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विजयवाड़ा का आज का पंचांग

सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 · विजयवाड़ा

शुभ · 7/10

शुक्ल पूर्णिमा

अभी कृष्ण प्रतिपदा, मंगल, 27 अक्टूबर 7:02 AM तक

अगले सूर्योदय (मंगल, 27 अक्टूबर, 6:03 AM) पर तिथि: कृष्ण प्रतिपदा

विजयवाड़ा में आज तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र अश्विनी, योग वज्र, करण बव और वार सोमवार है।

नक्षत्र
अश्विनी
5:41 PM तक, फिर भरणी
योग
वज्र
2:17 PM तक, फिर सिद्धि
करण
बव
9:42 AM तक, फिर बालव
सूर्योदय
सूर्यास्त

राहु काल

7:30 AM – 8:57 AM

बीत चुका

अभिजित मुहूर्त

11:28 AM – 12:15 PM

बीत चुका

विजयवाड़ा में अभी

विजयवाड़ा का आज का पंचांग, 26 अक्टूबर 2026 — 12:03 AM IST पर क्या चल रहा है

होरा बताती है कि इस घंटे में किस तरह का काम बैठता है। चौघड़िया पूरे दिन की योजना के लिए मोटा संकेत देता है।

अभी

विजयवाड़ा में

चौघड़िया

उद्वेग

1:24 AM तक

ग्रह-घंटा

सूर्य होरा

12:53 AM तक

राहु काल

7:30 AM – 8:57 AM

बीत चुका

अगला शुभ समय

शुभ

मंगल, 27 अक्टूबर, 1:24 AM – 2:57 AM

ग्रह-घंटा

सूर्य होरा

–

इसे आमतौर पर अधिकार, पहचान, सरकारी काम से जोड़ा जाता है।

चौघड़िया

उद्वेग

–

परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।

ज़रूरी समय-जाँच

अभी कोई बड़ी सावधानी अवधि नहीं चल रही

इस समय राहु काल, यमगण्ड और गुलिक नहीं चल रहे। कोई ज़रूरी काम शुरू करने से पहले आगे की अवधियाँ देख लें।

अभी चल रही होरा और चौघड़िया सूर्योदय-से-सूर्योदय वाले वैदिक दिन के हिसाब से हैं।

पूरा वैदिक दिन एक नज़र में

पंचांग की समय-रेखा · 6:03 AM से अगले दिन 6:03 AM तक

हर पंक्ति एक ही सूर्योदय-से-सूर्योदय पैमाने पर है। जो अवधियाँ एक सीध में हैं, वे उसी समय साथ चल रही हैं।

अभी चल रहाअनुकूलसावधानी रखें

वैदिक दिन
सूर्योदय दोपहर सूर्यास्त आधी रात अगला सूर्योदय
  1. चौघड़िया
    अमृत6:03 AM - 7:30 AM काल7:30 AM - 8:57 AM शुभ8:57 AM - 10:24 AM रोग10:24 AM - 11:51 AM उद्वेग11:51 AM - 1:18 PM चर1:18 PM - 2:46 PM लाभ2:46 PM - 4:13 PM अमृत4:13 PM - 5:40 PM चर5:40 PM - 7:13 PM रोग7:13 PM - 8:46 PM काल8:46 PM - 10:19 PM लाभ10:19 PM - 11:51 PM उद्वेग11:51 PM - 1:24 AM शुभ1:24 AM - 2:57 AM अमृत2:57 AM - 4:30 AM चर4:30 AM - 6:03 AM
  2. होरा
    चंद्र6:03 AM - 7:01 AM शनि7:01 AM - 7:59 AM गुरु7:59 AM - 8:57 AM मंगल8:57 AM - 9:55 AM सूर्य9:55 AM - 10:53 AM शुक्र10:53 AM - 11:51 AM बुध11:51 AM - 12:49 PM चंद्र12:49 PM - 1:48 PM शनि1:48 PM - 2:46 PM गुरु2:46 PM - 3:44 PM मंगल3:44 PM - 4:42 PM सूर्य4:42 PM - 5:40 PM शुक्र5:40 PM - 6:42 PM बुध6:42 PM - 7:44 PM चंद्र7:44 PM - 8:46 PM शनि8:46 PM - 9:48 PM गुरु9:48 PM - 10:50 PM मंगल10:50 PM - 11:51 PM सूर्य11:51 PM - 12:53 AM शुक्र12:53 AM - 1:55 AM बुध1:55 AM - 2:57 AM चंद्र2:57 AM - 3:59 AM शनि3:59 AM - 5:01 AM गुरु5:01 AM - 6:03 AM
  3. काल / मुहूर्त
    राहु काल7:30 AM - 8:57 AM यमगण्ड काल10:24 AM - 11:51 AM गुलिक काल1:18 PM - 2:46 PM अभिजित मुहूर्त11:28 AM - 12:15 PM दुर्मुहूर्त (पहला)12:15 PM - 1:01 PM दुर्मुहूर्त (दूसरा)2:34 PM - 3:21 PM वर्ज्य काल1:58 PM - 3:28 PM वर्ज्य काल (दूसरा)2:29 AM - 3:57 AM अमृत काल11:00 AM - 12:29 PM निशीथ काल11:27 PM - 12:16 AM
  4. गौरी पंचांगम्
    अमिर्ध6:03 AM - 7:30 AM विषम्7:30 AM - 8:57 AM रोगम्8:57 AM - 10:24 AM लाभम्10:24 AM - 11:51 AM धनम्11:51 AM - 1:18 PM सुगम्1:18 PM - 2:46 PM सोरम्2:46 PM - 4:13 PM उथि4:13 PM - 5:40 PM सुगम्5:40 PM - 7:13 PM सोरम्7:13 PM - 8:46 PM उथि8:46 PM - 10:19 PM अमिर्ध10:19 PM - 11:51 PM विषम्11:51 PM - 1:24 AM रोगम्1:24 AM - 2:57 AM लाभम्2:57 AM - 4:30 AM धनम्4:30 AM - 6:03 AM
  5. तिथि
    पूर्णिमा, शुक्ल6:03 AM - 9:42 AM प्रतिपदा, कृष्ण9:42 AM - 6:03 AM
  6. नक्षत्र
    अश्विनी6:03 AM - 5:41 PM भरणी5:41 PM - 6:03 AM
  7. योग
    वज्र6:03 AM - 2:17 PM सिद्धि2:17 PM - 6:03 AM
  8. करण
    बव6:03 AM - 9:42 AM बालव9:42 AM - 8:24 PM कौलव8:24 PM - 6:03 AM

