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शुक्ल पक्ष · पूर्णिमा तिथि · आश्विन

शरद पूर्णिमा 2027 कब है?

शरद पूर्णिमा 2027

352 दिन बाद

गुरु, 14 अक्टूबर

2027 में शरद पूर्णिमा गुरुवार, 14 अक्टूबर को है। नई दिल्ली में शरद पूर्णिमा पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11:42 से रात 12:32 तक है।

2028: सोमवार, 2 अक्टूबर 2028

शरद पूर्णिमा पूजा मुहूर्त

रात 11:42 – रात 12:32

नई दिल्ली

शरद पूर्णिमा कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

स्वर्ण से पूछें

क्या यह मुहूर्त मेरी कुंडली के लिए शुभ है? स्वर्ण से मुफ़्त पूछें

छत की मुंडेर पर मलमल से ढका चाँदी के कटोरे में खीर, पास में चमेली, ऊपर पूरा चाँद
शरद पूर्णिमा की रात खीर चाँदनी में रखी जाती है और सुबह प्रसाद के रूप में खाई जाती है।

नई दिल्ली के लिए गणना

शरद पूर्णिमा 2027: तारीख और तिथि का समय

गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027

तिथि
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
आश्विन
तिथि आरंभ
14 अक्टूबर, शाम 6:50
तिथि समाप्त
15 अक्टूबर, शाम 7:17
दिन का निर्णय
निशीथ काल
नई दिल्ली में निशीथ काल
रात 11:42 से रात 12:32

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: शरद पूर्णिमा का निर्णय मध्य रात्रि के निशीथ काल में चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके निशीथ काल पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

शरद पूर्णिमा 2027 के सभी मुहूर्त · नई दिल्ली

शरद पूर्णिमा 2027 शरद पूर्णिमा पूजा मुहूर्त

शरद पूर्णिमा, आश्विन मास की पूर्णिमा, वह रात है जब चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण माना जाता है: रात्रि जागरण (कोजागरी) के साथ माँ लक्ष्मी की पूजा होती है, चाँदनी में खीर रखी जाती है, और ब्रज में यह श्रीकृष्ण के महारास की रात है। शरद पूर्णिमा 2027 नई दिल्ली में गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027 को है, और चंद्रोदय शाम 4:57 पर है। खीर चाँदनी में (शाम 4:57 से रात 12:32 (15 अक्टूबर) तक) रखें और कोजागरी लक्ष्मी पूजा मध्यरात्रि के समय (रात 11:42 से रात 12:32 (15 अक्टूबर) तक) में करें।

शरद पूर्णिमा 2027 के सभी मुहूर्त — नई दिल्ली
मुहूर्तनई दिल्ली में समयकिसके लिए
चाँदनी में खीरशाम 4:57 से रात 12:32 (15 अक्टूबर) तकपूर्णिमा की रात चंद्रोदय से निशीथ काल के अंत तक।

चंद्रोदय से मध्यरात्रि (निशीथ) के मुहूर्त की समाप्ति तक। चाँद निकल आने पर ढकी हुई खीर खुली चाँदनी में रखें, और यह समय पूरा होने पर अंदर लाकर भोग लगाएँ और प्रसाद के रूप में खाएँ — आधी रात को, या ठंडी जगह रखकर अगली सुबह।

कोजागरी पूजा (निशीथ)रात 11:42 से रात 12:32 (15 अक्टूबर) तकपूर्णिमा की रात निशीथ काल, जब तक पूर्णिमा रहे।

पूर्णिमा की रात का मध्यरात्रि मुहूर्त, जब एक पुराने श्लोक के अनुसार माँ लक्ष्मी ‘को जागर्ति?’ — ‘कौन जाग रहा है?’ — पूछती हुई घूमती हैं। यही कोजागरी लक्ष्मी पूजा का समय और रात के जागरण का शिखर है, और इसी से तय होता है कि शरद पूर्णिमा कौन-सी रात है।

चंद्रोदयशाम 4:57इस सूर्योदय के बाद और अगले सूर्योदय से पहले का पहला चंद्रोदय।

पूर्णिमा का चाँद सूर्यास्त के आसपास निकलता है। चाँद निकलने के बाद उसे अर्घ्य दें और इसी समय से खीर बाहर रखें; व्रत रखने वाले चंद्र पूजा के बाद व्रत खोलते हैं।

