2027 में कामदा एकादशी शनिवार, 17 अप्रैल को है। नई दिल्ली में पारण 18 अप्रैल को सुबह 5:52 से सुबह 7:43 तक है; एकादशी तिथि 16 अप्रैल, सुबह 11:22 से 17 अप्रैल, सुबह 9:28 तक रहेगी।
कामदा एकादशी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।
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ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: कामदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।
कामदा एकादशी 2027 के सभी मुहूर्त · नई दिल्ली
कामदा एकादशी 2027 शुभ मुहूर्त
कामदा एकादशी हिंदू वर्ष की पहली एकादशी है, जो चैत्र शुक्ल पक्ष में, राम नवमी के कुछ दिन बाद, भगवान विष्णु के लिए रखी जाती है; इसके नाम का अर्थ है मनोकामना पूरी करने वाली। नई दिल्ली में यह शनिवार, 17 अप्रैल 2027 को है: व्रत सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है, और पारण का समय 18 अप्रैल, सुबह 5:52 से सुबह 7:43 तक है। बहुत से वैष्णव घर साल की चौबीस एकादशियों की शुरुआत इसी से करते हैं।
कामदा एकादशी 2027 के सभी मुहूर्त — नई दिल्ली
मुहूर्त
नई दिल्ली में समय
किसके लिए
पारण का समय
18 अप्रैल, सुबह 5:52 से सुबह 7:43 तकद्वादशी की सुबह (दिन का पहला पाँचवाँ भाग); हरि वासर रात में ही समाप्त हो चुका है। द्वादशी इसी बीच समाप्त हो जाती है, इसलिए पारण वहीं तक है।
द्वादशी का वह समय, जिसमें कामदा एकादशी का व्रत पूरा किया जाता है। यह हरि वासर बीतने के बाद शुरू होता है और सामान्यतः सुबह के पहले भाग तक रहता है; हरि वासर देर तक चले तो पारण दोपहर के बाद होता है, और द्वादशी समाप्त होने के बाद कभी नहीं। यहाँ दिया समय नई दिल्ली के लिए गणना करके दिया गया है।
हरि वासर समाप्ति
दोपहर 3:02द्वादशी के पहले चौथाई भाग का अंत; इसके भीतर व्रत नहीं खोला जाता।
हरि वासर द्वादशी का पहला चौथाई भाग है। इसमें व्रत नहीं खोला जाता, चाहे सुबह हो चुकी हो, इसलिए नई दिल्ली में इसकी समाप्ति ही पारण का सबसे पहला क्षण है।
ब्रह्म मुहूर्त
सुबह 4:25 से सुबह 5:09 तकरात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, जो सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले ख़त्म होता है।
एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले का समय: उठने, स्नान करने और व्रत का संकल्प लेने का पारंपरिक समय।
सूर्योदय
सुबह 5:54क्षितिज पर सूर्य का ऊपरी किनारा दिखने का समय।
व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक गिना जाता है, और सुबह की पूजा इसके बाद होती है।
शुभ चौघड़िया (दिन)
शुभसुबह 7:30 से सुबह 9:07 तक
चरदोपहर 12:21 से दोपहर 1:57 तक
लाभदोपहर 1:57 से दोपहर 3:34 तक
अमृतदोपहर 3:34 से शाम 5:11 तक
दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया।
दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया। जो परिवार भोर में पूजा नहीं कर पाते, वे मुख्य पूजा के लिए इनमें से कोई समय चुनते हैं।
प्रदोष काल: संध्या दीप
शाम 6:48 से रात 9:01 तकसूर्यास्त से रात के तीन मुहूर्त (रात का पाँचवाँ भाग)।
सूर्यास्त के बाद का समय, जब भगवान विष्णु के आगे और तुलसी के पास दीप जलाए जाते हैं और फिर से आरती होती है।
निशीथ काल: रात्रि जागरण
