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तिथि कैलेंडर · नई दिल्ली

चतुर्थी 2026 में कब है

अगली तिथि · चतुर्थी 2026

करवा चौथ

गुरु, 29 अक्टूबर

चतुर्थी: 29 अक्टू, रात 1:07 → 29 अक्टू, रात 10:10

अगली तिथि: करवा चौथ — गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

उसके बाद: शुक्ल चतुर्थी — शुक्र, 13 नवंबर

करवा चौथ — गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

2026 में चतुर्थी 25 बार पड़ती है। नीचे हर तिथि का दिन, आरंभ और समाप्ति का समय और वह महीना दिया है जिसमें वह आती है।

नई दिल्ली

चतुर्थी जनवरी 2026

जनवरी 2026 में चतुर्थी 2 बार पड़ती है।

  • मंगलवार, 6 जनवरी 2026 कृष्ण पक्ष, माघ। तिथि 6 जन, सुबह 8:02 → 7 जन, सुबह 6:53 (क्षय तिथि)
  • गुरुवार, 22 जनवरी 2026 शुक्ल पक्ष, माघ। तिथि 22 जन, रात 2:48 → 23 जन, रात 2:29

चतुर्थी फरवरी 2026

फरवरी 2026 में चतुर्थी 2 बार पड़ती है।

  • गुरुवार, 5 फरवरी 2026 कृष्ण पक्ष, फाल्गुन। तिथि 5 फ़र, रात 12:10 → 6 फ़र, रात 12:23
  • शनिवार, 21 फरवरी 2026 शुक्ल पक्ष, फाल्गुन। तिथि 20 फ़र, दोपहर 2:39 → 21 फ़र, दोपहर 1:01

चतुर्थी मार्च 2026

मार्च 2026 में चतुर्थी 2 बार पड़ती है।

  • शनिवार, 7 मार्च 2026 कृष्ण पक्ष, चैत्र। तिथि 6 मार्च, शाम 5:54 → 7 मार्च, शाम 7:18
  • रविवार, 22 मार्च 2026 शुक्ल पक्ष, चैत्र। तिथि 21 मार्च, रात 11:57 → 22 मार्च, रात 9:17

चतुर्थी अप्रैल 2026

अप्रैल 2026 में चतुर्थी 2 बार पड़ती है।

  • सोमवार, 6 अप्रैल 2026 कृष्ण पक्ष, वैशाख। तिथि 5 अप्रै, दोपहर 12:00 → 6 अप्रै, दोपहर 2:11
  • सोमवार, 20 अप्रैल 2026 शुक्ल पक्ष, वैशाख। तिथि 20 अप्रै, सुबह 7:28 → 21 अप्रै, सुबह 4:15 (क्षय तिथि)

चतुर्थी मई 2026

मई 2026 में चतुर्थी 2 बार पड़ती है।

  • मंगलवार, 5 मई 2026 कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 5 मई, सुबह 5:25 → 6 मई, सुबह 7:52 (अगले दिन भी मान्य)
  • बुधवार, 20 मई 2026 शुक्ल पक्ष, अधिक ज्येष्ठ। तिथि 19 मई, दोपहर 2:19 → 20 मई, सुबह 11:07

चतुर्थी जून 2026

जून 2026 में चतुर्थी 2 बार पड़ती है।

  • गुरुवार, 4 जून 2026 कृष्ण पक्ष, अधिक ज्येष्ठ। तिथि 3 जून, रात 9:22 → 4 जून, रात 11:31
  • गुरुवार, 18 जून 2026 शुक्ल पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 17 जून, रात 9:39 → 18 जून, शाम 6:59

चतुर्थी जुलाई 2026

जुलाई 2026 में चतुर्थी 2 बार पड़ती है।

  • शनिवार, 4 जुलाई 2026 कृष्ण पक्ष, आषाढ़। तिथि 3 जुला, सुबह 11:21 → 4 जुला, दोपहर 12:40
  • शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 शुक्ल पक्ष, आषाढ़। तिथि 17 जुला, सुबह 6:28 → 18 जुला, सुबह 4:43 (क्षय तिथि)

चतुर्थी अगस्त 2026

अगस्त 2026 में चतुर्थी 2 बार पड़ती है।

  • रविवार, 2 अगस्त 2026 कृष्ण पक्ष, श्रावण। तिथि 1 अग, रात 11:08 → 2 अग, रात 11:15
  • रविवार, 16 अगस्त 2026 शुक्ल पक्ष, श्रावण। तिथि 15 अग, शाम 5:29 → 16 अग, शाम 4:53

चतुर्थी सितंबर 2026

सितंबर 2026 में चतुर्थी 3 बार पड़ती है।

  • मंगलवार, 1 सितंबर 2026 कृष्ण पक्ष, भाद्रपद। तिथि 31 अग, सुबह 8:51 → 1 सित, सुबह 7:42
  • मंगलवार, 15 सितंबर 2026 शुक्ल पक्ष, भाद्रपद। तिथि 14 सित, सुबह 7:07 → 15 सित, सुबह 7:44
  • बुधवार, 30 सितंबर 2026 कृष्ण पक्ष, आश्विन। तिथि 29 सित, शाम 5:11 → 30 सित, दोपहर 2:56

