गणेश मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
Om Gam Ganapataye Namah
अर्थ: ॐ, गं: गणों के स्वामी गणपति को नमस्कार।
कब और कैसे: दीपक जलाते समय, तिलक से पहले एक या 11 बार।
शुक्ल पक्ष · द्वितीया तिथि · कार्तिक
बुध, 11 नवंबर
2026 में भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर को है। नई दिल्ली में भाई दूज पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:09 से दोपहर 3:19 तक है।
2027: रविवार, 31 अक्टूबर 2027
भाई दूज पूजा मुहूर्त
दोपहर 1:09 – दोपहर 3:19
भाई दूज कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।
धनतेरस से भाई दूज तक · नई दिल्ली

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बुधवार, 11 नवंबर 2026
ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: भाई दूज का निर्णय दोपहर बाद के भाग में चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके अपराह्न पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।
भाई दूज, जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं, दिवाली के पाँच दिनों का समापन है: बहनें भाइयों को तिलक करती हैं, उनकी लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं और उन्हें भोजन कराती हैं, जैसे यमुना जी ने अपने भाई यमराज को कराया था। नई दिल्ली में यह बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है, और तिलक का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:09 से दोपहर 3:19 तक है, यानी द्वितीया रहते दोपहर बाद का समय। महाराष्ट्र में इसे भाऊबीज, बंगाल में भाई फोंटा और नेपाल में भाई टीका कहते हैं।
| मुहूर्त | नई दिल्ली में समय | किसके लिए |
|---|---|---|
| भाई दूज तिलक मुहूर्त | दोपहर 1:09 से दोपहर 3:19 तकअपराह्न, दिन का चौथा पाँचवाँ भाग, जब तक द्वितीया रहे। | द्वितीया रहते दिन का अपराह्न, यानी दोपहर बाद का पाँचवाँ भाग। यम द्वितीया का धर्मशास्त्रीय नियम तिलक और बहन के घर भाई के भोजन को इसी समय रखता है, क्योंकि यमराज इसी समय यमुना जी के घर आए थे। |
| शुभ चौघड़िया (दिन) |
| दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया। जो परिवार दोपहर बाद नहीं मिल पाते, वे द्वितीया रहते इनमें से कोई समय चुनते हैं। |
| मुहूर्त | नई दिल्ली में समय | प्रकृति |
|---|---|---|
| अमृत काल | सुबह 4:32 से सुबह 6:19 | सर्वाधिक शुभ |
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 4:54 से सुबह 5:47 | शुभ |
मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।
| अवधि | नई दिल्ली में समय |
|---|---|
| राहु काल | दोपहर 12:05 से दोपहर 1:26 |
| यमगण्ड काल | सुबह 8:01 से सुबह 9:22 |
| दुर्मुहूर्त (पहला) | सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 |
| वर्ज्यम् | शाम 5:51 से शाम 7:38 |
ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए बुधवार, 11 नवंबर 2026 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।
बहन सुबह जल्दी स्नान करती है और, जैसा बहुत सी बहनें करती हैं, तिलक तक व्रत रखती है। भाई उस दिन बहन के घर आता है, जैसे यमराज यमुना जी के घर गए थे।
ज़मीन पर चावल के आटे से छोटा चौक बनाएँ और उस पर पटरा या छोटी चौकी रखें, जहाँ भाई पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठेगा।
