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शुक्ल पक्ष · पंचमी तिथि · श्रावण

नाग पंचमी 2027 कब है?

नाग पंचमी 2027

284 दिन बाद

शुक्र, 6 अगस्त

2027 में नाग पंचमी शुक्रवार, 6 अगस्त को है। नई दिल्ली में पंचमी तिथि 6 अगस्त, रात 2:28 से 7 अगस्त, रात 12:23 तक रहेगी।

2028: बुधवार, 26 जुलाई 2028

नाग पंचमी कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

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नई दिल्ली के लिए गणना

नाग पंचमी 2027: तारीख और तिथि का समय

शुक्रवार, 6 अगस्त 2027

तिथि
पंचमी, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
श्रावण
तिथि आरंभ
6 अगस्त, रात 2:28
तिथि समाप्त
7 अगस्त, रात 12:23
दिन का निर्णय
सूर्योदय
नई दिल्ली में सूर्योदय
6 अगस्त, सुबह 5:45

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: नाग पंचमी का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

नाग पंचमी 2027 के सभी मुहूर्त · नई दिल्ली

नाग पंचमी 2027 शुभ मुहूर्त

नाग पंचमी सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी है, नाग देवताओं की पूजा का दिन: परिवार नागों के चित्र बनाते या प्रतिमा रखते हैं, उन्हें दूध, फूल और खीर अर्पित करते हैं, और सर्पदंश से रक्षा व घर के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। नई दिल्ली में नाग पंचमी शुक्रवार, 6 अगस्त 2027 को है, और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:45 से सुबह 8:25 तक है, यानी पंचमी रहते सुबह का समय। दूध प्रतिमा को चढ़ाया जाता है, जीवित साँप को कभी नहीं।

नाग पंचमी 2027 के सभी मुहूर्त — नई दिल्ली
मुहूर्तनई दिल्ली में समयकिसके लिए
नाग पंचमी पूजा मुहूर्तसुबह 5:45 से सुबह 8:25 तकप्रातःकाल, दिन का पहला पाँचवाँ भाग, जब तक पंचमी रहे।

प्रातःकाल, दिन का पहला पाँचवाँ भाग, जब तक पंचमी रहे: घर पर, बाँबी पर या नाग मंदिर में नाग पूजा का शास्त्रीय सुबह का समय। जब पंचमी सुबह देर से शुरू हो, तो मुहूर्त उसी के साथ खुलता है।

सूर्योदयसुबह 5:45क्षितिज पर सूर्य का ऊपरी किनारा दिखने का समय।

नई दिल्ली में पूजा का समय सूर्योदय से गिना जाता है; स्नान और दीवार पर नाग बनाने का काम उससे पहले कर लिया जाता है।

ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:20 से सुबह 5:02 तकरात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, जो सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले ख़त्म होता है।

भोर से पहले का समय, स्नान और दूध, खीर व भोग की तैयारी के लिए।

अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12:00 से दोपहर 12:53 तकदिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय दोपहर के आसपास।

दोपहर का मुहूर्त, उन परिवारों के लिए जो सुबह देर से मंदिर में पूजा करते हैं, या सावन के इस दिन शिव जी का रुद्राभिषेक करते हैं। परंपरा के अनुसार बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं होता।

शुभ चौघड़िया (दिन)
  • चर सुबह 5:45 से सुबह 7:25 तक
  • लाभ सुबह 7:25 से सुबह 9:05 तक
  • अमृत सुबह 9:05 से सुबह 10:46 तक
  • शुभ दोपहर 12:26 से दोपहर 2:07 तक
  • चर शाम 5:28 से शाम 7:08 तक
दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया।

दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया, मंदिर जाने या ऐसी पूजा के लिए जो सुबह के मुहूर्त में न हो सके, जब तक पंचमी रहे।

उस दिन के शुभ समय

उस दिन के शुभ समय
मुहूर्तनई दिल्ली में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:00 से दोपहर 12:53शुभ
अमृत कालरात 12:42 से रात 2:14सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:20 से सुबह 5:02शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
अवधिनई दिल्ली में समय
राहु कालसुबह 10:46 से दोपहर 12:26
यमगण्ड कालदोपहर 3:47 से शाम 5:28
दुर्मुहूर्त (पहला)सुबह 8:25 से सुबह 9:19
दुर्मुहूर्त (दूसरा)दोपहर 12:53 से दोपहर 1:47
वर्ज्यम्दोपहर 3:33 से शाम 5:05

ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए शुक्रवार, 6 अगस्त 2027 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।

पूजा विधि · घर पर, क्रम से

नाग पंचमी पूजा विधि

  1. स्नान और दिन का नियम

    जल्दी स्नान करके साफ कपड़े पहनें। बहुत से लोग व्रत या एक समय भोजन रखते हैं, और कई घरों में इस दिन रसोई के अपने नियम होते हैं, जो नीचे दिए हैं।

  2. नाग बनाएँ या प्रतिमा रखें

    मुख्य द्वार के दोनों ओर या साफ दीवार पर हल्दी, चंदन, गोबर या कोयले से नाग की आकृतियाँ बनाएँ, या चौकी पर नाग देवता का चित्र, मिट्टी की या चाँदी की छोटी प्रतिमा रखें। दक्षिण भारत में परिवार साँप की बाँबी पर या पीपल के नीचे पत्थर की नाग प्रतिमाओं की पूजा करते हैं।

  3. पहले गणेश, फिर संकल्प

    'ॐ गं गणपतये नमः' बोलकर गणेश जी की पूजा करें। हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प करें कि श्रावण शुक्ल पंचमी को आप परिवार की रक्षा और कल्याण के लिए नाग देवताओं की पूजा कर रहे हैं।

  4. नाग देवता की पूजा

    प्रतिमा या चित्र को जल और थोड़ा दूध अर्पित करें, फिर हल्दी, रोली, अक्षत, फूल, दूर्वा और मौली चढ़ाएँ। घी का दीपक और धूप जलाएँ।

  5. भोग

    खीर, पूरी, भुने चने, भीगी मूँग, लाई (लाह्या) और फल का भोग लगाएँ। ये प्रतिमा को अर्पित होते हैं; दूध और भोग बाद में लोगों, गायों या पक्षियों को दिए जाते हैं, बिलों में नहीं डाले जाते।

  6. नौ नागों के नाम

    नव नाग स्तोत्र पढ़ें, जिसमें अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिय के नाम हैं, और प्रार्थना करें कि घर साँपों के भय से मुक्त रहे।

  7. सावन में शिव पूजा

    नाग शिव जी के आभूषण हैं और सावन उनका महीना है, इसलिए बहुत से लोग 'ॐ नमः शिवाय' बोलते हुए शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाते हैं, बेलपत्र अर्पित करते हैं, या इस दिन रुद्राभिषेक कराते हैं।

  8. कथा सुनें

    नाग पंचमी की कथाएँ पढ़ें या सुनाएँ: आस्तीक की, जिन्होंने जनमेजय के यज्ञ से नागों को बचाया, और उस किसान परिवार की, जिसे नागिन ने क्षमा करके जीवन लौटाया।

  9. आरती

    नाग देवता और शिव जी के सामने दीपक घुमाएँ, अपने परिवार का भजन या आरती गाएँ, और भूल के लिए क्षमा माँगें।

  10. दिन की परंपराएँ निभाएँ

    बहुत से परिवार नाग पंचमी पर ज़मीन नहीं खोदते, हल नहीं चलाते और पौधे नहीं उखाड़ते, ताकि साँपों के घर न बिगड़ें, और कई घरों में इस दिन तवा चूल्हे पर नहीं चढ़ता। साँप दिखे तो उसे छेड़ें नहीं, बच्चों को दूर रखें, और घर के अंदर हो तो प्रशिक्षित सर्प-रक्षक को बुलाएँ।

