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शुक्ल पक्ष · तृतीया तिथि · भाद्रपद

हरतालिका तीज 2027 कब है?

हरतालिका तीज 2027

312 दिन बाद

शुक्र, 3 सितंबर

2027 में हरतालिका तीज शुक्रवार, 3 सितंबर को है। नई दिल्ली में तृतीया तिथि 2 सितंबर, शाम 4:50 से 3 सितंबर, दोपहर 2:19 तक रहेगी।

2028: मंगलवार, 22 अगस्त 2028

हरतालिका तीज कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

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नई दिल्ली के लिए गणना

हरतालिका तीज 2027: तारीख और तिथि का समय

शुक्रवार, 3 सितंबर 2027

तिथि
तृतीया, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
भाद्रपद
तिथि आरंभ
2 सितंबर, शाम 4:50
तिथि समाप्त
3 सितंबर, दोपहर 2:19
दिन का निर्णय
सूर्योदय
नई दिल्ली में सूर्योदय
3 सितंबर, सुबह 5:59

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: हरतालिका तीज का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

हरतालिका तीज 2027 के सभी मुहूर्त · नई दिल्ली

हरतालिका तीज 2027 शुभ मुहूर्त

हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया का व्रत है, जिसमें सुहागिनें बिना अन्न और जल के निर्जला उपवास रखकर मिट्टी या बालू से बने शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं; कुंवारी कन्याएँ शिव जैसे वर के लिए यह व्रत रखती हैं। नई दिल्ली में यह शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 को है, और तृतीया तिथि शाम 4:50 (2 सितंबर) से दोपहर 2:19 तक रहेगी। पूजा तृतीया रहते सुबह होती है (सुबह 5:59 से सुबह 8:32 तक), या शाम को तृतीया रहते प्रदोष काल में (इस वर्ष उपलब्ध नहीं, क्योंकि उस समय तृतीया तिथि नहीं)। हरियाली तीज (श्रावण शुक्ल तृतीया) और कजरी तीज (भाद्रपद कृष्ण तृतीया) अलग दिन हैं, और उनके रीति-रिवाज भी अलग हैं।

हरतालिका तीज 2027 के सभी मुहूर्त — नई दिल्ली
मुहूर्तनई दिल्ली में समयकिसके लिए
प्रातःकाल हरतालिका पूजा मुहूर्तसुबह 5:59 से सुबह 8:32 तकप्रातःकाल, दिन का पहला पाँचवाँ भाग, जब तक तृतीया रहे।

बहुत से पंचांग हरतालिका पूजा सुबह, सूर्योदय के बाद के प्रातःकाल में, तृतीया रहते करने को कहते हैं। जिस साल तृतीया सूर्योदय के कुछ देर बाद ही खत्म हो जाए, उस साल यह समय छोटा होता है, इसलिए भोर से पहले स्नान करके मिट्टी की प्रतिमाएँ सजा लें और समय शुरू होते ही पूजा करें। जिस साल तृतीया दिन में देर से शुरू हो, उस साल सुबह का मुहूर्त नहीं बनता और नीचे दिया शाम का मुहूर्त ही मुख्य है।

प्रदोष काल हरतालिका पूजा मुहूर्तइस वर्ष इस समय तृतीया तिथि नहीं है।

उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में बहुत से परिवार मुख्य पूजा और कथा शाम को करते हैं, सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्तों वाले प्रदोष काल में। यहाँ दिया समय तृतीया रहते प्रदोष का है। जिस साल शाम तक तृतीया खत्म हो जाए, उस साल यह नहीं बनता, और शाम की पूजा वाले परिवार व्रत के दिन के प्रदोष काल में ही पूजा करते हैं।

व्रत के दिन का प्रदोष कालशाम 6:41 से रात 8:56 तकसूर्यास्त से रात के तीन मुहूर्त (रात का पाँचवाँ भाग)।

व्रत के दिन सूर्यास्त से रात के तीसरे मुहूर्त के अंत तक, तिथि चाहे जो हो: तृतीया खत्म हो जाने पर शाम की पूजा और सामूहिक कथा का समय, और यहीं से रात का जागरण शुरू होता है।

सूर्योदय: व्रत यहीं से गिना जाता हैसुबह 5:59क्षितिज पर सूर्य का ऊपरी किनारा दिखने का समय।

निर्जला व्रत व्रत वाले दिन के सूर्योदय से अगली सुबह की पूजा तक चलता है। जिन परिवारों में व्रत से पहले हल्का भोजन करने की रीति है, वे उसे सूर्योदय से पहले पूरा कर लेते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त: स्नान और श्रृंगारसुबह 4:29 से सुबह 5:14 तकरात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, जो सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले ख़त्म होता है।

भोर से पहले का समय स्नान, सोलह श्रृंगार और मिट्टी की प्रतिमाएँ व फुलेरा सजाने के लिए, खासकर उस साल जब सुबह का मुहूर्त जल्दी खत्म हो रहा हो।