कुछ होरा खंड चौड़े क्यों हैं: दिन और रात अलग-अलग बाँटे जाते हैं, इसलिए उनकी होरा की अवधि बराबर नहीं होती।

दिन का मुहूर्त-निर्णय

क्या आज विजयवाड़ा में शुभ दिन है? 7/10

मुहूर्त का अंक कोई राय नहीं, नाम से गिने हुए नियमों का जोड़ है। जो भी नियम लगा, वह अपने भार के साथ नीचे दिया है — ताकि कम अंक को सिर्फ़ मान न लेना पड़े, पढ़ा जा सके।

दिन की कुल शक्ति

7/10

शुभ

विशेष पंचांग योग

आज कोई नहीं

आज के वार, तिथि और नक्षत्र के मेल से सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, रवि, द्विपुष्कर, त्रिपुष्कर, विष, यमघंट या मृत्यु — इनमें से कोई योग नहीं बन रहा।

दिशा शूल

पूर्व

सोमवार को पूर्व दिशा की ओर निकलने से परंपरा में बचा जाता है। यह सिर्फ़ वार से तय होता है, ग्रहों की स्थिति से नहीं निकाला जाता — इसलिए हर शहर में एक ही रहता है।

परिहार निकलने से पहले आईना देख लें, या दूध ले लें।

नियमइस दिन का मानभारयह क्यों गिना जाता है
वारसोमवार+1दिन के स्वामी चंद्र हैं — नई शुरुआत के लिए अनुकूल
तिथिपूर्णिमा · शुक्ल+2पूर्णा तिथि — काम पूरा करने और उत्सव के लिए अनुकूल
नक्षत्रअश्विनी+2क्षिप्र नक्षत्र — फुर्तीले, हल्के और व्यापारिक कामों के लिए अनुकूल
नित्य योगवज्र-2नौ त्याज्य योगों में से एक
करणबव+1काम लायक करण

सभी भारों को जोड़कर आधा किया जाता है और 0-10 के पैमाने पर रखा जाता है, ताकि कोई एक नियम अकेले पूरा पैमाना न भर दे। यही निर्णय ऐप के महीने वाले कैलेंडर में भी इसी तारीख़ के लिए दिखता है।

दिन की योजना बनाएँ

आज का शुभ मुहूर्त और पूजा के समय

ये पंचांग के आम संकेत हैं। निजी मुहूर्त में यह भी देखा जाता है कि काम कौन-सा है और व्यक्ति की जन्म कुंडली क्या कहती है।

