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कृष्ण पक्ष · चतुर्थी तिथि · कार्तिक (पूर्णिमांत) / आश्विन (अमांत)

करवा चौथ 2026 कब है?

करवा चौथ 2026

3 दिन बाद

गुरु, 29 अक्टूबर

2026 में करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर को है। नई दिल्ली में इस दिन चाँद रात 8:11 बजे निकलेगा।

2027: सोमवार, 18 अक्टूबर 2027

चंद्रोदय

रात 8:11

नई दिल्ली

करवा चौथ कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह पूर्णिमांत गणना में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। दक्षिण और पश्चिम भारत की अमांत गणना में यही तिथि आश्विन कृष्ण चतुर्थी कहलाती है — दिन वही है, केवल महीने का नाम अलग। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

चंद्रोदय · गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

करवा चौथ 2026: शहर के अनुसार चाँद निकलने का समय

करवा चौथ की शाम हर शहर का चंद्रोदय, उसी शहर के लिए गणना करके। भारत के पूर्व और पश्चिम में चाँद एक घंटे से भी ज़्यादा आगे-पीछे निकलता है, इसलिए पूरे देश का एक समय नहीं, अपने शहर का समय देखें।

करवा चौथ 2026: शहर के अनुसार चाँद निकलने का समय
शहरचंद्रोदय
आगरारात 8:12
अहमदाबादरात 8:46
अजमेररात 8:28
अलीगढ़रात 8:10
अमृतसररात 8:12
आणंदरात 8:46
बेंगलुरुरात 8:50
भावनगररात 8:52
भोपालरात 8:26
भुवनेश्वरशाम 7:58
बीकानेररात 8:29
चंडीगढ़रात 8:07
चेन्नईरात 8:39
कोयंबटूररात 8:58
देहरादूनरात 8:03
फ़रीदाबादरात 8:12
गांधीनगररात 8:46
गाज़ियाबादरात 8:10
गोवारात 9:00
ग्रेटर नोएडारात 8:11
गुंटूररात 8:31
गुरुग्रामरात 8:13
गुवाहाटीशाम 7:18
ग्वालियररात 8:14
हरिद्वाररात 8:03
हैदराबादरात 8:36
इंदौररात 8:34
जबलपुररात 8:15
जयपुररात 8:22
जालंधररात 8:10
जम्मूरात 8:08
जामनगररात 8:58
जमशेदपुरशाम 7:50
जोधपुररात 8:36
कानपुररात 8:05
कन्याकुमारीरात 9:02
कोच्चिरात 9:03
कोल्हापुररात 8:56
कोलकाताशाम 7:42
कोल्लमरात 9:04
कोटारात 8:27
लखनऊरात 8:01
लुधियानारात 8:10
मदुरैरात 8:55
मंगलुरुरात 9:02
मेरठरात 8:08
मुंबईरात 8:55
मैसूरुरात 8:56
नागपुररात 8:24
नाशिकरात 8:49
नई दिल्लीरात 8:11
नोएडारात 8:11
पटनाशाम 7:47
प्रयागराजरात 8:01
पुदुच्चेरीरात 8:43
पुणेरात 8:53
पुरीशाम 7:59
रायपुररात 8:13
राजकोटरात 8:56
राँचीशाम 7:52
ऋषिकेशरात 8:03
सेलमरात 8:51
श्रीनगररात 8:04
सूरतरात 8:50
ठाणेरात 8:55
तिरुवनंतपुरमरात 9:03
तिरुचिरापल्लीरात 8:51
तिरुपतिरात 8:41
उदयपुररात 8:38
उज्जैनरात 8:33
वडोदरारात 8:46
वाराणसीशाम 7:57
विजयवाड़ारात 8:29
विशाखापत्तनमरात 8:16
वारंगलरात 8:30

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नई दिल्ली के लिए गणना

करवा चौथ 2026: तारीख और तिथि का समय

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

तिथि
चतुर्थी, कृष्ण पक्ष
हिंदू मास
कार्तिक (पूर्णिमांत) / आश्विन (अमांत)
तिथि आरंभ
29 अक्टूबर, रात 1:07
तिथि समाप्त
29 अक्टूबर, रात 10:10
दिन का निर्णय
चंद्रोदय
नई दिल्ली में चंद्रोदय
29 अक्टूबर, रात 8:11

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: करवा चौथ का निर्णय चाँद निकलने के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके चंद्रोदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