थाली में रोली, अक्षत, घी का दीपक, मिठाई, सूखा नारियल (गोला), सुपारी के साथ पान, फूल, मौली और थोड़ा जल रखें।
दीपक जलाकर गणेश जी का पूजन करें, फिर यमराज और यमुना जी के नाम से फूल और अक्षत अर्पित करें और भाई की लंबी, स्वस्थ आयु की प्रार्थना करें। बहुत सी बहनें गंगा-यमुना, यमी-यमराज और सुभद्रा-कृष्ण का नाम लेने वाली लोक-पंक्तियाँ बोलती हैं।
तिलक मुहूर्त में, भाई के सिर पर रूमाल रखकर, जैसा बहुत से परिवार करते हैं, उसके माथे पर रोली का तिलक लगाएँ और उस पर अक्षत के कुछ दाने लगाएँ।
जहाँ परंपरा हो, भाई की दाहिनी कलाई पर मौली बाँधें, दीपक से उसकी आरती उतारें और उसे मिठाई व गोला दें।
भाई बड़ी बहन के पैर छूता है या छोटी बहन को आशीर्वाद देता है, और उसे उपहार व साथ निभाने का वचन देता है।
बहन अपने हाथ का बना भोजन यम द्वितीया का श्लोक बोलते हुए परोसती है, और भाई उसके घर भोजन करता है। भाई के खा लेने के बाद बहन अपना व्रत खोलती है।
इसी भोजन के साथ दिवाली के पाँच दिन पूरे होते हैं। मथुरा में भाई-बहन साथ यमुना स्नान करते हैं, और कायस्थ परिवार इसी दिन कलम-दवात से चित्रगुप्त पूजा करते हैं।
ॐ गं गणपतये नमः
Om Gam Ganapataye Namah
अर्थ: ॐ, गं: गणों के स्वामी गणपति को नमस्कार।
कब और कैसे: दीपक जलाते समय, तिलक से पहले एक या 11 बार।
भ्रातस्तवानुजाताहं भुङ्क्ष्व भक्तमिदं शुभम् ।
प्रीतये यमराजस्य यमुनाया विशेषतः ॥
Bhratas tavanujataham bhunkshva bhaktam idam shubham
Pritaye Yamarajasya Yamunaya visheshatah
अर्थ: भैया, मैं तुम्हारी छोटी बहन हूँ: यमराज और विशेष रूप से यमुना जी की प्रसन्नता के लिए यह शुभ भोजन ग्रहण करो।
कब और कैसे: तिलक के बाद भोजन परोसते समय बहन बोलती है। बड़ी बहन 'तवानुजाताहं' की जगह 'तवाग्रजाताहं', यानी मैं तुम्हारी बड़ी बहन हूँ, कहती है। यह श्लोक धर्मशास्त्र के निबंध-ग्रंथों में यम द्वितीया के लिए उद्धृत है।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥
Om tryambakam yajamahe sugandhim pushtivardhanam
Urvarukam iva bandhanan mrityor mukshiya ma'mritat
अर्थ: हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधित, पुष्टि बढ़ाने वाले शिव की पूजा करते हैं। जैसे पका ककड़ी डंठल से छूट जाता है, वैसे वे हमें मृत्यु से छुड़ाएँ, अमरता से नहीं।
कब और कैसे: ऋग्वेद का मंत्र; बहुत सी बहनें भाई की लंबी और स्वस्थ आयु की प्रार्थना में इसे 11 या 108 बार जपती हैं।
मृत्यु के देवता यमराज और उनकी जुड़वाँ बहन यमी, यानी यमुना नदी, सूर्यदेव और उनकी पत्नी संज्ञा की संतान थे। यमुना जी अपने भाई से बहुत प्रेम करती थीं और बार-बार उन्हें अपने घर बुलाती थीं, पर अपने कर्तव्यों में व्यस्त यमराज हर साल बात टाल देते थे।
आखिर कार्तिक शुक्ल द्वितीया को वे आए। खुशी से भरी यमुना जी ने उनका स्वागत किया, माथे पर तिलक लगाया, पूजा की और अपने हाथ से बना भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वर माँगने को कहा, और यमुना जी ने माँगा कि जो भी भाई इस दिन बहन के घर जाकर उसका तिलक स्वीकार करे और उसके घर भोजन करे, उसे लंबी आयु का आशीर्वाद मिले। यमराज ने यह वर दिया, और यह दिन यम द्वितीया बन गया।
लोक-परंपरा एक दूसरी कथा भी सुनाती है: नरकासुर का वध करने के बाद श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के पास गए, जिन्होंने दीयों, फूलों और मिठाइयों से उनका स्वागत किया और उनके माथे पर तिलक लगाया। दोनों कथाओं का अंत एक ही है: बहन का स्वागत और भाई का आशीर्वाद।
भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते का पर्व है: बहन भाई की लंबी आयु और कुशलता की प्रार्थना करती है, और भाई उसके साथ खड़े रहने का वचन देता है। स्वयं यमराज ने इस परंपरा को आशीर्वाद दिया, इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं, और यह धनतेरस से शुरू हुए दिवाली के पाँच दिनों का समापन है।
भाई बहन के घर जाता है, अक्सर विवाहित बहन के, इसलिए यह दिन शादी के बाद भी परिवारों को जोड़े रखता है। कायस्थ परिवारों में यह चित्रगुप्त पूजा का दिन है, जब यमराज के लेखाकार चित्रगुप्त की कलम-दवात से पूजा होती है।
द्वितीया रहते अपराह्न के समय में तिलक करें, जैसा यम द्वितीया का धर्मशास्त्रीय नियम कहता है; परंपरा यही समय यमराज के आगमन से जोड़ती है।
भाई बहन के हाथ का बना भोजन करे। यमराज का वरदान इसी भोजन से जुड़ा है, इसलिए यह किसी भी उपहार से अधिक महत्वपूर्ण है।
तिलक के साथ बहन भाई के स्वास्थ्य के लिए महामृत्युंजय मंत्र 11 या 108 बार जपे।
जो भाई-बहन जा सकें, वे मथुरा के विश्राम घाट पर साथ यमुना स्नान करते हैं और वहाँ यम-यमुना मंदिर के दर्शन करते हैं; किसी भी नदी में डुबकी या गंगाजल की एक बूँद वाले स्नान से भी वही भाव निभता है।
भाई अपनी सामर्थ्य से बहन को उपहार और साथ का वचन दे। परंपरा कीमत से अधिक आने और कहे गए शब्दों को महत्व देती है।
जिसका भाई नहीं आ सकता, वह तिलक की थाली सजाकर उसके लिए प्रार्थना करे और मिठाई या रोली भेजे; आज बहुत से परिवार वीडियो कॉल पर तिलक करते हैं।
इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।
| वर्ष | तारीख | स्थिति |
|---|---|---|
| 2026इस वर्ष | बुधवार, 11 नवंबर 2026 | आने वाली |
| 2027 | रविवार, 31 अक्टूबर 2027 | आने वाली |
| 2028 | गुरुवार, 19 अक्टूबर 2028 | आने वाली |
दो पंचांग भाई दूज की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।
इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।
2026 में भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर को है। नई दिल्ली में भाई दूज पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:09 से दोपहर 3:19 तक है।
तीन दिन बाद — बुधवार, 11 नवंबर को; दिवाली की लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर को है और गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर को है। यह दिवाली के पाँच दिनों में अंतिम है।
नई दिल्ली में बुधवार, 11 नवंबर 2026 को तिलक का मुहूर्त दोपहर 1:09 से दोपहर 3:19 तक है: द्वितीया रहते अपराह्न, यानी दिन का दोपहर बाद वाला पाँचवाँ भाग। यम द्वितीया का यही शास्त्रीय समय है। परिवार इससे पहले या बाद ही मिल पाए, तो द्वितीया रहते दिन का कोई शुभ चौघड़िया (लाभ: सुबह 6:40 से सुबह 8:01 तक; अमृत: सुबह 8:01 से सुबह 9:22 तक; शुभ: सुबह 10:43 से दोपहर 12:05 तक; चर: दोपहर 2:47 से शाम 4:08 तक; लाभ: शाम 4:08 से शाम 5:29 तक) चुनें।
मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।
2027 में रविवार, 31 अक्टूबर; 2028 में गुरुवार, 19 अक्टूबर।
भाई को चावल के आटे के चौक पर रखे पटरे पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके, सिर ढककर बिठाएँ। घी का दीपक जलाकर गणेश जी, यमराज और यमुना जी को याद करें, रोली का तिलक लगाकर अक्षत लगाएँ, परंपरा हो तो मौली बाँधें, आरती उतारें और मिठाई व गोला दें। भाई उपहार देता है और बहन के हाथ का बना भोजन करता है।