प्रदोष कालशाम 5:53 से रात 8:22 तकसूर्यास्त से रात के तीन मुहूर्त (रात का पाँचवाँ भाग)।

सूर्यास्त के बाद का संध्याकाल, जब बहुत से परिवार — ख़ासकर बंगाली घर — लक्ष्मी पूजा शुरू करते हैं, अल्पना बनाते हैं और जागरण से पहले दीप जलाते हैं।

निशीथ कालरात 11:42 से रात 12:32 (15 अक्टूबर) तकरात के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, आधी रात के आसपास।

रात का आठवाँ मुहूर्त, स्थानीय मध्यरात्रि के आसपास, कोजागरी समय का केंद्र; इसमें घी का दीपक जलता रहे और जागरण चलता रहे।

उस दिन के शुभ समय

उस दिन के शुभ समय
मुहूर्तनई दिल्ली में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्तसुबह 11:43 से दोपहर 12:30शुभ
अमृत कालशाम 5:24 से शाम 7:06सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:41 से सुबह 5:31शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
अवधिनई दिल्ली में समय
राहु कालदोपहर 1:33 से दोपहर 3:00
यमगण्ड कालसुबह 6:20 से सुबह 7:47
दुर्मुहूर्त (पहला)सुबह 10:11 से सुबह 10:57
दुर्मुहूर्त (दूसरा)दोपहर 2:48 से दोपहर 3:34
वर्ज्यम्सुबह 7:12 से सुबह 8:54

ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।

पूजा विधि · घर पर, क्रम से

शरद पूर्णिमा पूजा विधि

  1. सुबह: स्नान और संकल्प

    सुबह जल्दी स्नान करें — नदी के पास रहते हों तो पवित्र स्नान — घर और पूजा स्थान साफ़ करें, और व्रत रख रहे हों तो हाथ में जल और चावल लेकर शरद पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें।

  2. खीर बनाएँ

    शाम को फुल क्रीम दूध में थोड़े चावल डालकर गाढ़ा होने तक पकाएँ, चीनी और इलायची डालें, और चाहें तो केसर और मेवे भी। ऐसा साफ़ स्टील, काँच, चाँदी या मिट्टी का बर्तन लें जिसे महीन कपड़े से ढका जा सके।

  3. लक्ष्मी पूजा की तैयारी

    चौकी पर लाल या सफ़ेद कपड़ा बिछाकर माँ लक्ष्मी की तस्वीर (चाहें तो भगवान विष्णु के साथ), आम के पत्तों वाला कलश और घी का दीपक रखें। बंगाली घरों में चावल के घोल से अल्पना बनाई जाती है, जिसमें घर के अंदर आते लक्ष्मी जी के पदचिह्न होते हैं।

  4. शाम की लक्ष्मी पूजा

    प्रदोष काल में माँ लक्ष्मी को कुमकुम, चावल, कमल या सफ़ेद और लाल फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें; ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ का 108 बार जप करें या महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ें, और आरती गाएँ।

  5. चंद्रमा को अर्घ्य

    चाँद निकल आने पर लोटे से थोड़ा कच्चा दूध, चावल और सफ़ेद फूल मिला जल, चंद्रमा की ओर देखते हुए, चंद्र श्लोक के साथ अर्पित करें; दीपक जलाकर मन की शांति और परिवार की कुशलता की प्रार्थना करें।

  6. खीर चाँदनी में रखें

    खीर को छत, बालकनी या आँगन में खुली चाँदनी में, ज़मीन से ऊपर रखें और कीड़ों-धूल से बचाने के लिए मलमल के कपड़े या जाली से ढकें, और खीर वाले पूरे समय वहीं रहने दें।

  7. जागरण (कोजागरी)

    कोजागरी परंपरा के अनुसार भजन, लक्ष्मी स्तोत्र, व्रत कथा और परिवार के खेलों के साथ रात में जागें; घी का दीपक जलता रहे।

  8. मध्यरात्रि की लक्ष्मी पूजा

    कोजागरी समय में माँ लक्ष्मी को फिर से फूल और दीपक अर्पित करें; बंगाली परिवार शंख बजाते हैं और लक्ष्मी पांचाली पढ़ते हैं। खीर का भोग माँ लक्ष्मी को, और कृष्ण भक्त घरों में राधा-कृष्ण को, लगाएँ।