चंद्रोदय · नई दिल्ली

करवा चौथ 2026: नई दिल्ली में चाँद निकलने का समय

व्रत चाँद निकलने पर खुलता है — नई दिल्ली में रात 8:11 बजे, 29 अक्टूबर को।

यह समय केवल नई दिल्ली का है। एक ही शाम भारत के पूर्व और पश्चिम में चंद्रोदय एक घंटे से भी ज़्यादा आगे-पीछे होता है — सूर्योदय से कहीं अधिक — इसलिए पूरे देश के लिए छपा एक चंद्रोदय समय लगभग हर जगह ग़लत होता है। ऊपर शहर बदलें तो यह समय, और कभी-कभी तारीख भी, उसके साथ बदलती है।

करवा चौथ 2026 के सभी मुहूर्त · नई दिल्ली

करवा चौथ 2026 शुभ मुहूर्त

करवा चौथ वह व्रत है जो विवाहित महिलाएँ पति की लंबी आयु के लिए कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखती हैं: यह भोर से पहले सरगी से शुरू होता है, शाम को पूजा और कथा होती है, और छलनी से चाँद देखकर पूरा होता है। करवा चौथ 2026 नई दिल्ली में गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। व्रत का समय सुबह 6:30 से रात 8:11 तक है; पूजा का मुहूर्त शाम 5:38 से शाम 6:45 तक है, और चंद्रोदय रात 8:11 पर है।

करवा चौथ 2026 के सभी मुहूर्त — नई दिल्ली
मुहूर्तनई दिल्ली में समयकिसके लिए
व्रत का समय (सूर्योदय से चंद्रोदय)सुबह 6:30 से रात 8:11 तकसूर्योदय से इस शहर में चंद्रोदय तक।

आपके शहर में सूर्योदय से चंद्रोदय तक — व्रत की अवधि। सरगी इससे पहले पूरी हो जाती है, और व्रत चाँद देखकर अर्घ्य देने के बाद ही खोला जाता है।

करवा चौथ पूजा मुहूर्तशाम 5:38 से शाम 6:45 तकसूर्यास्त के बाद संध्या काल: तीन घटी, यानी दिन का दसवाँ भाग।

सूर्यास्त से शुरू होने वाला, लगभग सवा घंटे का संध्या पूजा का समय: शिव, गणेश और कार्तिकेय के साथ गौरी माता की पूजा, कथा, थालियों की फेरी और बायना देना। ज़्यादातर महिलाओं के समूह इसी समय मिलते हैं।

चंद्रोदयरात 8:11इस सूर्योदय के बाद और अगले सूर्योदय से पहले का पहला चंद्रोदय।

वह क्षण जिसकी व्रत को प्रतीक्षा है। देश भर में चंद्रोदय में एक घंटे से ज़्यादा का अंतर होता है, इसलिए अपने शहर का समय देखें; चाँद क्षितिज या इमारतों से ऊपर साफ़ दिखने पर अर्घ्य दें।

ब्रह्म मुहूर्त (सरगी)सुबह 4:47 से सुबह 5:39 तकरात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, जो सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले ख़त्म होता है।

सूर्योदय से पहले के दो मुहूर्त — उठने, स्नान करने और भरपूर पानी के साथ सरगी खाने का पारंपरिक समय, ताकि सूर्योदय पर व्रत शुरू होने से पहले सरगी पूरी हो जाए।

सूर्योदयसुबह 6:30क्षितिज पर सूर्य का ऊपरी किनारा दिखने का समय।

व्रत सूर्योदय से शुरू होता है; सुबह के स्नान के बाद संकल्प लें।

सूर्यास्तशाम 5:38सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज से ओझल होने का समय।

शाम की पूजा सूर्यास्त से शुरू होती है; उससे पहले तैयार होकर, थाली सजाकर इकट्ठी हो जाएँ।

उस दिन के शुभ समय

उस दिन के शुभ समय
मुहूर्तनई दिल्ली में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्तसुबह 11:42 से दोपहर 12:26शुभ
अमृत कालसुबह 8:17 से सुबह 9:44सर्वाधिक शुभ
अमृत काल (दूसरा)रात 1:03 से रात 2:30सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:47 से सुबह 5:39शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
अवधिनई दिल्ली में समय
राहु कालदोपहर 1:28 से दोपहर 2:51
यमगण्ड कालसुबह 6:30 से सुबह 7:54
दुर्मुहूर्त (पहला)सुबह 10:13 से सुबह 10:57
दुर्मुहूर्त (दूसरा)दोपहर 2:40 से दोपहर 3:25
वर्ज्यम्शाम 4:18 से शाम 5:45

ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।

पूजा विधि · घर पर, क्रम से

करवा चौथ पूजा विधि

  1. एक दिन पहले

    मेहंदी लगाएँ, करवा, थाली और पूजा का सामान तैयार रखें और सरगी की योजना बना लें। पंजाबी घरों में सास सरगी और श्रृंगार भेजती हैं; ससुराल से दूर रहने वाली महिला अपनी सरगी स्वयं तैयार करती है।

