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गणना-पद्धति

स्वर्ण सिद्धि कुंडली और समय कैसे निकालता है

इस साइट की हर कुंडली, पंचांग और मुहूर्त एक ही इंजन से, नीचे लिखी सेटिंग्स के साथ निकलता है। ये इसलिए लिखी हैं कि आप कोई भी मान ख़ुद दोबारा निकाल सकें, या समझ सकें कि दूसरा पंचांग अलग समय क्यों देता है। यह पेज किसी परंपरा को सही या ग़लत नहीं कहता।

Swiss Ephemeris · लाहिड़ी अयनांश

ग्रह और राशिचक्र

ग्रहों की स्थिति

हर ग्रह की स्थिति Swiss Ephemeris (संस्करण 2.10.03) से, उसकी उन डेटा फ़ाइलों से जो ऐप के साथ आती हैं। स्थिति भू-केंद्रीय और दृश्य (apparent) है।

राशिचक्र और अयनांश

निरयण (sidereal) राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश के साथ। 27 अक्टूबर 2026 को लाहिड़ी अयनांश 24°14′02″ है; पिछले पचास वर्षों में यह औसतन 50.1″ प्रति वर्ष बढ़ा है, और यही सायन (पश्चिमी) और निरयण राशि का अंतर है।

राहु और केतु

माध्य (mean) राहु; केतु हमेशा ठीक सामने, 180° पर।

सायन स्थिति कहाँ

केवल वहाँ जहाँ पेज ख़ुद कहता है, जैसे सूर्य राशि कैलकुलेटर दोनों राशिचक्र साथ-साथ दिखाता है। बाकी हर कुंडली, पंचांग और मुहूर्त निरयण है।

लग्न, भाव, नक्षत्र, दशा

कुंडली कैसे बनती है

लग्न

जन्म के समय और स्थान पर पूर्वी क्षितिज पर उदित निरयण राशि का अंश। लग्न लगभग हर दो घंटे में राशि बदलता है, इसलिए जन्म समय सबसे ज़्यादा इसी पर असर डालता है।

भाव

संपूर्ण राशि (whole-sign) भाव: लग्न की राशि पहला भाव, अगली राशि दूसरा, और आगे इसी तरह।

नक्षत्र

राशिचक्र के 27 बराबर भाग, हर एक 13°20′ का, और हर नक्षत्र के चार चरण 3°20′ के।

विंशोत्तरी दशा

चंद्रमा के नक्षत्र से। जन्म के समय बची दशा चंद्रमा के नक्षत्र में बचे भाग से, और महादशाएँ कैलेंडर वर्षों में आगे गिनी जाती हैं।

जन्म का समय-क्षेत्र

जन्म स्थान के निर्देशांकों से उसका IANA समय-क्षेत्र, उस तारीख़ के नियमों के साथ — पुराने बदलाव और दूसरे देशों का डेलाइट सेविंग भी।

उदया तिथि · हर त्योहार का अपना नियम

सूर्योदय, दिन और तिथि

सूर्योदय और सूर्यास्त

वह क्षण जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज को छूता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन (refraction) के साथ, उस स्थान के अक्षांश-देशांतर पर समुद्र-तल की ऊँचाई मानकर।

वैदिक दिन

एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। आधी रात के बाद का समय भी पिछली तारीख़ की रात का हिस्सा है, और पेज ऐसे समय के साथ तारीख़ लिखते हैं।

दिन की तिथि

पंचांग हर दिन को उस तिथि से पहचानता है जो सूर्योदय के समय चल रही हो (उदया तिथि), और बताता है कि वह कब ख़त्म होती है।

त्योहार की तारीख़

हर त्योहार अपने शास्त्रीय नियम से: तिथि दिन के किस हिस्से में होनी चाहिए। कुछ उदाहरण:

जब तिथि दो दिनों को छूती है, तब यही नियम तय करता है कि त्योहार किस दिन है।

मुहूर्त और काल

राहु काल, यमगंड और गुलिक: वार के अनुसार दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) का एक आठवाँ भाग। चौघड़िया: दिन के आठ और रात के आठ भाग। अभिजीत: दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ (बुधवार को नहीं)। प्रदोष: रात का पाँचवाँ भाग। निशीथ: रात के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ। हर समय मिनट तक काटा जाता है, पूर्णांकित नहीं।

हर शहर अपने निर्देशांकों से

स्थान, निर्देशांक और समय-क्षेत्र

शहरों के पेज

पंचांग, राहु काल, चौघड़िया और त्योहारों के शहर-पेज 84 शहरों के लिए हैं (75 भारत में)। हर शहर एक तय बिंदु है: उसके अक्षांश और देशांतर, जो पेज पर छपे हैं।

समय-क्षेत्र

हर शहर का IANA समय-क्षेत्र उसके निर्देशांकों से निकाला गया है, और एक टेस्ट हर बार उसे दोबारा जाँचता है। भारत के बाहर डेलाइट सेविंग उसी क्षेत्र के नियमों से अपने-आप लगती है।