रात 11:58 से रात 12:42 (18 अप्रैल) तकरात के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, आधी रात के आसपास।
आधी रात का समय, जागरण का केंद्र। जो रात भर जागते हैं, वे यह भाग कीर्तन और जप को देते हैं।
राहु काल (वर्जित समय)इस समय टाला जाता है
सुबह 9:07 से सुबह 10:44 तकदिन का वह आठवाँ भाग जो वार के अनुसार राहु का है: इसमें पूजा, खरीदारी या यात्रा शुरू नहीं की जाती।
नई दिल्ली में एकादशी के दिन का राहु काल। बहुत से परिवार संकल्प या मुख्य पूजा इसके भीतर शुरू नहीं करते; इससे व्रत या पारण का समय नहीं बदलता।
उस दिन के शुभ समय
उस दिन के शुभ समय
मुहूर्त
नई दिल्ली में समय
प्रकृति
अभिजित मुहूर्त
सुबह 11:55 से दोपहर 12:46
शुभ
अमृत काल
रात 11:58 से रात 1:30
सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त
सुबह 4:25 से सुबह 5:09
शुभ
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
अवधि
नई दिल्ली में समय
राहु काल
सुबह 9:07 से सुबह 10:44
यमगण्ड काल
दोपहर 1:57 से दोपहर 3:34
दुर्मुहूर्त (पहला)
सुबह 5:54 से सुबह 6:45
दुर्मुहूर्त (दूसरा)
सुबह 6:45 से सुबह 7:37
वर्ज्यम्
दोपहर 2:47 से शाम 4:19
ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए शनिवार, 17 अप्रैल 2027 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।
पारण · नई दिल्ली
कामदा एकादशी 2027 पारण का समय
रविवार, 18 अप्रैल 2027, सुबह 5:52 से सुबह 7:43
पारण द्वादशी को होता है, और हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो इस बार 17 अप्रैल, दोपहर 3:02 पर समाप्त होता है — में व्रत नहीं खोला जाता। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है। द्वादशी इस अवधि के बीच में ही समाप्त हो जाती है, इसलिए पारण वहीं तक है।
व्रत के बारे में यहाँ दी गई बातें परंपरा का वर्णन हैं, चिकित्सा सलाह नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या दवाइयों की स्थिति में व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
शुक्ल पक्ष · चैत्र
कामदा एकादशी 2027: स्मार्त और वैष्णव तारीख
इस पेज की तारीख (स्मार्त, सूर्योदय का नियम)
शनिवार, 17 अप्रैल 2027 — जिस दिन के सूर्योदय पर एकादशी तिथि है, व्रत उसी दिन का माना जाता है — यही दिन एस्ट्रोसेज और यह साइट देती है।
वैष्णव (इस्कॉन), अरुणोदय का नियम
शनिवार, 17 अप्रैल 2027 — इस बार वही दिन। वैष्णव नियम तिथि सूर्योदय पर नहीं, अरुणोदय — सूर्योदय से पहले के 96 मिनट — पर देखता है; शनिवार, 17 अप्रैल 2027 का अरुणोदय (17 अप्रै, सुबह 4:18) एकादशी में है, दशमी में नहीं।
ऊपर का हर दिन नई दिल्ली के लिए उन्हीं तिथि-क्षणों से निकाला गया है। इस्कॉन मंदिर हर शहर के लिए अपना कैलेंडर छापते हैं और कुछ वर्षों में महाद्वादशी के नियम से व्रत द्वादशी पर भी ले जाते हैं — आपके मंदिर का कैलेंडर अलग हो तो उसी का पालन करें।
महत्व और व्रत कथा
कामदा एकादशी व्रत कथा और महत्व
कामदा एकादशी हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी है — चैत्र शुक्ल पक्ष की, राम नवमी के कुछ दिन बाद। कामदा का अर्थ है मनोकामना पूरी करने वाली। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा किसी दोष या शाप से मुक्ति की कामना से की जाती है — इसकी कथा भी इसी की है। वैष्णव घरों में इसे साल की चौबीस एकादशियों के चक्र की शुरुआत भी माना जाता है।