अनुकूल अवधियाँ

रात का चौघड़िया

शुभ

मंगलवार –

सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि।

रात का चौघड़िया

अमृत

मंगलवार –

ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि।

अनुकूल अवधि

ब्रह्म मुहूर्त

मंगलवार –

रात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, जो सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले पूरा होता है। परंपरा में यह पढ़ाई, ध्यान और जप का सबसे अच्छा समय माना जाता है, सांसारिक कामों की शुरुआत का नहीं।

दिन का चौघड़िया

लाभ

मंगलवार –

व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है।

सावधानी रखें

रात का चौघड़िया

उद्वेग

सोमवार –

परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।

सावधानी की अवधि

वर्ज्य काल (दूसरा)

मंगलवार –

परंपरा में शुभ कामों की शुरुआत के लिए यह समय छोड़ दिया जाता है। यह उस दिन के नक्षत्र से निकलता है, इसलिए हर दिन खिसकता है।

दिन का चौघड़िया

रोग

मंगलवार –

परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।

दिन का चौघड़िया

उद्वेग

मंगलवार –

परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।

दिन के पाँच अंग

पंचांग, सरल भाषा में

देखें कि दिन का स्वभाव कैसा है, अभी क्या चल रहा है, और कौन-सी आम समय-अवधियाँ अनुकूल हैं या जिनसे बचना बेहतर है। नीचे का हर समय विजयवाड़ा के लिए निकाला गया है, किसी तय राष्ट्रीय तालिका से उठाया नहीं गया।

“पंचांग” का अर्थ है पाँच अंग। ये पाँचों मिलकर स्थानीय सूर्योदय के समय दिन का चंद्र और ग्रह-स्वभाव बताते हैं।

तिथि · चंद्र दिवस

पूर्णिमा — शुक्ल पक्ष

चंद्रमा शुक्ल पक्ष में है और पूर्णिमा की ओर बढ़ता जा रहा है।

वार · सप्ताह का दिन

सोमवार

इस वार को परंपरा में चंद्र से जोड़ा जाता है।

नक्षत्र · चंद्रमा का नक्षत्र

अश्विनी

स्थानीय सूर्योदय पर चंद्रमा जिस निरयन आकाश-खंड में होता है, वही नक्षत्र है। यह गंडमूल नक्षत्र है — बुध या केतु के स्वामित्व वाले उन छह में से एक जो राशि-संधि पर पड़ते हैं, और जिनमें जन्म होने पर परंपरा में शांति करवाई जाती है।

योग · सूर्य-चंद्र का योग

वज्र

सूर्य और चंद्रमा के देशांतरों को जोड़कर बनने वाला संबंध; यहाँ इसे प्रतिकूल माना गया है।

करण · तिथि का आधा भाग

बव

सूर्योदय पर चल रहा आधा तिथि-भाग; यहाँ इसे अनुकूल माना गया है।

हिंदू मास · पूर्णिमांत — पूर्णिमा पर ख़त्म

आश्विन

उत्तर भारत की गणना — दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और पंजाब में यही चलती है, और विक्रम संवत इसी के साथ चलता है।

हिंदू मास · अमांत — अमावस्या पर ख़त्म

आश्विन

दक्षिण और पश्चिम भारत की गणना — महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र और तमिलनाडु में यही चलती है।

विक्रम संवत · चंद्र वर्ष

2083 सिद्धार्थी

शुक्ल पक्ष है, इसलिए दोनों गणनाएँ मास का एक ही नाम रखती हैं। चंद्रमा के घटना शुरू होते ही ये अलग हो जाती हैं।

अयन · सूर्य का आधा वर्ष

दक्षिणायन

सूर्य का दक्षिण की ओर चलने वाला आधा वर्ष — मध्य जुलाई की कर्क संक्रांति से धनु के अंत तक। परंपरा में यह आत्मचिंतन, व्रत और पितरों से जुड़े कर्मों का समय माना जाता है।

ऋतु · वैदिक ऋतु, चंद्रमास से

शरद

शरद की ऋतु। यह वैदिक ऋतु है: दो चंद्रमास की, जो कैलेंडर की तारीख़ से नहीं, ऊपर वाले मास से पढ़ी जाती है। कुछ पंचांग सूर्य की स्थिति से चलने वाली सायन ऋतु भी छापते हैं, जो इससे एक महीने तक आगे हो सकती है।

शक संवत · राष्ट्रीय संवत

1948

भारत का सरकारी चंद्र-सौर संवत — विक्रम संवत से 135 वर्ष पीछे और अमांत गणना के साथ। हर वसंत में ये दोनों करीब पंद्रह दिन तक अलग रह सकते हैं, इसीलिए इसे घटाकर नहीं, गिनकर निकाला जाता है।

