ग्रह-घंटा
सूर्य होरा
–
इसे आमतौर पर अधिकार, पहचान, सरकारी काम से जोड़ा जाता है।
शुक्ल पूर्णिमा
अभी कृष्ण प्रतिपदा, मंगल, 27 अक्टूबर 7:02 AM तक
अगले सूर्योदय (मंगल, 27 अक्टूबर, 6:03 AM) पर तिथि: कृष्ण प्रतिपदा
वाराणसी में आज तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र अश्विनी, योग वज्र, करण बव और वार सोमवार है।
अभिजित मुहूर्त
11:19 AM – 12:05 PM
बीत चुका
होरा बताती है कि इस घंटे में किस तरह का काम बैठता है। चौघड़िया पूरे दिन की योजना के लिए मोटा संकेत देता है।
अभी
वाराणसी में

अगला शुभ समय
शुभ
ग्रह-घंटा
–
इसे आमतौर पर अधिकार, पहचान, सरकारी काम से जोड़ा जाता है।
चौघड़िया
–
परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।
ज़रूरी समय-जाँच
इस समय राहु काल, यमगण्ड और गुलिक नहीं चल रहे। कोई ज़रूरी काम शुरू करने से पहले आगे की अवधियाँ देख लें।
अभी चल रही होरा और चौघड़िया सूर्योदय-से-सूर्योदय वाले वैदिक दिन के हिसाब से हैं।
वाराणसी के लिए आगे
हर पंक्ति एक ही सूर्योदय-से-सूर्योदय पैमाने पर है। जो अवधियाँ एक सीध में हैं, वे उसी समय साथ चल रही हैं।
अभी चल रहाअनुकूलसावधानी रखें
कुछ होरा खंड चौड़े क्यों हैं: दिन और रात अलग-अलग बाँटे जाते हैं, इसलिए उनकी होरा की अवधि बराबर नहीं होती।
मुहूर्त का अंक कोई राय नहीं, नाम से गिने हुए नियमों का जोड़ है। जो भी नियम लगा, वह अपने भार के साथ नीचे दिया है — ताकि कम अंक को सिर्फ़ मान न लेना पड़े, पढ़ा जा सके।
दिन की कुल शक्ति
7/10
शुभ
विशेष पंचांग योग
आज के वार, तिथि और नक्षत्र के मेल से सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, रवि, द्विपुष्कर, त्रिपुष्कर, विष, यमघंट या मृत्यु — इनमें से कोई योग नहीं बन रहा।
दिशा शूल
सोमवार को पूर्व दिशा की ओर निकलने से परंपरा में बचा जाता है। यह सिर्फ़ वार से तय होता है, ग्रहों की स्थिति से नहीं निकाला जाता — इसलिए हर शहर में एक ही रहता है।
परिहार निकलने से पहले आईना देख लें, या दूध ले लें।
| नियम | इस दिन का मान | भार | यह क्यों गिना जाता है |
|---|---|---|---|
| वार | सोमवार | +1 | दिन के स्वामी चंद्र हैं — नई शुरुआत के लिए अनुकूल |
| तिथि | पूर्णिमा · शुक्ल | +2 | पूर्णा तिथि — काम पूरा करने और उत्सव के लिए अनुकूल |
| नक्षत्र | अश्विनी | +2 | क्षिप्र नक्षत्र — फुर्तीले, हल्के और व्यापारिक कामों के लिए अनुकूल |
| नित्य योग | वज्र | -2 | नौ त्याज्य योगों में से एक |
| करण | बव | +1 | काम लायक करण |
सभी भारों को जोड़कर आधा किया जाता है और 0-10 के पैमाने पर रखा जाता है, ताकि कोई एक नियम अकेले पूरा पैमाना न भर दे। यही निर्णय ऐप के महीने वाले कैलेंडर में भी इसी तारीख़ के लिए दिखता है।
ये पंचांग के आम संकेत हैं। निजी मुहूर्त में यह भी देखा जाता है कि काम कौन-सा है और व्यक्ति की जन्म कुंडली क्या कहती है।
रात का चौघड़िया
मंगलवार –
सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि।
रात का चौघड़िया
मंगलवार –
ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि।
अनुकूल अवधि
मंगलवार –
रात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, जो सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले पूरा होता है। परंपरा में यह पढ़ाई, ध्यान और जप का सबसे अच्छा समय माना जाता है, सांसारिक कामों की शुरुआत का नहीं।
दिन का चौघड़िया
मंगलवार –
व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है।
रात का चौघड़िया
सोमवार –
परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।