कामदा एकादशी की कथा
संक्षेप में, अपने शब्दों में — स्रोत: वराह पुराण, एकादशी माहात्म्य, जहाँ वसिष्ठ मुनि यह कथा राजा दिलीप को सुनाते हैं और श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को।
रत्नपुर नगर में राजा पुंडरीक का दरबार गंधर्वों, किन्नरों और अप्सराओं से भरा रहता था। गायकों में ललित नाम का एक गंधर्व था, जिसकी पत्नी ललिता नर्तकी थी, और दोनों में गहरा प्रेम था।
एक दिन ललिता दरबार में नहीं थी और ललित राजा के सामने गा रहा था। उसका मन पत्नी की ओर चला गया और वह सुर और बोल दोनों भूल गया। राजा ने इसे अपना अपमान माना और उसे नरभक्षी राक्षस बनने का शाप दे दिया। ललित का रूप तुरंत विशाल और भयानक हो गया और वह वनों में भटकने लगा; दुखी ललिता उसके पीछे-पीछे चलती रही।
विंध्य पर्वत पर उसे शृंगी ऋषि का आश्रम मिला। उसने ऋषि से पति की मुक्ति का उपाय पूछा। ऋषि ने कहा कि चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी निकट है; यदि वह श्रद्धा से इसका व्रत रखकर उसका पुण्य ललित को दे, तो शाप समाप्त हो जाएगा।
ललिता ने व्रत रखा, रात भर जागरण किया और द्वादशी को भगवान विष्णु के सामने व्रत का पुण्य पति को अर्पित कर दिया। पुराण कहता है कि ललित उसी क्षण अपने रूप में लौट आया और दोनों साथ गंधर्व लोक गए। वसिष्ठ कहते हैं कि यह व्रत ऐसे भारी दोष को भी मिटा देता है, और इसकी कथा सुनना भी पुण्य है।
व्रत कैसे रखा जाता है
व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के पारण तक चलता है। बहुत से परिवार एक दिन पहले, दशमी की शाम, एक बार सादा भोजन करते हैं।
एकादशी को अन्न और चावल नहीं लिए जाते। जो पूरा उपवास नहीं रख पाते वे फल, दूध या फलाहार लेते हैं; निर्जल व्रत वही रखते हैं जिनकी परंपरा और स्वास्थ्य इसकी अनुमति दें।
भगवान विष्णु की पूजा तुलसी दल, दीप और उनके नामों से होती है; उस दिन की कथा पढ़ना या सुनना व्रत का अंग है, और कई लोग रात का कुछ भाग कीर्तन या जप में जागकर बिताते हैं।
पारण द्वादशी को होता है, हरि वासर — द्वादशी का पहला चौथाई भाग — बीतने के बाद। आपके शहर का पारण समय ऊपर गणना करके दिया गया है।
उपवास के नियम यहाँ परंपरा के रूप में बताए गए हैं, चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं। गर्भावस्था, मधुमेह, बढ़ती उम्र या किसी दवा के चलते उपवास से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
सभी 26 · नई दिल्ली
सभी एकादशी और उनकी अगली तारीख
साधारण वर्ष में चौबीस, और अधिक मास वाले वर्ष में दो और। हर एकादशी का अपना पेज है — कथा, पारण और स्मार्त-वैष्णव तारीख के साथ।
हर एकादशी का व्रत एक ही ढंग से रखा जाता है: दशमी को एक समय सात्विक भोजन, सुबह संकल्प, तुलसी के साथ विष्णु पूजा, कथा और आरती, शाम को दीप, रात्रि जागरण और द्वादशी को पारण। ये चरण एकादशी व्रत विधि में हैं। नीचे वे चरण हैं जो कामदा एकादशी में जुड़ते हैं या अलग ढंग से किए जाते हैं।
व्रत का संकल्प
पूजा स्थान के सामने बैठकर दाहिने हाथ में थोड़ा जल और एक फूल लें और व्रत का संकल्प करें: अपना नाम लें, कहें कि आप भगवान विष्णु के लिए कामदा एकादशी का व्रत रख रहे हैं, और यह भी कि व्रत कैसा होगा, निर्जल, केवल जल पर, फलाहार पर या एक समय के फलाहारी भोजन के साथ। फिर जल धरती पर छोड़ दें। मंत्र वाले भाग का एकादशी संकल्प श्लोक यहाँ बोला जा सकता है।
