2027 में जया एकादशी बुधवार, 17 फरवरी को है। नई दिल्ली में पारण 18 फरवरी को सुबह 6:57 से सुबह 9:12 तक है; एकादशी तिथि 16 फरवरी, रात 8:20 से 17 फरवरी, शाम 5:32 तक रहेगी।
जया एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।
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ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: जया एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।
जया एकादशी 2027 के सभी मुहूर्त · नई दिल्ली
जया एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त
जया एकादशी माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जो भगवान विष्णु के लिए विजय के दिन के रूप में रखी जाती है: इसकी कथा एक दिव्य जोड़े की है जो इसे रखकर शाप से मुक्त हुआ। नई दिल्ली में यह बुधवार, 17 फरवरी 2027 को है: व्रत सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है, पारण का समय 18 फरवरी, सुबह 6:57 से सुबह 9:12 तक है, और वह द्वादशी भीष्म द्वादशी है। इसे भैमी एकादशी भी कहते हैं।
जया एकादशी 2027 के सभी मुहूर्त — नई दिल्ली
मुहूर्त
नई दिल्ली में समय
किसके लिए
पारण का समय
18 फरवरी, सुबह 6:57 से सुबह 9:12 तकद्वादशी की सुबह (दिन का पहला पाँचवाँ भाग); हरि वासर रात में ही समाप्त हो चुका है।
द्वादशी का वह समय, जिसमें जया एकादशी का व्रत पूरा किया जाता है। यह हरि वासर बीतने के बाद शुरू होता है और सामान्यतः सुबह के पहले भाग तक रहता है; हरि वासर देर तक चले तो पारण दोपहर के बाद होता है, और द्वादशी समाप्त होने के बाद कभी नहीं। यहाँ दिया समय नई दिल्ली के लिए गणना करके दिया गया है।
हरि वासर समाप्ति
रात 10:46द्वादशी के पहले चौथाई भाग का अंत; इसके भीतर व्रत नहीं खोला जाता।
हरि वासर द्वादशी का पहला चौथाई भाग है। इसमें व्रत नहीं खोला जाता, चाहे सुबह हो चुकी हो, इसलिए नई दिल्ली में इसकी समाप्ति ही पारण का सबसे पहला क्षण है।
ब्रह्म मुहूर्त
सुबह 5:15 से सुबह 6:06 तकरात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, जो सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले ख़त्म होता है।
एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले का समय: उठने, स्नान करने और व्रत का संकल्प लेने का पारंपरिक समय।
सूर्योदय
सुबह 6:57क्षितिज पर सूर्य का ऊपरी किनारा दिखने का समय।
व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक गिना जाता है, और सुबह की पूजा इसके बाद होती है।
शुभ चौघड़िया (दिन)
लाभसुबह 6:57 से सुबह 8:22 तक
अमृतसुबह 8:22 से सुबह 9:46 तक
शुभसुबह 11:11 से दोपहर 12:35 तक
चरदोपहर 3:24 से शाम 4:48 तक
लाभशाम 4:48 से शाम 6:12 तक
दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया।
दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया। जो परिवार भोर में पूजा नहीं कर पाते, वे मुख्य पूजा के लिए इनमें से कोई समय चुनते हैं।
प्रदोष काल: संध्या दीप
शाम 6:12 से रात 8:45 तकसूर्यास्त से रात के तीन मुहूर्त (रात का पाँचवाँ भाग)।
सूर्यास्त के बाद का समय, जब भगवान विष्णु के आगे और तुलसी के पास दीप जलाए जाते हैं और फिर से आरती होती है।
निशीथ काल: रात्रि जागरण
18 फरवरी, रात 12:09 से रात 1:00 तकरात के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, आधी रात के आसपास।
आधी रात का समय, जागरण का केंद्र। जो रात भर जागते हैं, वे यह भाग कीर्तन और जप को देते हैं।
राहु काल (वर्जित समय)इस समय टाला जाता है