उस दिन के शुभ समय

उस दिन के शुभ समय
मुहूर्तनई दिल्ली में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्तसुबह 11:55 से दोपहर 12:45शुभ
अमृत कालसुबह 10:19 से सुबह 11:48सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:29 से सुबह 5:14शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
अवधिनई दिल्ली में समय
राहु कालसुबह 10:45 से दोपहर 12:20
यमगण्ड कालदोपहर 3:30 से शाम 5:05
दुर्मुहूर्त (पहला)सुबह 8:32 से सुबह 9:22
दुर्मुहूर्त (दूसरा)दोपहर 12:45 से दोपहर 1:36
वर्ज्यम्रात 11:32 से रात 1:04

ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।

पूजा विधि · घर पर, क्रम से

हरतालिका तीज पूजा विधि

  1. एक दिन पहले

    शाम को मेहंदी लगाएँ और सादा सात्विक भोजन करें। बहुत सी महिलाएँ भोग की मिठाइयाँ एक दिन पहले ही बना लेती हैं, और कुछ परिवारों में व्रत के दिन भोर से पहले हल्का भोजन किया जाता है।

  2. स्नान, श्रृंगार और संकल्प

    जल्दी स्नान करके नए वस्त्र पहनें, प्रायः हरे या लाल, और पूरा श्रृंगार करें। हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर शिव-पार्वती की कृपा और अखंड सौभाग्य के लिए हरतालिका व्रत का संकल्प लें: निर्जला, या जैसा आपका स्वास्थ्य अनुमति दे।

  3. प्रतिमाएँ बनाना

    साफ बालू या मिट्टी से (बहुत से लोग नदी किनारे की काली मिट्टी लेते हैं) शिवलिंग, माता पार्वती और गणेश जी बनाएँ, या मिट्टी की बनी-बनाई प्रतिमाएँ रखें। महाराष्ट्र में पार्वती की सखी की प्रतिमा भी बनाई जाती है। प्लास्टर ऑफ पेरिस से बचें, क्योंकि अगली सुबह प्रतिमाओं का विसर्जन होता है।

  4. फुलेरा और चौकी

    लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ और केले के तने व पत्तों से उसके ऊपर छोटा मंडप बनाएँ। प्रतिमाओं के ऊपर फूलों का फुलेरा लटकाएँ, और पास में आम के पत्तों व नारियल वाला कलश रखें।

  5. पहले गणेश पूजा

    घी का दीपक और धूप जलाकर दूर्वा, रोली और मिठाई से गणेश जी की पूजा करें और 'ॐ गं गणपतये नमः' बोलें, ताकि व्रत निर्विघ्न पूरा हो।

  6. शिव पूजा

    शिवलिंग को जल और पंचामृत से स्नान कराएँ, फिर चंदन, अक्षत, सफेद फूल, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, शमी पत्र, जनेऊ और वस्त्र चढ़ाएँ, साथ में 'ॐ नमः शिवाय' या नीचे दिए शिव के नाम बोलें।

  7. सुहाग सामग्री से पार्वती पूजा

    माता पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग की पूरी सामग्री अर्पित करें: सिंदूर, बिंदी, चूड़ियाँ, मेहंदी, काजल, आलता, कंघी और शीशा, साथ में फूल और देवी के नाम। बहुत से परिवार दोनों देवताओं को तरह-तरह के पत्ते (पत्री) भी चढ़ाते हैं।

  8. कथा

    परिवार या मोहल्ले की महिलाओं के साथ बैठकर नीचे दी गई हरतालिका व्रत कथा सुनें या पढ़ें; हाथ में अक्षत और फूल रखें और कथा पूरी होने पर उन्हें अर्पित करें।

  9. आरती और भोग

    कपूर और घी के दीपक से शिव-पार्वती की आरती करें; ज़्यादातर घरों में नीचे दी 'ॐ जय शिव ओंकारा' और पार्वती जी की आरती गाई जाती है। मिठाई और फल का भोग लगाएँ।

  10. रात्रि जागरण

    पूरी रात भजन, तीज के गीत और शिव नाम के साथ जागें; बहुत से परिवार रात के चारों प्रहर में पूजा दोहराते हैं। दीपक सुबह तक जलता रहे।

  11. सुबह की पूजा और विसर्जन

    अगली सुबह स्नान करके अंतिम पूजा और आरती करें और भोग लगाएँ, फिर मिट्टी की प्रतिमाओं को नदी, तालाब या घर में पानी भरे बर्तन में विसर्जित करें; बाद में वह पानी और मिट्टी बगीचे या गमले में डाल दें।

  12. सुहाग दान, फिर पारण

    सुहाग की सामग्री, साड़ी या चुनरी और दक्षिणा किसी सुहागिन को, प्रायः अपनी सास को, देकर आशीर्वाद लें। फिर जल और प्रसाद से व्रत खोलें और सादा भोजन करें।