सूर्य और चंद्र राशि · दोनों प्रकाश-ग्रह किस राशि में हैं

तुला · मेष

स्थानीय सूर्योदय पर सूर्य की और चंद्रमा की निरयन राशि। वैदिक ज्योतिष में “आपकी राशि” से मतलब चंद्रमा वाली राशि से ही होता है।

दिनमान और रात्रिमान · नापा हुआ दिन और रात

11h 37m 26s · 12h 22m 53s

इस पेज की हर अनुपात वाली अवधि इन्हीं दो अवधियों का एक हिस्सा है, किसी बारह-घंटे की मान्यता का नहीं। इसीलिए आज दिन की होरा और रात की होरा की लंबाई अलग है।

आनंदादि योग · वार × नक्षत्र

राक्षस · अशुभ

  • राक्षस 6:03 AM - 5:41 PM · अश्विनी
  • चर 5:41 PM - 6:03 AM · भरणी

अट्ठाईस योगों में से एक, जो वार और चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है — इसलिए यह ठीक तभी बदलता है जब नक्षत्र बदलता है, सूर्योदय पर कभी नहीं।

तमिल योग · सिद्ध, अमृत या मरण

मरण · अशुभ

  • मरण 6:03 AM - 5:41 PM · अश्विनी
  • सिद्ध 5:41 PM - 6:03 AM · भरणी

वार और नक्षत्र की जोड़ी पर तमिल पंचांग का निर्णय। हर जोड़ी इन्हीं तीन में से एक पर बैठती है — न कोई तटस्थ स्थिति है, न कोई ख़ाली दिन।

आज
· Asia/Kolkata
सूर्योदय
सूर्यास्त
दिन के स्वामी
सोमवार
अगला सूर्योदय
चंद्रोदय
चंद्रास्त
अगले सूर्योदय तक चंद्रास्त नहीं
सूर्योदय पर चंद्र कला
पूर्णिमा
सूर्योदय पर चंद्रमा
100.0% प्रकाशित · 14.6 दिन पुराना
बदलाव की दिशा
शुक्ल पक्ष — चंद्रमा पूर्णिमा की ओर बढ़ रहा है

हर अंग का एक मान नहीं — एक क्रम

दिन भर नक्षत्र, योग और करण

ऊपर के कार्ड बताते हैं कि स्थानीय सूर्योदय पर क्या चल रहा था — दिन का नाम इसी परंपरा से पड़ता है। चारों अंगों में से कोई भी ठीक एक दिन नहीं चलता, इसलिए यहाँ इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक हर एक की सारी अवधियाँ दी हैं, और अभी जो चल रही है उस पर निशान है।

दिन भर की तिथि

  1. पूर्णिमा शुक्ल पक्ष 9:42 AM तक इस सूर्योदय से पहले शुरू हुई
  2. प्रतिपदा कृष्ण पक्ष 6:03 AM अगली सुबह तक अगले सूर्योदय पर भी चल रही होगी अभी चल रही

इस दिन को पूर्णिमा कहा जाता है क्योंकि सूर्योदय पर वही तिथि चल रही थी, और वैदिक दिन का नाम इसी से पड़ता है। अभी प्रतिपदा चल रही है। दोनों सही हैं — ये अलग-अलग सवालों के जवाब हैं।

दिन भर का नक्षत्र

  1. अश्विनी 5:41 PM तक इस सूर्योदय से पहले शुरू हुआ
  2. भरणी 6:03 AM अगली सुबह तक अगले सूर्योदय पर भी चल रहा होगा अभी चल रहा

दिन का नक्षत्र अश्विनी लिखा जाता है, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय पर वही चल रहा था। अभी भरणी चल रहा है। चंद्रमा एक नक्षत्र लगभग 19 से 27 घंटे में पार करता है, इसलिए यह खंड दिन के साथ कम ही मिलता है।

दिन भर का योग

  1. वज्र 2:17 PM तक इस सूर्योदय से पहले शुरू हुआ
  2. सिद्धि 6:03 AM अगली सुबह तक अगले सूर्योदय पर भी चल रहा होगा अभी चल रहा

दिन का योग वज्र लिखा जाता है, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय पर वही चल रहा था। अभी सिद्धि चल रहा है। एक नित्य योग दिन से थोड़ा कम चलता है, इसलिए यह हर दिन अलग घंटे पर बदलता है।

दिन भर का करण

  1. बव 9:42 AM तक इस सूर्योदय से पहले शुरू हुआ
  2. बालव 8:24 PM तक
  3. कौलव 6:03 AM अगली सुबह तक अगले सूर्योदय पर भी चल रहा होगा अभी चल रहा

दिन का करण बव लिखा जाता है, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय पर वही चल रहा था। अभी कौलव चल रहा है। एक करण आधी तिथि का होता है, इसलिए हर वैदिक दिन में कम से कम दो करण पड़ते हैं।

