नया चाँद · कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि · साल में 12 से 13 बार
अगली अमावस्या कब है?
सोम, 9 नवंबर
कार्तिक अमावस्या · चंद्रोदय सुबह 6:35
अगली अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर 2026 को है। नई दिल्ली में अमावस्या तिथि 8 नवंबर, सुबह 11:29 से 9 नवंबर, दोपहर 12:32 तक रहेगी।
उसके बाद: मंगल, 8 दिसंबर
तिथि: 8 नवंबर, सुबह 11:29 → 9 नवंबर, दोपहर 12:32
सोमवार, 9 नवंबर 2026
कार्तिक अमावस्या · 14 दिन बाद · चंद्रोदय सुबह 6:35
- तिथि आरंभ
- 8 नवंबर, सुबह 11:29
- तिथि समाप्त
- 9 नवंबर, दोपहर 12:32
- पक्ष
- कृष्ण
- हिंदू मास
- कार्तिक (पूर्णिमांत) / आश्विन (अमांत)
- इस तिथि का पर्व
- दिवाली, काली पूजा
उत्तर भारत की पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत की अमांत पद्धति में कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा अलग महीने के नाम से जाना जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष में दोनों का नाम एक रहता है। जहाँ ऊपर दो नाम दिखें, वहाँ दोनों सही हैं — दो कैलेंडरों के तारीख पर असहमत दिखने का यह भी एक ईमानदार कारण है।
अमावस्या कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि है, जब चाँद दिखाई नहीं देता। अधिकतर श्राद्ध और पितृ कर्म इसी दिन होते हैं। नीचे दिन के साथ तिथि का आरंभ और समाप्ति समय भी दिया है।
2026 में नई दिल्ली के लिए 12 अमावस्या हैं। यह संख्या हर साल बदलती है: बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, और अधिक मास वाले साल में संख्या बढ़ जाती है।
| तारीख | पक्ष | मास (पूर्णिमांत) | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | पर्व |
|---|---|---|---|---|---|
| 18 जनवरी, रविवार | कृष्ण | माघ | 18 जनवरी, रात 12:04 | 19 जनवरी, रात 1:22 | — |
| 17 फरवरी, मंगलवार | कृष्ण | फाल्गुन | 16 फरवरी, शाम 5:34 | 17 फरवरी, शाम 5:31 | — |
| 19 मार्च, गुरुवार | कृष्ण | चैत्र | 18 मार्च, सुबह 8:25 | 19 मार्च, सुबह 6:53 | — |
| 17 अप्रैल, शुक्रवार | कृष्ण | वैशाख | 16 अप्रैल, रात 8:12 | 17 अप्रैल, शाम 5:22 | — |
| 16 मई, शनिवार | कृष्ण | ज्येष्ठ | 16 मई, सुबह 5:12 | 17 मई, रात 1:31 | वट सावित्री व्रत |
| 15 जून, सोमवार | कृष्ण | अधिक ज्येष्ठ | 14 जून, दोपहर 12:20 | 15 जून, सुबह 8:24 | — |
| 14 जुलाई, मंगलवार | कृष्ण | आषाढ़ | 13 जुलाई, शाम 6:50 | 14 जुलाई, दोपहर 3:13 | — |
| 12 अगस्त, बुधवार | कृष्ण | श्रावण | 12 अगस्त, रात 1:54 | 12 अगस्त, रात 11:06 | — |
| 11 सितंबर, शुक्रवार | कृष्ण | भाद्रपद | 10 सितंबर, सुबह 10:33 | 11 सितंबर, सुबह 8:57 | — |
| 10 अक्टूबर, शनिवार | कृष्ण | आश्विन | 9 अक्टूबर, रात 9:36 | 10 अक्टूबर, रात 9:20 | — |
| 9 नवंबर, सोमवारअगली | कृष्ण | कार्तिक | 8 नवंबर, सुबह 11:29 | 9 नवंबर, दोपहर 12:32 | दिवाली (8 नवंबर) काली पूजा (8 नवंबर) |
| 8 दिसंबर, मंगलवार | कृष्ण | मार्गशीर्ष | 8 दिसंबर, सुबह 4:13 | 9 दिसंबर, सुबह 6:22 | — |
समय नई दिल्ली के अनुसार हैं। क्षय तिथि वाली पंक्ति की तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं थी — वह एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले से पहले समाप्त हो गई, और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। अगले दिन भी मान्य वाली पंक्ति में तिथि दो सूर्योदय तक चलती है, इसलिए दो परंपराएँ दो अलग दिन लेती हैं।
पर्व वाले कॉलम के बारे में: नाम केवल उन पंक्तियों पर है जिन पर हमारी गणना का कोई पर्व — जैसे दिवाली या महालया अमावस्या — उसी तिथि पर पड़ता है। जहाँ पर्व का दिन इस पंक्ति से अलग है — जैसे प्रदोष में मनाया जाने वाला पर्व — वहाँ उसकी अपनी तारीख कोष्ठक में दी है।
तिथि चंद्र मास का तीसवाँ भाग है — चंद्रमा का सूर्य से 12° आगे बढ़ना — इसलिए यह औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है और लगभग कभी सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। यह पेज सामान्य नियम मानता है: सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, दिन उसी का है। इसके दो परिणाम ऊपर की तालिका में दिखते हैं, और दोनों भूल नहीं हैं।
- दो सूर्योदय पर तिथि। जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय पर चलती है, तब दोनों दिन सचमुच उसके होते हैं और परंपराएँ बँट जाती हैं।
- क्षय तिथि। जब तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती, तब वह क्षय है, और व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली।
- शहर। सूर्योदय भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा बदलता है, इसलिए एक शहर में जो तिथि सूर्योदय के ठीक बाद ख़त्म होती है, वह दूसरे में ठीक पहले ख़त्म हो सकती है — और दिन बदल जाता है।
आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं; दिन उनकी व्याख्या है। यह पेज बताता है कि उसने कौन-सा नियम माना, ताकि आप अपने पंचांग से मिलान कर सकें।
अमावस्या से जुड़े सामान्य प्रश्न
अगली अमावस्या कब है?
अगली अमावस्या सोमवार, 9 नवंबर 2026 को है। नई दिल्ली में अमावस्या तिथि 8 नवंबर, सुबह 11:29 से 9 नवंबर, दोपहर 12:32 तक रहेगी।
2026 में कितनी अमावस्या हैं?
नई दिल्ली के लिए 2026 में 12। यह संख्या हर साल बदलती है, क्योंकि बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, और अधिक मास वाले साल में एक-दो और जुड़ जाती हैं।
मेरे कैलेंडर में अमावस्या की तारीख अलग क्यों है?
क्योंकि तिथि बहुत कम ही सूर्योदय पर शुरू या ख़त्म होती है। जब वह दो दिन सूर्योदय पर चलती है, या किसी दिन नहीं, तब परंपराएँ बँट जाती हैं: कुछ सूर्योदय वाला दिन लेती हैं, कुछ वह दिन जब तिथि शुरू हुई। ऊपर दिए आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं — दिन उनकी व्याख्या है, और यह पेज बताता है कि उसने कौन-सा नियम माना।
2026 में अमावस्या पर कौन-से पर्व पड़ते हैं?
वट सावित्री व्रत (16 मई), दिवाली (8 नवंबर), काली पूजा (8 नवंबर)। तारीखें नई दिल्ली के लिए हैं; हर पर्व का अपना पेज उसका मुहूर्त और निर्णय का नियम बताता है।