  9. व्रत खोलें और प्रसाद लें

    व्रत रखने वाले चंद्र पूजा के बाद फल या खीर के प्रसाद से व्रत खोलें। समय पूरा होने पर खीर अंदर लाएँ; आधी रात को खाएँ, या फ्रिज में रखकर सुबह प्रसाद के रूप में बाँटें।

  10. अगली सुबह: बाँटें और दान करें

    खीर परिवार और पड़ोसियों में बाँटें, और किसी ज़रूरतमंद को चावल, दूध, चीनी या सफ़ेद कपड़ा दें — यह पूर्णिमा का पारंपरिक दान है।

सामग्री · पहले से तैयार रखें

शरद पूर्णिमा पूजा सामग्री सूची

  • फुल क्रीम दूध परिवार की एक कटोरी खीर के लिए लगभग एक लीटर।
  • चावल एक छोटी मुट्ठी; दूध को गाढ़ा करें, भरें नहीं।
  • चीनी, इलायची और केसर केसर वैकल्पिक है; गुड़ डालना हो तो खीर आँच से उतारने के बाद डालें, वरना दूध फट सकता है।
  • बादाम, काजू और किशमिश वैकल्पिक, खीर और कोजागरी दूध के लिए।
  • स्टील, काँच, चाँदी या मिट्टी का बर्तन खीर बाहर रखने के लिए; प्लास्टिक से बचें।
  • महीन मलमल का कपड़ा या जाली का ढक्कन चाँदनी पहुँचे पर कीड़े और धूल न पहुँचें।
  • माँ लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा शाम और मध्यरात्रि की पूजा के लिए।
  • लाल या सफ़ेद कपड़े वाली चौकी देवी का आसन।
  • आम के पत्तों और नारियल वाला कलश वैकल्पिक, पूर्ण लक्ष्मी पूजा के लिए।
  • कमल या सफ़ेद और लाल फूल कमल माँ लक्ष्मी का फूल है; कोई भी ताज़े फूल चलेंगे।
  • कुमकुम, हल्दी, अक्षत और चंदन तिलक और अर्पण के लिए।
  • घी का दीपक और रुई की बत्तियाँ रात भर के जागरण में जलता रहे।
  • अगरबत्ती, धूप और कपूर पूजा और आरती के लिए।
  • ताँबे या चाँदी का लोटा चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए।
  • कच्चा दूध, जल, चावल और सफ़ेद फूल चंद्र अर्घ्य के लिए लोटे में मिलाकर।
  • अल्पना के लिए चावल का घोल बंगाली घरों में लक्ष्मी जी के पदचिह्नों के लिए।
  • शंख बंगाल और ओडिशा में लक्ष्मी पूजा के समय बजाया जाता है।
  • पान, सुपारी और कुछ सिक्के लक्ष्मी पूजा में अर्पित; कुछ लोग चाँदी का सिक्का रखते हैं।
  • फल और मिठाई नैवेद्य के लिए केला, मौसमी फल, नारियल या खोए की मिठाई।
  • लक्ष्मी स्तोत्र या लक्ष्मी पांचाली की पुस्तक जागरण के लिए।

मंत्र · अर्थ के साथ

शरद पूर्णिमा के मंत्र और आरती

महालक्ष्मी मंत्र

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

Om Shrim Mahalakshmyai Namah

अर्थ: ॐ, बीज अक्षर ‘श्रीं’ के साथ महालक्ष्मी को नमस्कार।

कब और कैसे: शाम और मध्यरात्रि की लक्ष्मी पूजा में: कमलगट्टे या स्फटिक की माला पर 108 बार, या हर अर्पण के साथ।

महालक्ष्मी अष्टकम, पहला श्लोक

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥

Namastestu Mahamaye Shripithe Surapujite, Shankhachakragadahaste Mahalakshmi Namostu Te

अर्थ: हे महामाया, श्रीपीठ पर विराजमान, देवताओं से पूजित, हाथों में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी — आपको नमस्कार है।

कब और कैसे: महालक्ष्मी अष्टकम का पहला श्लोक, जिसे परंपरा पद्म पुराण में इंद्र की स्तुति बताती है; जागरण में पूरा स्तोत्र, या यह श्लोक ग्यारह बार पढ़ें।

चंद्र श्लोक

दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम् ।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम् ॥