दिन कब बदलता है

पंचांग के बदलाव का सही समय

ऊपर के कार्ड बताते हैं कि स्थानीय सूर्योदय पर क्या चल रहा है। यह तालिका सूर्योदय के बाद का पहला बदलाव दिखाती है; वार तब बदलता है जब अगला वैदिक दिन सूर्योदय पर शुरू होता है।

अंगसूर्योदय पर चल रहापहला बदलाव
तिथि चंद्र दिवसपूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष) → प्रतिपदा (कृष्ण पक्ष)
वार सप्ताह का दिनसोमवारसोमवार → मंगलवार — अगले सूर्योदय पर
नक्षत्र चंद्रमा का नक्षत्रअश्विनीअश्विनी → भरणी
योग सूर्य-चंद्र का योगवज्रवज्र → सिद्धि
करण तिथि का आधा भागबवबव → बालव

बदलाव के समय विजयवाड़ा के लिए सूर्य और चंद्रमा की निरयन स्थिति से निकाले जाते हैं — सेकंड तक गिनकर, और नज़दीकी मिनट में दिखाकर।

दिन की मुख्य अवधियाँ

अभिजित, राहु काल, यमगण्ड और गुलिक

ये अवधियाँ स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ खिसकती हैं। ये सब शहरों के लिए तय घड़ी-समय नहीं हैं।

अनुकूल अवधि

अभिजित मुहूर्त

–

दोपहर की एक आम तौर पर अनुकूल खिड़की — जब विस्तार से मुहूर्त न निकाला जा सके तो ज़रूरी काम के लिए इसे लिया जाता है।

अनुकूल अवधि

अमृत काल

–

परंपरा में इसे दिन की सबसे अनुकूल अवधि माना जाता है। यह केवल सूर्योदय से नहीं, चंद्रमा के नक्षत्र से निकलती है।

अनुकूल अवधि

ब्रह्म मुहूर्त

–

रात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, जो सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले पूरा होता है। परंपरा में यह पढ़ाई, ध्यान और जप का सबसे अच्छा समय माना जाता है, सांसारिक कामों की शुरुआत का नहीं।

सावधानी की अवधि

राहु काल

–

इस समय कोई ज़रूरी काम शुरू करने से बचा जाता है। जो काम पहले से चल रहा है, वह चलता रह सकता है।

सावधानी की अवधि

यमगण्ड काल

–

यात्रा, शुभ कार्यों और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए आमतौर पर इससे बचा जाता है।

सावधानी की अवधि

गुलिक काल

–

नए वादों और सौदों में थोड़ी और सावधानी रखें; परंपरा इसे सतर्कता की अवधि मानती है।

सावधानी की अवधि

वर्ज्य काल

–

परंपरा में शुभ कामों की शुरुआत के लिए यह समय छोड़ दिया जाता है। यह उस दिन के नक्षत्र से निकलता है, इसलिए हर दिन खिसकता है।

सावधानी की अवधि

वर्ज्य काल (दूसरा)

–

परंपरा में शुभ कामों की शुरुआत के लिए यह समय छोड़ दिया जाता है। यह उस दिन के नक्षत्र से निकलता है, इसलिए हर दिन खिसकता है।

सावधानी की अवधि

दुर्मुहूर्त (पहला)

–

वार के हिसाब से तय एक छोटी अशुभ अवधि। नई शुरुआत के लिए आम तौर पर इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रहता है।

सावधानी की अवधि

दुर्मुहूर्त (दूसरा)

–

वार के हिसाब से तय एक छोटी अशुभ अवधि। नई शुरुआत के लिए आम तौर पर इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रहता है।

सावधानी की अवधि

निशीथ काल

–

आधी रात का समय, जो महाशिवरात्रि जैसी रात की पूजा के लिए लिया जाता है, रोज़ की योजना के लिए नहीं।

नौ ग्रह कहाँ हैं

सूर्योदय पर ग्रह स्थिति

लाहिड़ी अयनांश से निरयन स्थिति — ऊपर की तिथि, नक्षत्र, योग और करण इन्हीं देशांतरों से निकाले जाते हैं, और उसी क्षण पर पढ़े जाते हैं।

ग्रहराशिअंशनक्षत्रपादगति
सूर्यतुला स्वामी शुक्र8° 22' 35"स्वाति1मार्गी
चंद्रमेष स्वामी मंगल6° 20' 32"अश्विनी2मार्गी
मंगलकर्क स्वामी चंद्र21° 19' 18"आश्लेषा2मार्गी
बुधतुला स्वामी शुक्र26° 32' 30"विशाखा2वक्री
गुरुकर्क स्वामी चंद्र29° 19' 21"आश्लेषा4मार्गी
शुक्रतुला स्वामी शुक्र5° 22' 33"चित्रा4वक्री
शनिमीन स्वामी गुरु15° 26' 49"उत्तर भाद्रपदा4वक्री
राहुकुंभ स्वामी शनि2° 09' 22"धनिष्ठा3वक्री
केतुसिंह स्वामी सूर्य2° 09' 22"मघा1वक्री

