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नवग्रह उपाय · पहले मुफ़्त अभ्यास

नौ ग्रहों के उपाय

  • 9 ग्रह
  • हर उपाय 40 दिन
  • कोई रत्न नहीं

हर ग्रह का मुफ़्त अभ्यास, जैसा स्वर्ण सिद्धि ऐप देता है: बीज मंत्र और रोज़ की इतनी जप संख्या कि 40 दिन में पारंपरिक संख्या पूरी हो, उस ग्रह के दिन का दान, और एक रोज़ का आचरण। किस ग्रह का उपाय करना है, यह आपकी अपनी कुंडली बताती है।

आपका ग्रह कौन-सा है? यह कुंडली बताती है: मुफ़्त कुंडली में देखें

किस ग्रह का उपाय करें

ऐप आपकी कुंडली के तीन संकेतों से ग्रहों को क्रम देता है — जन्म के समय कमज़ोरी (षड्बल), अभी चल रही दशाएँ, और चंद्रमा पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया — और उसी ग्रह का अभ्यास देता है। कुंडली के बिना, जिस ग्रह की दशा चल रही है उसे चुनें, या आज के वार के ग्रह से शुरू करें।

अपनी कुंडली से ग्रह जानेंऐप में साधना योजना

हर ग्रह के मुफ़्त उपाय

सूर्य

पारंपरिक दिन: रविवार
  • सूर्य का मंत्र जपें: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — रविवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 2 माला (216 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 7,000 जप पूरे होते हैं।
  • सूर्य का दान करें. गेहूँ, गुड़, ताँबा का दान रविवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी वृद्ध पुरुष या पितृ-तुल्य व्यक्ति को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • सूर्य के लिए दैनिक आचरण. सूर्योदय पर सूर्य को जल अर्पित करें; पिता और अधिकारियों का सम्मान करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

पूरा मंत्र: सूर्य

चंद्र

पारंपरिक दिन: सोमवार
  • चंद्र का मंत्र जपें: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — सोमवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 3 माला (324 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 11,000 जप पूरे होते हैं।
  • चंद्र का दान करें. चावल, दूध, श्वेत वस्त्र का दान सोमवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी वृद्ध स्त्री या मातृ-तुल्य व्यक्ति को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • चंद्र के लिए दैनिक आचरण. माता का सम्मान करें; घर में चाँदी रखें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

पूरा मंत्र: चंद्र

मंगल

पारंपरिक दिन: मंगलवार
  • मंगल का मंत्र जपें: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — मंगलवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 3 माला (324 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 10,000 जप पूरे होते हैं।
  • मंगल का दान करें. मसूर दाल, गुड़, ताँबा का दान मंगलवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी सैनिक, खिलाड़ी या छोटे भाई को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • मंगल के लिए दैनिक आचरण. नीम का पौधा लगाएँ; भाई-बहनों की सेवा करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

पूरा मंत्र: मंगल

बुध

पारंपरिक दिन: बुधवार
  • बुध का मंत्र जपें: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — बुधवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 3 माला (324 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 9,000 जप पूरे होते हैं।
  • बुध का दान करें. हरी सब्ज़ियाँ, पुस्तकें, हरा वस्त्र का दान बुधवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी विद्यार्थी या पढ़ने वाले को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • बुध के लिए दैनिक आचरण. गाय को हरा चारा खिलाएँ; बच्चों से कभी कठोर न बोलें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

पूरा मंत्र: बुध

गुरु (बृहस्पति)

पारंपरिक दिन: गुरुवार
  • गुरु का मंत्र जपें: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — गुरुवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 5 माला (540 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 19,000 जप पूरे होते हैं।
  • गुरु का दान करें. चना दाल, हल्दी, पीला वस्त्र का दान गुरुवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी शिक्षक, पुरोहित या गुरु को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • गुरु के लिए दैनिक आचरण. हल्दी का तिलक लगाएँ; गुरुजनों और बड़ों का आदर करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

पूरा मंत्र: गुरु (बृहस्पति)

शुक्र

पारंपरिक दिन: शुक्रवार
  • शुक्र का मंत्र जपें: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — शुक्रवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 4 माला (432 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 16,000 जप पूरे होते हैं।
  • शुक्र का दान करें. सफ़ेद मिठाई, श्वेत वस्त्र, इत्र का दान शुक्रवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी युवती या कलाकार को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • शुक्र के लिए दैनिक आचरण. स्त्रियों का सम्मान करें; ज़रूरतमंद महिलाओं को वस्त्र या शृंगार-सामग्री दान करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

