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नक्षत्र · चंद्रमा पुष्य में · लगभग हर 27 दिन

पुष्य नक्षत्र 2026 कब है?

पुष्य नक्षत्र 2026

6 दिन बाद

रवि, 1 नवंबर

2026 में दिवाली से पहले चंद्रमा रविवार, 1 नवंबर 2026 सुबह 5:39 बजे से सोमवार, 2 नवंबर 2026 सुबह 4:30 बजे तक पुष्य नक्षत्र में रहेगा (नई दिल्ली के समय से)। रविवार होने से यह रवि पुष्य योग है: 1 नवंबर, सुबह 6:32 से 2 नवंबर, सुबह 4:30 तक। दिवाली की लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।

2027: शनिवार, 23 अक्टूबर 2027

पुष्य नक्षत्र

1 नवंबर, सुबह 5:39 – 2 नवंबर, सुबह 4:30

रवि पुष्य योग

1 नवंबर, सुबह 6:32 – 2 नवंबर, सुबह 4:30

नई दिल्ली

गुरु पुष्य और रवि पुष्य भी यही नक्षत्र है — गुरुवार या रविवार को पड़ने पर — इसलिए वे इसी पेज पर हैं, किसी दूसरे पेज पर नहीं।

दिवाली से पहले · नई दिल्ली

दिवाली 2026 से पहले पुष्य नक्षत्र

1 नवंबर, सुबह 5:39 से 2 नवंबर, सुबह 4:30 तक

वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, इसलिए अवधि दिन-दर-दिन दिखाई गई है। गुरुवार वाला हिस्सा गुरु पुष्य और रविवार वाला रवि पुष्य है; सूर्योदय से पहले का छोटा हिस्सा पिछले वार का होता है। दिवाली की लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।

दिवाली 2026 से पहले पुष्य नक्षत्र, नई दिल्ली
वार (सूर्योदय से सूर्योदय)सेतकयोग
शनिवार, 31 अक्टूबर 20261 नवंबर, सुबह 5:391 नवंबर, सुबह 6:32—
रविवार, 1 नवंबर 20261 नवंबर, सुबह 6:322 नवंबर, सुबह 4:30रवि पुष्य

पुष्य के भीतर शुभ, लाभ और अमृत चौघड़िया

उन दिनों के शुभ चौघड़िया, केवल उतने हिस्से में जितना पुष्य के भीतर पड़ता है — पुष्य में ख़रीदारी या शुरुआत के लिए पंचांग यही समय बताते हैं।

पुष्य के भीतर शुभ, लाभ और अमृत चौघड़िया, नई दिल्ली
दिनचौघड़ियानई दिल्ली में समय
31 अक्टूबरलाभसुबह 5:39 से सुबह 6:32
1 नवंबरलाभसुबह 9:18 से सुबह 10:41
1 नवंबरअमृतसुबह 10:41 से दोपहर 12:04
1 नवंबरशुभदोपहर 1:27 से दोपहर 2:50
1 नवंबरशुभशाम 5:36 से शाम 7:13
1 नवंबरअमृतशाम 7:13 से रात 8:50
1 नवंबरलाभरात 1:42 से रात 3:19

2026 के सभी पुष्य नक्षत्र

चंद्रमा लगभग हर 27.3 दिन में पुष्य से गुज़रता है, इसलिए साल में 13 या 14 बार। हर पंक्ति उस दिन से लिखी है जिसमें पुष्य का सबसे बड़ा हिस्सा है; गुरु और रवि पुष्य वाले हिस्से अपने समय के साथ दिए हैं।

2026 के सभी पुष्य नक्षत्र, नई दिल्ली
दिनपुष्य आरंभपुष्य समाप्तगुरु / रवि पुष्य
रविवार, 4 जनवरी 20264 जनवरी, दोपहर 3:115 जनवरी, दोपहर 1:25रवि पुष्य: 4 जनवरी, दोपहर 3:11 से 5 जनवरी, सुबह 7:14
रविवार, 1 फरवरी 20261 फरवरी, रात 1:341 फरवरी, रात 11:58रवि पुष्य: 1 फरवरी, सुबह 7:09 से 1 फरवरी, रात 11:58
शनिवार, 28 फरवरी 202628 फरवरी, सुबह 9:351 मार्च, सुबह 8:34रवि पुष्य: 1 मार्च, सुबह 6:46 से 1 मार्च, सुबह 8:34
शुक्रवार, 27 मार्च 202627 मार्च, दोपहर 3:2428 मार्च, दोपहर 2:50—
शुक्रवार, 24 अप्रैल 202623 अप्रैल, रात 8:5724 अप्रैल, रात 8:14गुरु पुष्य: 23 अप्रैल, रात 8:57 से 24 अप्रैल, सुबह 5:46
गुरुवार, 21 मई 202621 मई, सुबह 4:1222 मई, रात 2:49गुरु पुष्य: 21 मई, सुबह 5:27 से 22 मई, रात 2:49
बुधवार, 17 जून 202617 जून, दोपहर 1:3718 जून, सुबह 11:32गुरु पुष्य: 18 जून, सुबह 5:23 से 18 जून, सुबह 11:32
बुधवार, 15 जुलाई 202615 जुलाई, रात 12:0915 जुलाई, रात 9:46—
मंगलवार, 11 अगस्त 202611 अगस्त, सुबह 10:0912 अगस्त, सुबह 8:00—
सोमवार, 7 सितंबर 20267 सितंबर, शाम 6:148 सितंबर, शाम 4:39—
सोमवार, 5 अक्टूबर 20265 अक्टूबर, रात 12:145 अक्टूबर, रात 11:09रवि पुष्य: 5 अक्टूबर, रात 12:14 से 5 अक्टूबर, सुबह 6:15
रविवार, 1 नवंबर 2026दिवाली से पहले1 नवंबर, सुबह 5:392 नवंबर, सुबह 4:30रवि पुष्य: 1 नवंबर, सुबह 6:32 से 2 नवंबर, सुबह 4:30
शनिवार, 28 नवंबर 202628 नवंबर, दोपहर 12:5029 नवंबर, सुबह 10:59रवि पुष्य: 29 नवंबर, सुबह 6:54 से 29 नवंबर, सुबह 10:59
शनिवार, 26 दिसंबर 202625 दिसंबर, रात 10:5026 दिसंबर, रात 8:13—