राहु और केतु चंद्र-पात हैं, कोई पिंड नहीं, और परिभाषा से ही उल्टे चलते हैं — उनका वक्री होना उनका स्वभाव है, कोई गुज़रती हुई दशा नहीं।

दिन की आठ अवधियाँ, रात की आठ

चौघड़िया सारणी

जब विस्तार से निजी मुहूर्त न निकाला जा सके, तब चौघड़िया को समय का मोटा मार्गदर्शक मान लिया जाता है।

दिन · 6:03 AM से 5:40 PM तक
अवधिसमयइसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं
अमृत – ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि।
काल – परंपरा में शुभ या बड़े दाँव वाले कामों की शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
शुभ – सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि।
रोग – परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
उद्वेग – परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।
चर – यात्रा, आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों के लिए चलने वाली लचीली अवधि।
लाभ – व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है।
अमृत – ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि।
रात · सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक
अवधिसमयइसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं
चर – यात्रा, आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों के लिए चलने वाली लचीली अवधि।
रोग – परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
काल – परंपरा में शुभ या बड़े दाँव वाले कामों की शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
लाभ – व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है।
उद्वेग – परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।
शुभ – सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि।
अमृत – ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि।
चर – यात्रा, आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों के लिए चलने वाली लचीली अवधि।

नल्ल नेरम · तमिल शुभ-समय सारणी

गौरी पंचांगम्

दक्षिण भारत की पद्धति, ऊपर वाले चौघड़िया की तरह दिन के आठ और रात के आठ हिस्सों पर पढ़ी जाती है। इसकी आठ में से पाँच अवधियाँ नल्ल नेरम हैं — वही “शुभ समय” जो तमिल पंचांग छापता है — और तीन से बचा जाता है।

दिन · 6:03 AM से 5:40 PM तक
अवधिसमयइसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं
अमिर्ध – तमिल पद्धति का सबसे प्रबल भाग — जो काम टिकाऊ हो, उसके लिए लिया जाता है।
विषम् – विष — राहु का भाग। किसी भी ज़रूरी काम के लिए इससे बचा जाता है।
रोगम् – रोग। परंपरा में सेहत से जुड़े काम और नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
लाभम् – लाभ। व्यापार, वसूली और व्यावहारिक लेन-देन के लिए आमतौर पर लिया जाता है।
धनम् – धन। पैसे के काम, ख़रीदारी और जो चीज़ अपने पास रखनी हो, उसके लिए।
सुगम् – सुगमता। यात्रा, आराम, मिलने-जुलने और जो काम बिना अड़चन निपटाने हों, उनके लिए।
सोरम् – शोक। परंपरा में शुरुआत, संस्कार और उत्सव के लिए इससे बचा जाता है।
उथि – मेहनत और उद्यम। जिस काम को आगे बढ़ाना हो, उसके लिए ठीक — कोमल शुरुआत के लिए नहीं।
रात · सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक
अवधिसमयइसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं
सुगम् – सुगमता। यात्रा, आराम, मिलने-जुलने और जो काम बिना अड़चन निपटाने हों, उनके लिए।
सोरम् – शोक। परंपरा में शुरुआत, संस्कार और उत्सव के लिए इससे बचा जाता है।
उथि – मेहनत और उद्यम। जिस काम को आगे बढ़ाना हो, उसके लिए ठीक — कोमल शुरुआत के लिए नहीं।
अमिर्ध – तमिल पद्धति का सबसे प्रबल भाग — जो काम टिकाऊ हो, उसके लिए लिया जाता है।
विषम् – विष — राहु का भाग। किसी भी ज़रूरी काम के लिए इससे बचा जाता है।
रोगम् – रोग। परंपरा में सेहत से जुड़े काम और नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
लाभम् – लाभ। व्यापार, वसूली और व्यावहारिक लेन-देन के लिए आमतौर पर लिया जाता है।
धनम् – धन। पैसे के काम, ख़रीदारी और जो चीज़ अपने पास रखनी हो, उसके लिए।