सामग्री · पहले से तैयार रखें

हरतालिका तीज पूजा सामग्री सूची

  • साफ बालू या मिट्टी शिवलिंग, पार्वती और गणेश जी बनाने के लिए; या मिट्टी की बनी प्रतिमाएँ, प्लास्टर ऑफ पेरिस की कभी नहीं।
  • लकड़ी की चौकी और लाल या पीला कपड़ा प्रतिमाओं का आसन।
  • केले के तने और पत्ते चौकी के ऊपर छोटे मंडप के लिए।
  • फुलेरा के लिए फूल गेंदे और मौसमी फूल, जिन्हें पिरोकर प्रतिमाओं के ऊपर फुलेरा लटकाया जाता है।
  • कलश, आम के पत्ते और नारियल चौकी के पास रखें; नारियल पर लाल कपड़ा लपेटें।
  • बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और शमी पत्र शिव जी की अपनी प्रिय सामग्री; बेलपत्र साबुत हों, कटे-फटे नहीं।
  • तरह-तरह के पत्ते (पत्री) बहुत से परिवार दोनों देवताओं को कई प्रकार के पत्ते चढ़ाते हैं।
  • माता पार्वती के लिए सुहाग सामग्री सिंदूर, बिंदी, चूड़ियाँ, मेहंदी, काजल, आलता, कंघी, शीशा और लाल चुनरी; अगली सुबह यह किसी सुहागिन को दी जाती है।
  • जनेऊ और सफेद वस्त्र शिव जी के लिए।
  • पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और शक्कर, शिवलिंग के स्नान के लिए।
  • रोली, हल्दी, चंदन और अक्षत तिलक और पूजन के लिए।
  • दूर्वा गणेश जी के लिए।
  • घी का दीपक, धूप और कपूर दीपक पूरी रात जलता रहता है।
  • पान, सुपारी, लौंग और इलायची देवताओं के सामने रखने के लिए।
  • फल केला और मौसमी फल।
  • मिठाई बिहार-झारखंड में ठेकुआ और पेड़किया; बाकी जगह लड्डू या घर की बनी कोई मिठाई।
  • व्रत कथा कथा की पुस्तक, या यही पेज।
  • दक्षिणा सुहाग सामग्री पाने वाली सुहागिन या पुरोहित के लिए।

मंत्र · अर्थ के साथ

हरतालिका तीज के मंत्र और आरती

गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

Om Gam Ganapataye Namah

अर्थ: ॐ; गं, गणपति का बीज अक्षर: गणपति को नमस्कार।

कब और कैसे: आरंभ में, मिट्टी के गणेश जी के सामने, 11 बार। इस बीज अक्षर की व्याख्या गणपति अथर्वशीर्ष में है।

हरतालिका व्रत का संकल्प

मम समस्तपापक्षयपूर्वकसप्तजन्मराज्याखण्डितसौभाग्यादिवृद्धये उमामहेश्वरप्रीत्यर्थं हरितालिकाव्रतमहं करिष्ये ।

Mama samasta-papa-kshaya-purvaka-sapta-janma-rajya-akhandita-saubhagyadi-vriddhaye Umamaheshvara-prityartham Haritalika-vratam aham karishye

अर्थ: मेरे सब पापों के नाश के साथ सात जन्मों तक समृद्धि, अखंड सौभाग्य आदि की वृद्धि के लिए, और उमा-महेश्वर की प्रसन्नता के लिए, मैं हरितालिका व्रत करूँगी।

कब और कैसे: व्रतराज में दिया गया संकल्प, हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर। पुरोहित इससे पहले स्थान, दिन, आपका नाम और गोत्र जोड़ते हैं; अपनी मनोकामना आप अपने शब्दों में जोड़ सकती हैं।

उमा-महेश्वर मंत्र

ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः

Om Umamaheshvarabhyam Namah

अर्थ: ॐ: उमा और महेश्वर को, दोनों को साथ, नमस्कार।

कब और कैसे: शिव-पार्वती को फूल और बेलपत्र चढ़ाते समय; चाहें तो माला पर 108 बार, दांपत्य में प्रेम और सामंजस्य के लिए।

माता पार्वती के नाम

ॐ उमायै नमः । ॐ गौर्यै नमः । ॐ पार्वत्यै नमः । ॐ जगद्धात्र्यै नमः । ॐ जगत्प्रतिष्ठायै नमः । ॐ शान्तिरूपिण्यै नमः । ॐ देव्यै नमः । ॐ लोकवन्दितायै नमः । ॐ काल्यै नमः । ॐ शिवायै नमः । ॐ भवान्यै नमः । ॐ रुद्राण्यै नमः । ॐ शर्वाण्यै नमः । ॐ मङ्गलदात्र्यै नमः ॥

Om Umayai Namah. Om Gauryai Namah. Om Parvatyai Namah. Om Jagaddhatryai Namah. Om Jagatpratishthayai Namah. Om Shantirupinyai Namah. Om Devyai Namah. Om Lokavanditayai Namah. Om Kalyai Namah. Om Shivayai Namah. Om Bhavanyai Namah. Om Rudranyai Namah. Om Sharvanyai Namah. Om Mangaladatryai Namah.

