु की प्रार्थना से जोड़ता है, और यहीं से दिवाली के पाँच दिन शुरू होते हैं। जैन समाज इसी दिन को धन्य तेरस के रूप में मनाता है, जब भगवान महावीर दिवाली पर निर्वाण से पहले अंतिम ध्यान में लीन हुए।

उपाय · परंपरा

धनतेरस के पारंपरिक उपाय

परिवार के लिए यम दीपदान

संध्या को दक्षिण की ओर चौमुखा दीपक जलाएँ और यम दीपदान का श्लोक बोलें। परंपरा इसे घर की लंबी आयु और कुशलता के लिए यमराज से प्रार्थना मानती है।

साबुत धनिया

साबुत धनिया खरीदें, लक्ष्मी जी को अर्पित करें, कुछ दाने तिजोरी में रखें और बाकी दिवाली के बाद गमले में बो दें। लोक-मान्यता हरे-भरे अंकुर को अच्छे साल का संकेत मानती है।

नई झाड़ू का आदर

परंपरा झाड़ू को लक्ष्मी का रूप मानती है जो घर से दरिद्रता बुहार देती है। नई झाड़ू पर कुमकुम का तिलक लगाकर पूजें, उसे नज़रों से ओट में रखें और कभी पैर न लगाएँ।

लक्ष्मी जी के साथ सिक्का

खरीदा हुआ सिक्का धोकर लक्ष्मी और कुबेर जी के साथ पूजें, दिवाली पर फिर पूजा करें और साल भर तिजोरी में रखें।

तिजोरी पर कुबेर

तिजोरी या लॉकर के सामने कुबेर मंत्र बोलें और वहाँ कुबेर यंत्र या चित्र रखें, जैसा व्यापारी परिवार परंपरा से करते हैं।

तेरह दीये

त्रयोदशी पर तेरह दीये जलाकर द्वार, रसोई, पानी के स्थान, तुलसी और घर के कोनों में रखें; मान्यता है कि रोशन और साफ घर लक्ष्मी जी का स्वागत करता है।

धन्वंतरि के दिन दान

किसी ज़रूरतमंद को भोजन दें या किसी बीमार की देखभाल में मदद करें। वैद्य-देवता के दिन परिवार धन के साथ स्वास्थ्य का भी ध्यान रखते हैं।

परंपरा, संक्षेप में

धनतेरस पर क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • त्रयोदशी रहते शुभ चौघड़िया में घर के लिए कुछ नया खरीदें।
  • पीतल, तांबे या चाँदी के बर्तन, चाँदी या सोने का सिक्का, झाड़ू या साबुत धनिया को प्राथमिकता दें।
  • नया बर्तन पानी, चावल, शक्कर या मिठाई भरकर घर लाएँ।
  • संध्या को मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर यम का दीपक जलाएँ।
  • कुबेर और लक्ष्मी जी के साथ परिवार के स्वास्थ्य के लिए धन्वंतरि जी की भी पूजा करें।
  • सिक्का और बर्तन दिवाली की लक्ष्मी पूजा के लिए संभालकर रखें।
  • घर और द्वार साफ करें, रंगोली बनाएँ और द्वार पर रोशनी करें।
  • अपनी सामर्थ्य के भीतर खरीदें; छोटी-सी प्रतीकात्मक खरीदारी से भी परंपरा पूरी होती है।

क्या न करें

  • परंपरा से धनतेरस पर लोहा, चाकू-कैंची जैसी धारदार चीज़ें, काँच और काले रंग की वस्तुएँ खरीदने से बचें।
  • नया बर्तन घर में खाली न लाएँ।
  • खरीदारी के लिए उधार न लें, न बजट से बाहर जाएँ; परंपरा प्रतीक माँगती है, बोझ नहीं।
  • लोक-मान्यता से इस दिन परिवार किसी को पैसा उधार नहीं देते।
  • यम का दीपक घर के भीतर या आग पकड़ने वाली चीज़ों के पास न जलाएँ।
  • गणेश जी को तुलसी न चढ़ाएँ, और लक्ष्मी-कुबेर से पहले गणेश पूजा न छोड़ें।
  • पुरानी झाड़ू धनतेरस के दिन ही न फेंकें; त्योहार के बाद उसे हटाएँ।