सामग्री · पहले से तैयार रखें

नाग पंचमी पूजा सामग्री सूची

  • नाग देवता का चित्र, मिट्टी या चाँदी की प्रतिमा या मुख्य द्वार के पास दीवार पर बनी नाग आकृति।
  • हल्दी, चंदन, गोबर या कोयला दीवार पर नाग बनाने के लिए।
  • कटोरी में थोड़ा दूध प्रतिमा को, या चित्र पर कुछ बूँदें; जीवित साँप को कभी नहीं।
  • लोटे में जल भेंट और आचमन के लिए।
  • हल्दी, रोली और अक्षत तिलक और भेंट के लिए।
  • फूल और दूर्वा मौसम के कोई भी ताज़े फूल।
  • मौली (कलावा) नाग प्रतिमा को धागे के रूप में।
  • घी का दीपक, बत्ती, धूप और कपूर पूजा और आरती के लिए।
  • खीर इस दिन का मुख्य भोग।
  • पूरी उन घरों में रोटी की जगह, जहाँ इस दिन तवा नहीं चढ़ता।
  • भुने चने और भीगी मूँग नाग देवता का पारंपरिक भोग।
  • लाई (चावल या ज्वार की लाह्या) महाराष्ट्र में दूध के साथ अर्पित।
  • मौसमी फल केला, ककड़ी या जो मौसम में मिले।
  • बेलपत्र और शिवलिंग के लिए लोटा शिव अभिषेक के लिए।
  • चौकी और कपड़ा दीवार पर न बनाएँ तो प्रतिमा के लिए।
  • कथा की पुस्तक वैकल्पिक; कथाएँ ऊपर दी गई हैं।

मंत्र · अर्थ के साथ

नाग पंचमी के मंत्र

गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

Om Gam Ganapataye Namah

अर्थ: ॐ, गं: गणों के स्वामी गणपति को नमस्कार।

कब और कैसे: पूजा की शुरुआत में 11 बार।

नव नाग स्तोत्र

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम् ।
शङ्खपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा ॥
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम् ।
सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः ।
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥

Anantam Vasukim Shesham Padmanabham cha Kambalam
Shankhapalam Dhritarashtram Takshakam Kaliyam tatha
Etani nava namani naganam cha mahatmanam
Sayankale pathen nityam pratahkale visheshatah
Tasya vishabhayam nasti sarvatra vijayi bhavet

अर्थ: अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिय: ये महान नागों के नौ नाम हैं। जो इन्हें रोज़ शाम को, और विशेष रूप से सुबह, पढ़ता है, उसे विष का भय नहीं रहता और वह सब जगह विजयी होता है।

कब और कैसे: नाग पूजा में एक या तीन बार, नाग पंचमी के पारंपरिक श्लोक के रूप में; अंतिम पंक्ति का वचन परंपरा का है, साँपों से सावधानी का विकल्प नहीं।

शिव पंचाक्षर मंत्र

ॐ नमः शिवाय

Om Namah Shivaya

अर्थ: ॐ, शिव को नमस्कार। 'नमः शिवाय' शब्द यजुर्वेद के श्रीरुद्रम् से हैं।

कब और कैसे: शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाते हुए 11 या 108 बार।

कथा · कहानी और उसका अर्थ

नाग पंचमी की कथा और महत्व

कथा

महाभारत बताता है कि राजा जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की मृत्यु, जो तक्षक नाग के डसने से हुई थी, का बदला लेने के लिए सर्प यज्ञ किया, जिसमें हर जगह से नाग खिंचकर अग्नि में गिरने लगे। ऋषि जरत्कारु और उसी नाम की नाग कन्या के पुत्र, बाल ऋषि आस्तीक यज्ञ में आए, अपनी बुद्धि से राजा को प्रसन्न किया, और वर माँगने को कहा गया तो यज्ञ रोकने का वर माँगा। नाग बच गए, और लोक-परंपरा मानती है कि यह श्रावण शुक्ल पंचमी को हुआ, इसीलिए इस दिन नागों की पूजा होती है और वे आस्तीक को याद करने वालों को आशीर्वाद देते हैं।

घरों में सुनाई जाने वाली लोक-कथा एक किसान की है, जिसने हल चलाते हुए अनजाने में एक नागिन के बच्चों को मार दिया। दुख और क्रोध में नागिन ने किसान के परिवार को डस लिया। उसकी बेटी, जो बच गई थी, को सब पता चला तो उसने हाथ जोड़कर कटोरी में दूध रखा और नागिन से क्षमा माँगी; द्रवित होकर नागिन ने परिवार को क्षमा किया और उन्हें जीवन लौटा दिया। कथा कहती है कि इसीलिए नाग पंचमी पर कोई ज़मीन नहीं खोदता, हल नहीं चलाता, और नागों की दूध से पूजा होती है।