सावधानी की अवधि
मंगलवार –
परंपरा में शुभ कामों की शुरुआत के लिए यह समय छोड़ दिया जाता है। यह उस दिन के नक्षत्र से निकलता है, इसलिए हर दिन खिसकता है।
दिन का चौघड़िया
मंगलवार –
परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है।
दिन का चौघड़िया
मंगलवार –
परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है।
देखें कि दिन का स्वभाव कैसा है, अभी क्या चल रहा है, और कौन-सी आम समय-अवधियाँ अनुकूल हैं या जिनसे बचना बेहतर है। नीचे का हर समय वाराणसी के लिए निकाला गया है, किसी तय राष्ट्रीय तालिका से उठाया नहीं गया।
“पंचांग” का अर्थ है पाँच अंग। ये पाँचों मिलकर स्थानीय सूर्योदय के समय दिन का चंद्र और ग्रह-स्वभाव बताते हैं।
तिथि · चंद्र दिवस
चंद्रमा शुक्ल पक्ष में है और पूर्णिमा की ओर बढ़ता जा रहा है।
वार · सप्ताह का दिन
इस वार को परंपरा में चंद्र से जोड़ा जाता है।
नक्षत्र · चंद्रमा का नक्षत्र
स्थानीय सूर्योदय पर चंद्रमा जिस निरयन आकाश-खंड में होता है, वही नक्षत्र है। यह गंडमूल नक्षत्र है — बुध या केतु के स्वामित्व वाले उन छह में से एक जो राशि-संधि पर पड़ते हैं, और जिनमें जन्म होने पर परंपरा में शांति करवाई जाती है।
योग · सूर्य-चंद्र का योग
सूर्य और चंद्रमा के देशांतरों को जोड़कर बनने वाला संबंध; यहाँ इसे प्रतिकूल माना गया है।
करण · तिथि का आधा भाग
सूर्योदय पर चल रहा आधा तिथि-भाग; यहाँ इसे अनुकूल माना गया है।
हिंदू मास · पूर्णिमांत — पूर्णिमा पर ख़त्म
उत्तर भारत की गणना — दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और पंजाब में यही चलती है, और विक्रम संवत इसी के साथ चलता है।
हिंदू मास · अमांत — अमावस्या पर ख़त्म
दक्षिण और पश्चिम भारत की गणना — महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र और तमिलनाडु में यही चलती है।
विक्रम संवत · चंद्र वर्ष
शुक्ल पक्ष है, इसलिए दोनों गणनाएँ मास का एक ही नाम रखती हैं। चंद्रमा के घटना शुरू होते ही ये अलग हो जाती हैं।
अयन · सूर्य का आधा वर्ष
सूर्य का दक्षिण की ओर चलने वाला आधा वर्ष — मध्य जुलाई की कर्क संक्रांति से धनु के अंत तक। परंपरा में यह आत्मचिंतन, व्रत और पितरों से जुड़े कर्मों का समय माना जाता है।
ऋतु · वैदिक ऋतु, चंद्रमास से
शरद की ऋतु। यह वैदिक ऋतु है: दो चंद्रमास की, जो कैलेंडर की तारीख़ से नहीं, ऊपर वाले मास से पढ़ी जाती है। कुछ पंचांग सूर्य की स्थिति से चलने वाली सायन ऋतु भी छापते हैं, जो इससे एक महीने तक आगे हो सकती है।
शक संवत · राष्ट्रीय संवत
भारत का सरकारी चंद्र-सौर संवत — विक्रम संवत से 135 वर्ष पीछे और अमांत गणना के साथ। हर वसंत में ये दोनों करीब पंद्रह दिन तक अलग रह सकते हैं, इसीलिए इसे घटाकर नहीं, गिनकर निकाला जाता है।
सूर्य और चंद्र राशि · दोनों प्रकाश-ग्रह किस राशि में हैं
स्थानीय सूर्योदय पर सूर्य की और चंद्रमा की निरयन राशि। वैदिक ज्योतिष में “आपकी राशि” से मतलब चंद्रमा वाली राशि से ही होता है।
दिनमान और रात्रिमान · नापा हुआ दिन और रात
इस पेज की हर अनुपात वाली अवधि इन्हीं दो अवधियों का एक हिस्सा है, किसी बारह-घंटे की मान्यता का नहीं। इसीलिए आज दिन की होरा और रात की होरा की लंबाई अलग है।
आनंदादि योग · वार × नक्षत्र
अट्ठाईस योगों में से एक, जो वार और चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है — इसलिए यह ठीक तभी बदलता है जब नक्षत्र बदलता है, सूर्योदय पर कभी नहीं।
तमिल योग · सिद्ध, अमृत या मरण