Dadhishankhatusharabham Kshirodarnavasambhavam, Namami Shashinam Somam Shambhormukutabhushanam

अर्थ: दही, शंख और हिम के समान श्वेत, क्षीर सागर से उत्पन्न, शिव के मुकुट के आभूषण चंद्रमा को मैं प्रणाम करता हूँ।

कब और कैसे: नवग्रह स्तोत्र का चंद्र श्लोक: उगते चाँद को अर्घ्य देते समय तीन बार बोलें।

चंद्र मंत्र

ॐ सों सोमाय नमः

Om Som Somaya Namah

अर्थ: ॐ, सोम — चंद्रमा — को नमस्कार।

कब और कैसे: चंद्रमा का छोटा मंत्र: पूर्णिमा की रात अर्घ्य के बाद 108 बार।

कृष्णाय वासुदेवाय

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।
प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ॥

Krishnaya Vasudevaya Haraye Paramatmane, Pranataklesanashaya Govindaya Namo Namah

अर्थ: वसुदेव के पुत्र श्रीकृष्ण को, परमात्मा हरि को, शरणागतों के क्लेश हरने वाले गोविंद को बार-बार नमस्कार।

कब और कैसे: श्रीमद्भागवत, दशम स्कंध, अध्याय 73, श्लोक 16। रास पूर्णिमा पर कृष्ण भक्त घरों में राधा-कृष्ण को खीर का भोग लगाते समय पढ़ें।

आरती लक्ष्मी जी की आरती: ॐ जय लक्ष्मी माता पूरी आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

Om jai Lakshmi Mata, maiya jai Lakshmi Mata.
Tumko nishidin sevat, Hari Vishnu Vidhata.
Om jai Lakshmi Mata.

Uma, Rama, Brahmani, tum hi jag-mata.
Surya-Chandrama dhyavat, Narad rishi gata.
Om jai Lakshmi Mata.

Durga roop niranjani, sukh sampatti data.
Jo koi tumko dhyavat, riddhi-siddhi dhan pata.
Om jai Lakshmi Mata.

Tum patal-nivasini, tum hi shubhdata.
Karm-prabhav-prakashini, bhavnidhi ki trata.
Om jai Lakshmi Mata.

Jis ghar mein tum rahtin, sab sadgun aata.
Sab sambhav ho jata, man nahin ghabrata.
Om jai Lakshmi Mata.

Tum bin yagya na hote, vastra na koi pata.
Khan-paan ka vaibhav, sab tumse aata.
Om jai Lakshmi Mata.

Shubh-gun mandir sundar, kshirodadhi-jata.
Ratna chaturdash tum bin, koi nahin pata.
Om jai Lakshmi Mata.

Mahalakshmi ji ki aarti, jo koi jan gata.
Ur anand samata, paap utar jata.
Om jai Lakshmi Mata.

यह आरती उसी रूप में है जैसे आम तौर पर गाई जाती है। गीता प्रेस के 'आरती-संग्रह' में 'हरि विष्णु विधाता' की जगह 'हर-विष्णू-धाता', 'जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता' की जगह 'जिस घर तुम रहती, तहँ सब सद्गुण आता', 'वस्त्र न कोई पाता' की जगह 'वस्त्र न हो पाता' और 'जो कोई जन गाता' की जगह 'जो कोई नर गाता' छपा है। छपा पाठ

कथा · कहानी और उसका अर्थ

शरद पूर्णिमा की कथा और महत्व

कथा

शरद पूर्णिमा पर कही जाने वाली व्रत कथा एक साहूकार की दो बेटियों की है, जो दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं — बड़ी बेटी पूरा, और छोटी हमेशा अधूरा छोड़ देती। विवाह के बाद छोटी बहन की संतानें जीवित नहीं रहती थीं। ज्ञानी लोगों ने बताया कि इसका कारण उसके अधूरे पूर्णिमा व्रत हैं, तो उसने पूरे विधि-विधान से शरद पूर्णिमा का व्रत रखा।

जब उसका अगला बच्चा भी जन्म के कुछ समय बाद चल बसा, तो उसने उसे एक पीढ़े पर लिटाकर कपड़े से ढक दिया और बड़ी बहन को वहीं बैठने को कहा। बड़ी बहन का वस्त्र छूते ही बच्चा रोने लगा। चौंककर बड़ी बहन ने उसे डाँटा, पर छोटी बहन ने बताया कि बच्चा उसकी बहन के पूरे व्रतों के पुण्य से जी उठा है — और तब से सब पूर्णिमा का पूरा व्रत रखने लगे।