अर्थ और परंपरा

पुष्य नक्षत्र क्या है, और दिवाली की ख़रीदारी में इसे क्यों देखा जाता है

पुष्य 27 नक्षत्रों में आठवाँ है: निरयन कर्क राशि में 3°20' से 16°40' के बीच चंद्रमा। इसके देवता बृहस्पति हैं और नाम का अर्थ है "पोषण करने वाला"। मुहूर्त ग्रंथ इसे शुरुआत के लिए सबसे अनुकूल नक्षत्रों में गिनते हैं, और दिवाली से पहले वाला पुष्य सोना, चाँदी, वाहन और घर की चीज़ें ख़रीदने का पारंपरिक दिन बन गया है।

  • गुरु पुष्य (गुरुवार को) और रवि पुष्य (रविवार को) — परंपरा इन्हीं दो वार-संयोगों को ख़ास मानती है। वार हिंदू दिन का है, सूर्योदय से सूर्योदय।
  • यही परंपरा विवाह मुहूर्त में पुष्य को नहीं लेती, इसलिए शादी की तारीख इससे नहीं चुनी जाती।
  • ये परंपरा का वर्णन हैं, कोई वादा नहीं। इस दिन कुछ ख़रीदना ज़रूरी नहीं, और इस दिन की ख़रीद का मूल्य उतना ही है जितनी उसकी क़ीमत।
  • नक्षत्र लाहिरी अयनांश से निकाला गया है, जैसे इस साइट का बाकी पंचांग; इसका आरंभ और अंत हर जगह एक ही क्षण होता है।

पुष्य नक्षत्र से जुड़े सामान्य प्रश्न

2026 में दिवाली से पहले पुष्य नक्षत्र कब है?

रविवार, 1 नवंबर 2026 सुबह 5:39 बजे से सोमवार, 2 नवंबर 2026 सुबह 4:30 बजे तक, नई दिल्ली के समय से। दिवाली की लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।

2026 में गुरु पुष्य है या रवि पुष्य?

रवि पुष्य योग: पुष्य रविवार को, 1 नवंबर, सुबह 6:32 से 2 नवंबर, सुबह 4:30 तक। वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, इसलिए योग पुष्य का वही हिस्सा है जो उस वार के भीतर पड़ता है।

2026 में गुरु पुष्य और रवि पुष्य कितनी बार हैं?

9 बार: रवि पुष्य — रविवार, 4 जनवरी 2026; रवि पुष्य — रविवार, 1 फरवरी 2026; रवि पुष्य — रविवार, 1 मार्च 2026; गुरु पुष्य — गुरुवार, 23 अप्रैल 2026; गुरु पुष्य — गुरुवार, 21 मई 2026; गुरु पुष्य — गुरुवार, 18 जून 2026; रवि पुष्य — रविवार, 4 अक्टूबर 2026; रवि पुष्य — रविवार, 1 नवंबर 2026; रवि पुष्य — रविवार, 29 नवंबर 2026।

पुष्य नक्षत्र कितनी देर रहता है?

सामान्यतः 19 से 27 घंटे — चंद्रमा को निरयन राशिचक्र के 13°20' पार करने में जितना समय लगता है, जो उसकी गति के साथ बदलता है। यह लगभग हर 27.3 दिन में लौटता है, इसलिए साल में 13 या 14 बार आता है।

दूसरे पंचांग में समय थोड़ा अलग क्यों है?

पंचांग समय को अलग ढंग से पूर्णांकित करते हैं, इसलिए एक-दो मिनट का अंतर आम है; जो पंचांग लाहिरी के बजाय दूसरा अयनांश लेते हैं, उनमें अंतर ज़्यादा होता है। वार का बँटवारा सूर्योदय से होता है, इसलिए भोर से ठीक पहले शुरू होने वाला पुष्य पिछले वार का गिना जाता है।