दोपहर 12:35 से दोपहर 1:59 तकदिन का वह आठवाँ भाग जो वार के अनुसार राहु का है: इसमें पूजा, खरीदारी या यात्रा शुरू नहीं की जाती।
नई दिल्ली में एकादशी के दिन का राहु काल। बहुत से परिवार संकल्प या मुख्य पूजा इसके भीतर शुरू नहीं करते; इससे व्रत या पारण का समय नहीं बदलता।
उस दिन के शुभ समय
उस दिन के शुभ समय
मुहूर्त
नई दिल्ली में समय
प्रकृति
अमृत काल
शाम 6:01 से शाम 7:29
सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त
सुबह 5:15 से सुबह 6:06
शुभ
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
अवधि
नई दिल्ली में समय
राहु काल
दोपहर 12:35 से दोपहर 1:59
यमगण्ड काल
सुबह 8:22 से सुबह 9:46
दुर्मुहूर्त (पहला)
दोपहर 12:12 से दोपहर 12:57
वर्ज्यम्
सुबह 9:17 से सुबह 10:44
ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए बुधवार, 17 फरवरी 2027 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।
पारण · नई दिल्ली
जया एकादशी 2027 पारण का समय
गुरुवार, 18 फरवरी 2027, सुबह 6:57 से सुबह 9:12
पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 17 फरवरी, रात 10:46 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।
व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
शुक्ल पक्ष · माघ
जया एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख
इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
बुधवार, 17 फरवरी 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
बुधवार, 17 फरवरी 2027 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; बुधवार, 17 फरवरी 2027 का अरुणोदय (17 फ़र, सुबह 5:21) एकादशी में है, दशमी में नहीं।
ऊपर का हर दिन नई दिल्ली के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।
महत्व और व्रत कथा
जया एकादशी व्रत कथा और महत्व
अन्य नाम: भैमी एकादशी।
जया एकादशी माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी है, बसंत पंचमी के कुछ दिन बाद। जया का अर्थ है विजय। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा इस विश्वास के साथ होती है, जो इसकी कथा में है, कि यह व्रत अधोगति से मुक्ति देता है। इसे भैमी एकादशी भी कहते हैं, और अगले दिन भीष्म द्वादशी मनाई जाती है।
जया एकादशी की कथा
संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: भविष्योत्तर पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य (कुछ हिंदी व्रत-कथा पुस्तकें इसे पद्म पुराण से बताती हैं)।
इंद्र की सभा में, नंदन वन में, गंधर्व माल्यवान गाता था और अप्सरा पुष्पवती नाचती थी। दोनों में ऐसा प्रेम हुआ कि एक प्रस्तुति के दौरान वे एक-दूसरे के सिवा कुछ सोच ही नहीं पाए; माल्यवान का सुर बिगड़ गया और पुष्पवती का ताल छूट गया।
इंद्र ने इसे सभा का अपमान समझा और दोनों को पिशाच बनकर पृथ्वी पर रहने का शाप दे दिया। वे हिमालय की एक बर्फ़ीली ढलान पर पहुँचे, जहाँ न खाना मिलता, न विश्राम, न कोई सुख — दिन-रात कष्ट ही कष्ट।
संयोग से वह माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी थी। उस दिन उन्होंने थोड़े-से फल के सिवा कुछ नहीं खाया, एक पीपल के नीचे शरण ली, और ठंड और दुख से रात भर सो न सके। अनजाने में उन्होंने जया एकादशी का व्रत और जागरण पूरा कर लिया।