  2. भोर से पहले सरगी

    ब्रह्म मुहूर्त में उठें, चाहें तो स्नान करें, और सरगी खाएँ: दूध में फेनी या सेवइयाँ, फल, मेवे, मठरी, एक परांठा, और भरपूर पानी या नारियल पानी। सूर्योदय से पहले खा लें।

  3. सूर्योदय पर संकल्प

    सुबह के स्नान के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर करक चतुर्थी व्रत का संकल्प लें — परिवार के सुख, सौभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए — और तय करें कि व्रत कैसे रखेंगी: निर्जल, या स्वास्थ्य की ज़रूरत हो तो फल और पानी के साथ।

  4. दिन भर

    आराम करें, मन शांत रखें और भारी काम से बचें। पंजाबी परंपरा में इस दिन महिलाएँ सिलाई, कताई या कपड़ा काटने का काम नहीं करतीं। दोपहर बाद सोलह श्रृंगार के साथ दुल्हन जैसे या त्योहारी कपड़े पहनें और थाली सजाएँ।

  5. पूजा की तैयारी

    चौकी या दीवार पर करवा माता की तस्वीर या कैलेंडर लगाएँ, या मिट्टी या गोबर से छोटी गौर माता बनाएँ, साथ में शिव, गणेश और कार्तिकेय। करवे में जल भरें (कुछ घरों में गेहूँ), ढक्कन लगाएँ, उस पर दीपक या मिठाई रखें, और थाली तैयार रखें: रोली, चावल, सिंदूर, दीया, मिठाई, फल, जल का लोटा और छलनी।

  6. शाम की पूजा

    पूजा मुहूर्त में परिवार या पड़ोस की महिलाओं के साथ बैठें। दीया जलाएँ, पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर रोली, चावल, सिंदूर, फूल और श्रृंगार सामग्री से गौरी माता की, और शिव जी व कार्तिकेय की; गौरी प्रार्थना का श्लोक पढ़ें।

  7. कथा सुनें

    हाथ में गेहूँ या चावल के कुछ दाने लेकर करवा चौथ की कथा — वीरावती की कहानी — और उसके बाद अक्सर गणेश जी की कथा सुनें, जो कोई बड़ी महिला सुनाती है या पुस्तिका से पढ़ी जाती है; फिर दाने अर्पित करें।

  8. थालियों की फेरी

    पंजाबी परंपरा में महिलाएँ दिन के करने और न करने वाले कामों वाला पुराना करवा गीत गाते हुए सात बार घेरे में अपनी थालियाँ एक-दूसरे को घुमाती हैं।

  9. बायना दें

    बायना — मिठाई, मेवे, साड़ी या सूट, कुछ रुपये और भरा हुआ करवा — सास या किसी बड़ी सुहागन को दें और पैर छूकर आशीर्वाद लें।

  10. चंद्रमा को अर्घ्य

    चाँद निकलने पर थाली लेकर खुली जगह पर जाएँ। करवे या लोटे से — थोड़ा दूध और चावल मिला जल — रोली-चावल के साथ, चंद्र श्लोक बोलते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दें और पति की लंबी आयु की प्रार्थना करें।

  11. छलनी से चाँद देखें

    थाली में दीया जलाकर पहले छलनी से चाँद देखें, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा।

  12. व्रत खोलें

    पति अपने हाथ से पहला घूँट पानी और मिठाई का कौर देते हैं; उनके और बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लें। फिर पहले हल्का भोजन और बाद में त्योहारी भोजन करें; लंबे व्रत के बाद एकदम भारी भोजन न करें।