पूरा मंत्र: शुक्र

शनि

पारंपरिक दिन: शनिवार
  • शनि का मंत्र जपें: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — शनिवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 6 माला (648 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 23,000 जप पूरे होते हैं।
  • शनि का दान करें. तिल, उड़द, लोहा का दान शनिवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी श्रमिक, सफ़ाईकर्मी या अत्यंत निर्धन को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • शनि के लिए दैनिक आचरण. काले कुत्तों और कौओं को खिलाएँ; बुज़ुर्गों की सेवा करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

पूरा मंत्र: शनि

राहु

पारंपरिक दिन: शनिवार
  • राहु का मंत्र जपें: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — शनिवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 5 माला (540 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 18,000 जप पूरे होते हैं।
  • राहु का दान करें. उड़द दाल, नीला वस्त्र, कंबल का दान शनिवार को, दोपहर से पहले करें। इसे संसार द्वारा अनदेखे किसी व्यक्ति को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • राहु के लिए दैनिक आचरण. घर में चाँदी या हाथी की आकृति रखें; शयनकक्ष में पुरानी वस्तुएँ न रखें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

पूरा मंत्र: राहु

केतु

पारंपरिक दिन: मंगलवार
  • केतु का मंत्र जपें: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — मंगलवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 4 माला (432 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 17,000 जप पूरे होते हैं।
  • केतु का दान करें. कुलथी, रंग-बिरंगा वस्त्र, कंबल का दान मंगलवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी साधु या आवारा कुत्ते को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • केतु के लिए दैनिक आचरण. कुत्तों की देखभाल करें; जो अभी दिखता नहीं उस पर श्रद्धा रखें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

पूरा मंत्र: केतु

यह पेज कोई रत्न क्यों नहीं सुझाता

रत्न ग्रह को बल देता है, और गलत ग्रह को बल देना सबसे पुरानी भूल है। इसलिए रत्न केवल पूरी कुंडली देखकर, सावधानियों के साथ सुझाया जाता है — ऐप के रत्न टैब या जेमस्टोन रिपोर्ट में — ग्रह के नाम से नहीं।

ग्रहों के उपाय क्या कर सकते हैं और क्या नहीं

ये ध्यान, अनुशासन और उदारता के पारंपरिक अभ्यास हैं। ये स्वास्थ्य, धन या किसी परिणाम का वादा नहीं करते, इनके लिए कुछ खरीदना ज़रूरी नहीं, और डर दिखाकर महँगी पूजा बेचने वाला उपाय नहीं, व्यापार कर रहा है।

लोग अक्सर क्या पूछते हैं

मुझे किस ग्रह का उपाय करना चाहिए?

यह आपकी कुंडली से तय होता है: कौन-सा ग्रह जन्म के समय कमज़ोर है, किसकी दशा चल रही है, और क्या साढ़ेसाती है। ऐप का साधना पेज यही तीनों देखकर ग्रह चुनता है; यह पेज सभी नौ ग्रहों के उपाय बताता है।

ग्रह शांति के मुफ़्त उपाय कौन-से हैं?

हर ग्रह के लिए तीन: उसका बीज मंत्र, उसके दिन का दान, और एक रोज़ का आचरण। तीनों मुफ़्त या सस्ते हैं और 40 दिन तक नियम से किए जाते हैं।

मंत्र कितनी बार जपें?

हर ग्रह की पारंपरिक संख्या 40 दिन में पूरी हो, इतनी माला रोज़ — जैसे शनि के 23,000 जप के लिए रोज़ 6 माला (648)। संख्या हर ग्रह के साथ लिखी है।

क्या ग्रह के लिए रत्न पहनना चाहिए?

केवल पूरी कुंडली देखकर, सावधानियों के साथ। किसी ग्रह का नाम अपने आप में रत्न पहनने का कारण नहीं है; इसीलिए यह पेज कोई रत्न नहीं सुझाता।

क्या उपाय से बीमारी या पैसे की समस्या ठीक होती है?

नहीं, ऐसा कोई वादा नहीं। ये पारंपरिक अभ्यास हैं जो मन को टिकाते हैं; बीमारी के लिए डॉक्टर और पैसे या क़ानून के लिए योग्य सलाहकार ज़रूरी हैं।