चतुर्थी अक्टूबर 2026

अक्टूबर 2026 में चतुर्थी 2 बार पड़ती है।

  • बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 शुक्ल पक्ष, आश्विन। तिथि 13 अक्टू, रात 11:28 → 15 अक्टू, रात 1:14
  • गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 कृष्ण पक्ष, कार्तिक। तिथि 29 अक्टू, रात 1:07 → 29 अक्टू, रात 10:10

चतुर्थी नवंबर 2026

नवंबर 2026 में चतुर्थी 2 बार पड़ती है।

  • शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 शुक्ल पक्ष, कार्तिक। तिथि 12 नव, शाम 6:10 → 13 नव, रात 8:43
  • शुक्रवार, 27 नवंबर 2026 कृष्ण पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 27 नव, सुबह 9:49 → 28 नव, सुबह 6:40 (क्षय तिथि)

चतुर्थी दिसंबर 2026

दिसंबर 2026 में चतुर्थी 2 बार पड़ती है।

  • रविवार, 13 दिसंबर 2026 शुक्ल पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 12 दिस, दोपहर 2:06 → 13 दिस, शाम 4:48
  • रविवार, 27 दिसंबर 2026 कृष्ण पक्ष, पौष। तिथि 26 दिस, रात 8:06 → 27 दिस, शाम 5:13

2026 की सभी चतुर्थी तिथियाँ

2026 की सभी चतुर्थी तिथियाँ
तारीखपक्षहिंदू माह (पूर्णिमांत)तिथि आरंभतिथि समाप्तटिप्पणी
मंगलवार, 6 जनवरी 2026कृष्णमाघ6 जन, सुबह 8:027 जन, सुबह 6:53क्षय तिथि
गुरुवार, 22 जनवरी 2026शुक्लमाघ22 जन, रात 2:4823 जन, रात 2:29—
गुरुवार, 5 फरवरी 2026कृष्णफाल्गुन5 फ़र, रात 12:106 फ़र, रात 12:23—
शनिवार, 21 फरवरी 2026शुक्लफाल्गुन20 फ़र, दोपहर 2:3921 फ़र, दोपहर 1:01—
शनिवार, 7 मार्च 2026कृष्णचैत्र6 मार्च, शाम 5:547 मार्च, शाम 7:18—
रविवार, 22 मार्च 2026शुक्लचैत्र21 मार्च, रात 11:5722 मार्च, रात 9:17—
सोमवार, 6 अप्रैल 2026कृष्णवैशाख5 अप्रै, दोपहर 12:006 अप्रै, दोपहर 2:11—
सोमवार, 20 अप्रैल 2026शुक्लवैशाख20 अप्रै, सुबह 7:2821 अप्रै, सुबह 4:15क्षय तिथि
मंगलवार, 5 मई 2026कृष्णज्येष्ठ5 मई, सुबह 5:256 मई, सुबह 7:52अगले दिन भी मान्य
बुधवार, 20 मई 2026शुक्लअधिक ज्येष्ठ19 मई, दोपहर 2:1920 मई, सुबह 11:07—
गुरुवार, 4 जून 2026कृष्णअधिक ज्येष्ठ3 जून, रात 9:224 जून, रात 11:31—
गुरुवार, 18 जून 2026शुक्लज्येष्ठ17 जून, रात 9:3918 जून, शाम 6:59—
शनिवार, 4 जुलाई 2026कृष्णआषाढ़3 जुला, सुबह 11:214 जुला, दोपहर 12:40—
शुक्रवार, 17 जुलाई 2026शुक्लआषाढ़17 जुला, सुबह 6:2818 जुला, सुबह 4:43क्षय तिथि
रविवार, 2 अगस्त 2026कृष्णश्रावण1 अग, रात 11:082 अग, रात 11:15—
रविवार, 16 अगस्त 2026शुक्लश्रावण15 अग, शाम 5:2916 अग, शाम 4:53—
मंगलवार, 1 सितंबर 2026कृष्णभाद्रपद31 अग, सुबह 8:511 सित, सुबह 7:42—
मंगलवार, 15 सितंबर 2026शुक्लभाद्रपद14 सित, सुबह 7:0715 सित, सुबह 7:44—
बुधवार, 30 सितंबर 2026कृष्णआश्विन29 सित, शाम 5:1130 सित, दोपहर 2:56—
बुधवार, 14 अक्टूबर 2026शुक्लआश्विन13 अक्टू, रात 11:2815 अक्टू, रात 1:14—
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026अगलीकृष्णकार्तिक29 अक्टू, रात 1:0729 अक्टू, रात 10:10—
शुक्रवार, 13 नवंबर 2026शुक्लकार्तिक12 नव, शाम 6:1013 नव, रात 8:43—
शुक्रवार, 27 नवंबर 2026कृष्णमार्गशीर्ष27 नव, सुबह 9:4928 नव, सुबह 6:40क्षय तिथि
रविवार, 13 दिसंबर 2026शुक्लमार्गशीर्ष12 दिस, दोपहर 2:0613 दिस, शाम 4:48—
रविवार, 27 दिसंबर 2026कृष्णपौष26 दिस, रात 8:0627 दिस, शाम 5:13—
  • यह तालिका नई दिल्ली के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से इसी समय गणना की गई है — किसी छपे कैलेंडर से नकल नहीं की गई।
  • हर तिथि का आरंभ और समाप्ति समय दिया गया है, ताकि आप दिन स्वयं जाँच सकें।