वार और नक्षत्र की जोड़ी पर तमिल पंचांग का निर्णय। हर जोड़ी इन्हीं तीन में से एक पर बैठती है — न कोई तटस्थ स्थिति है, न कोई ख़ाली दिन।
ऊपर के कार्ड बताते हैं कि स्थानीय सूर्योदय पर क्या चल रहा था — दिन का नाम इसी परंपरा से पड़ता है। चारों अंगों में से कोई भी ठीक एक दिन नहीं चलता, इसलिए यहाँ इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक हर एक की सारी अवधियाँ दी हैं, और अभी जो चल रही है उस पर निशान है।
दिन भर की तिथि
इस दिन को पूर्णिमा कहा जाता है क्योंकि सूर्योदय पर वही तिथि चल रही थी, और वैदिक दिन का नाम इसी से पड़ता है। अभी प्रतिपदा चल रही है। दोनों सही हैं — ये अलग-अलग सवालों के जवाब हैं।
दिन भर का नक्षत्र
दिन का नक्षत्र अश्विनी लिखा जाता है, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय पर वही चल रहा था। अभी भरणी चल रहा है। चंद्रमा एक नक्षत्र लगभग 19 से 27 घंटे में पार करता है, इसलिए यह खंड दिन के साथ कम ही मिलता है।
दिन भर का योग
दिन का योग वज्र लिखा जाता है, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय पर वही चल रहा था। अभी सिद्धि चल रहा है। एक नित्य योग दिन से थोड़ा कम चलता है, इसलिए यह हर दिन अलग घंटे पर बदलता है।
दिन भर का करण
दिन का करण बव लिखा जाता है, क्योंकि स्थानीय सूर्योदय पर वही चल रहा था। अभी कौलव चल रहा है। एक करण आधी तिथि का होता है, इसलिए हर वैदिक दिन में कम से कम दो करण पड़ते हैं।
ऊपर के कार्ड बताते हैं कि स्थानीय सूर्योदय पर क्या चल रहा है। यह तालिका सूर्योदय के बाद का पहला बदलाव दिखाती है; वार तब बदलता है जब अगला वैदिक दिन सूर्योदय पर शुरू होता है।
| अंग | सूर्योदय पर चल रहा | पहला बदलाव |
|---|---|---|
| तिथि चंद्र दिवस | पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष) | पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष) → प्रतिपदा (कृष्ण पक्ष) |
| वार सप्ताह का दिन | सोमवार | सोमवार → मंगलवार — अगले सूर्योदय पर |
| नक्षत्र चंद्रमा का नक्षत्र | अश्विनी | अश्विनी → भरणी |
| योग सूर्य-चंद्र का योग | वज्र | वज्र → सिद्धि |
| करण तिथि का आधा भाग | बव | बव → बालव |
बदलाव के समय वाराणसी के लिए सूर्य और चंद्रमा की निरयन स्थिति से निकाले जाते हैं — सेकंड तक गिनकर, और नज़दीकी मिनट में दिखाकर।
ये अवधियाँ स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ खिसकती हैं। ये सब शहरों के लिए तय घड़ी-समय नहीं हैं।
अनुकूल अवधि
–
दोपहर की एक आम तौर पर अनुकूल खिड़की — जब विस्तार से मुहूर्त न निकाला जा सके तो ज़रूरी काम के लिए इसे लिया जाता है।
अनुकूल अवधि
–
परंपरा में इसे दिन की सबसे अनुकूल अवधि माना जाता है। यह केवल सूर्योदय से नहीं, चंद्रमा के नक्षत्र से निकलती है।
अनुकूल अवधि
–
रात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, जो सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले पूरा होता है। परंपरा में यह पढ़ाई, ध्यान और जप का सबसे अच्छा समय माना जाता है, सांसारिक कामों की शुरुआत का नहीं।
सावधानी की अवधि
–
इस समय कोई ज़रूरी काम शुरू करने से बचा जाता है। जो काम पहले से चल रहा है, वह चलता रह सकता है।
सावधानी की अवधि
–
यात्रा, शुभ कार्यों और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए आमतौर पर इससे बचा जाता है।
सावधानी की अवधि
–
नए वादों और सौदों में थोड़ी और सावधानी रखें; परंपरा इसे सतर्कता की अवधि मानती है।
सावधानी की अवधि
–
परंपरा में शुभ कामों की शुरुआत के लिए यह समय छोड़ दिया जाता है। यह उस दिन के नक्षत्र से निकलता है, इसलिए हर दिन खिसकता है।