अर्थ: उमा को नमस्कार; गौरी को; पर्वतराज की पुत्री पार्वती को; जगत का पालन करने वाली को; जगत की आधार को; शांति स्वरूपा को; देवी को; सब लोकों से वंदित को; काली को; शिव की अर्धांगिनी, कल्याणी को; भवानी को; रुद्राणी को; शर्वाणी को; मंगल देने वाली को।

कब और कैसे: व्रतराज की हरितालिका पूजा में हर नाम से प्रतिमा के एक अंग की पूजा होती है, चरणों से सिर तक; घर पर आप हर नाम के साथ फूल, सिंदूर या अक्षत अर्पित कर सकती हैं।

शिव जी के नाम

ॐ हराय नमः । ॐ महेश्वराय नमः । ॐ शम्भवे नमः । ॐ शूलपाणये नमः । ॐ पिनाकधृषे नमः । ॐ शिवाय नमः । ॐ पशुपतये नमः । ॐ महादेवाय नमः ॥

Om Haraya Namah. Om Maheshvaraya Namah. Om Shambhave Namah. Om Shulapanaye Namah. Om Pinakadhrishe Namah. Om Shivaya Namah. Om Pashupataye Namah. Om Mahadevaya Namah.

अर्थ: दुख हरने वाले हर को नमस्कार; महेश्वर को; सुख देने वाले शंभु को; त्रिशूलधारी को; पिनाक धनुषधारी को; कल्याणकारी शिव को; सब प्राणियों के स्वामी पशुपति को; महादेव को।

कब और कैसे: शिव पुराण में मिट्टी के शिवलिंग की पूजा के लिए दिए गए आठ नाम, मिट्टी लाने से विदाई तक हर चरण के लिए एक; बहुत से परिवार शिवलिंग पर हर अर्पण के साथ एक नाम बोलते हैं: जल, चंदन, बेलपत्र, धतूरा और फूल।

पंचाक्षर मंत्र

ॐ नमः शिवाय

Om Namah Shivaya

अर्थ: ॐ: शिव को नमस्कार।

कब और कैसे: बेलपत्र चढ़ाते समय, और रात भर जागरण में बार-बार। 'नमः शिवाय' शब्द यजुर्वेद के श्रीरुद्रम् से हैं।

माता गौरी की स्तुति

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Sarva-mangala-mangalye shive sarvartha-sadhike
sharanye tryambake gauri narayani namo'stu te

अर्थ: हे सब मंगलों की मंगलरूपा, शिवा, सब मनोरथ पूरे करने वाली, शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली गौरी, नारायणी: आपको नमस्कार।

कब और कैसे: पार्वती पूजा के अंत में, दांपत्य और घर-परिवार पर कृपा माँगते हुए। यह देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) के ग्यारहवें अध्याय से है।

कर्पूरगौरं

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

Karpura-gauram karunavataram samsara-saram bhujagendra-haram
sada vasantam hridayaravinde bhavam bhavani-sahitam namami

अर्थ: कपूर जैसे गौर, करुणा के अवतार, संसार के सार, नागराज का हार पहने, सदा हृदय-कमल में बसने वाले भव, यानी शिव को, भवानी यानी पार्वती सहित, मैं नमस्कार करता/करती हूँ।

कब और कैसे: आरती के बाद गाया जाता है। इसमें शिव को भवानी के साथ प्रणाम है, और तीज का भाव यही है।

आरती शिव जी की आरती: ॐ जय शिव ओंकारा पूरी आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

Om jai Shiv Omkara, swami jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, arddhangi dhara.
Om jai Shiv Omkara.

Ekanan chaturanan panchanan raje.
Hansasan Garudasan vrishvahan saje.
Om jai Shiv Omkara.

Do bhuj char chaturbhuj dasbhuj ati sohe.
Trigun roop nirakhte tribhuvan jan mohe.
Om jai Shiv Omkara.

Akshamala vanmala, mundmala dhari.
Chandan mrigmad sohai, bhale shashidhari.
Om jai Shiv Omkara.

Shvetambar pitambar baghambar ange.
Sanakadik Garunadik bhutadik sange.
Om jai Shiv Omkara.

Kar ke madhya kamandal chakra trishooldhari.
Sukhkari dukhhari jagpalan kari.
Om jai Shiv Omkara.

Brahma Vishnu Sadashiv janat aviveka.
Pranavakshar mein shobhit ye teenon eka.
Om jai Shiv Omkara.

Trigunswami ji ki aarti jo koi nar gave.
Kahat Shivanand Swami sukh sampati pave.
Om jai Shiv Omkara.

Om jai Shiv Omkara, swami jai Shiv Omkara.
Brahma, Vishnu, Sadashiv, arddhangi dhara.

यह आरती उसी रूप में है जैसे आम तौर पर गाई जाती है। गीता प्रेस के 'आरती-संग्रह' में यह 'जय शिव ओंकारा, भज शिव ओंकारा' से शुरू होती है और टेक 'ॐ हर हर महादेव' है; उसमें 'त्रिगुण रूप' की जगह 'तीनों रूप', 'चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी' की जगह 'त्रिपुरारी कंसारी करमाला धारी', 'कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधारी' की जगह 'कर मध्ये सुकमण्डलु चक्र शूलधारी' और 'कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे' की जगह 'भनत शिवानन्द स्वामी मनवाञ्छित पावै' छपा है। छपा पाठ