सामग्री · पहले से तैयार रखें

करवा चौथ पूजा सामग्री सूची

  • करवा (टोंटी वाला मिट्टी या पीतल का कलश) और ढक्कन एक या दो; जल से, या कुछ घरों में गेहूँ से भरा, और चंद्रमा के अर्घ्य के लिए।
  • जल का लोटा या कलश अगर करवा बंद रखा जाए तो अर्घ्य के लिए।
  • छलनी जिससे पहले चाँद और फिर पति को देखा जाता है।
  • मिट्टी का दीया, घी और बत्ती पूजा और चाँद के लिए थाली में जलाया जाता है।
  • सजी हुई पूजा की थाली शाम की पूजा और चाँद के लिए सारा सामान रखने को।
  • रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी और अक्षत गौरी माता, करवे और चंद्रमा के लिए।
  • मौली (कलावा) करवे के गले में बाँधने के लिए।
  • फूल गौरी माता और चंद्रमा के लिए।
  • अगरबत्ती और कपूर पूजा और आरती के लिए।
  • करवा माता की तस्वीर या कैलेंडर, या मिट्टी की गौर माता बगल में शिव, गणेश और कार्तिकेय के साथ।
  • चौकी और लाल कपड़ा देवताओं के लिए।
  • गेहूँ या चावल के दाने कथा सुनते समय हाथ में रखने के लिए।
  • श्रृंगार सामग्री: चूड़ियाँ, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, आलता महिलाएँ पहनती हैं और गौरी माता को भी अर्पित करती हैं।
  • लाल या त्योहारी कपड़े दुल्हन का जोड़ा पारंपरिक है; लाल और गुलाबी पसंद किए जाते हैं।
  • मिठाई: मठरी, हलवा या लड्डू पूजा, बायने और व्रत खोलने के लिए।
  • फल और मेवे पूजा और सरगी के लिए।
  • कच्चा दूध थोड़ा सा, अर्घ्य के जल में मिलाने के लिए।
  • सरगी का सामान: फेनी या सेवइयाँ, दूध, फल, मेवे, मठरी, नारियल भोर से पहले खाने के लिए।
  • बायना: मिठाई, मेवे, साड़ी या सूट, रुपये सास या किसी बड़ी सुहागन को देने के लिए।
  • करवा चौथ कथा की पुस्तिका पूजा में कथा पढ़ने के लिए।
  • माचिस छत पर दीया जलाने के लिए।

मंत्र · अर्थ के साथ

करवा चौथ के मंत्र और आरती

करवा चौथ संकल्प

मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये ॥

Mama Sukhasaubhagya Putrapautradi Susthira Shri Praptaye Karaka Chaturthi Vratamaham Karishye

अर्थ: सुख, सौभाग्य, संतान और स्थिर समृद्धि की प्राप्ति के लिए मैं करक चतुर्थी का व्रत करूँगी।

कब और कैसे: करवा चौथ की कई विधि-पुस्तिकाओं में छपा संकल्प (किसी प्राचीन ग्रंथ में इसके शब्द तय नहीं हैं): सुबह स्नान के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर एक बार बोलें, या यही संकल्प अपने शब्दों में लें।

गौरी प्रार्थना

नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संततिं शुभाम् ।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे ॥

Namah Shivayai Sharvanyai Saubhagyam Santatim Shubham, Prayachchha Bhaktiyuktanam Narinam Haravallabhe

अर्थ: शिवा, शर्वाणी को नमस्कार; हे हर की प्रिया, भक्ति करने वाली स्त्रियों को सौभाग्य और शुभ संतान प्रदान करें।

कब और कैसे: करवा चौथ की कई पूजा-पुस्तिकाओं में छपी गौरी प्रार्थना (इसका पुराना स्रोत ज्ञात नहीं): गौरी माता को सिंदूर और श्रृंगार अर्पित करते समय तीन या ग्यारह बार पढ़ें।

वक्रतुंड (गणेश वंदना)

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

Vakratunda Mahakaya Suryakotisamaprabha, Nirvighnam Kuru Me Deva Sarvakaryeshu Sarvada

अर्थ: हे टेढ़ी सूँड़ और विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव, मेरे सब काम सदा निर्विघ्न करें।

कब और कैसे: शाम की पूजा में सबसे पहले: करवा चौथ चतुर्थी — गणेश जी की तिथि — को पड़ता है, और गौरी माता से पहले उनकी पूजा होती है।

चंद्र श्लोक

दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम् ।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम् ॥

Dadhishankhatusharabham Kshirodarnavasambhavam, Namami Shashinam Somam Shambhormukutabhushanam

अर्थ: दही, शंख और हिम के समान श्वेत, क्षीर सागर से उत्पन्न, शिव के मुकुट के आभूषण चंद्रमा को मैं प्रणाम करती हूँ।

कब और कैसे: नवग्रह स्तोत्र से: चंद्रमा को अर्घ्य देते समय तीन बार बोलें।

चंद्र मंत्र

ॐ सों सोमाय नमः

Om Som Somaya Namah

अर्थ: ॐ, सोम — चंद्रमा — को नमस्कार।

कब और कैसे: चाँद की प्रतीक्षा करते और उसे देखते समय ग्यारह या 108 बार दोहराने का छोटा मंत्र।

आरती शिव जी की आरती: ॐ जय शिव ओंकारा (शिव-पार्वती पूजा में गाई जाती है) पूरी आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

Om jai Shiv Omkara, swami jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, arddhangi dhara.
Om jai Shiv Omkara.

Ekanan chaturanan panchanan raje.
Hansasan Garudasan vrishvahan saje.
Om jai Shiv Omkara.

Do bhuj char chaturbhuj dasbhuj ati sohe.
Trigun roop nirakhte tribhuvan jan mohe.
Om jai Shiv Omkara.