देश भर में

धनतेरस की क्षेत्रीय परंपराएँ और भोग

क्षेत्र के अनुसार

उत्तर भारत
दिन में बर्तन, सिक्के और गहने खरीदे जाते हैं, प्रदोष में लक्ष्मी-कुबेर पूजा होती है और द्वार पर यम का दीपक रखा जाता है; बाज़ार देर रात तक खुले रहते हैं।
महाराष्ट्र
वसु बारस के बाद धनत्रयोदशी आती है। धन्वंतरि की पूजा होती है, बहुत से घरों में गुड़ और धनिये का नैवेद्य चढ़ता है और संध्या को यमदीपदान होता है।
गुजरात
धन तेरस पर लक्ष्मी पूजा और सिक्कों व गहनों की पूजा होती है; व्यापार का साल दिवाली के चोपड़ा पूजन की ओर बढ़ता है।
दक्षिण भारत
धनत्रयोदशी के रूप में घर पर लक्ष्मी या कुबेर पूजा होती है; आयुर्वेद संस्थानों और धन्वंतरि मंदिरों में धन्वंतरि पूजा होती है।
जैन समाज
धन्य तेरस: भगवान महावीर के उस अंतिम ध्यान का स्मरण, जो दिवाली पर उनके निर्वाण में पूर्ण हुआ।

भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन

  • गुड़ और धनिया महाराष्ट्र के बहुत से घरों में धनत्रयोदशी का नैवेद्य, प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है।
  • खीर और मिठाई घर की बनी कोई भी मिठाई, हो सके तो नए बर्तन में।
  • गणेश जी के लिए लड्डू बेसन या मोतीचूर के।
  • मौसमी फल केला, सेब, अनार या सिंघाड़ा।
  • सुपारी-लौंग वाला पान नैवेद्य के अंत में।

आने वाले वर्षों में धनतेरस की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

आने वाले वर्षों में धनतेरस की तारीख
वर्षतारीखस्थिति
2026इस वर्षशुक्रवार, 6 नवंबर 2026आने वाली
2027बुधवार, 27 अक्टूबर 2027आने वाली
2028रविवार, 15 अक्टूबर 2028आने वाली

पंचांगों में धनतेरस की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग धनतेरस की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: धनतेरस का निर्णय प्रदोष काल से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

धनतेरस से जुड़े सामान्य प्रश्न

2026 में धनतेरस कब है?

2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को है। नई दिल्ली में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:02 से शाम 7:58 तक (वृषभ काल) है।

2026 में धनतेरस दिवाली से कितने दिन पहले है?

दो दिन पहले। धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को और दिवाली की लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को है। नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) भी इस बार रविवार, 8 नवंबर को ही है।

नई दिल्ली में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:02 से शाम 7:58 तक है: प्रदोष काल, जब स्थिर लग्न वृषभ उदित हो और त्रयोदशी चल रही हो। इसमें शुरू न कर पाएँ, तो त्रयोदशी रहते प्रदोष काल (शाम 5:32 से रात 8:09 तक) का कोई भी भाग अगला मान्य विकल्प है। यम का दीपक भी इसी शाम के समय में जलाएँ।

दूसरे कैलेंडर में धनतेरस की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल धनतेरस कब है?

2027 में बुधवार, 27 अक्टूबर; 2028 में रविवार, 15 अक्टूबर।

धनतेरस पर क्या खरीदें?

पारंपरिक खरीदारी है पीतल, तांबे या चाँदी का बर्तन, चाँदी या सोने का सिक्का या कोई गहना, नई झाड़ू और साबुत धनिया। बहुत से परिवार रसोई या घर के लिए कोई नई चीज़ भी लेते हैं, और कुछ वाहन या गैजेट की खरीद इसी दिन रखते हैं। महत्व शुभ समय में खरीदे गए समृद्धि के प्रतीक का है, खर्च की रकम का नहीं।

धनतेरस पर क्या नहीं खरीदना चाहिए?