सावधानी की अवधि
–
परंपरा में शुभ कामों की शुरुआत के लिए यह समय छोड़ दिया जाता है। यह उस दिन के नक्षत्र से निकलता है, इसलिए हर दिन खिसकता है।
सावधानी की अवधि
–
वार के हिसाब से तय एक छोटी अशुभ अवधि। नई शुरुआत के लिए आम तौर पर इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रहता है।
सावधानी की अवधि
–
वार के हिसाब से तय एक छोटी अशुभ अवधि। नई शुरुआत के लिए आम तौर पर इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रहता है।
सावधानी की अवधि
–
आधी रात का समय, जो महाशिवरात्रि जैसी रात की पूजा के लिए लिया जाता है, रोज़ की योजना के लिए नहीं।
लाहिड़ी अयनांश से निरयन स्थिति — ऊपर की तिथि, नक्षत्र, योग और करण इन्हीं देशांतरों से निकाले जाते हैं, और उसी क्षण पर पढ़े जाते हैं।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र | पाद | गति |
|---|---|---|---|---|---|
| सूर्य | तुला स्वामी शुक्र | 8° 22' 33" | स्वाति | 1 | मार्गी |
| चंद्र | मेष स्वामी मंगल | 6° 20' 10" | अश्विनी | 2 | मार्गी |
| मंगल | कर्क स्वामी चंद्र | 21° 19' 18" | आश्लेषा | 2 | मार्गी |
| बुध | तुला स्वामी शुक्र | 26° 32' 30" | विशाखा | 2 | वक्री |
| गुरु | कर्क स्वामी चंद्र | 29° 19' 21" | आश्लेषा | 4 | मार्गी |
| शुक्र | तुला स्वामी शुक्र | 5° 22' 34" | चित्रा | 4 | वक्री |
| शनि | मीन स्वामी गुरु | 15° 26' 49" | उत्तर भाद्रपदा | 4 | वक्री |
| राहु | कुंभ स्वामी शनि | 2° 09' 22" | धनिष्ठा | 3 | वक्री |
| केतु | सिंह स्वामी सूर्य | 2° 09' 22" | मघा | 1 | वक्री |
राहु और केतु चंद्र-पात हैं, कोई पिंड नहीं, और परिभाषा से ही उल्टे चलते हैं — उनका वक्री होना उनका स्वभाव है, कोई गुज़रती हुई दशा नहीं।
जब विस्तार से निजी मुहूर्त न निकाला जा सके, तब चौघड़िया को समय का मोटा मार्गदर्शक मान लिया जाता है।
| अवधि | समय | इसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं |
|---|---|---|
| अमृत | – | ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि। |
| काल | – | परंपरा में शुभ या बड़े दाँव वाले कामों की शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| शुभ | – | सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि। |
| रोग | – | परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| उद्वेग | – | परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है। |
| चर | – | यात्रा, आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों के लिए चलने वाली लचीली अवधि। |
| लाभ | – | व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है। |
| अमृत | – | ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि। |
| अवधि | समय | इसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं |
|---|---|---|
| चर | – | यात्रा, आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों के लिए चलने वाली लचीली अवधि। |
| रोग | – | परंपरा में सेहत से जुड़े काम और ज़रूरी नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| काल | – | परंपरा में शुभ या बड़े दाँव वाले कामों की शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| लाभ | – | व्यापार, कमाई और व्यावहारिक प्रगति के लिए अक्सर चुनी जाती है। |
| उद्वेग | – | परंपरा में ज़रूरी शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है; रोज़ का काम चलता रह सकता है। |