आपका अपना स्थान

जन्म स्थान या शहर खोजने पर उसके निर्देशांक लिए जाते हैं, और समय-क्षेत्र उन्हीं निर्देशांकों से।

एक उदाहरण, आज का

27 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय कोलकाता में सुबह 5:38, नई दिल्ली में सुबह 6:29 और मुंबई में सुबह 6:36 है — एक ही घड़ी पर 58 मिनट का फ़र्क़। देशांतर का हर एक अंश समय में चार मिनट है, इसलिए शहर बदलते ही हर समय बदलता है।

बिना किसी को सही या ग़लत कहे

अलग पंचांगों में समय अलग क्यों होता है

सूर्योदय की परिभाषा

27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सूर्य का ऊपरी किनारा, अपवर्तन सहित: 06:29:15; बिंब का केंद्र, अपवर्तन सहित: 06:30:31; बिंब का केंद्र, बिना अपवर्तन: 06:33:24। परिभाषा बदलने से ही लगभग 4 मिनट का अंतर, और सूर्योदय से गिना हर काल उतना ही खिसकता है।

स्थान

शहर का केंद्र और आपका अपना मोहल्ला, या दो पंचांगों के लिए एक ही शहर के अलग निर्देशांक: पूर्व की ओर हर एक अंश पर समय चार मिनट पहले।

अयनांश

लाहिड़ी के बजाय कोई दूसरा अयनांश हर निरयण स्थिति को एक ही छोटे कोण से खिसकाता है। जो ग्रह या लग्न राशि या नक्षत्र की सीमा के पास हो, उसकी राशि या नक्षत्र बदल सकता है, और लग्न शुरू होने का समय भी।

त्योहार का नियम

तिथि दिन के किस हिस्से में होनी चाहिए, और जब वह दो दिनों को छूए तब कौन-सा दिन चुना जाए — यहीं पंचांग सबसे ज़्यादा अलग होते हैं। जिस साल ऐसा होता है, त्योहार का पेज उसी साल का कारण लिखता है (जैसे दिवाली)।

काल की लंबाई और लग्न सारणी

कुछ पंचांग प्रदोष जैसे काल की एक तय लंबाई लेते हैं; यहाँ प्रदोष रात का पाँचवाँ भाग है। कुछ पूरी रात के लिए एक ही लग्न सारणी चलाते हैं; यहाँ लग्न का समय उदित राशि से ही निकाला जाता है।

मिनट काटना

यहाँ हर समय मिनट तक काटा जाता है; जो पंचांग पूर्णांकित करता है, वह एक मिनट बाद दिखा सकता है।

इसलिए एक-दो मिनट का अंतर सामान्य है। एक दिन का अंतर आम तौर पर अलग त्योहार-नियम, अलग समय-क्षेत्र या अलग शहर से आता है। अगर इन सबके बाद भी कोई समय ग़लत लगे, तो पेज, शहर और आपकी अपेक्षा के साथ हमें लिखें।

क्या गणना है और क्या नहीं

गणना और व्याख्या अलग

ऊपर की हर संख्या गणना है। अर्थ, अंक और मुहूर्त के नियम पारंपरिक ज्योतिष से हैं, विज्ञान से सिद्ध नहीं। AI केवल गणना की हुई संख्याओं को शब्दों में कहता है; वह कुंडली नहीं बनाता। यह कैसे काम करता है इन परतों को अलग-अलग बताता है।

सलाह नहीं

कोई भी परिणाम चिकित्सा, क़ानूनी, आर्थिक या मानसिक-स्वास्थ्य की सलाह नहीं है।

गणना-पद्धति: सामान्य प्रश्न

स्वर्ण सिद्धि कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, Swiss Ephemeris के साथ। 27 अक्टूबर 2026 को इसका मान 24°14′ है।

सूर्योदय कैसे परिभाषित है?

सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर, सामान्य अपवर्तन सहित, उस स्थान के अक्षांश-देशांतर पर समुद्र-तल मानकर।

दूसरे पंचांग में समय अलग क्यों दिखता है?

सूर्योदय की परिभाषा (आज नई दिल्ली में इससे ही लगभग 4 मिनट), शहर के निर्देशांक, अयनांश, त्योहार का नियम, काल की लंबाई और मिनट काटने का तरीक़ा — इनमें से किसी के बदलने से।

दिन की तिथि कैसे तय होती है?

सूर्योदय के समय चल रही तिथि (उदया तिथि) से। त्योहार अपने नियम से तय होते हैं, यानी तिथि दिन के किस हिस्से में होनी चाहिए।

जन्म कुंडली में समय-क्षेत्र कैसे लिया जाता है?

जन्म स्थान के निर्देशांकों से उसका IANA समय-क्षेत्र, उस तारीख़ के नियमों के साथ।