Akshamala vanmala, mundmala dhari.
Chandan mrigmad sohai, bhale shashidhari.
Om jai Shiv Omkara.

Shvetambar pitambar baghambar ange.
Sanakadik Garunadik bhutadik sange.
Om jai Shiv Omkara.

Kar ke madhya kamandal chakra trishooldhari.
Sukhkari dukhhari jagpalan kari.
Om jai Shiv Omkara.

Brahma Vishnu Sadashiv janat aviveka.
Pranavakshar mein shobhit ye teenon eka.
Om jai Shiv Omkara.

Trigunswami ji ki aarti jo koi nar gave.
Kahat Shivanand Swami sukh sampati pave.
Om jai Shiv Omkara.

Om jai Shiv Omkara, swami jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, arddhangi dhara.

यह आरती उसी रूप में है जैसे आम तौर पर गाई जाती है। गीता प्रेस के 'आरती-संग्रह' में यह 'जय शिव ओंकारा, भज शिव ओंकारा' से शुरू होती है और टेक 'ॐ हर हर महादेव' है; उसमें 'त्रिगुण रूप' की जगह 'तीनों रूप', 'चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी' की जगह 'त्रिपुरारी कंसारी करमाला धारी', 'कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधारी' की जगह 'कर मध्ये सुकमण्डलु चक्र शूलधारी' और 'कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे' की जगह 'भनत शिवानन्द स्वामी मनवाञ्छित पावै' छपा है। छपा पाठ

कथा · कहानी और उसका अर्थ

करवा चौथ की कथा और महत्व

कथा

वीरावती सात भाइयों की इकलौती बहन थी। उसने अपना पहला करवा चौथ मायके में रखा और शाम तक भूख-प्यास से बेहाल हो गई। उसकी हालत भाइयों से देखी न गई; उन्होंने पहाड़ी के पीछे आग जलाई — कुछ कथाओं में एक भाई छलनी में दीपक लेकर पेड़ पर चढ़ गया — और बहन से कहा कि चाँद निकल आया है। उसने नकली चाँद को अर्घ्य देकर व्रत खोल लिया।

उसी समय समाचार आया कि उसके पति की मृत्यु हो गई है। दुखी वीरावती पति के पास गई और उनका शरीर ले जाने नहीं दिया। कुछ कथाओं में देवराज इंद्र की पत्नी इंद्राणी उसे वर्ष भर हर चौथ का व्रत रखने को कहती हैं; कुछ में माता पार्वती पति को लौटाने में उसकी सहायता करती हैं। वह वर्ष भर पति के पास बैठी रही, हर चौथ का व्रत रखती रही, और अगले करवा चौथ पर पूरी श्रद्धा से व्रत रखने पर उसके पति को जीवनदान मिला। इसी कथा के कारण चाँद छलनी से देखा जाता है और व्रत कभी जल्दी नहीं खोला जाता।

एक और कथा करवा नाम की पतिव्रता स्त्री की है, जिसके पति को नदी में नहाते समय मगरमच्छ ने पकड़ लिया। उसने कच्चे धागे से मगरमच्छ को बाँध दिया और यमराज के पास जाकर न्याय माँगा; ऐसी सती के श्राप से डरकर यमराज ने मगरमच्छ को दंड दिया और उसके पति को लंबी आयु दी। पूजा का करवा उसी के नाम से जुड़ा है।

महत्व

करवा चौथ में दो व्रत मिलते हैं: कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर गणेश जी का संकष्टी व्रत, और शिव की आदर्श पत्नी गौरी माता से विवाहित स्त्री की पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना। करवा — जल से भरा कलश — चंद्रमा के अर्घ्य का पात्र भी है और समृद्धि का प्रतीक भी।

यह फ़सल के बाद के मौसम में आता है, जब, कहा जाता है, उत्तर भारत की स्त्रियाँ अपनी सखियों और ससुराल से अपने रिश्ते का उत्सव मनाती थीं: सास की सरगी, बदले में बायना, और शाम का महिलाओं का घेरा — ये उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितना व्रत।

आज बहुत से पति भी व्रत रखते हैं, और अविवाहित लड़कियाँ होने वाले या मनचाहे जीवनसाथी के लिए व्रत रखकर तारे या चाँद देखकर खोलती हैं। यह शरद पूर्णिमा के बाद की चतुर्थी पर, दिवाली से लगभग दस दिन पहले आता है।

उपाय · परंपरा

करवा चौथ के पारंपरिक उपाय

गौरी माता को श्रृंगार अर्पण

गौरी माता को सिंदूर, चूड़ियाँ और बाकी श्रृंगार सामग्री अर्पित करना, और बाद में किसी सुहागन को देना, अखंड सौभाग्य की प्रार्थना का पारंपरिक तरीका है।