कोजागरी नाम एक पुराने श्लोक से आया है: आश्विन की पूर्णिमा की रात माँ लक्ष्मी ‘को जागर्ति?’ — ‘कौन जाग रहा है?’ — पूछती हुई पृथ्वी पर घूमती हैं और उस घर को आशीर्वाद देती हैं जहाँ दीपक जल रहा हो और परिवार भक्ति में जाग रहा हो। और ब्रज में भागवत की वे शरद रातें, ‘जब मल्लिका के फूल खिले थे’, जब श्रीकृष्ण ने बाँसुरी बजाई और गोपियाँ रास के लिए आईं, इसी पूर्णिमा पर रास पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती हैं।

महत्व

शरद पूर्णिमा वर्षा के बाद साफ़ शरद आकाश की पूर्णिमा है — वह रात जब परंपरा के अनुसार चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। माना जाता है कि इसकी चाँदनी में अमृत होता है, इसीलिए खीर — दूध, चावल और शक्कर, चंद्रमा के अपने ‘श्वेत’ पदार्थ — उसके नीचे रखकर प्रसाद के रूप में खाई जाती है।

यह तीन भक्तियों की रात है: माँ लक्ष्मी, जिनकी जागरण (कोजागरी) के साथ पूजा होती है; चंद्रमा, जिन्हें अर्घ्य दिया जाता है; और ब्रज में श्रीकृष्ण, जिनके गोपियों के साथ महारास को याद किया जाता है। आश्विन पूर्णिमा रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती के रूप में भी मनाई जाती है।

शरद पूर्णिमा की तारीख सूर्योदय से नहीं, मध्यरात्रि से तय होती है: यह वह रात है जब पूर्ण चंद्रमा आकाश में हो, जो कुछ कैलेंडरों में दिखाए गए पूर्णिमा व्रत से एक दिन पहले भी हो सकती है।

उपाय · परंपरा

शरद पूर्णिमा के पारंपरिक उपाय

चाँदनी वाली खीर का प्रसाद

चाँदनी में रखी और माँ लक्ष्मी को अर्पित खीर परंपरा से खाने वालों को स्वास्थ्य और संतोष देने वाली मानी जाती है। इसे कृतज्ञता से प्रसाद के रूप में खाएँ; यह भक्ति की परंपरा है, दवा नहीं।

लक्ष्मी जी के लिए जागरण

दीपक जलाकर, होठों पर लक्ष्मी जी का नाम लेकर कोजागरी जागरण करना इस रात की मुख्य परंपरा है; माना जाता है कि माँ लक्ष्मी उन घरों को आशीर्वाद देती हैं जिन्हें वे जागता और रोशन पाती हैं।

चंद्रमा को अर्घ्य

ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक है, और पूर्णिमा पर दूध और सफ़ेद फूल मिला जल अर्पित करना मन की शांति और भावनात्मक संतुलन की पारंपरिक साधना है।

श्वेत वस्तुओं का दान

पूर्णिमा पर किसी ज़रूरतमंद को चावल, दूध, चीनी, दही या सफ़ेद कपड़ा देना चंद्रमा के दिन का पारंपरिक दान है।

तुलसी और द्वार पर दीपक

शरद पूर्णिमा की रात तुलसी के पौधे और घर के द्वार पर घी का दीपक जलाना साफ़, रोशन घर में माँ लक्ष्मी के स्वागत का पुराना तरीका है।

कनकधारा स्तोत्र का पाठ

बहुत से परिवार जागरण में आदि शंकराचार्य का कनकधारा स्तोत्र या श्री सूक्त पढ़ते हैं — घर की समृद्धि के लिए लक्ष्मी जी के पारंपरिक स्तोत्र।

परंपरा, संक्षेप में

शरद पूर्णिमा पर क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • खीर को महीन कपड़े से ढककर ज़मीन से ऊपर रखें।
  • पालतू जानवरों और पक्षियों को खीर से दूर रखें।
  • अगर खीर अगली सुबह खानी हो तो फ्रिज में रखें।
  • चाँद निकलने के बाद उसे अर्घ्य दें।
  • घी का दीपक जलता रखें और घर लक्ष्मी जी के लिए साफ़ और रोशन रखें।
  • खीर का प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बाँटें।