समय नई दिल्ली के अनुसार हैं। जिस पंक्ति पर क्षय तिथि लिखा है, वह तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं थी — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो गई, और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। जिस पर अगले दिन भी मान्य लिखा है, वहाँ तिथि दो सूर्योदय तक चलती है, इसलिए दो परंपराएँ दो अलग दिन लेती हैं।

चतुर्थी का दिन कैसे तय होता है

तिथि एक चंद्रमास का तीसवाँ भाग है — चंद्रमा का सूर्य से 12° आगे बढ़ना — इसलिए यह औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, जबकि दिन 24 घंटे का। इसीलिए तिथि लगभग कभी सूर्योदय पर आरंभ नहीं होती। यह पृष्ठ सामान्य नियम मानता है: सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, दिन उसी का कहलाता है। ऊपर की तालिका में इसके दो परिणाम दिखते हैं और दोनों त्रुटि नहीं हैं। जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय पर चलती है, तब दोनों दिन सचमुच उसके होते हैं और परंपराएँ बँट जाती हैं। जब वह किसी सूर्योदय को नहीं छूती, तब वह क्षय तिथि है और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं; दिन उनकी व्याख्या है।

2026 की अन्य तिथियाँ

सामान्य प्रश्न

चतुर्थी कब है 2026 में?

2026 में अगली चतुर्थी गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। तिथि 29 अक्टू, रात 1:07 → 29 अक्टू, रात 10:10 तक चलती है (नई दिल्ली के समय अनुसार)। पूरे वर्ष की 25 तिथियाँ ऊपर तालिका में दी गई हैं।

2026 में चतुर्थी कितनी बार आती है?

25 बार — शुक्ल पक्ष में 12 और कृष्ण पक्ष में 13। संख्या हर वर्ष बदलती है क्योंकि बारह चंद्रमास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे पड़ते हैं, और अधिक मास इसे और बदल देता है।

शुक्ल चतुर्थी और कृष्ण चतुर्थी में क्या अंतर है?

दोनों एक ही तिथि संख्या हैं, अलग पक्ष की। शुक्ल पक्ष अमावस्या के बाद का उजाला पखवाड़ा है और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद का। चतुर्थी हर चंद्रमास में दो बार आती है, एक बार प्रत्येक पक्ष में, और ऊपर की तालिका में पक्ष का स्तंभ बताता है कि कौन-सी कौन है।

मेरे कैलेंडर में चतुर्थी की तारीख अलग क्यों है?

क्योंकि तिथि शायद ही कभी सूर्योदय पर आरंभ या समाप्त होती है। जब वह दो दिन के सूर्योदय पर चल रही हो, या किसी पर भी न हो, तब परंपराएँ बँट जाती हैं। ऊपर दिए आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं — दिन उनकी व्याख्या है, और यह पृष्ठ बताता है कि उसने कौन-सी व्याख्या ली।

क्या चतुर्थी पूरे भारत में एक ही दिन होती है?

हमेशा नहीं। दिन सूर्योदय से तय होता है और भारत में सूर्योदय एक घंटे से अधिक अंतर रखता है, इसलिए एक तिथि जो नई दिल्ली में सूर्योदय के ठीक बाद समाप्त होती है, पश्चिम के किसी शहर में उससे पहले समाप्त हो सकती है और दिन बदल जाता है। ऊपर शहर बदलकर देखिए।

चतुर्थी को और किन नामों से खोजा जाता है?

चौथ, चतुर्थी तिथि — ये सब एक ही तिथि हैं। इस पृष्ठ का पता एक ही है ताकि उत्तर एक जगह रहे।

क्षय चतुर्थी क्या होती है?

2026 में 4 बार चतुर्थी क्षय तिथि है: मंगलवार, 6 जनवरी 2026; सोमवार, 20 अप्रैल 2026; शुक्रवार, 17 जुलाई 2026; शुक्रवार, 27 नवंबर 2026। क्षय तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो जाती है। व्रत फिर भी रखा जाता है, उसी दिन जिस दिन वह चली, पर सामान्य सूर्योदय नियम वहाँ लागू नहीं होता।