श्रीकृष्ण का कालिय दमन भी याद किया जाता है: अनेक फनों वाला कालिय नाग वृंदावन में यमुना को विषैला कर रहा था, और बालक कृष्ण उसके फनों पर तब तक नाचे जब तक उसने हार नहीं मान ली, फिर उसे समुद्र की ओर भेज दिया, जैसा भागवत पुराण बताता है। नागों को शिव जी के आभूषण के रूप में, गले में वासुकि, और शेषनाग के रूप में, जिन पर भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, भी पूजा जाता है।

महत्व

नाग पंचमी सावन में, मानसून के चरम पर आती है, जब बारिश से साँपों के बिल भर जाते हैं और वे घरों और खेतों के पास आ जाते हैं। यह पर्व उस भय को श्रद्धा में बदल देता है: नागों को जल, धरती और घर के रक्षक के रूप में पूजा जाता है, और दिन की परंपराएँ, न खुदाई, न हल, न साँपों को हानि, उनके साथ रहने का तरीका हैं। परंपरा सर्पदंश से मुक्ति की प्रार्थना करती है; आज की समझ यह भी जोड़ती है कि साँप उन चूहों को खाते हैं जो वरना फसल बर्बाद कर देते।

साँप दूध नहीं पचा सकते, और सपेरे जो साँप दिखाते हैं वे पकड़कर भूखे रखे जाते हैं, जो क्रूर है और भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत गैरकानूनी भी। पूजा प्रतिमा, चित्र, बाँबी या मंदिर की है; जीवित साँप के लिए सबसे दयालु भेंट उसे छोड़ देना है।

उपाय · परंपरा

नाग पंचमी के पारंपरिक उपाय

दूध प्रतिमा को, दया साँप को

नाग प्रतिमा या चित्र को दूध अर्पित करें और बाद में वह दूध किसी को पीने के लिए दें। परंपरा मानती है कि नाग श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं, और इससे किसी जीवित साँप को हानि नहीं होती।

नौ नागों के नाम

नाग पंचमी की सुबह और शाम नव नाग स्तोत्र पढ़ें; यह साँपों के भय से मुक्ति की पारंपरिक प्रार्थना है।

सावन में रुद्राभिषेक

शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाएँ, या रुद्राभिषेक में शामिल हों; सर्प धारण करने वाले शिव पूरे सावन नागों के साथ पूजे जाते हैं।

धरती को न छेड़ें

इस दिन खुदाई, हल चलाना या झाड़ियाँ साफ करना न करें, जैसा किसान परिवार पीढ़ियों से करते आए हैं।

मुसीबत में साँपों की मदद

किसी स्थानीय वन्यजीव बचाव समूह की मदद करें, या किसी प्रशिक्षित सर्प-रक्षक का नंबर रखें, ताकि घर में मिला साँप मारा न जाए, सुरक्षित हटाया जाए।

काल सर्प का प्रश्न

जिन परिवारों को कुंडली में काल सर्प योग बताया गया है, वे अक्सर नाग पंचमी पर त्र्यंबकेश्वर और उज्जैन जैसे मंदिरों में शांति पूजा कराते हैं। यह ज्योतिषीय परंपरा है, शास्त्रीय अनिवार्यता नहीं; डरने या महँगे अनुष्ठानों की ज़रूरत नहीं, और घर पर सरल शिव पूजा भी वही प्रार्थना है।

परंपरा, संक्षेप में

नाग पंचमी पर क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • पंचमी रहते सुबह के मुहूर्त में नाग देवता की पूजा करें।
  • प्रतिमा, चित्र या बाँबी पर दूध, फूल और खीर अर्पित करें।
  • नौ नागों के नाम और 'ॐ नमः शिवाय' का पाठ करें।
  • इस दिन के लिए अपने परिवार की रसोई की परंपरा निभाएँ, जैसे रोटी की जगह पूरी।
  • बच्चों को साँप से दूर रखें, और घर में साँप आए तो प्रशिक्षित सर्प-रक्षक को बुलाएँ।
  • दिन के सावन वाले भाव में किसी नाग मंदिर या शिव मंदिर जाएँ।