क्या न करें

  • खीर खुली न छोड़ें, और खट्टी गंध आए तो न खाएँ।
  • खीर वाले किसी उपाय के लिए डॉक्टर की दी हुई दवा बंद न करें; यह परंपरा भक्ति की है।
  • प्लास्टिक के बर्तन से अर्घ्य न दें; ताँबे, पीतल या चाँदी का लोटा लें।
  • छत पर या पर्दों के पास दीपक बिना देखरेख न छोड़ें।
  • जागरण झगड़े या जुए में न बिताएँ; इसे भक्ति और परिवार के साथ बिताएँ।
  • अगर स्वास्थ्य भोजन माँगे तो व्रत की ज़िद न करें; व्रत उतना ही रखें जितना संभव हो।

देश भर में

शरद पूर्णिमा की क्षेत्रीय परंपराएँ और भोग

क्षेत्र के अनुसार

ब्रज (मथुरा और वृंदावन)
रास पूर्णिमा: मंदिरों में ठाकुर जी को श्वेत वस्त्र पहनाए जाते हैं, महारास का मंचन होता है, और वृंदावन में बांके बिहारी बाँसुरी के साथ दर्शन देते हैं; श्रद्धालु यमुना किनारे रात भर जागते हैं।
पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा
लगभग हर बंगाली घर में कोजागोरी लोक्खी पूजा: लक्ष्मी जी के पदचिह्नों वाली अल्पना, लक्ष्मी पांचाली का पाठ, शंख और उलूध्वनि, और खिचुड़ी, लाबड़ा व नारकेल नाड़ू का भोग।
ओडिशा
कुमार पूर्णिमा: अविवाहित लड़कियाँ नए कपड़े पहनकर सुबह सूर्य और रात को चंद्रमा की पूजा करती हैं, और कुमार (कार्तिकेय) जैसे पति की प्रार्थना करती हैं; शाम गीतों और खेलों से भरी रहती है।
महाराष्ट्र
कोजागिरी पूर्णिमा: परिवार केसर, इलायची और जायफल वाले मसाला दूध के साथ चाँद के नीचे जागते हैं, और बहुत से परिवार आश्विन पूर्णिमा पर सबसे बड़ी संतान का औक्षण (आरती) भी करते हैं।
गुजरात
शरद पूनम: पूर्ण चंद्रमा के नीचे गरबे की आख़िरी रात, और चाँदनी में रखकर खाए जाने वाले दूध-पोहे।
मिथिला (बिहार)
कोजागरा: बहुत से मैथिल परिवारों में उस वर्ष विवाहित वर का उत्सव। वधू के घर से मखाना, पान, दही, फल और मिठाई का भार आता है, रिश्तेदारों और पड़ोसियों में मखाना और पान बाँटा जाता है, और लक्ष्मी पूजा के साथ रात जागकर बिताई जाती है।
पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत
इसी पूर्णिमा पर रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती शोभायात्राओं और पाठ के साथ मनाई जाती है।

भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन

  • चावल की खीर चाँदनी वाली खीर: दूध, चावल, चीनी और इलायची, भोग लगाकर प्रसाद के रूप में।
  • कोजागिरी मसाला दूध केसर, इलायची, जायफल और मेवों के साथ उबाला दूध, इस रात का महाराष्ट्रीय पेय।
  • दूध-पोहा मीठे दूध में पोहा, गुजरात में चाँदनी में रखकर खाया जाता है।
  • नारकेल नाड़ू और खिचुड़ी का भोग बंगाल की लोक्खी पूजा की नारियल की मिठाई और खिचुड़ी, लाबड़ा, पायेश।
  • मखाना और दही मिथिला के कोजागरा में भार के साथ आते हैं; मखाना रिश्तेदारों में बाँटा जाता है।
  • फल और दूध चंद्रोदय तक पूर्णिमा का व्रत रखने वालों के लिए।

आने वाले वर्षों में शरद पूर्णिमा की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

आने वाले वर्षों में शरद पूर्णिमा की तारीख
वर्षतारीखस्थिति
2026इस वर्षरविवार, 25 अक्टूबर 2026बीत गई
2027गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027आने वाली
2028सोमवार, 2 अक्टूबर 2028आने वाली

