होली का दिन होलिका दहन के ठीक अगले दिन का होता है। होलिका दहन अमांत गणना में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होता है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।
स्वर्ण से पूछें
क्या यह मुहूर्त मेरी कुंडली के लिए शुभ है? स्वर्ण से मुफ़्त पूछें
ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: होली का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।
होली 2027 के सभी मुहूर्त · नई दिल्ली
होली 2027 शुभ मुहूर्त
होली, जिसे धुलंडी या रंगवाली होली भी कहते हैं, होलिका दहन के बाद आने वाला रंगों का दिन है: चैत्र कृष्ण पक्ष की पहली सुबह लोग एक-दूसरे को गुलाल और रंग लगाते हैं, बड़ों के पैर छूते हैं, पुराने दोस्तों को गले लगाते हैं और गुझिया खाते हैं। नई दिल्ली में होली मंगलवार, 23 मार्च 2027 को है, होलिका दहन के अगले दिन। रंग खेलने का कोई मुहूर्त नहीं होता, रंग सुबह से लगभग दोपहर तक खेले जाते हैं; यह गाइड सुबह की छोटी पूजा, सुरक्षित प्राकृतिक रंग और उसके बाद आने वाली होली भाई दूज बताती है।
होली 2027 के सभी मुहूर्त — नई दिल्ली
मुहूर्त
नई दिल्ली में समय
किसके लिए
सूर्योदय (सुबह की पूजा, फिर रंग)
सुबह 6:22क्षितिज पर सूर्य का ऊपरी किनारा दिखने का समय।
होली में रंग खेलने का कोई शास्त्रीय मुहूर्त नहीं है। दिन सूर्योदय के बाद स्नान, होलिका की थोड़ी राख के तिलक और राधा-कृष्ण या कुलदेवता को गुलाल चढ़ाने से शुरू होता है; फिर रंग शुरू होते हैं और उत्तर भारत के ज़्यादातर हिस्सों में दोपहर तक खत्म हो जाते हैं।
शुभ चौघड़िया (दिन)
चरसुबह 9:25 से सुबह 10:56 तक
लाभसुबह 10:56 से दोपहर 12:28 तक
अमृतदोपहर 12:28 से दोपहर 1:59 तक
शुभदोपहर 3:31 से शाम 5:02 तक
दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया।
दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया, उन परिवारों के लिए जो होली पर पूजा, मंदिर दर्शन या यात्रा का समय चौघड़िया देखकर तय करते हैं।
उस दिन के शुभ समय
उस दिन के शुभ समय
मुहूर्त
नई दिल्ली में समय
प्रकृति
अभिजित मुहूर्त
दोपहर 12:03 से दोपहर 12:52
शुभ
अमृत काल
दोपहर 2:03 से दोपहर 3:36
सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्त
सुबह 4:47 से सुबह 5:34
शुभ
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।
जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
अवधि
नई दिल्ली में समय
राहु काल
दोपहर 3:31 से शाम 5:02
यमगण्ड काल
सुबह 9:25 से सुबह 10:56
दुर्मुहूर्त (पहला)
सुबह 8:48 से सुबह 9:37
वर्ज्यम्
रात 3:41 से सुबह 5:16
ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए मंगलवार, 23 मार्च 2027 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।
पूजा विधि · घर पर, क्रम से
होली पूजा विधि
खेलने से पहले तेल
बाहर निकलने से पहले त्वचा, बालों और नाखूनों पर नारियल या सरसों का तेल, या गाढ़ी क्रीम लगाएँ, और हाथ-पैर ढकने वाले पुराने सूती कपड़े पहनें। इससे रंग चिपकता नहीं और त्वचा सुरक्षित रहती है।
स्नान और राख का तिलक
सुबह स्नान करें। जहाँ परंपरा हो, रात की होलिका की ठंडी राख का थोड़ा तिलक लगाएँ; धुलंडी नाम होलिका की इसी धूल के सम्मान से आया है।
पहले भगवान को गुलाल
किसी को रंग लगाने से पहले राधा-कृष्ण या कुलदेवता को गुलाल, फूल और मिठाई अर्पित करें; ब्रज में होली कृष्ण मंदिरों से ही शुरू होती है।
बड़ों के चरणों में गुलाल