क्या न करें

  • जीवित साँपों को दूध न पिलाएँ; वे इसे पचा नहीं सकते।
  • सपेरों को पैसे न दें, न पूजा के लिए साँप खरीदें; यह क्रूर और गैरकानूनी है।
  • परंपरा के अनुसार इस दिन खुदाई, हल चलाना या पौधे उखाड़ना न करें।
  • साँप को न मारें, न भगाएँ; उसे छोड़ दें या सर्प-रक्षक को बुलाएँ।
  • बिलों या बाँबियों में इस तरह दूध न डालें कि वे भर जाएँ।
  • किसी को नाग श्राप जैसी बातों से आपको डराने न दें; परंपरा श्रद्धा की है, भय की नहीं।

देश भर में

नाग पंचमी की क्षेत्रीय परंपराएँ और भोग

क्षेत्र के अनुसार

उज्जैन, मध्य प्रदेश
महाकालेश्वर मंदिर की ऊपरी मंज़िल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर केवल नाग पंचमी पर खुलता है, और भक्त उसके एक दिन के दर्शन के लिए रात भर कतार में रहते हैं।
महाराष्ट्र
महिलाएँ झूला (झोका) झूलती हैं और नाग पंचमी के गीत गाती हैं; नागोबा को दूध और लाह्या चढ़ाए जाते हैं, और कई घरों में इस दिन काटना, तलना या भूनना नहीं होता। सांगली का बत्तीस शिराला, जो कभी ज़िंदा नागों की शोभायात्रा के लिए जाना जाता था, अब अदालती आदेशों के बाद प्रतिमाओं के साथ उत्सव मनाता है।
गोवा और कोंकण
नाग पंचमी पर पातोळ्या, हल्दी के पत्तों में भाप से पकी चावल-नारियल की मिठाई, बनाई और अर्पित की जाती है।
उत्तर प्रदेश और बिहार
अखाड़ों में दंगल होते हैं, और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में लड़कियाँ कपड़े की गुड़िया बनाती हैं जिन्हें तालाब या चौराहे पर डंडों से पीटा जाता है, एक लोक-परंपरा जिसके पीछे स्थानीय किस्से बताए जाते हैं। कई घरों में इस दिन तवा नहीं चढ़ता।
कर्नाटक
नागर पंचमी: महिलाएँ बाँबी (हुत्त) और पत्थर की नाग प्रतिमाओं (नागकल्लु) की दूध और मिठाई से पूजा करती हैं।
गुजरात
नाग पांचम एक अलग दिन, अमांत गणना की श्रावण कृष्ण पंचमी को, जन्माष्टमी से पहले के उत्सव सप्ताह में मनाई जाती है, दीवार पर बने नागों की पूजा के साथ।
बंगाल और असम
सर्प देवी मनसा की पूजा पूरी बरसात होती है, मुख्य पूजा सावन के अंत में; नाग पंचमी स्वयं कम घरों में मनाई जाती है।

भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन

  • खीर इस दिन का भोग, नाग देवता को अर्पित करके सबके साथ।
  • पूरी, दाल और चावल उन घरों में रोटी की जगह, जहाँ इस दिन तवा नहीं चढ़ता।
  • भुने चने और भीगी मूँग नाग देवता को भोग और प्रसाद।
  • दूध के साथ लाह्या चावल या ज्वार की लाई, महाराष्ट्र में नागोबा का भोग।
  • पातोळ्या गोवा और कोंकण की हल्दी के पत्तों में भाप से पकी मिठाई।
  • भाप से पकी और उबली चीज़ें कई महाराष्ट्रीय घर इस दिन तलने और भूनने से बचते हैं।

आने वाले वर्षों में नाग पंचमी की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

आने वाले वर्षों में नाग पंचमी की तारीख
वर्षतारीखस्थिति
2026इस वर्षसोमवार, 17 अगस्त 2026बीत गई
2027शुक्रवार, 6 अगस्त 2027आने वाली
2028बुधवार, 26 जुलाई 2028आने वाली

पंचांगों में नाग पंचमी की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग नाग पंचमी की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: नाग पंचमी का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

नाग पंचमी से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में नाग पंचमी कब है?