पंचांगों में शरद पूर्णिमा की तारीख अलग क्यों होती है

2027 में, नई दिल्ली के लिए: कुछ पंचांग चंद्रोदय लगभग 4 मिनट बाद, शाम 5:01 पर, बताते हैं: जब चंद्रमा का केंद्र क्षितिज पर आता है, वायुमंडलीय अपवर्तन जोड़े बिना। यहाँ समय वह है जब उसका ऊपरी किनारा पहली बार दिखता है, यानी जब चाँद दिखाई देने लगता है।

दो पंचांग शरद पूर्णिमा की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: शरद पूर्णिमा का निर्णय निशीथ काल से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

शरद पूर्णिमा से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में शरद पूर्णिमा कब है?

शरद पूर्णिमा 2027 नई दिल्ली में गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027 को है। पूर्णिमा तिथि शाम 6:49 से शाम 7:17 (15 अक्टूबर) तक है; चंद्रोदय शाम 4:57 पर है, और कोजागरी मध्यरात्रि का समय रात 11:42 से रात 12:32 (15 अक्टूबर) तक है।

शरद पूर्णिमा की तिथि क्या है?

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि। नई दिल्ली में यह तिथि 14 अक्टूबर, शाम 6:50 से 15 अक्टूबर, शाम 7:17 तक है, और शरद पूर्णिमा का दिन मध्य रात्रि के निशीथ काल में चल रही तिथि से तय होता है।

नई दिल्ली में शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त क्या है?

चाँदनी में खीर: नई दिल्ली में गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027 को शाम 4:57 से रात 12:32 (15 अक्टूबर) तक। चंद्रोदय से मध्यरात्रि (निशीथ) के मुहूर्त की समाप्ति तक। चाँद निकल आने पर ढकी हुई खीर खुली चाँदनी में रखें, और यह समय पूरा होने पर अंदर लाकर भोग लगाएँ और प्रसाद के रूप में खाएँ — आधी रात को, या ठंडी जगह रखकर अगली सुबह।

दूसरे कैलेंडर में शरद पूर्णिमा की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल शरद पूर्णिमा कब है?

2028 में सोमवार, 2 अक्टूबर।

शरद पूर्णिमा पर खीर कब रखें?

चाँद निकलने के बाद खीर बाहर रखें और नई दिल्ली में शाम 4:57 से रात 12:32 (15 अक्टूबर) तक — यानी चंद्रोदय से मध्यरात्रि के मुहूर्त की समाप्ति तक — वहीं रहने दें। महीन कपड़े से ढकें, फिर अंदर लाकर आधी रात को भोग लगाकर खाएँ, या फ्रिज में रखकर सुबह खाएँ।

शरद पूर्णिमा पर चाँद कितने बजे निकलेगा?

नई दिल्ली में गुरुवार, 14 अक्टूबर 2027 को चंद्रोदय शाम 4:57 पर है — पूर्णिमा के चाँद की तरह सूर्यास्त के आसपास। देश के अलग-अलग हिस्सों में चंद्रोदय में एक घंटे से ज़्यादा का अंतर होता है, इसलिए अपने शहर का समय देखें; चाँद क्षितिज से ऊपर साफ़ दिखने पर अर्घ्य दें।

शरद पूर्णिमा की व्रत कथा क्या है?

यह एक साहूकार की दो बेटियों की कथा है: बड़ी बेटी पूर्णिमा का पूरा व्रत रखती थी, छोटी अधूरा छोड़ती थी और उसकी संतानें नहीं बचती थीं। जब उसने शरद पूर्णिमा का पूरा व्रत रखा, तो पूरे व्रतों के पुण्य से उसका मृत शिशु बड़ी बहन के वस्त्र के स्पर्श से जी उठा। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

कोजागरी लक्ष्मी पूजा क्या है और कब होती है?

यह शरद पूर्णिमा की रात जागरण के साथ होने वाली माँ लक्ष्मी की पूजा है, क्योंकि एक पुराने श्लोक के अनुसार वे ‘कौन जाग रहा है?’ पूछती हुई घूमती हैं। बंगाली घर इसे संध्या में अल्पना और लक्ष्मी पांचाली से शुरू करते हैं; मुख्य पूजा मध्यरात्रि के समय, नई दिल्ली में रात 11:42 से रात 12:32 (15 अक्टूबर) तक, होती है।

शरद पूर्णिमा पर चाँदनी में खीर क्यों रखते हैं?

