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उदयपुर में आज का अमृत काल

मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 · उदयपुर

10 घंटे 11 मिनट में शुरू होगा

11:15 AM – 12:43 PM

शुभ शुरुआत 11:15 AM के लिए रखें

अगला: बुध, 28 अक्टूबर, 11:15 AM – 12:42 PM

उदयपुर में आज अमृत काल 11:15 AM – 12:43 PM (भरणी नक्षत्र) है।

वर्ज्यम्

2:32 AM – 3:59 AM (28 अक्टूबर)

25 घंटे 28 मिनट में

अभिजित मुहूर्त

11:56 AM – 12:42 PM

10 घंटे 52 मिनट में

उदयपुर, राजस्थान में आज का अमृत काल, 27 अक्टूबर 2026

सभी समय उदयपुर के स्थानीय हैं, Asia/Kolkata (UTC+05:30) के लिए निकाले गए।

उदयपुर, राजस्थान में आज का अमृत काल, 27 अक्टूबर 2026
कालसमयनक्षत्रनक्षत्र का समयघटी
अमृत काल11:15 AM – 12:43 PMभरणी5:41 PM (26 अक्टूबर) – 3:39 PM48 / 60
वर्ज्यम्2:32 AM – 3:59 AM (28 अक्टूबर)कृत्तिका3:39 PM – 1:26 PM (28 अक्टूबर)30 / 60

उदयपुर में कल का अमृत काल

उदयपुर, राजस्थान में कल का अमृत काल
कालसमयनक्षत्रनक्षत्र का समयघटी
अमृत काल11:15 AM – 12:42 PMकृत्तिका3:39 PM (27 अक्टूबर) – 1:26 PM54 / 60
वर्ज्यम्3:56 AM – 5:23 AM (29 अक्टूबर)रोहिणी1:26 PM – 11:11 AM (29 अक्टूबर)40 / 60

उदयपुर में अगले 7 दिनों का अमृत काल

दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक गिना गया है, जैसे पंचांग गिनता है: आधी रात के बाद का अमृत काल उस दिन का है जिसका सूर्योदय उससे पहले हुआ।

उदयपुर, राजस्थान में अगले 7 दिनों का अमृत काल
तारीखअमृत कालनक्षत्र
आज11:15 AM – 12:43 PMभरणी
11:15 AM – 12:42 PMकृत्तिका
8:17 AM – 9:44 AM; 1:03 AM – 2:30 AM (30 अक्टूबर)रोहिणी, मृगशिरा
1:40 AM – 3:08 AM (31 अक्टूबर)आर्द्रा
3:25 AM – 4:54 AM (1 नवंबर)पुनर्वसु
10:25 PM – 11:56 PMपुष्य
2:13 AM – 3:46 AM (3 नवंबर)आश्लेषा

अमृत काल की गणना: नक्षत्र घटी तालिका

अमृत काल नक्षत्र का होता है, घड़ी का नहीं। हर नक्षत्र में चंद्रमा का ठहराव — लगभग 19 से 27 घंटे — 60 घटियों में बँटता है; अमृत काल उस नक्षत्र की अमृत घटी पर खुलता है और चार घटी रहता है। वर्ज्यम्, जिससे बचना है, वही चार घटी उसकी विष घटी पर हैं। तालिका हर नक्षत्र के लिए दोनों देती है।

अमृत काल की गणना: नक्षत्र घटी तालिका
नक्षत्रवर्ज्यम् (विष) घटीअमृत घटी
अश्विनी5042
भरणी2448
कृत्तिका3054
रोहिणी4052
मृगशिरा1438
आर्द्रा2145
पुनर्वसु3054
पुष्य2044
आश्लेषा3256
मघा3054
पूर्वा फाल्गुनी2044
उत्तरा फाल्गुनी1842
हस्त2145
चित्रा2044
स्वाति1438
विशाखा1438
अनुराधा1034
ज्येष्ठा1438
मूल5644
पूर्वाषाढ़ा2448
उत्तराषाढ़ा2044
श्रवण1034
धनिष्ठा1034
शतभिषा1842
पूर्व भाद्रपदा1640
उत्तर भाद्रपदा2448
रेवती3054

जहाँ तालिकाएँ अलग हैं: अधिकांश नक्षत्रों में अमृत घटी विष घटी से 24 आगे है। अश्विनी, रोहिणी और मूल में यह योग नक्षत्र के अंत से आगे चला जाता है, और पंचांग अलग मान छापते हैं; यहाँ के तीन (42, 52 और 44) द्रिक पंचांग के हैं, उसके छपे समयों से वापस निकाले गए।

अमृत काल का अर्थ: अमृत चौघड़िया नहीं

अमृत काल (अमृत कालम्, अमृत घड़ी) नक्षत्र का सबसे शुभ भाग माना जाता है, जिसमें पूजा, यात्रा या नया काम शुरू किया जाता है। यह अमृत चौघड़िया से अलग है: चौघड़िया वार से तय दिन या रात का आठवाँ भाग है; अमृत काल चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है और हर दिन खिसकता है।

क्योंकि यह चंद्रमा के साथ चलता है, अमृत काल रात में पड़ सकता है, एक सूर्योदय-से-सूर्योदय दिन में दो बार आ सकता है, और किसी दिन होता ही नहीं। यह हर शहर में एक ही क्षण है; केवल विदेश की घड़ी और वह दिन बदलता है जिसमें इसे गिना जाता है।

उदयपुर में आज का चौघड़िया

अमृत काल: सामान्य प्रश्न

आज उदयपुर में अमृत काल कब है?

उदयपुर में आज अमृत काल 11:15 AM – 12:43 PM (भरणी नक्षत्र) है।

कल उदयपुर में अमृत काल कब है?

कल: 11:15 AM – 12:42 PM।

अमृत काल क्या है?

नक्षत्र की अमृत घटी से खुलने वाली चार घटी — नक्षत्र का सबसे शुभ भाग। हर नक्षत्र में चंद्रमा का ठहराव 60 घटियों में बँटता है, इसलिए अमृत काल की लंबाई उस नक्षत्र की लंबाई के साथ बदलती है (लगभग 75 से 110 मिनट)।

क्या अमृत काल और अमृत चौघड़िया एक ही हैं?

नहीं। अमृत चौघड़िया वार से तय दिन या रात का आठवाँ भाग है; अमृत काल चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है। दोनों अलग समय पर पड़ते हैं।

कुछ दिन अमृत काल क्यों नहीं होता?

क्योंकि यह नक्षत्र के साथ चलता है, सूर्योदय के साथ नहीं: किसी सूर्योदय-से-सूर्योदय दिन में कोई अमृत घटी पड़ती ही नहीं, और किसी दिन दो पड़ जाती हैं।

अमृत काल में क्या करें?

पूजा, यात्रा या नया काम शुरू करने के लिए इसे सबसे शुभ भाग माना जाता है। इसके साथ वर्ज्यम्, राहु काल और दिन की बाकी खिड़कियाँ भी देखी जाती हैं।

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