परंपरा से परिवार लोहा, चाकू-कैंची जैसी धारदार चीज़ें, काँच, प्लास्टिक और काले रंग की वस्तुएँ नहीं खरीदते, और नया बर्तन कभी खाली घर नहीं लाते। स्टील पर राय बँटी है: परंपरा पीतल, तांबा और चाँदी पसंद करती है, पर आज बहुत से घर स्टील भी लेते हैं। ये मान्यताएँ हैं, शास्त्रीय नियम नहीं; अपनी ज़रूरत और सामर्थ्य से खरीदें।

धनतेरस पर सोना, चाँदी या बर्तन खरीदने का शुभ समय क्या है?

त्रयोदशी रहते (सुबह 10:31 से सुबह 10:48 (7 नवंबर) तक) दिन के शुभ चौघड़िया में खरीदें: नई दिल्ली में ये अमृत: सुबह 10:31 से सुबह 10:42 तक; शुभ: दोपहर 12:04 से दोपहर 1:26 तक; चर: शाम 4:10 से शाम 5:32 तक; लाभ: रात 8:48 से रात 10:26 तक; शुभ: 7 नवंबर, रात 12:04 से रात 1:43 तक; अमृत: 7 नवंबर, रात 1:43 से रात 3:21 तक; चर: 7 नवंबर, रात 3:21 से सुबह 4:59 तक; शुभ: 7 नवंबर, सुबह 7:59 से सुबह 9:20 तक हैं। दोपहर के आसपास का अभिजीत मुहूर्त (सुबह 11:42 से दोपहर 12:26 तक) भी लिया जाता है, बुधवार को छोड़कर। दिन के राहुकाल से बचें, जो पंचांग में दिया होता है।

यम का दीपक कैसे जलाएँ?

प्रदोष काल (शाम 5:32 से शाम 6:51 तक) में मिट्टी के चौमुखे दीपक में सरसों या तिल का तेल भरें, उसे मुख्य द्वार के बाहर थोड़े से गेहूँ या चावल पर रखें, लौ दक्षिण यानी यम की दिशा की ओर हो, और यम दीपदान का श्लोक एक बार बोलें। दीपक को वहीं सुरक्षित जलकर शांत होने दें। यह परिवार की लंबी आयु की प्रार्थना है।

यम दीपक धनतेरस को जलाएँ या नरक चतुर्दशी को?

दोनों परंपराएँ हैं। पंचांग जिस पौराणिक नियम को मानते हैं, वह यम दीपदान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, यानी धनतेरस की संध्या को रखता है, और उत्तर भारत में मुख्य रूप से यही होता है। बहुत से परिवार अगले दिन नरक चतुर्दशी की शाम भी यम के लिए दीया जलाते हैं। धनतेरस पर जलाना कभी गलत नहीं; दूसरे दीपक के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा मानें।

घर पर धनतेरस पूजा कैसे करें?

घर साफ करें, शुभ समय में कुछ नया खरीदें और संध्या को चौकी पर गणेश, लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि जी को स्थापित करें। पहले गणेश जी, फिर स्वास्थ्य के लिए धन्वंतरि और समृद्धि के लिए कुबेर और लक्ष्मी जी की रोली, अक्षत, फूल, सिक्कों और मिठाई से पूजा करें, आरती गाएँ, दक्षिण की ओर यम का दीपक रखें और घर भर में तेरह दीये जलाएँ। ऊपर की विधि इसी क्रम में है।

धनतेरस पूजा सामग्री लिस्ट क्या है?

गणेश, लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र, कपड़े वाली चौकी, रोली, हल्दी, अक्षत, मौली, फूल और तुलसी, तेल के साथ मिट्टी के तेरह दीये, घी का दीपक, यम के लिए चौमुखा दीपक, धूप, कपूर, साबुत धनिया, गुड़, मिठाई, फल, पान-सुपारी, सिक्के और दिन में खरीदा नया बर्तन। ऊपर की पूरी सूची में विकल्प भी दिए हैं।

भगवान धन्वंतरि कौन हैं और धनतेरस पर उनकी पूजा कैसे करें?