कथा और आरती
नीचे दी गई कामदा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें, और हो सके तो विष्णु सहस्रनाम या गीता का एक अध्याय भी। फिर घी के दीपक या कपूर से 'ॐ जय जगदीश हरे' आरती गाएँ और पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा माँगें।
प्रियजन के लिए व्रत का पुण्य
कथा में ललिता ने यह व्रत पति के लिए रखा और भगवान विष्णु के सामने उसका पुण्य उन्हें अर्पित किया। यदि आप कामदा किसी संकट में पड़े अपने के लिए रख रहे हैं, पति या पत्नी, माता-पिता या संतान, तो सुबह के संकल्प में उनका नाम लें और द्वादशी को पारण से पहले जल और फूल के साथ व्रत का पुण्य उन्हें अर्पित करें।
सामग्री · पहले से तैयार रखें
कामदा एकादशी पूजा सामग्री सूची
हर एकादशी की पूजा सामग्री (विष्णु की प्रतिमा, दशमी को तोड़े तुलसी के पत्ते, घी का दीपक, पीले फूल, पंचामृत, गंगाजल आदि) एकादशी पूजा सामग्री सूची में है। कामदा एकादशी के लिए इससे अलग कुछ नहीं चाहिए।
मंत्र · अर्थ के साथ
कामदा एकादशी के मंत्र और आरती
हर एकादशी में पढ़े जाने वाले श्लोक — ध्यान और संकल्प से लेकर पारण के श्लोक तक — और ॐ जय जगदीश हरे आरती एकादशी गाइड के एकादशी के मंत्र और आरती वाले हिस्से में हैं। कामदा एकादशी के अपने:
अर्थ: राम, राम, राम कहते हुए मैं मन को आनंद देने वाले राम में रमता हूँ। हे सुमुखी, राम-नाम सहस्र नामों के बराबर है। विष्णु सहस्रनाम के अंत में पार्वती से शिव के वचन।
कब और कैसे: तीन बार; परंपरा में समय कम हो तो पूरे विष्णु सहस्रनाम की जगह।
महत्व
कामदा एकादशी का महत्व
राम नवमी के ठीक बाद आने के कारण बहुत से परिवार इसे त्योहार से चले आ रहे राम नाम के साथ मनाते हैं, और जल्दी ही हनुमान जयंती आती है। इसकी कथा ध्यान की एक चूक पर टिकी है, इसलिए यह पालन उसका उलटा माँगता है: धीरे-धीरे, हर अर्पण पर मन टिकाकर की गई पूजा, और कोई पुराना झगड़ा सुलझाना। गर्मी की तपिश शुरू होते ही दूसरों के लिए पानी और छाया उचित दान है।
इसकी कथा वराह पुराण से है, जहाँ रघुकुल के गुरु वसिष्ठ मुनि इसे राजा दिलीप को सुनाते हैं: गंधर्व ललित को एक क्षण की भूल पर राक्षस बनने का शाप मिला, और वह तब मुक्त हुआ जब उसकी पत्नी ललिता ने यह व्रत रखकर उसका पुण्य उसे दे दिया। इसलिए यह दिन एक व्यक्ति द्वारा दूसरे के लिए भी रखा जाता है, व्रत का पुण्य संकट में पड़े किसी अपने को अर्पित करते हुए। यह मार्च के अंत से अप्रैल के अंत के बीच आती है।
उपाय · परंपरा
कामदा एकादशी के पारंपरिक उपाय
संकट में पड़े अपने के लिए व्रत
ललिता ने कामदा पति के लिए रखी और उसका पुण्य उन्हें दे दिया। कोई प्रियजन कठिनाई में हो, तो उसके नाम से व्रत रखें और पारण से पहले उसका पुण्य उसे अर्पित करें; परंपरा परिणाम से अधिक निःस्वार्थ भाव को महत्व देती है।
साल की एकादशियों की शुरुआत
हिंदू वर्ष की पहली एकादशी होने से कामदा साल की एकादशियाँ, एक-एक करके और सेहत के अनुसार, निभाने का संकल्प लेने का सहज दिन है।
राम नवमी के बाद राम-नाम
कामदा राम नवमी के कुछ दिन बाद आती है, और इसकी कथा श्रीराम के कुलगुरु वसिष्ठ सुनाते हैं। 'राम रामेति' श्लोक तीन बार पढ़ें, जिसे परंपरा पूरे विष्णु सहस्रनाम के बराबर मानती है।