रोली या कुमकुम, अक्षत, घी का दीपक, मिठाई, सूखा नारियल (गोला), सुपारी के साथ पान, फूल, मौली और थोड़ा जल। बंगाल में भाई फोंटा की थाली में चंदन, काजल, दही, धान और दूर्वा भी होते हैं।
यमुना जी अपने भाई, मृत्यु के देवता यमराज को बार-बार अपने घर बुलाती थीं। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को वे आखिर आए; यमुना जी ने तिलक लगाया, पूजा की और भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने उनका यह वर स्वीकार किया कि इस दिन बहन के घर जाकर भोजन करने वाले हर भाई को लंबी आयु का आशीर्वाद मिले। लोक-परंपरा नरकासुर वध के बाद श्रीकृष्ण के सुभद्रा के घर जाने की कथा भी सुनाती है।
यह भाई-बहन के प्रेम का पर्व है: बहनें भाइयों की लंबी आयु और कुशलता की प्रार्थना करती हैं और भाई साथ निभाने का वचन देते हैं। यह परंपरा यमराज के अपनी बहन यमुना जी के घर जाने से आई है, इसीलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इसी से दिवाली के पाँच दिन पूरे होते हैं।
भाई बहन के घर जाता है, जैसे यमराज यमुना जी के घर गए थे, और बहन के हाथ का बना भोजन करता है। बहन तिलक, मिठाई और उत्तर भारत में गोला देती है; भाई उसे उपहार और आशीर्वाद देता है। बहन भाई के परिवार के साथ ही रहती हो, तो अनुष्ठान घर पर ही होता है।
पश्चिम बंगाल में इसे भाई फोंटा और भ्रातृ द्वितीया, महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में भाऊबीज, गुजरात में भाई बीज, और नेपाल में तिहार के अंतिम दिन भाई टीका कहते हैं। उत्तर भारत में यह भाई दूज या भैया दूज है, और शास्त्रों में यम द्वितीया।
शुरुआत 'ॐ गं गणपतये नमः' से करें। भोजन परोसते समय बहन यम द्वितीया का श्लोक 'भ्रातस्तवानुजाताहं' बोलती है, जिसमें वह भाई से यमराज और यमुना जी की प्रसन्नता के लिए भोजन करने को कहती है। बहुत सी बहनें भाई की लंबी आयु के लिए महामृत्युंजय मंत्र भी जपती हैं। सभी मंत्र अर्थ सहित मंत्र वाले भाग में हैं।
यह परंपरा है, नियम नहीं। बहुत सी बहनें सुबह से तब तक कुछ नहीं खातीं जब तक भाई को तिलक करके भोजन न करा दें, फिर उसी भोजन से व्रत खोलती हैं। बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग बहनें बिना व्रत के भी यह दिन पूरे भाव से मना सकती हैं।
उत्तर भारत के बहुत से घरों में तिलक के बाद मिठाई के साथ पूरा सूखा नारियल, यानी गोला, दिया जाता है। नारियल हर पूजा में शुभ भेंट है, समृद्धि और भरी-पूरी लंबी आयु का प्रतीक, इसलिए बहन इसे भाई के लिए आशीर्वाद के रूप में देती है।
हाँ। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में होली की पूर्णिमा के बाद चैत्र कृष्ण द्वितीया को दूसरी भाई दूज मनाई जाती है, वही तिलक और भोजन के साथ। मुख्य भाई दूज दिवाली वाली, कार्तिक शुक्ल द्वितीया की है।
महाराष्ट्र में जिन लड़कियों के भाई नहीं होते, वे चंद्रमा की आरती करती हैं, और बहुत सी बहनें चचेरे भाई या भाई जैसे मित्र को तिलक करती हैं। भाई दूर हो, तो बहन थाली सजाकर उसके लिए प्रार्थना करे और मिठाई भेजे; आज बहुत से परिवार वीडियो कॉल पर तिलक करते हैं।
इस दिन की कोई अलग शास्त्रीय आरती नहीं है। बहन जलता दीपक भाई के सामने गोल घुमाकर उसकी आरती उतारती है, और कुछ परिवार साथ में श्रीकृष्ण या यमुना जी की आरती या भाई दूज का कोई गीत गाते हैं।