कथा · कहानी और उसका अर्थ

हरतालिका तीज की कथा और महत्व

कथा

हरतालिका व्रत की कथा स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी, यह याद दिलाने के लिए कि उन्होंने शिव को कैसे पाया। पर्वतराज हिमवान की पुत्री के रूप में जन्मी पार्वती ने बचपन में ही शिव को मन से वर लिया था। हिमालय में गंगा के तट पर उन्होंने वर्षों तक कठोर तप किया, गर्मी-सर्दी सहते हुए, कभी केवल सूखे पत्ते खाकर और कभी केवल वायु पीकर, यहाँ तक कि पिता उन्हें इस हाल में देखकर दुखी रहने लगे।

तभी देवर्षि नारद हिमवान के पास एक प्रस्ताव लेकर आए: भगवान विष्णु उनकी पुत्री से विवाह करना चाहते हैं। हिमवान ने खुशी से हाँ कर दी। यह सुनकर पार्वती का हृदय टूट गया, क्योंकि उन्होंने मन से केवल शिव को ही पति माना था, और उन्होंने अपनी सखी को सारी बात बताई।

सखी (कई कथाओं में सखियाँ) उन्हें चुपचाप घने वन में एक गुफा में ले गई, जहाँ पिता उन्हें न ढूँढ सकें। इसी से व्रत का नाम पड़ा: 'हरत' यानी हर ले जाना और 'आलिका' यानी सखी। वहाँ भाद्रपद शुक्ल तृतीया को, हस्त नक्षत्र में, पार्वती ने नदी की बालू से शिवलिंग बनाया, फूल-पत्तों से उसकी पूजा की, बिना अन्न-जल के व्रत रखा और पूरी रात शिव का गुणगान करते हुए जागती रहीं।

उनके तप से शिव का आसन डोल उठा। शिव प्रकट हुए और वर माँगने को कहा; पार्वती ने उन्हें पति रूप में माँगा, और शिव ने 'तथास्तु' कहा। सुबह पार्वती ने शिवलिंग और पूजा सामग्री नदी में विसर्जित की और सखी के साथ व्रत का पारण किया।

उधर हिमवान ने पुत्री को हर जगह ढूँढा। जब वे मिलीं, तो पार्वती ने कहा कि वे शिव के सिवा किसी से विवाह नहीं करेंगी; पिता ने बात मान ली, और समय आने पर विधि-विधान से शिव-पार्वती का विवाह हुआ। कथा के अंत में शिव का वचन है: जो स्त्री श्रद्धा से यह व्रत करती है उसे अखंड सौभाग्य मिलता है, और कुंवारी कन्या को मनचाहा वर।

पुरानी छपी कथाओं के अंत में व्रत के दिन खाने, पानी पीने या सोने वाली स्त्री के लिए कड़ी चेतावनियाँ लिखी हैं। बहुत से परिवार इन्हें व्रत की गंभीरता बताने का कथा का तरीका मानते हैं। यह व्रत प्रेम की साधना है, और किसी से यह अपेक्षा नहीं कि वह अपना स्वास्थ्य दाँव पर लगाकर इसे निभाए।

महत्व

हरतालिका तीज माता पार्वती के संकल्प का उत्सव है: उन्होंने शिव को स्वयं चुना और हर बाधा के बावजूद तप से उन्हें पाया। सुहागिनें यह व्रत अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं, और कुंवारी कन्याएँ पार्वती की तरह मनचाहे वर के लिए। मिट्टी की प्रतिमाएँ, रात का जागरण और साथ बैठकर सुनी कथा इसे पूजा के साथ-साथ महिलाओं का मिलन-पर्व भी बनाते हैं।

बरसात की तीन तीजों में यह आखिरी और सबसे कठिन है। हरियाली (सावन) तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को होती है: झूले, हरे कपड़े और मायके से आए सिंधारे का त्योहार। कजरी तीज, जिसे कजली, सातुड़ी या बड़ी तीज भी कहते हैं, भाद्रपद कृष्ण तृतीया को, हरतालिका से एक पखवाड़ा पहले आती है। हरतालिका भाद्रपद शुक्ल तृतीया को, गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर होती है। आखा तीज यानी अक्षय तृतीया वैशाख में, वसंत का पर्व है। चारों अलग-अलग दिन हैं।

पहले गौरी, फिर गणेश: हरतालिका की तृतीया के बाद चतुर्थी आती है, और कर्नाटक में यही तृतीया गौरी के मायके आने का दिन है, बेटे गणेश के आने से एक दिन पहले। जिस साल तृतीया सुबह जल्दी खत्म हो जाए, उस साल तीज और गणेश चतुर्थी एक ही तारीख को पड़ती हैं: सुबह तीज की पूजा होती है और दोपहर में गणेश स्थापना।

उपाय · परंपरा

हरतालिका तीज के पारंपरिक उपाय

सुहाग सामग्री आगे बढ़ाएँ

श्रृंगार की सामग्री माता पार्वती को अर्पित करें और अगली सुबह मिठाई और दक्षिणा के साथ किसी सुहागिन को, प्रायः अपनी सास को, दें। मान्यता है कि देवी का आशीर्वाद इसके साथ आगे जाता है।

उमा-महेश्वर का जप

मिट्टी की प्रतिमाओं के सामने 'ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः' का 108 बार जप करें, दांपत्य में प्रेम और सामंजस्य के लिए।