पूजा में पूरा ध्यान
ललित का शाप राजा के सामने एक क्षण की असावधानी से आया था। पूजा और कथा को पूरा मन दें, फ़ोन दूर रखकर।
गर्मी के लिए जल और छाँव
कामदा तब आती है जब गर्मी बढ़ने लगती है। मज़दूरों और राहगीरों के लिए पानी, छाछ या पंखे का प्रबंध इस मौसम का उपयुक्त दान है।
किसी झगड़े को सुलझाएँ
कथा एक राजा के क्रोध और एक पत्नी की निष्ठा पर टिकी है। नया साल आगे बढ़े, उससे पहले किसी से हुए झगड़े में सुलह कर लें।
परंपरा, संक्षेप में
कामदा एकादशी पर क्या करें, क्या न करें
क्या करें
दशमी को सूर्यास्त से पहले एक बार हल्का सात्विक भोजन करें।
सुबह संकल्प लें और जैसा व्रत तय किया, वैसा ही निभाएँ।
हर भोग पर एक दिन पहले तोड़ा गया तुलसी दल रखें।
'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करें और कथा पढ़ें या सुनें।
शाम को भगवान विष्णु के सामने और तुलसी के पास दीपक जलाएँ।
रात का कम से कम कुछ भाग कीर्तन या जप में जागें।
ज़रूरतमंद को भोजन या जल दें, और द्वादशी को पारण से पहले दान करें।
द्वादशी को पारण के समय के भीतर ही व्रत खोलें।
किसी और के लिए व्रत रखें, तो ललिता की तरह संकल्प में उनका नाम लें।
क्या न करें
एकादशी को चावल, गेहूँ, दाल या कोई भी अन्न न खाएँ।
एकादशी को तुलसी दल न तोड़ें।
दशमी से द्वादशी तक प्याज़, लहसुन, मांस, अंडा और मदिरा से दूर रहें।
दिन में न सोएँ।
झगड़ा, झूठ और कटु वचन से बचें।
हरि वासर में व्रत न खोलें, और द्वादशी बीतने से पहले पारण कर लें।
बीमार, बुज़ुर्ग, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं और बच्चों पर कठोर व्रत का दबाव न डालें; डायबिटीज़ या किसी और बीमारी वाले, या रोज़ दवा लेने वाले लोग व्रत से पहले डॉक्टर से पूछ लें।
पूजा के समय मन भटकने न दें; कथा में एक क्षण की असावधानी से ही शाप मिला था।
देश भर में
कामदा एकादशी का भोग और प्रसाद
किसी भी एकादशी पर क्या खाया जा सकता है — फल और साबूदाने से लेकर समा के चावल और पारण के भोजन तक — यह एकादशी व्रत के भोजन की सूची में है।
आने वाले वर्षों में कामदा एकादशी की तारीख
इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।
आने वाले वर्षों में कामदा एकादशी की तारीख
वर्ष
तारीख
स्थिति
2026इस वर्ष
रविवार, 29 मार्च 2026
बीत गई
2027
शनिवार, 17 अप्रैल 2027
आने वाली
2028
बुधवार, 5 अप्रैल 2028
आने वाली
पंचांगों में कामदा एकादशी की तारीख अलग क्यों होती है
2027 में, नई दिल्ली के लिए: द्वादशी सुबह 7:43 पर समाप्त होती है, इसलिए पारण उससे पहले हो जाना चाहिए: द्वादशी के बाद खोला गया व्रत पूरा नहीं माना जाता। कुछ पंचांग इसके बाद तक का समय देते हैं।
दो पंचांग कामदा एकादशी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।
तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: कामदा एकादशी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।
नई दिल्ली में कामदा एकादशी शनिवार, 17 अप्रैल 2027 को है, और एकादशी तिथि सुबह 11:22 (16 अप्रैल) से सुबह 9:28 तक रहेगी। यह चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी है, हिंदू नववर्ष के बाद की पहली, और राम नवमी के कुछ दिन बाद आती है।
कामदा एकादशी की तिथि क्या है?