परंपरा मानती है कि इस रात चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृत होता है; दूध, चावल और शक्कर — चंद्रमा के अपने श्वेत पदार्थ — से बनी खीर उसका आशीर्वाद पाने के लिए उसके नीचे रखी जाती है और फिर प्रसाद के रूप में खाई जाती है।

क्या शरद पूर्णिमा की खीर के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है?

कोई वैज्ञानिक अध्ययन यह नहीं दिखाता कि चाँदनी खीर को बदल देती है या उसे औषधि बना देती है; यह परंपरा भक्ति और ऋतु की है — ठंडी शरद रात में बाँटा जाने वाला हल्का दूध का व्यंजन। इसे प्रसाद के रूप में आनंद से खाएँ, ढका और साफ़ रखें, और किसी दवा की जगह न लें।

शरद पूर्णिमा के दिन क्या करना चाहिए?

सुबह स्नान करके संकल्प लें, संध्या में लक्ष्मी पूजा करें, उगते चाँद को अर्घ्य दें, खीर चाँदनी में रखें, दीपक जलाकर लक्ष्मी नाम के साथ रात का जागरण करें, मध्यरात्रि की पूजा करें, और अगली सुबह खीर का प्रसाद बाँटकर ज़रूरतमंद को दान दें।

शरद पूर्णिमा पर कौन-सा मंत्र जपें?

माँ लक्ष्मी के लिए ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ 108 बार, या महालक्ष्मी अष्टकम; चंद्रमा के लिए अर्घ्य के समय चंद्र श्लोक ‘दधिशङ्खतुषाराभं’, या ‘ॐ सों सोमाय नमः’। सभी ऊपर अर्थ सहित दिए गए हैं।

शरद पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?

परंपरा में यह सोलह कलाओं से पूर्ण चंद्रमा की रात है, जब माँ लक्ष्मी जागने वालों को आशीर्वाद देती हैं, और ब्रज में श्रीकृष्ण के महारास की रात; यह महर्षि वाल्मीकि की जयंती भी है। परिवार इसे लक्ष्मी पूजा, चंद्र अर्घ्य, खीर और जागरण के साथ मनाते हैं।

शरद पूर्णिमा का व्रत कैसे रखें?

सुबह संकल्प लेकर दिन भर फल, दूध और पानी पर, या एक बार भोजन पर रहें। शाम को माँ लक्ष्मी की पूजा करें, चाँद निकलने पर अर्घ्य दें, और चंद्र पूजा के बाद फल या खीर के प्रसाद से व्रत खोलें। व्रत उतना ही रखें जितना स्वास्थ्य अनुमति दे।

कोजागिरी पूर्णिमा क्या है?

कोजागिरी, ‘को जागर्ति’ (कौन जाग रहा है?) से, शरद पूर्णिमा का मराठी नाम है, जो लक्ष्मी जी के रात्रि जागरण से आया है; बंगाल में इसे कोजागोरी और मिथिला में कोजागरा कहते हैं। महाराष्ट्र में इसे चाँद के नीचे मसाला दूध के साथ मनाया जाता है, और बहुत से परिवार सबसे बड़ी संतान का औक्षण भी करते हैं।

कुछ कैलेंडर शरद पूर्णिमा दूसरे दिन क्यों दिखाते हैं?

क्योंकि पूर्णिमा दो दिनों में फैल सकती है। शरद पूर्णिमा वह रात है जिसकी मध्यरात्रि पर पूर्णिमा हो — तभी चाँद देखा जाता है और खीर रखी जाती है — जबकि कुछ कैलेंडर पूर्णिमा का व्रत अगले दिन दिखाते हैं, जिसके सूर्योदय पर पूर्णिमा हो। नई दिल्ली में पूर्णिमा शाम 6:49 से शाम 7:17 (15 अक्टूबर) तक है।

क्या शरद पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा एक ही हैं?

नहीं। गुरु पूर्णिमा आषाढ़ की पूर्णिमा है, जून या जुलाई में, जो महर्षि व्यास और अपने गुरुओं को समर्पित है; शरद पूर्णिमा आश्विन की पूर्णिमा है, सितंबर या अक्टूबर में, जो माँ लक्ष्मी, चंद्रमा और ब्रज में श्रीकृष्ण के रास को समर्पित है।