2027 में नाग पंचमी शुक्रवार, 6 अगस्त को है। नई दिल्ली में पंचमी तिथि 6 अगस्त, रात 2:28 से 7 अगस्त, रात 12:23 तक रहेगी।

नाग पंचमी की तिथि क्या है?

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि। नई दिल्ली में यह तिथि 6 अगस्त, रात 2:28 से 7 अगस्त, रात 12:23 तक है, और नाग पंचमी का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

दूसरे कैलेंडर में नाग पंचमी की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल नाग पंचमी कब है?

2028 में बुधवार, 26 जुलाई।

नाग पंचमी कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

नई दिल्ली में नाग पंचमी शुक्रवार, 6 अगस्त 2027 को, श्रावण शुक्ल पंचमी पर है। पूजा का मुहूर्त सुबह 5:45 से सुबह 8:25 तक है: प्रातःकाल, दिन का पहला पाँचवाँ भाग, जब तक पंचमी रहे। पंचमी तिथि रात 2:27 से रात 12:23 (7 अगस्त) तक रहेगी, इसलिए जो सुबह पूजा न कर सकें, वे उसके रहते बाद में कर सकते हैं।

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?

नाग देवताओं की, जल, धरती और घर के रक्षक के रूप में, पूजा के लिए, और मानसून में सर्पदंश से रक्षा की प्रार्थना के लिए, जब साँप घरों के पास आ जाते हैं। परंपरा इस दिन को आस्तीक से जोड़ती है, जिन्होंने राजा जनमेजय के यज्ञ से नागों को बचाया, और श्रीकृष्ण की कालिय नाग पर विजय से।

घर पर नाग पंचमी की पूजा कैसे करें?

स्नान करके मुख्य द्वार के पास हल्दी, चंदन या गोबर से नाग बनाएँ, या नाग प्रतिमा रखें। गणेश पूजा और संकल्प के बाद प्रतिमा को जल और थोड़ा दूध, हल्दी, रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें, खीर, पूरी और भुने चने का भोग लगाएँ, नौ नागों के नाम पढ़ें, शिव जी की पूजा करें, कथा सुनें और आरती करें, सुबह के मुहूर्त सुबह 5:45 से सुबह 8:25 तक में।

नाग पंचमी पर कौन सा मंत्र पढ़ें?

नव नाग स्तोत्र, जिसमें नौ महान नागों, अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिय, के नाम हैं और इसे पढ़ने वाले को विष के भय से मुक्ति का वचन है। शिव पूजा में 'ॐ नमः शिवाय' बोला जाता है। सभी मंत्र अर्थ सहित मंत्र वाले भाग में हैं।

नाग पंचमी की कथा क्या है?

दो कथाएँ सुनाई जाती हैं। महाभारत में बाल ऋषि आस्तीक राजा जनमेजय को नागों का नाश कर रहे सर्प यज्ञ को रोकने के लिए मना लेते हैं। लोक-कथा में एक किसान हल चलाते हुए अनजाने में नागिन के बच्चों को मार देता है, नागिन उसके परिवार को डस लेती है, और उसकी बेटी की प्रार्थना और दूध की भेंट से नागिन क्षमा करके उन्हें जीवन लौटा देती है। दोनों कथाएँ ऊपर पूरी दी गई हैं।

क्या नाग पंचमी पर जीवित साँप को दूध पिलाना चाहिए?

नहीं। साँप दूध नहीं पचा सकते, और सपेरों के लाए साँप पकड़े, दाँत तोड़े और भूखे रखे जाते हैं, जो क्रूर है और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत गैरकानूनी भी। दूध नाग प्रतिमा, चित्र या मंदिर में अर्पित करें; जीवित साँप के लिए सबसे दयालु काम उसे छोड़ देना है।

नाग पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?