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। नई दिल्ली में यह तिथि 16 अप्रैल, सुबह 11:22 से 17 अप्रैल, सुबह 9:28 तक है, और कामदा एकादशी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।
कामदा एकादशी का पारण कब करें?
रविवार, 18 अप्रैल 2027 को सुबह 5:52 से सुबह 7:43 तक। हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुका है, इसलिए पारण प्रातःकाल — दिन के उजाले के पहले पाँचवें भाग — में है। द्वादशी इस अवधि के बीच में ही समाप्त हो जाती है, इसलिए पारण वहीं तक है।
दूसरे कैलेंडर में कामदा एकादशी की तारीख अलग क्यों है?
मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।
अगले साल कामदा एकादशी कब है?
2028 में बुधवार, 5 अप्रैल।
कामदा एकादशी क्यों रखी जाती है?
कामदा एकादशी हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी है — चैत्र शुक्ल पक्ष की, राम नवमी के कुछ दिन बाद। कामदा का अर्थ है मनोकामना पूरी करने वाली। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा किसी दोष या शाप से मुक्ति की कामना से की जाती है — इसकी कथा भी इसी की है। वैष्णव घरों में इसे साल की चौबीस एकादशियों के चक्र की शुरुआत भी माना जाता है।
कामदा एकादशी की व्रत कथा किस ग्रंथ में है?
कथा वराह पुराण, एकादशी माहात्म्य, जहाँ वसिष्ठ मुनि यह कथा राजा दिलीप को सुनाते हैं और श्रीकृष्ण युधिष्ठिर को में है। पूरी कथा ऊपर दी गई है।
क्या स्मार्त और वैष्णव कामदा एकादशी अलग दिन है?
नहीं, इस बार दोनों शनिवार, 17 अप्रैल 2027 को हैं। वैष्णव नियम एकादशी को अरुणोदय पर देखता है, और उस दिन अरुणोदय पर भी एकादशी है।
कामदा एकादशी मार्च में है या अप्रैल में?
दोनों में से किसी में भी हो सकती है: कामदा मार्च के अंत से अप्रैल के अंत के बीच पड़ती है, चैत्र नवरात्रि से हिंदू नववर्ष शुरू होने के ग्यारहवें दिन। नई दिल्ली के लिए तारीख शनिवार, 17 अप्रैल 2027 है; बाकी वर्ष इस पेज की तालिका में हैं।
कामदा एकादशी का पारण कब है?
पारण द्वादशी को होता है: नई दिल्ली में 18 अप्रैल, सुबह 5:52 से सुबह 7:43 तक, हरि वासर समाप्त होने (दोपहर 3:02) के बाद। व्रत किसी और के लिए रखा हो, तो व्रत खोलने से ठीक पहले उसका पुण्य उन्हें अर्पित करें।
कामदा एकादशी की व्रत कथा क्या है?
रत्नपुर में राजा पुंडरीक के दरबार में गंधर्व ललित गा रहा था, जब उसकी पत्नी ललिता वहाँ नहीं थी; उसका मन पत्नी की ओर गया और वह सुर भूल गया। क्रोधित राजा ने उसे नरभक्षी राक्षस बनने का शाप दे दिया। ललिता उसके पीछे वन गई, जहाँ शृंगी ऋषि ने उसे चैत्र की कामदा एकादशी रखकर उसका पुण्य पति को देने को कहा। उसने ऐसा किया, और ललित उसी क्षण अपने रूप में लौट आया। पूरी कथा ऊपर है।
कामदा एकादशी का महत्व क्या है?