| शुभ | – | सोच-समझकर की गई शुरुआत, समझौतों और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल अवधि। |
| अमृत | – | ज़रूरी काम और नई शुरुआत के लिए दिन की सबसे अच्छी मानी जाने वाली अवधि। |
| चर | – | यात्रा, आवाजाही और रोज़मर्रा के कामों के लिए चलने वाली लचीली अवधि। |
दक्षिण भारत की पद्धति, ऊपर वाले चौघड़िया की तरह दिन के आठ और रात के आठ हिस्सों पर पढ़ी जाती है। इसकी आठ में से पाँच अवधियाँ नल्ल नेरम हैं — वही “शुभ समय” जो तमिल पंचांग छापता है — और तीन से बचा जाता है।
| अवधि | समय | इसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं |
|---|---|---|
| अमिर्ध | – | तमिल पद्धति का सबसे प्रबल भाग — जो काम टिकाऊ हो, उसके लिए लिया जाता है। |
| विषम् | – | विष — राहु का भाग। किसी भी ज़रूरी काम के लिए इससे बचा जाता है। |
| रोगम् | – | रोग। परंपरा में सेहत से जुड़े काम और नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| लाभम् | – | लाभ। व्यापार, वसूली और व्यावहारिक लेन-देन के लिए आमतौर पर लिया जाता है। |
| धनम् | – | धन। पैसे के काम, ख़रीदारी और जो चीज़ अपने पास रखनी हो, उसके लिए। |
| सुगम् | – | सुगमता। यात्रा, आराम, मिलने-जुलने और जो काम बिना अड़चन निपटाने हों, उनके लिए। |
| सोरम् | – | शोक। परंपरा में शुरुआत, संस्कार और उत्सव के लिए इससे बचा जाता है। |
| उथि | – | मेहनत और उद्यम। जिस काम को आगे बढ़ाना हो, उसके लिए ठीक — कोमल शुरुआत के लिए नहीं। |
| अवधि | समय | इसे आमतौर पर किस काम के लिए लेते हैं |
|---|---|---|
| सुगम् | – | सुगमता। यात्रा, आराम, मिलने-जुलने और जो काम बिना अड़चन निपटाने हों, उनके लिए। |
| सोरम् | – | शोक। परंपरा में शुरुआत, संस्कार और उत्सव के लिए इससे बचा जाता है। |
| उथि | – | मेहनत और उद्यम। जिस काम को आगे बढ़ाना हो, उसके लिए ठीक — कोमल शुरुआत के लिए नहीं। |
| अमिर्ध | – | तमिल पद्धति का सबसे प्रबल भाग — जो काम टिकाऊ हो, उसके लिए लिया जाता है। |
| विषम् | – | विष — राहु का भाग। किसी भी ज़रूरी काम के लिए इससे बचा जाता है। |
| रोगम् | – | रोग। परंपरा में सेहत से जुड़े काम और नई शुरुआत के लिए इससे बचा जाता है। |
| लाभम् | – | लाभ। व्यापार, वसूली और व्यावहारिक लेन-देन के लिए आमतौर पर लिया जाता है। |
| धनम् | – | धन। पैसे के काम, ख़रीदारी और जो चीज़ अपने पास रखनी हो, उसके लिए। |
गौरी पंचांगम् और चौघड़िया दिन को बिलकुल एक जैसा बाँटते हैं और हिस्सों के नाम अलग रखते हैं — इसलिए एक ही अवधि एक पद्धति में शुभ और दूसरी में नहीं हो सकती। यह दो परंपराओं का सच्चा मतभेद है, गणना की भूल नहीं — इसीलिए दोनों को मिलाया नहीं, अलग-अलग दिखाया गया है।
दिन और रात, दोनों को बारह-बारह बराबर ग्रह-घंटों में बाँटा जाता है, इसलिए होरा हमेशा साठ मिनट की नहीं होती।
| होरा | # | दिन / रात | समय | अक्सर किस काम के लिए |
|---|---|---|---|---|
| चंद्र होरा | 1 | दिन | – | घर, परिवार, मन को शांत करना |
| शनि होरा | 2 | दिन | – | अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ |
| गुरु होरा | 3 | दिन | – | शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य |
| मंगल होरा | 4 | दिन | – | व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम |
| सूर्य होरा | 5 | दिन | – | अधिकार, पहचान, सरकारी काम |
| शुक्र होरा | 6 | दिन | – | रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला |
| बुध होरा | 7 | दिन | – | पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार |
| चंद्र होरा | 8 | दिन | – | घर, परिवार, मन को शांत करना |
| शनि होरा | 9 | दिन | – | अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ |
| गुरु होरा | 10 | दिन | – | शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य |
| मंगल होरा | 11 | दिन | – | व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम |
| सूर्य होरा | 12 | दिन | – | अधिकार, पहचान, सरकारी काम |
| शुक्र होरा | 13 | रात | – | रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला |
| बुध होरा | 14 | रात | – | पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार |
| चंद्र होरा | 15 | रात | – | घर, परिवार, मन को शांत करना |
| शनि होरा | 16 | रात | – | अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ |
| गुरु होरा | 17 | रात | – | शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य |
| मंगल होरा | 18 | रात | – | व्यायाम, शारीरिक काम, निर्णायक कदम |
| सूर्य होरा | 19 | रात | – | अधिकार, पहचान, सरकारी काम |
| शुक्र होरा | 20 | रात | – | रिश्ते, सौंदर्य, आराम, कला |
| बुध होरा | 21 | रात | – | पढ़ाई, लेखन, अनुबंध, व्यापार |
| चंद्र होरा | 22 | रात | – | घर, परिवार, मन को शांत करना |
| शनि होरा | 23 | रात | – | अनुशासन, मरम्मत, लंबे समय की ज़िम्मेदारियाँ |
| गुरु होरा | 24 | रात | – | शिक्षण, धन की योजना, आध्यात्मिक कार्य |
सूर्योदय पर पूर्णिमा चल रही थी, और वैदिक दिन का नाम इसी से पड़ता है। अभी प्रतिपदा चल रही है।
वाराणसी में आज सूर्योदय 6:02 AM और सूर्यास्त 5:22 PM पर है। इस पेज की हर अवधि उसी सूर्योदय से नापी जाती है, आधी रात से नहीं।
वाराणसी में सूर्योदय पर चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में है, वज्र योग और बव करण के साथ।
पंचांग के समय स्थानीय सूर्योदय से निकाले जाते हैं, इसलिए हर शहर में अलग होते हैं — और छपा हुआ पंचांग चंद्रमास के लिए दूसरी गणना ले सकता है। यह पेज बताता है कि वह कौन-सी गणना ले रहा है, और दोनों दिखाता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त वाराणसी के लिए स्विस एफ़िमेरिस से निकाले जाते हैं — अक्षांश 25.3176, देशांतर 82.9739, समय-क्षेत्र Asia/Kolkata।
पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय पर चल रहे मानों से शुरू होते हैं। तिथि, नक्षत्र, योग और करण का पहला बदलाव ऊपर निकाला गया है; वार अगले सूर्योदय पर बदलता है।
राहु काल, यमगण्ड और गुलिक दिन के उजाले को आठ बराबर हिस्सों में बाँटकर, वार के अनुसार तय होते हैं। अभिजित नापे हुए दिन का बीच वाला पंद्रहवाँ हिस्सा है। चौघड़िया आठ भाग लेता है और होरा बारह।
हिंदू मास एक चंद्रमास है, सूर्य की राशि का नया नाम नहीं। ऊपर दोनों गणनाएँ दी गई हैं क्योंकि कृष्ण पक्ष में ये एक ही दिन को अलग नाम देती हैं: पूर्णिमांत मास पूर्णिमा पर ख़त्म होता है, अमांत मास अमावस्या पर। जिस चंद्रमास में कोई संक्रांति न पड़े, वह अधिक मास होता है और उसे वैसा ही लिखा जाता है। त्योहार और व्रत की तारीख़ें यहाँ अभी नहीं दी जातीं।
पंचांग योजना बनाने का एक पारंपरिक ढाँचा है, किसी नतीजे की गारंटी नहीं। शादी, ऑपरेशन, क़ानूनी काग़ज़ात या बड़े पैसों के फ़ैसलों के लिए काम के हिसाब से निजी मुहूर्त निकलवाएँ और योग्य पेशेवर की सलाह लें।
आने वाले त्योहार · अगले 30 दिन
सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले टूल और रिपोर्ट
दिल्ली और सभी बड़े शहर एक पेज पर: आज का पंचांग।
भारत के बाहर