द्वादशी की सुबह शाप उतर गया और उन्होंने अपना दिव्य रूप फिर पा लिया। स्वर्ग लौटे तो इंद्र ने चकित होकर पूछा कि वे मुक्त कैसे हुए; उन्होंने बताया — भगवान विष्णु की कृपा और जया एकादशी से। श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि जो यह व्रत रखता है उसे ऐसे पतन का भय नहीं रहता।
व्रत कैसे रखा जाता है
व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।
उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
सभी 26 · नई दिल्ली
सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख
साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।
हर एकादशी का व्रत एक ही ढंग से रखा जाता है: दशमी को एक समय सात्विक भोजन, सुबह संकल्प, तुलसी के साथ विष्णु पूजा, कथा और आरती, शाम को दीप, रात्रि जागरण और द्वादशी को पारण। ये चरण एकादशी व्रत विधि में हैं। नीचे वे चरण हैं जो जया एकादशी में जुड़ते हैं या अलग ढंग से किए जाते हैं।
व्रत का संकल्प
पूजा स्थान के सामने बैठकर दाहिने हाथ में थोड़ा जल और एक फूल लें और व्रत का संकल्प करें: अपना नाम लें, कहें कि आप भगवान विष्णु के लिए जया एकादशी का व्रत रख रहे हैं, और यह भी कि व्रत कैसा होगा, निर्जल, केवल जल पर, फलाहार पर या एक समय के फलाहारी भोजन के साथ। फिर जल धरती पर छोड़ दें। मंत्र वाले भाग का एकादशी संकल्प श्लोक यहाँ बोला जा सकता है।
कथा और आरती
नीचे दी गई जया एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें, और हो सके तो विष्णु सहस्रनाम या गीता का एक अध्याय भी। फिर घी के दीपक या कपूर से 'ॐ जय जगदीश हरे' आरती गाएँ और पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा माँगें।
भीष्म द्वादशी के लिए विष्णु सहस्रनाम
जया के अगले दिन भीष्म द्वादशी है, और महाभारत के अनुसार भीष्म पितामह ने ही बाणों की शय्या से युधिष्ठिर को भगवान विष्णु के सहस्र नाम सुनाए थे। बहुत से लोग जया एकादशी पर 'शुक्लाम्बरधरं' श्लोक से शुरू करके विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं।
द्वादशी, यानी भीष्म द्वादशी: दान के बाद पारण
अगली सुबह, भीष्म द्वादशी को, स्नान करके संक्षेप में भगवान का पूजन करें और, जैसा बहुत से परिवार करते हैं, भीष्म पितामह की स्मृति में जल अर्पित करें। किसी ज़रूरतमंद को भोजन या दान दें, फिर पारण के समय के भीतर पारण का श्लोक बोलकर जल के साथ तुलसी दल से व्रत खोलें, और उसके बाद सादा सात्विक भोजन।
सामग्री · पहले से तैयार रखें
जया एकादशी पूजा सामग्री सूची
हर एकादशी की पूजा सामग्री (विष्णु की प्रतिमा, दशमी को तोड़े तुलसी के पत्ते, घी का दीपक, पीले फूल, पंचामृत, गंगाजल आदि) एकादशी पूजा सामग्री सूची में है। जया एकादशी के लिए इसके साथ:
विष्णु सहस्रनामउस पाठ के लिए जो जया एकादशी को भीष्म द्वादशी से जोड़ता है।
मंत्र · अर्थ के साथ
जया एकादशी के मंत्र और आरती
हर एकादशी में पढ़े जाने वाले श्लोक — ध्यान और संकल्प से लेकर पारण के श्लोक तक — और ॐ जय जगदीश हरे आरती एकादशी गाइड के एकादशी के मंत्र और आरती वाले हिस्से में हैं। जया एकादशी के अपने:
अर्थ: श्वेत वस्त्र धारण करने वाले, चंद्रमा जैसे उज्ज्वल, चार भुजाओं वाले, प्रसन्न मुख वाले विष्णु का ध्यान करें, ताकि हर विघ्न शांत हो।
कब और कैसे: विष्णु सहस्रनाम पढ़ने या पूजा का कोई भी भाग शुरू करने से पहले एक बार।
महत्व
जया एकादशी का महत्व