कामदा का अर्थ है मनोकामना पूरी करने वाली। हिंदू वर्ष की पहली एकादशी होने से यह साल की चौबीस एकादशियों का चक्र खोलती है, और इसकी कथा इसे दोष या शाप से मुक्ति की, और एक व्यक्ति द्वारा दूसरे के लिए रखे व्रत की, एकादशी बनाती है। पुराण में वसिष्ठ कहते हैं कि यह ललित के शाप जैसे भारी दोष को भी मिटा देती है।
कामदा को साल की पहली एकादशी क्यों कहते हैं?
हिंदू चंद्र वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से, यानी चैत्र नवरात्रि के पहले दिन से, शुरू होता है, और कामदा उसके बाद, उसी शुक्ल पक्ष में, आने वाली पहली एकादशी है। इसीलिए बहुत से पंचांग साल की एकादशियों की सूची कामदा से शुरू करते हैं और पापमोचनी पर ख़त्म।
क्या कामदा एकादशी किसी और के लिए रखी जा सकती है?
हाँ; इसकी कथा यही है। ललिता ने व्रत रखा और उसका पुण्य पति ललित को अर्पित किया, और वह मुक्त हो गया। सुबह के संकल्प में उस व्यक्ति का नाम लें और द्वादशी को पारण से पहले भगवान विष्णु के सामने जल और फूल के साथ पुण्य उसे अर्पित करें; परंपरा मानती है कि पुण्य इस तरह दिया जा सकता है।
क्या कामदा एकादशी सचमुच मनोकामना पूरी करती है?
इसका नाम और पुराण ऐसा कहते हैं, और बहुत से लोग मन में कोई कामना लेकर इसे रखते हैं। यह परंपरा की श्रद्धा की भाषा है, परिणाम का वादा नहीं। कथा स्वयं दिखाती है कि किस बात का मूल्य है: ललिता ने अपने लिए कुछ नहीं माँगा और अपना व्रत किसी और को दे दिया।
कामदा एकादशी का व्रत कैसे करें?
दशमी को एक बार सात्विक भोजन करें। एकादशी को जल्दी स्नान करके संकल्प लें, जिसके लिए रख रहे हों उसका नाम लेते हुए, और तुलसी, पीले फूल, फल और घी के दीपक से भगवान विष्णु की पूजा करें। ललित और ललिता की कथा पढ़ें, आरती गाएँ, जल या फल का व्रत रखें, रात का कुछ भाग कीर्तन में बिताएँ और पारण के समय में व्रत खोलें।
कामदा एकादशी के व्रत में क्या खाएँ?
कामदा शुरुआती गर्मी में आती है, इसलिए फलाहार हल्का और ठंडक देने वाला रखें: तरबूज़, खरबूज़ा, केला, दही, सेंधा नमक वाली छाछ, नारियल पानी, साबूदाना और मखाने। पारण तक चावल, गेहूँ या दाल नहीं, और प्याज़-लहसुन भी नहीं।
कामदा एकादशी का राम नवमी से क्या संबंध है?
दोनों चैत्र के एक ही शुक्ल पक्ष में आती हैं: राम नवमी नौवें दिन, कामदा दो दिन बाद ग्यारहवें दिन। इसकी कथा श्रीराम के कुल के गुरु वसिष्ठ उसी कुल के राजा दिलीप को सुनाते हैं, इसलिए बहुत से परिवार कामदा पर भी राम-नाम जपते हैं।
कामदा एकादशी पर कौन सी आरती गाएँ?
ज़्यादातर घरों में एकादशी की आरती 'ॐ जय जगदीश हरे' है, जो ऊपर पूरी दी गई है, और सुबह की पूजा के बाद व शाम के दीपों के साथ गाई जाती है। जो परिवार व्रत पुस्तक से एकादशी माता की आरती भी गाते हैं, उसमें एक-एक करके गिनाई गई एकादशियों में कामदा का नाम भी आता है।