पूजा का सिंदूर

बहुत सी महिलाएँ गौरी माता को चढ़ाया सिंदूर रख लेती हैं और अगले दिन लगाती हैं — यह सुहागिन के सौभाग्य से जुड़ी परंपरा है।

सास का सम्मान

आदर से बायना देना और सास के पैर छूना घर के बड़ों का आशीर्वाद दिलाने वाला माना जाता है — यह परंपरा व्रत जितनी ही महत्वपूर्ण है।

चंद्रमा का मंत्र

ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक है; चंद्रोदय की प्रतीक्षा करते हुए ‘ॐ सों सोमाय नमः’ का जप धैर्य, शांति और घर में सामंजस्य की पारंपरिक साधना है।

ज़रूरतमंद सुहागन को दान

किसी ऐसी विवाहित महिला को चूड़ियाँ, सिंदूर, साड़ी या भोजन देना जो इन्हें न खरीद सके, करवा चौथ का पारंपरिक दान है।

साथ में व्रत

बहुत से दंपति अब साथ में व्रत रखते हैं; यह परंपरा एक-दूसरे की लंबी आयु की प्रार्थना है, और इसे साझा करना उसी भाव में है।

परंपरा, संक्षेप में

करवा चौथ पर क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • सूर्योदय से पहले भरपूर पानी के साथ पौष्टिक सरगी खाएँ।
  • दिन में आराम करें और धूप में भारी काम से बचें।
  • चंद्रोदय अपने शहर का देखें, पूरे देश का एक समय नहीं।
  • कथा सुनें और किसी बड़ी सुहागन को बायना दें।
  • व्रत धीरे खोलें — पहले पानी, फिर हल्का भोजन।
  • स्वास्थ्य की ज़रूरत हो तो निर्जल की जगह फलाहार या जल वाला व्रत रखें।

क्या न करें

  • गर्भावस्था, स्तनपान, मधुमेह, दवा या अस्वस्थता में निर्जल व्रत न रखें; डॉक्टर से पूछकर हल्का व्रत रखें।
  • जब तक चंद्रमा को अर्घ्य न दिया जाए, व्रत न खोलें — जब तक तबीयत ठीक हो।
  • पूरे भारत के लिए एक चंद्रोदय समय पर भरोसा न करें; यह शहर के अनुसार बदलता है।
  • पंजाबी परंपरा के अनुसार इस दिन सिलाई, कताई या कपड़ा काटने का काम न करें।
  • बहुत से परिवार करवा चौथ पर काले और सफ़ेद कपड़ों से बचते हैं; लाल और गुलाबी पसंद किए जाते हैं।
  • छत पर जलता दीया बिना देखरेख न छोड़ें।

देश भर में

करवा चौथ की क्षेत्रीय परंपराएँ और भोग

क्षेत्र के अनुसार

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश
सास की सरगी, शाम का घेरा जिसमें करवा गीत के साथ थालियों की फेरी होती है, बदले में बायना, और वीरावती की कथा; कथा पंजाबी में भी सुनाई जाती है।
राजस्थान
महिलाएँ चौथ माता की पूजा करती हैं — बरवाड़ा का चौथ माता मंदिर इस दिन तीर्थ है — और पूजा की गौर माता अक्सर मिट्टी की बनती है।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश
महिलाएँ दीवार पर गेरू और चावल के घोल से करवा का चित्र — चाँद, सूरज, करवा माता और सात भाई — बनाती हैं या छपा करवा कैलेंडर लगाती हैं, और बहुत से घरों में करवे में गेहूँ भरा जाता है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
अट्ला तद्दी, विवाहित महिलाओं और लड़कियों का ऐसा ही चंद्रोदय व्रत, एक दिन पहले तृतीया को रखा जाता है और गौरी माता को अट्लु (डोसे) अर्पित करके खुलता है।
देश के बाकी हिस्से और विदेश
दक्षिण, पश्चिम या पूर्व में पारंपरिक न होते हुए भी करवा चौथ अब हर जगह उत्तर भारतीय परिवार मनाते हैं, और इसकी रस्में अपार्टमेंट की छतों और दूर रहने वाले पति से वीडियो कॉल के अनुसार ढल गई हैं।

भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन

  • दूध में फेनी या सेवइयाँ सरगी का मुख्य हिस्सा: मीठे दूध में भीगी बारीक सेवइयाँ, पेट भरने वाली और पानी की कमी से बचाने वाली।
  • मठरी सरगी, थाली और बायने के लिए करारी नमकीन मठरी।
  • फल, मेवे और नारियल पानी सरगी का हिस्सा; नारियल पानी सूखे दिन में मदद करता है।
  • परांठा बहुत सी सरगी की थालियों में दही के साथ परांठा होता है, जो देर तक साथ देता है।
  • पानी और मिठाई चाँद के बाद पति के हाथ से पहला घूँट और कौर।
  • त्योहारी भोजन: पूरी, सब्ज़ी, खीर हल्की शुरुआत के बाद; बहुत से परिवार इसे सात्विक रखते हैं।

आने वाले वर्षों में करवा चौथ की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

आने वाले वर्षों में करवा चौथ की तारीख
वर्षतारीखस्थिति
2026इस वर्षगुरुवार, 29 अक्टूबर 2026आने वाली
2027सोमवार, 18 अक्टूबर 2027आने वाली
2028शनिवार, 7 अक्टूबर 2028आने वाली

पंचांगों में करवा चौथ की तारीख अलग क्यों होती है

2026 में, नई दिल्ली के लिए:

  • कुछ पंचांग पूजा का लंबा समय देते हैं, सूर्यास्त के बाद रात का दसवाँ भाग, शाम 6:56 तक। यहाँ समय तीन दिन-घटी की सायं संध्या है, दिन का दसवाँ भाग, शाम 6:45 तक।
  • कुछ पंचांग चंद्रोदय लगभग 5 मिनट बाद, रात 8:16 पर, बताते हैं: जब चंद्रमा का केंद्र क्षितिज पर आता है, वायुमंडलीय अपवर्तन जोड़े बिना। यहाँ समय वह है जब उसका ऊपरी किनारा पहली बार दिखता है, यानी जब चाँद दिखाई देने लगता है।

दो पंचांग करवा चौथ की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: करवा चौथ का निर्णय चंद्रोदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

करवा चौथ से जुड़े सामान्य प्रश्न

2026 में करवा चौथ कब है?

करवा चौथ 2026 नई दिल्ली में गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। व्रत का समय सुबह 6:30 से रात 8:11 तक है; शाम की पूजा का मुहूर्त शाम 5:38 से शाम 6:45 तक है, और चंद्रोदय रात 8:11 पर है।

करवा चौथ की तिथि क्या है?

कार्तिक (पूर्णिमांत) / आश्विन (अमांत) मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि। नई दिल्ली में यह तिथि 29 अक्टूबर, रात 1:07 से 29 अक्टूबर, रात 10:10 तक है, और करवा चौथ का दिन चाँद निकलने के समय चल रही तिथि से तय होता है।

नई दिल्ली में करवा चौथ पर चाँद कितने बजे निकलेगा?

नई दिल्ली में गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को चंद्रोदय रात 8:11 पर है। देश भर में चंद्रोदय में एक घंटे से ज़्यादा का अंतर होता है, और इमारतें या धुंध दिखने में कुछ मिनट की देरी कर सकती हैं, इसलिए अपने शहर का समय देखें और चाँद साफ़ दिखने तक प्रतीक्षा करें।

दूसरे कैलेंडर में करवा चौथ की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल करवा चौथ कब है?

2027 में सोमवार, 18 अक्टूबर; 2028 में शनिवार, 7 अक्टूबर।

करवा चौथ पूजा का समय क्या है?

नई दिल्ली में पूजा मुहूर्त शाम 5:38 से शाम 6:45 तक है — सूर्यास्त के बाद का वह समय जिसमें गौरी माता की पूजा होती है और कथा सुनी जाती है। व्रत बाद में, रात 8:11 पर चंद्रोदय के बाद, खोला जाता है।

सरगी क्या होती है और कब खानी चाहिए?

सरगी भोर से पहले का भोजन है, जो परंपरा से सास भेजती हैं और जो पूरे व्रत में साथ देता है: दूध में फेनी या सेवइयाँ, फल, मेवे, मठरी, परांठा और भरपूर पानी। इसे ब्रह्म मुहूर्त, सुबह 4:47 से सुबह 5:39 तक, में खाएँ और सुबह 6:30 पर सूर्योदय से पहले पूरा कर लें।

करवा चौथ की व्रत कथा क्या है?

सबसे ज़्यादा सुनाई जाने वाली कथा वीरावती की है: सात भाइयों ने नकली चाँद दिखाकर उसका पहला करवा चौथ व्रत तुड़वा दिया, उसके पति की मृत्यु हो गई, और वर्ष भर की भक्ति और पूरे व्रत के बाद देवी ने उन्हें जीवित किया। दूसरी कथा करवा की है, जिसने मगरमच्छ को बाँधकर यमराज से पति का जीवन पाया। दोनों ऊपर दी गई हैं।

करवा चौथ की पूजा कैसे करें?