गौरी पंचांगम् और चौघड़िया दिन को बिलकुल एक जैसा बाँटते हैं और हिस्सों के नाम अलग रखते हैं — इसलिए एक ही अवधि एक पद्धति में शुभ और दूसरी में नहीं हो सकती। यह दो परंपराओं का सच्चा मतभेद है, गणना की भूल नहीं — इसीलिए दोनों को मिलाया नहीं, अलग-अलग दिखाया गया है।

चौबीसों ग्रह-घंटे

होरा सारणी

दिन और रात, दोनों को बारह-बारह बराबर ग्रह-घंटों में बाँटा जाता है, इसलिए होरा हमेशा साठ मिनट की नहीं होती।

होरा#दिन / रातसमयअक्सर किस काम के लिए
चंद्र होरा1दिन – घर, परिवार, मन को शांत करना
शनि होरा2दिन – अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ
गुरु होरा3दिन – शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य
मंगल होरा4दिन – व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम
सूर्य होरा5दिन – अधिकार, पहचान, सरकारी काम
शुक्र होरा6दिन – रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला
बुध होरा7दिन – पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार
चंद्र होरा8दिन – घर, परिवार, मन को शांत करना
शनि होरा9दिन – अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ
गुरु होरा10दिन – शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य
मंगल होरा11दिन – व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम
सूर्य होरा12दिन – अधिकार, पहचान, सरकारी काम
शुक्र होरा13रात – रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला
बुध होरा14रात – पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार
चंद्र होरा15रात – घर, परिवार, मन को शांत करना
शनि होरा16रात – अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ
गुरु होरा17रात – शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य
मंगल होरा18रात – व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम
सूर्य होरा19रात – अधिकार, पहचान, सरकारी काम
शुक्र होरा20रात – रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला
बुध होरा21रात – पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार
चंद्र होरा22रात – घर, परिवार, मन को शांत करना
शनि होरा23रात – अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ
गुरु होरा24रात – शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य

विजयवाड़ा में सूर्योदय, मध्याह्न और दिनमान

  • नई दिल्ली से तुलना। आज विजयवाड़ा में सूर्योदय 6:03 AM पर, नई दिल्ली (6:29 AM) से 26 मिनट पहले है, और सूर्यास्त 5:40 PM पर, नई दिल्ली (5:41 PM) से 1 मिनट पहले। देशांतर: विजयवाड़ा दिल्ली से 3.4° पूर्व में है, इसलिए यहाँ मध्याह्न 14 मिनट पहले आता है (11:51 AM, दिल्ली में 12:05 PM)। अक्षांश: विजयवाड़ा दिल्ली से 12.1° दक्षिण में है, और सितंबर से मार्च के विषुव तक दक्षिण की ओर दिन लंबे होते हैं; आज यहाँ का दिन 25 मिनट लंबा है (11 घंटे 37 मिनट बनाम 11 घंटे 13 मिनट), जो सूर्योदय को पहले और सूर्यास्त को बाद में खिसकाता है — दोनों तरफ़ लगभग 12 मिनट। दिल्ली की तालिका यहाँ आज अभिजित और दिन के बाक़ी मुहूर्त को 1–26 मिनट देर से बताती — इस पेज के अपने समय देखें।
  • अभिजित की लंबाई। अभिजित मुहूर्त दिनमान का पंद्रहवाँ भाग है: आज 46 मिनट, और 2026 में 45 मिनट से 52 मिनट तक।
  • स्थानीय मध्याह्न। विजयवाड़ा में आज सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक बीच का क्षण 11:51 AM है — घड़ी के 12:00 से 9 मिनट पहले। विजयवाड़ा उस 82.5° पूर्व देशांतर से 1.9° पश्चिम में है जिस पर यहाँ की घड़ी चलती है, जिससे मध्याह्न 7 मिनट देर से आता है; साल का यह समय (समय-समीकरण) आज 16 मिनट घटाता है। अभिजित मुहूर्त का मध्य यही क्षण होता है, घड़ी के बारह बजे नहीं।
  • दिनमान। आज विजयवाड़ा में दिन 11 घंटे 37 मिनट का है; एक हफ़्ते पहले 11 घंटे 43 मिनट का था और एक हफ़्ते बाद 11 घंटे 32 मिनट का होगा: यहाँ दिन हर हफ़्ते लगभग 6 मिनट छोटे हो रहे हैं, और 21 दिसंबर के आसपास सबसे छोटे दिन तक यही चलेगा। 2026 में सबसे लंबा दिन 13 घंटे 7 मिनट (21 जून के आसपास) और सबसे छोटा 11 घंटे 9 मिनट (21 दिसंबर के आसपास) — 1 घंटे 58 मिनट का अंतर, जो नई दिल्ली के 3 घंटे 39 मिनट से कम है।
  • 2026 के छोर। सबसे जल्दी सूर्योदय 5:34 AM (4 जून के आसपास) और सबसे देर का 6:39 AM (20 जनवरी के आसपास); सबसे जल्दी सूर्यास्त 5:32 PM (22 नवंबर के आसपास) और सबसे देर का 6:45 PM (6 जुलाई के आसपास)। इनमें से कोई भी संक्रांति के दिन नहीं पड़ता: सूर्य का घड़ी-समय साल भर खिसकता है, इसलिए सबसे देर की सुबहें सबसे छोटे दिन के कई हफ़्ते बाद आती हैं।
  • सिर के ऊपर सूर्य। विजयवाड़ा भूमध्य रेखा से 16.5° उत्तर में, कर्क रेखा से दक्षिण है, इसलिए दोपहर का सूर्य साल में दो बार ठीक सिर के ऊपर आता है — 2026 में 6 मई और 7 अगस्त के आसपास। उन दिनों स्थानीय मध्याह्न पर सीधे खड़े खंभे की परछाईं लगभग नहीं बनती।
  • यहाँ का कैलेंडर। आंध्र प्रदेश में चांद्र मास अमावस्या से अमावस्या (अमांत) गिना जाता है, इसलिए आज आश्विन पूर्णिमा है।
  • सबसे पास के शहर। गुंटूर (32 किमी दक्षिण-पश्चिम) — सूर्योदय एक ही मिनट में; वारंगल (197 किमी उत्तर-पश्चिम) — सूर्योदय 5 मिनट बाद।