शिव जी को बेलपत्र

शिवलिंग पर 11 या 108 साबुत बेलपत्र चढ़ाएँ, हर पत्ते के साथ 'ॐ नमः शिवाय', पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखते हुए।

अच्छे वर के लिए

कुंवारी कन्याएँ यह व्रत रखें, चाहें तो फल और जल के साथ, माता पार्वती को लाल चुनरी चढ़ाएँ और उन्हीं की तरह मन के अनुकूल वर के लिए प्रार्थना करें।

कथा सबके साथ सुनें

साथ बैठकर कथा सुनना और गीतों के साथ रात का जागरण करना व्रत का प्राण माना जाता है; परिवार या मोहल्ले की महिलाओं को बुलाएँ।

खाने से पहले दान

पारण के भोजन से पहले किसी ज़रूरतमंद या गाय को भोजन, फल या भोग की मिठाई दें, ताकि व्रत दान के साथ पूरा हो।

परंपरा, संक्षेप में

हरतालिका तीज पर क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • व्रत उसी रूप में रखें जैसा आपका स्वास्थ्य अनुमति दे: निर्जला, जल के साथ, या फलाहार।
  • पूजा सुबह तृतीया रहते करें या शाम को प्रदोष में; दोनों मुहूर्त ऊपर दिए हैं।
  • प्रतिमाएँ मिट्टी या बालू की बनाएँ और अगली सुबह आदर से विसर्जित करें।
  • पूरी कथा सुनें या पढ़ें, हो सके तो सबके साथ।
  • दीपक जलाए रखें और जितना हो सके, रात भर भजन के साथ जागें।
  • अगली सुबह स्नान और अंतिम पूजा के बाद ही व्रत खोलें।
  • सुहाग सामग्री किसी सुहागिन को दें और बड़ों का आशीर्वाद लें।
  • दिन शांत रखें: मीठी वाणी, कोई झगड़ा नहीं।

क्या न करें

  • अगली सुबह की पूजा और विसर्जन से पहले व्रत न तोड़ें, जब तक स्वास्थ्य के कारण ज़रूरी न हो।
  • गर्भावस्था, बीमारी, डायबिटीज़ या बढ़ती उम्र में निर्जला व्रत न रखें; फल-जल वाला व्रत या केवल पूजा और कथा करें, और डॉक्टर से सलाह लें।
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाएँ न लें, और पूजा सामग्री प्लास्टिक में भरकर नदी में न डालें।
  • व्रत के दिन झगड़ा, कटु वचन या निंदा न करें।
  • पूजा की बची सामग्री कूड़े में न फेंकें; विसर्जित करें या किसी पेड़ के नीचे रख दें।
  • कथा छोड़ें नहीं: कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

देश भर में

हरतालिका तीज की क्षेत्रीय परंपराएँ और भोग

क्षेत्र के अनुसार

उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश
यहाँ हरतालिका को बस 'तीज' कहते हैं, साल का बड़ा सुहाग-व्रत: निर्जला, फुलेरे के नीचे मिट्टी की प्रतिमाएँ, शाम को अक्सर किसी आँगन में मिलकर पूजा और कथा, और रात भर गीत। बिहार-झारखंड में भोग के लिए ठेकुआ और पेड़किया बनते हैं, और नई दुल्हन की पहली तीज खास धूमधाम से मनाई जाती है।
राजस्थान
राजस्थान की प्रसिद्ध तीजें अलग दिन हैं: हरियाली (सावन) तीज, जब जयपुर में सिटी पैलेस से तीज माता की सवारी निकलती है, और कजली या बड़ी तीज, हरतालिका से एक पखवाड़ा पहले, जिसका बूंदी में मेला लगता है। हरतालिका यहाँ घरों में मनाई जाती है, खासकर पूर्व और मध्य भारत से आए परिवारों में।
महाराष्ट्र
हरतालिका गणपति के आगमन से एक दिन पहले मनाई जाती है। महिलाएँ बालू या मिट्टी से पार्वती, उनकी सखी और शिवलिंग बनाती हैं, कई तरह के पत्तों और फूलों से पूजा करती हैं, उपवास रखती हैं (अक्सर फलाहार के साथ), और अगले दिन प्रतिमाओं का विसर्जन करती हैं।
कर्नाटक
यही तृतीया स्वर्ण गौरी व्रत, यानी गौरी हब्बा है: गौरी, यानी मायके आई बेटी के रूप में पार्वती, की पूजा उनके पुत्र गणेश के उन्हें लेने आने से एक दिन पहले होती है, और सुहागिनें आपस में बागिना देती हैं: हल्दी, कुमकुम, चूड़ियाँ, काले मोती, नारियल और अनाज से सजी थालियाँ।
नेपाल, सिक्किम और दार्जिलिंग
तीज नेपाली महिलाओं का सबसे बड़ा पर्व है: एक रात पहले 'दर' नाम का भरपूर भोज, फिर लाल साड़ियों में निर्जला व्रत, नाच-गाना, और काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में भारी भीड़। अगले दो दिन गणेश चतुर्थी और ऋषि पंचमी होती हैं।
गुजरात
बहुत से गुजराती परिवार यह दिन केवड़ा त्रीज के रूप में मनाते हैं: व्रत रखकर शिव जी को सुगंधित केवड़े का फूल चढ़ाया जाता है, जो वैसे शिव पूजा में वर्जित माना जाता है।

भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन

  • ठेकुआ गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बने कुरकुरे तले पकवान: बिहार-झारखंड में तीज का भोग, जो पारण पर बाँटा जाता है।
  • पेड़किया (गुझिया) सूजी या खोये और चीनी से भरी अर्धचंद्राकार गुझिया, जो बिहार और उत्तर प्रदेश में एक दिन पहले बनती है।
  • फल केला और मौसमी फल भोग में रखे जाते हैं, और फलाहार व्रत रखने वाली महिलाएँ यही खाती हैं।
  • साबूदाना खिचड़ी जिन परिवारों में फलाहार व्रत की रीति है, उनके लिए, खासकर महाराष्ट्र में।
  • दर नेपाल में व्रत से एक रात पहले परिवार के साथ खाया जाने वाला भरपूर भोज।
  • पारण का भोजन पहले जल, फिर प्रसाद, फिर हल्का घर का खाना; तला-भुना और भारी भोजन शरीर के संभलने के बाद।

आने वाले वर्षों में हरतालिका तीज की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

आने वाले वर्षों में हरतालिका तीज की तारीख
वर्षतारीखस्थिति
2026इस वर्षसोमवार, 14 सितंबर 2026बीत गई
2027शुक्रवार, 3 सितंबर 2027आने वाली
2028मंगलवार, 22 अगस्त 2028आने वाली

पंचांगों में हरतालिका तीज की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग हरतालिका तीज की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: हरतालिका तीज का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

हरतालिका तीज से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में हरतालिका तीज कब है?

नई दिल्ली में हरतालिका तीज शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 को है, भाद्रपद शुक्ल तृतीया, और तृतीया तिथि शाम 4:50 (2 सितंबर) से दोपहर 2:19 तक रहेगी। तृतीया रहते पूजा का समय: सुबह (सुबह 5:59 से सुबह 8:32 तक); शाम को प्रदोष में (इस वर्ष उपलब्ध नहीं, क्योंकि उस समय तृतीया तिथि नहीं)। समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए इस पेज पर अपना शहर चुनें।

हरतालिका तीज की तिथि क्या है?

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि। नई दिल्ली में यह तिथि 2 सितंबर, शाम 4:50 से 3 सितंबर, दोपहर 2:19 तक है, और हरतालिका तीज का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

दूसरे कैलेंडर में हरतालिका तीज की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल हरतालिका तीज कब है?

2028 में मंगलवार, 22 अगस्त।

तीज कब है: इस पेज पर कौन सी तीज है?

यह पेज हरतालिका तीज का है, भाद्रपद शुक्ल तृतीया, जो नई दिल्ली में शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 को है: निर्जला व्रत और मिट्टी के शिव-पार्वती वाली तीज। हरियाली (सावन) तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को, लगभग एक महीना पहले होती है; कजरी (कजली, सातुड़ी या बड़ी) तीज भाद्रपद कृष्ण तृतीया को, एक पखवाड़ा पहले; और आखा तीज यानी अक्षय तृतीया वसंत में। हर तीज की अपनी तारीख है।

क्या हरतालिका तीज और हरियाली तीज एक ही हैं?

नहीं। हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को, सावन के महीने में होती है: झूले, हरे कपड़े, मेहंदी और मायके से आया सिंधारा। हरतालिका तीज एक महीने बाद, भाद्रपद शुक्ल तृतीया को होती है, जिसमें निर्जला व्रत, मिट्टी के शिव-पार्वती, सखी द्वारा हर ले जाई गई पार्वती की कथा और रात भर का जागरण होता है।

हरतालिका तीज पर शाम की पूजा का समय क्या है?

शाम की पूजा प्रदोष काल में होती है, यानी सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त। तृतीया रहते प्रदोष (इस वर्ष उपलब्ध नहीं, क्योंकि उस समय तृतीया तिथि नहीं)। जो परिवार हमेशा शाम को पूजा करते हैं, वे तृतीया खत्म हो जाने पर भी व्रत के दिन के प्रदोष काल में पूजा करते हैं (शाम 6:41 से रात 8:56 तक)।

घर पर हरतालिका तीज की पूजा कैसे करें?

जल्दी स्नान करके श्रृंगार करें और संकल्प लें। मिट्टी या बालू से शिव, पार्वती और गणेश बनाकर फूलों और केले के पत्तों के फुलेरे के नीचे चौकी पर रखें। पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर बेलपत्र और धतूरे से शिव जी की और सुहाग सामग्री से माता पार्वती की; कथा सुनें, आरती करें और रात भर जागरण करें। अगली सुबह अंतिम पूजा करके प्रतिमाएँ विसर्जित करें और व्रत खोलें। पूरी विधि ऊपर दी है।

हरतालिका तीज की कथा क्या है?