धन्वंतरि देवताओं के वैद्य हैं, विष्णु का वह रूप जो समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुआ, और आयुर्वेद के अधिष्ठाता। धनतेरस की शाम उन्हें चंदन, पीले फूल, तुलसी और दीपक अर्पित करें और परिवार के स्वास्थ्य के लिए उनका मंत्र 11 या 108 बार जपें; यह इलाज के साथ भक्ति है, उसकी जगह नहीं।

धनतेरस पर किसकी पूजा होती है?

हर पूजा की तरह सबसे पहले गणेश जी की; फिर स्वास्थ्य के लिए धन्वंतरि जी, धन के रक्षक कुबेर जी और समृद्धि के लिए लक्ष्मी जी की; और यमराज की, जिन्हें संध्या को दक्षिणमुखी दीपक अर्पित होता है। बहुत से घरों में शाम की पूजा लक्ष्मी-कुबेर पूजा होती है, दिवाली पूजा का छोटा रूप।

धनतेरस पर कौन सा मंत्र बोलें?

गणेश जी के लिए 'ॐ गं गणपतये नमः', स्वास्थ्य के लिए धन्वंतरि मंत्र, कुबेर जी के लिए वैदिक 'राजाधिराजाय' मंत्र या 'ॐ यक्षाय कुबेराय', लक्ष्मी जी के लिए 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः', और यम का दीपक रखते समय यम दीपदान का श्लोक। सभी मंत्र अर्थ सहित मंत्र वाले भाग में हैं।

धनतेरस पर झाड़ू क्यों खरीदते हैं?

लोक-परंपरा झाड़ू को लक्ष्मी का रूप मानती है, क्योंकि वह घर से गंदगी और दरिद्रता बुहार देती है। धनतेरस पर खरीदी नई झाड़ू पर थोड़ा कुमकुम लगाकर पूजा की जाती है, उसे आदर से नज़रों की ओट में रखा जाता है और कभी पैर नहीं लगाया जाता; पुरानी झाड़ू उसी दिन फेंकने के बजाय त्योहार के बाद हटाई जाती है।

धनतेरस पर कितने दीये जलाएँ?

बहुत से परिवार तेरह दीये जलाते हैं, त्रयोदशी तक की हर तिथि का एक, और उन्हें द्वार, रसोई, पानी के स्थान, तुलसी और घर के कोनों में रखते हैं। यम का दीपक अलग है: मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर एक चौमुखा दीपक। घर के दीयों की कोई शास्त्रीय संख्या नहीं, इसलिए उतने जलाएँ जितने सुरक्षित संभाल सकें।

क्या धनतेरस पर राशि के अनुसार खरीदारी करनी चाहिए?

कोई शास्त्रीय ग्रंथ धनतेरस की खरीदारी को चंद्र राशि से नहीं जोड़ता। हर राशि के लिए धातु या रंग बताने वाली सूचियाँ आधुनिक सुझाव हैं। पारंपरिक विकल्प सबके लिए एक ही है: शुभ समय में खरीदा बर्तन, सिक्का, झाड़ू या धनिया। बड़ी खरीदारी के लिए किसी त्योहार-सूची से ज़्यादा आपकी अपनी कुंडली की दशा मायने रखती है।

धनतेरस पर धनिया क्यों खरीदते हैं?

धनिया 'धन' जैसा सुनाई देता है और उसका बीज आसानी से अंकुरित होता है, इसलिए वह बढ़ती समृद्धि का लोक-प्रतीक बन गया। परिवार साबुत धनिया खरीदकर लक्ष्मी जी को अर्पित करते हैं, कुछ दाने तिजोरी में रखते हैं और बाकी दिवाली के बाद गमले में बोते हैं; महाराष्ट्र के बहुत से घरों में इस दिन गुड़ और धनिये का नैवेद्य चढ़ता है।