आज के पंचांग के बारे में

विजयवाड़ा में आज कौन-सी तिथि है?

सूर्योदय पर पूर्णिमा चल रही थी, और वैदिक दिन का नाम इसी से पड़ता है। अभी प्रतिपदा चल रही है।

विजयवाड़ा में आज सूर्योदय किस समय है?

विजयवाड़ा में आज सूर्योदय 6:03 AM और सूर्यास्त 5:40 PM पर है। इस पेज की हर अवधि उसी सूर्योदय से नापी जाती है, आधी रात से नहीं।

आज चंद्रमा किस नक्षत्र में है?

विजयवाड़ा में सूर्योदय पर चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में है, वज्र योग और बव करण के साथ।

यह पंचांग कहीं और छपे पंचांग से अलग क्यों है?

पंचांग के समय स्थानीय सूर्योदय से निकाले जाते हैं, इसलिए हर शहर में अलग होते हैं — और छपा हुआ पंचांग चंद्रमास के लिए दूसरी गणना ले सकता है। यह पेज बताता है कि वह कौन-सी गणना ले रहा है, और दोनों दिखाता है।

ये समय कैसे निकाले जाते हैं

यह पंचांग कैसे बनता है, और इसकी सीमाएँ

पहले जगह

सूर्योदय और सूर्यास्त विजयवाड़ा के लिए स्विस एफ़िमेरिस से निकाले जाते हैं — अक्षांश 16.5062, देशांतर 80.648, समय-क्षेत्र Asia/Kolkata।

सूर्योदय की स्थिति

पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर चल रहे मानों से शुरू होते हैं। तिथि, नक्षत्र, योग और करण का पहला बदलाव ऊपर निकाला गया है; वार अगले सूर्योदय पर बदलता है।

दिन के अनुपात वाले भाग

राहु काल, यमगण्ड और गुलिक दिन के उजाले को आठ बराबर हिस्सों में बाँटकर, वार के अनुसार तय होते हैं। अभिजित नापे हुए दिन का बीच वाला पंद्रहवाँ हिस्सा है। चौघड़िया आठ भाग लेता है और होरा बारह।

कैलेंडर की गणना मायने रखती है

हिंदू मास एक चंद्रमास है, सूर्य की राशि का नया नाम नहीं। ऊपर दोनों गणनाएँ दी गई हैं क्योंकि कृष्ण पक्ष में ये एक ही दिन को अलग नाम देती हैं: पूर्णिमांत मास पूर्णिमा पर ख़त्म होता है, अमांत मास अमावस्या पर। जिस चंद्रमास में कोई संक्रांति न पड़े, वह अधिक मास होता है और उसे वैसा ही लिखा जाता है। त्योहार और व्रत की तारीख़ें यहाँ अभी नहीं दी जातीं।

पंचांग योजना बनाने का एक पारंपरिक ढाँचा है, किसी नतीजे की गारंटी नहीं। शादी, ऑपरेशन, क़ानूनी काग़ज़ात या बड़े पैसों के फ़ैसलों के लिए काम के हिसाब से निजी मुहूर्त निकलवाएँ और योग्य पेशेवर की सलाह लें।

पाँचों अंग कैसे काम करते हैं, जानें

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