हिमवान की पुत्री पार्वती ने वर्षों तक शिव के लिए तप किया। जब पिता ने उनका विवाह विष्णु से तय कर दिया, तो सखी उन्हें वन की एक गुफा में ले गई, इसी से व्रत का नाम पड़ा: 'हरत' यानी हर ले जाना, 'आलिका' यानी सखी। वहाँ भाद्रपद शुक्ल तृतीया को उन्होंने बालू के शिवलिंग की पूजा व्रत और रात भर के जागरण के साथ की, और शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। पूरी कथा ऊपर है।

हरतालिका तीज की पूजा सामग्री में क्या-क्या चाहिए?

प्रतिमाओं के लिए साफ मिट्टी या बालू, लाल कपड़े वाली चौकी, फुलेरे के लिए केले के पत्ते और फूल, कलश और नारियल, शिव जी के लिए बेलपत्र, धतूरा, आक और शमी, माता पार्वती के लिए सुहाग सामग्री और लाल चुनरी, पंचामृत, रोली, अक्षत, दूर्वा, घी का दीपक, धूप, फल, मिठाई और दक्षिणा। पूरी सूची ऊपर है।

हरतालिका तीज के व्रत में क्या कुछ खा-पी सकते हैं?

पारंपरिक निर्जला व्रत में नहीं: सूर्योदय से अगली सुबह की पूजा तक न अन्न, न जल, और इसलिए चाय भी नहीं। जो ऐसा न कर सकें, उनके लिए बहुत से परिवार जल और फल की छूट देते हैं, और संकल्प शुरू से उसी रूप में लिया जा सकता है। स्वास्थ्य पहले है; व्रत श्रद्धा माँगता है।

हरतालिका तीज का व्रत कब खोलें (पारण)?

अगली सुबह, सूर्योदय के बाद। स्नान करके अंतिम पूजा और आरती करें, मिट्टी की प्रतिमाएँ विसर्जित करें, सुहाग सामग्री किसी सुहागिन को दें, फिर जल और प्रसाद से व्रत खोलें। रात कितनी भी लंबी लगे, व्रत रात में नहीं खोला जाता।

क्या हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन हैं?

आम तौर पर गणेश चतुर्थी अगले दिन होती है। जिस साल तीज वाले दिन तृतीया सुबह जल्दी खत्म हो जाए, उस दिन दोपहर में चतुर्थी रहती है, और दोनों एक ही तारीख को पड़ती हैं: सुबह तृतीया रहते तीज की पूजा होती है और दोपहर में गणेश स्थापना। नई दिल्ली के लिए गणेश चतुर्थी की तारीख उसके अपने पेज पर है।

हरतालिका तीज क्यों मनाई जाती है, और इस नाम का अर्थ क्या है?

यह वह दिन है जब वर्षों के तप के बाद पार्वती ने शिव को पति रूप में पाया। नाम 'हरत' (हर ले जाना) और 'आलिका' (सखी) से बना है: सखी उन्हें ले गई ताकि उनका विवाह किसी और से न हो। सुहागिनें यह व्रत अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं, और कुंवारी कन्याएँ मनचाहे वर के लिए।

क्या कुंवारी लड़कियाँ हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं?

हाँ। स्वयं पार्वती ने विवाह से पहले यह व्रत रखा था, इसलिए कन्याएँ अच्छे वर की कामना से इसे रखती हैं, कई निर्जला के बजाय फल और जल के साथ। पूजा और कथा वही रहती है।

गर्भवती महिला हरतालिका तीज कैसे करे?

गर्भवती महिला से निर्जला व्रत की अपेक्षा नहीं है। वह जल और फल या हल्का भोजन लेते हुए पूजा कर सकती है और कथा सुन सकती है, या परिवार उसकी ओर से पूजा कर सकता है। कोई भी व्रत रखने से पहले डॉक्टर से बात करें।

क्या हरतालिका तीज की रात सोना चाहिए?

परंपरा रात्रि जागरण की है: भजन, कथा और शिव नाम के साथ पूरी रात जागना, और कथा में सोने की मनाही भी कही गई है। जो महिला अस्वस्थ हो या जिसे अगले दिन काम पर जाना हो, वह बिना अपराध-बोध के आराम करे: यह संकल्प प्रेम का है, सहनशक्ति की परीक्षा का नहीं।

क्या एक बार शुरू करने पर यह व्रत हर साल रखना होता है? उद्यापन क्या है?

परंपरा के अनुसार जो स्त्री हरतालिका व्रत शुरू करती है, वह इसे हर साल रखती है। जब उम्र या स्वास्थ्य निर्जला व्रत की अनुमति न दे, तो इसे हल्के रूप में रखा जाता है, या उद्यापन करके पूरा किया जाता है: अंतिम पूर्ण पूजा, कई परिवारों में हवन, सुहागिनों को सुहाग सामग्री और वस्त्र, और पुरोहित या ज़रूरतमंदों को भोजन। विस्तार के लिए कुल पुरोहित से पूछें।

हरतालिका तीज पर कौन सा मंत्र बोलें?

शिव-पार्वती दोनों के लिए 'ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः', और बेलपत्र के साथ 'ॐ नमः शिवाय'। हर अर्पण के साथ पार्वती और शिव के नाम बोले जाते हैं, और पार्वती पूजा 'सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये' श्लोक से पूरी होती है। सभी मंत्र अर्थ सहित ऊपर दिए हैं।