दो दिव्य कलाकार एक क्षण के ध्यान-भंग पर शाप पाकर बर्फ़ीली हिमालयी ढलान पर दुखी आत्माओं की तरह भटकने भेज दिए गए, और अनजाने में यह दिन निभा लेना ही उन्हें लौटाने को काफ़ी था। इसलिए यह हर उस व्यक्ति का दिन है जो किसी आदत, चूक या हिम्मत टूटने से अपने ही स्तर से गिरा हुआ महसूस करता है: उपवास और कीर्तन की एक रात वापसी का रास्ता हैं। कथा में श्रीकृष्ण का वचन है कि इसे रखने वाले को ऐसे पतन का डर नहीं।
यह माघ के कई पर्वों के क्रम में आती है: भीष्म अष्टमी, जिस दिन भीष्म ने देह त्यागी, कुछ दिन पहले, भीष्म द्वादशी ठीक इसके बाद, और प्रयागराज के कल्पवासियों का महीना पूरा करने वाला माघ पूर्णिमा स्नान कुछ दिन बाद। बहुत से लोग आज विष्णु सहस्रनाम पढ़ते या सुनते हैं, वह स्तोत्र जो भीष्म ने बाणों की शय्या से सिखाया।
उपाय · परंपरा
जया एकादशी के पारंपरिक उपाय
विष्णु सहस्रनाम
दिन में एक बार 'शुक्लाम्बरधरं' से शुरू करके भगवान विष्णु के सहस्र नाम पढ़ें; यही पाठ जया एकादशी को भीष्म द्वादशी से जोड़ता है, क्योंकि ये नाम भीष्म ने ही सुनाए थे।
फल का व्रत
कथा के शापित जोड़े ने इस दिन थोड़े-से फल ही खाए थे। पूरा उपवास कठिन हो, तो फल का व्रत रखना इस दिन की भावना के अनुरूप है।
पूरे मन से कीर्तन
माल्यवान और पुष्पवती गायक और नर्तकी थे, जिनका ध्यान भटक गया था। शाम को भगवान विष्णु के भजन या कीर्तन पूरे मन से गाएँ।
भीष्म पितामह के लिए जल
भीष्म द्वादशी की सुबह, पारण से पहले, बहुत से परिवार भीष्म पितामह की स्मृति में जल अर्पित करते हैं, जिनकी अपनी कोई संतान नहीं थी जो उन्हें जल देती।
माघ का स्नान
जया माघ में आती है, जो पवित्र स्नान का मास है; माघ मेले में रहने वाले संगम पर स्नान करते हैं, और बाकी लोग सुबह के स्नान के जल में गंगाजल की कुछ बूँदें मिलाते हैं।
एक कमज़ोरी छोड़ें
जया का अर्थ विजय है, और इसकी कथा अधोगति से उठने की है; इस एकादशी से अपनी कोई एक नीचे खींचने वाली आदत छोड़ने का संकल्प इसी भावना में है।
परंपरा, संक्षेप में
जया एकादशी पर क्या करें, क्या न करें
क्या करें
दशमी को सूर्यास्त से पहले एक बार हल्का सात्विक भोजन करें।
सुबह संकल्प लें और जैसा व्रत तय किया, वैसा ही निभाएँ।
हर भोग पर एक दिन पहले तोड़ा गया तुलसी दल रखें।
'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करें और कथा पढ़ें या सुनें।
शाम को भगवान विष्णु के सामने और तुलसी के पास दीपक जलाएँ।
रात का कम से कम कुछ भाग कीर्तन या जप में जागें।
ज़रूरतमंद को भोजन या जल दें, और द्वादशी को पारण से पहले दान करें।
द्वादशी को पारण के समय के भीतर ही व्रत खोलें।
हो सके तो भीष्म द्वादशी से पहले विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
क्या न करें
एकादशी को चावल, गेहूँ, दाल या कोई भी अन्न न खाएँ।
एकादशी को तुलसी दल न तोड़ें।
दशमी से द्वादशी तक प्याज़, लहसुन, मांस, अंडा और मदिरा से दूर रहें।
दिन में न सोएँ।
झगड़ा, झूठ और कटु वचन से बचें।
हरि वासर में व्रत न खोलें, और द्वादशी बीतने से पहले पारण कर लें।
बीमार, बुज़ुर्ग, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं और बच्चों पर कठोर व्रत का दबाव न डालें; डायबिटीज़ या किसी और बीमारी वाले, या रोज़ दवा लेने वाले लोग व्रत से पहले डॉक्टर से पूछ लें।
देश भर में
जया एकादशी की क्षेत्रीय परंपराएँ और भोग
क्षेत्र के अनुसार
प्रयागराज (माघ मेला)
माघ भर संगम पर रहने वाले कल्पवासी जया एकादशी स्नान, व्रत और शिविरों में कथा के साथ मनाते हैं।
गौड़ीय वैष्णव पंचांग
यह दिन भैमी एकादशी के नाम से दिया जाता है, और व्रत अगली द्वादशी को खोला जाता है।
भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन
किसी भी एकादशी पर क्या खाया जा सकता है — फल और साबूदाने से लेकर समा के चावल और पारण के भोजन तक — यह एकादशी व्रत के भोजन की सूची में है।
आने वाले वर्षों में जया एकादशी की तारीख
इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।
आने वाले वर्षों में जया एकादशी की तारीख
वर्ष
तारीख
स्थिति
2026इस वर्ष
गुरुवार, 29 जनवरी 2026
बीत गई
2027
बुधवार, 17 फरवरी 2027
आने वाली
2028
सोमवार, 7 फरवरी 2028
आने वाली
पंचांगों में जया एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है
दो पंचांग जया एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।
तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: जया एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।
नई दिल्ली में जया एकादशी बुधवार, 17 फरवरी 2027 को है, और एकादशी तिथि रात 8:19 (16 फरवरी) से शाम 5:32 तक रहेगी। यह माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसका महीना हर पंचांग में एक ही है, और इसके अगले दिन भीष्म द्वादशी होती है।
जया एकादशी की तिथि क्या है?
माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। नई दिल्ली में यह तिथि 16 फरवरी, रात 8:20 से 17 फरवरी, शाम 5:32 तक है, और जया एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।
जया एकादशी का पारण कब करें?
गुरुवार, 18 फरवरी 2027 को सुबह 6:57 से सुबह 9:12 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है।
दूसरे कैलेंडर में जया एकादशी की तारीख अलग क्यों है?
मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।
अगले साल जया एकादशी कब है?
2028 में सोमवार, 7 फरवरी।
जया एकादशी क्यों रखी जाती है?
जया एकादशी माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी है, बसंत पंचमी के कुछ दिन बाद। जया का अर्थ है विजय। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा इस विश्वास के साथ होती है, जो इसकी कथा में है, कि यह व्रत अधोगति से मुक्ति देता है। इसे भैमी एकादशी भी कहते हैं, और अगले दिन भीष्म द्वादशी मनाई जाती है।
जया एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?
कथा भविष्योत्तर पुराण, श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया एकादशी माहात्म्य (कुछ हिंदी व्रत-कथा पुस्तकें इसे पद्म पुराण से बताती हैं) में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।
क्या स्मार्त और वैष्णव जया एकादशी अलग दिन है?
नहीं, इस बार दोनों बुधवार, 17 फरवरी 2027 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।
जया एकादशी का पारण कब है?
नई दिल्ली में व्रत भीष्म द्वादशी को 18 फरवरी, सुबह 6:57 से सुबह 9:12 तक के भीतर खोला जाता है, हरि वासर बीतने (रात 10:46) के बाद। बहुत से परिवार पारण से ठीक पहले भीष्म पितामह की स्मृति में जल अर्पित करते हैं और किसी ज़रूरतमंद को भोजन देते हैं।
जया एकादशी की व्रत कथा क्या है?
इंद्र की सभा में गंधर्व माल्यवान और अप्सरा पुष्पवती को एक-दूसरे से ऐसा प्रेम हुआ कि उनका गायन और नृत्य बिगड़ गया। इंद्र ने उन्हें पिशाच बनकर पृथ्वी पर रहने का शाप दिया, और वे हिमालय की बर्फ़ीली ढलान पर जा पहुँचे। संयोग से वह माघ शुक्ल एकादशी थी: उन्होंने थोड़े-से फल ही खाए, पीपल के नीचे शरण ली और ठंड से सो न सके, और इस तरह अनजाने में जया का व्रत और जागरण पूरा हो गया। द्वादशी को शाप उतर गया। पूरी कथा ऊपर है।
जया एकादशी का महत्व क्या है?