परंपरा के अनुसार खुदाई, हल चलाना या पौधे उखाड़ना नहीं; कई घरों में तवा नहीं चढ़ता और तलना-काटना नहीं होता। सबसे ज़रूरी, जीवित साँपों को न मारें, न भगाएँ, न दूध पिलाएँ, सपेरों को पैसे न दें, और बाँबियों या बिलों को दूध से न भरें।

नाग पंचमी पर रोटी क्यों नहीं बनती, तवा क्यों नहीं चढ़ता?

यह उत्तर भारत के बहुत से घरों की लोक-परंपरा है: नाग पंचमी पर लोहे का तवा चूल्हे पर नहीं चढ़ाया जाता, और इसका कारण अक्सर तवे के आकार को नाग के फन जैसा मानने से जोड़ा जाता है, इसलिए पूरी, दाल और चावल बनते हैं। महाराष्ट्र में कई घर इसी तरह के कारण से तलना और काटना टालते हैं। अपने परिवार की परंपरा मानें; यह शास्त्रीय नियम नहीं है।

क्या नाग पंचमी की कोई आरती है?

नाग देवताओं की कोई एक शास्त्रीय आरती नहीं है। परिवार नाग प्रतिमा के सामने दीपक घुमाकर आरती करते हैं और नाग देवता की लोक-आरती या शिव जी की आरती गाते हैं, क्योंकि नाग उनके आभूषण हैं। इस दिन का पारंपरिक पाठ नव नाग स्तोत्र है।

नाग पंचमी का व्रत कैसे रखें?

बहुत से लोग व्रत रखते हैं या पूजा के बाद एक बार सात्विक भोजन करते हैं: खीर, पूरी और मौसम का भोजन। इस दिन निर्जल व्रत का कोई तय नियम नहीं है; बीमार, गर्भवती या बुज़ुर्ग फल और दूध के साथ व्रत रख सकते हैं, या केवल पूजा कर सकते हैं।

नाग पंचमी पर क्या खाना बनता है?

सबसे पहले खीर, साथ में उन घरों में पूरी, दाल और चावल जहाँ तवा नहीं चढ़ता, भोग के रूप में भुने चने और भीगी मूँग, महाराष्ट्र में दूध के साथ लाह्या, और गोवा व कोंकण में पातोळ्या, हल्दी के पत्तों में भाप से पकी चावल की मिठाई।

उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर कब खुलता है?

केवल नाग पंचमी पर: महाकालेश्वर परिसर की ऊपरी मंज़िल पर स्थित यह मंदिर एक दिन के दर्शन के लिए पिछली रात से खुलता है, और भक्त घंटों कतार में रहते हैं। समय हर साल मंदिर प्रशासन घोषित करता है।

बत्तीस शिराला की नाग पंचमी क्या है?

महाराष्ट्र के सांगली ज़िले का गाँव बत्तीस शिराला ज़िंदा नागों की नाग पंचमी शोभायात्रा के लिए प्रसिद्ध था। साँपों की रक्षा के अदालती आदेशों के बाद ज़िंदा नागों की शोभायात्रा बंद हुई, और अब यह उत्सव नाग प्रतिमाओं, पूजा और मेले के साथ मनाया जाता है।

क्या गुजरात में नाग पंचमी इसी दिन होती है?

नहीं। गुजरात में नाग पांचम अमांत गणना की श्रावण कृष्ण पंचमी को, जन्माष्टमी से ठीक पहले के उत्सव सप्ताह में मनाई जाती है, इस पेज की नाग पंचमी से लगभग दो सप्ताह बाद। दीवार पर बने नागों की पूजा लगभग वैसी ही होती है।

क्या महिलाएँ और गर्भवती महिलाएँ नाग पंचमी की पूजा कर सकती हैं?

हाँ। ज़्यादातर घरों में नाग बनाने और पूजा करने का काम महिलाएँ ही करती हैं। गर्भवती महिला आराम से बैठकर पूरी पूजा कर सकती है और कठोर व्रत छोड़ सकती है; बस असली साँपों और मंदिरों की भीड़ भरी कतारों से दूर रहे।