सरगी और सुबह के संकल्प के बाद दिन भर व्रत रखें। शाम को शिव, गणेश और कार्तिकेय के साथ गौरी माता को स्थापित करें, करवा भरें, पहले गणेश जी और फिर रोली, चावल, सिंदूर और श्रृंगार से गौरी माता की पूजा करें, कथा सुनें, थालियाँ घुमाएँ और बायना दें। चंद्रोदय पर अर्घ्य देकर छलनी से चाँद और पति को देखें और उनके हाथ से व्रत खोलें।

करवा चौथ की थाली में क्या-क्या रखें?

जल भरा करवा, दीया, रोली, कुमकुम, सिंदूर और चावल, थोड़ा कच्चा दूध, फूल, मठरी जैसी मिठाई, फल, अर्घ्य के लिए जल का लोटा और छलनी; साथ में करवा माता की तस्वीर, कथा के लिए गेहूँ के दाने और सास के लिए बायना। पूरी सूची ऊपर है।

करवा चौथ का व्रत कैसे खोलते हैं?

चाँद निकलने पर करवे से उसे अर्घ्य दें, थाली में दीया रखकर छलनी से चाँद देखें, फिर उसी छलनी से पति को देखें। पति पहला घूँट पानी और मिठाई का कौर देते हैं; उनके और बड़ों के पैर छुएँ, फिर भोजन से पहले हल्का कुछ खाएँ।

अगर बादलों के कारण चाँद न दिखे तो क्या करें?

थोड़ी प्रतीक्षा करें; अक्सर चाँद दिख जाता है। अगर छिपा ही रहे, तो बहुत से परिवार नई दिल्ली के गणना किए गए चंद्रोदय, रात 8:11, पर चाँद की दिशा (पूर्व) की ओर अर्घ्य देकर व्रत खोल लेते हैं; कुछ किसी साफ़ आसमान वाले शहर से लाइव वीडियो में चाँद देखते हैं। अपने परिवार की रीति मानें।

क्या कुंवारी लड़कियाँ करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?

हाँ, बहुत सी लड़कियाँ अच्छे जीवनसाथी या मंगेतर के लिए रखती हैं। उनकी रीति आम तौर पर हल्की होती है: ससुराल की सरगी नहीं, बाकी महिलाओं के साथ पूजा, और तारे या चाँद देखकर व्रत खोलना, अक्सर बिना छलनी के। कोई तय नियम नहीं; परिवार की रीति मानें।

पीरियड्स में करवा चौथ की पूजा कैसे करें?

परंपराएँ अलग हैं। बहुत से परिवारों में महिला व्रत रखती है और कथा सुनती है, पर प्रतिमा छूने और पूजा का काम कोई और महिला करती है; चंद्रमा को अर्घ्य वह स्वयं देती है। बहुत से परिवार अब कोई रोक नहीं मानते। अपने परिवार की परंपरा और अपनी सुविधा के अनुसार करें।

क्या गर्भवती महिला करवा चौथ का व्रत रख सकती है?

परंपरा कभी नुकसान नहीं माँगती। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, और मधुमेह या दवा लेने वाले, पहले डॉक्टर से बात करें; ज़्यादातर फल, दूध और पानी वाला फलाहार व्रत रखती हैं, या बिना व्रत के पूजा और चंद्र अर्घ्य करती हैं।

करवा चौथ क्यों मनाया जाता है?

विवाहित महिलाएँ पति की लंबी आयु और परिवार के सुख के लिए यह व्रत रखती हैं, गौरी माता, शिव और गणेश जी की पूजा करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। यह महिलाओं के रिश्तों का उत्सव भी है — सास की सरगी, बदले में बायना और शाम का घेरा।

करवा चौथ पर कौन-सी आरती गाएँ?

बहुत से परिवार अपनी कथा पुस्तिका में छपी करवा माता की आरती गाते हैं; कुछ शिव-पार्वती पूजा में शिव जी की आरती ‘ॐ जय शिव ओंकारा’, जो ऊपर दी गई है, गाते हैं, या ‘ॐ जय जगदीश हरे’ से समापन करते हैं। कोई एक शास्त्रीय आरती नहीं है; अपने परिवार की आरती गाएँ।

क्या करवा चौथ की पूजा पर भद्रा का असर होता है?

भद्रा (विष्टि करण) रक्षाबंधन और होलिका दहन जैसे कामों में टाली जाती है, पर आम परंपरा में करवा चौथ का व्रत, शाम की पूजा और चंद्र अर्घ्य उसके कारण नहीं बदले जाते। अगर आपके पंडित जी पूजा में भद्रा से बचने की सलाह दें, तो उस दिन की भद्रा आपके शहर के पंचांग में दी होती है।