जया का अर्थ है विजय। कथा कहती है कि इस व्रत ने माल्यवान और पुष्पवती को पिशाच योनि से उबारा, इसलिए यह दिन भगवान विष्णु के लिए इस विश्वास के साथ रखा जाता है कि यह अधोगति से मुक्त करता है, और पुराण जोड़ता है कि इसे रखने वाले को ऐसे पतन का भय नहीं रहता। बहुत से लोग इसे अपनी कमज़ोरियों पर विजय का दिन मानते हैं।
भैमी एकादशी क्या है?
भैमी, या भामी, एकादशी जया एकादशी का ही दूसरा नाम है, यानी माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी; गौड़ीय वैष्णव पंचांग इसे इसी नाम से देते हैं। दिन, व्रत और कथा वही हैं, और इसकी द्वादशी भीष्म द्वादशी है।
जया एकादशी के अगले दिन भीष्म द्वादशी क्या है?
यह माघ शुक्ल पक्ष की द्वादशी है, महाभारत के पितामह भीष्म की स्मृति में, जिन्होंने बाणों की शय्या पर सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा करते हुए युधिष्ठिर को भगवान विष्णु के सहस्र नाम सुनाए थे। परिवार उनकी स्मृति में जल अर्पित करते हैं और विष्णु सहस्रनाम पढ़ते हैं, और जया का व्रत इसी दिन खोला जाता है।
जया एकादशी का व्रत कैसे करें?
दशमी को हल्का भोजन करें। एकादशी को जल्दी स्नान करके संकल्प लें, तुलसी, पीले फूल, फल और घी के दीपक से भगवान विष्णु की पूजा करें, जया की कथा और हो सके तो विष्णु सहस्रनाम पढ़ें। फल या जल का व्रत रखें, शाम को भजन गाएँ और रात का कुछ भाग जागें। भीष्म द्वादशी को भोजन या जल का दान करके पारण के समय में व्रत खोलें।
जया एकादशी पर कौन सी आरती गाएँ?
सुबह की पूजा के बाद और फिर शाम के दीपों के साथ 'ॐ जय जगदीश हरे', जो ऊपर पूरी दी गई है। कथा के गंधर्व और अप्सरा गायक-नर्तक थे, इसलिए बहुत से परिवार शाम को पूरा कीर्तन करते हैं, और कथा के बाद व्रत पुस्तक से एकादशी माता की आरती गाते हैं।
जया एकादशी किस महीने में मनाई जाती है?
माघ में, शुक्ल पक्ष की एकादशी को, बसंत पंचमी के कुछ दिन बाद। अंग्रेज़ी कैलेंडर में यह जनवरी के अंत से फरवरी के अंत के बीच पड़ती है; नई दिल्ली के लिए तारीख बुधवार, 17 फरवरी 2027 है।
जया एकादशी व्रत का क्या फल है?
भविष्योत्तर पुराण कहता है कि इस व्रत ने एक शापित जोड़े को मुक्त किया और इसे रखने वाले को अधोगति का भय नहीं रहता। ये परंपरा के वचन हैं, जो श्रद्धा से माने जाते हैं, किसी परिणाम का वादा नहीं। यह दिन निश्चित रूप से संयम, भगवान के सहस्र नाम और किसी ज़रूरतमंद को दान का अवसर देता है।
क्या प्रयागराज के माघ मेले में जया एकादशी मनाई जाती है?
हाँ। जया माघ के भीतर आती है, जब तीर्थयात्री और कल्पवासी महीने भर संगम के किनारे रहते हैं, और उनके लिए यह महीने के बड़े स्नान और व्रत के दिनों में से एक है। घर पर रहने वाले वही व्रत रखते हैं, अक्सर सुबह के स्नान में गंगाजल की कुछ बूँदें मिलाकर।
जया एकादशी पर क्या नहीं खाना चाहिए?
दशमी से पारण तक चावल, गेहूँ, जौ या कोई भी अन्न, दाल या फलियाँ, प्याज़-लहसुन, और मांस, अंडा या मदिरा नहीं। साधारण नमक की जगह सेंधा नमक। व्रत फल, दूध, मखाने, शकरकंद और, परंपरा हो तो, कुट्टू या सिंघाड़े पर रखा जाता है।