माता-पिता और बड़ों के चरणों में चुटकी भर गुलाल रखकर पैर छुएँ; वे आशीर्वाद के साथ आपके माथे पर गुलाल लगाते हैं।
पहले सूखा गुलाल
शुरुआत गालों और माथे पर सूखे, प्राकृतिक गुलाल से करें; किसी को रंग लगाने से पहले पूछ लें, और जो मना करे, बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे और पशु, उन्हें छोड़ दें।
रंगीन पानी, संभलकर
पिचकारी में टेसू (पलाश) का पानी या दूसरे प्राकृतिक गीले रंग लें, और पानी कम खर्च करें, खासकर सूखे साल में।
दोपहर तक रुककर स्नान
ज़्यादातर मोहल्ले दोपहर तक रुक जाते हैं। पहले सूखा रंग पोंछें, फिर गुनगुने पानी और हल्के साबुन से, या बेसन और दही के लेप से धोएँ; ज़ोर से न रगड़ें।
शाम को होली मिलन
नए कपड़ों में रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलने जाएँ, या उनका स्वागत करें, गुझिया, ठंडाई और नमकीन के साथ; रूठों को मनाने का यही दिन है।
होली भाई दूज
अगले दिन, चैत्र कृष्ण द्वितीया को, उत्तर भारत के बहुत से परिवारों में बहनें भाइयों को तिलक करती हैं, उनकी लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं और उन्हें भोजन कराती हैं, जैसे दिवाली के बाद की भाई दूज पर।
सामग्री · पहले से तैयार रखें
होली पूजा सामग्री सूची
प्राकृतिक गुलालभरोसेमंद जगह से हर्बल या फूलों से बना गुलाल; चमकीले या बहुत तेज़ रंग के पाउडर से बचें।
टेसू (पलाश) के फूलरात भर भिगोकर उबालने से होली का पारंपरिक नारंगी-पीला पानी बनता है।
हल्दी और बेसनदोनों मिलाकर सुरक्षित पीला पाउडर।
चुकंदरकसकर भिगोने या उबालने से गहरा गुलाबी रंगीन पानी।
मेहंदी पाउडरसूखा हरा रंग; गीला होने पर दाग छोड़ता है, इसलिए सूखा ही लगाएँ।
सूखे गुड़हल या लाल चंदन का पाउडरहल्का लाल रंग।
पिचकारी और बाल्टियाँरंगीन पानी के लिए।
नारियल तेल या गाढ़ी क्रीमखेलने से पहले त्वचा, बालों और नाखूनों पर।
पुराने सूती कपड़े और धूप का चश्माशरीर ढकें और आँखें बचाएँ।
बेसन और दहीबाद में हल्के हाथ से धोने के लिए।
पूजा की थाली: गुलाल, फूल, मिठाई और दीपकसुबह राधा-कृष्ण को अर्पण के लिए।
होलिका की राखजहाँ परंपरा हो, सुबह के तिलक के लिए चुटकी भर, ठंडी।
गुझिया, ठंडाई और नमकीनमेहमानों और होली मिलन के लिए।
होली भाई दूज के लिए रोली, अक्षत और मिठाईअगले दिन के तिलक के लिए।
मंत्र · अर्थ के साथ
होली के मंत्र
हरे कृष्ण महामंत्र
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे । हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ॥
Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare
अर्थ: हरि, राम और कृष्ण के सोलह नाम। कलिसंतरण उपनिषद में ब्रह्मा जी इन्हें नारद मुनि को इस युग के जप के रूप में सिखाते हैं।
कब और कैसे: होली के दिनों में ब्रज के मंदिरों के कीर्तन में, और घर पर राधा-कृष्ण को गुलाल चढ़ाते हुए; कितनी भी बार।
Krishnaya Vasudevaya Haraye Paramatmane Pranata-klesha-nashaya Govindaya namo namah
अर्थ: वसुदेव के पुत्र कृष्ण, हरि, परमात्मा, शरणागतों के कष्ट मिटाने वाले गोविंद को बार-बार नमस्कार। यह भागवत पुराण में उन राजाओं की प्रार्थना है जिन्हें श्रीकृष्ण ने बंधन से छुड़ाया।
कब और कैसे: सुबह गुलाल और फूल अर्पित करते हुए एक या तीन बार।
विष्णु द्वादशाक्षर मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
Om Namo Bhagavate Vasudevaya
अर्थ: ॐ, भगवान वासुदेव को नमस्कार; उस भक्ति का मंत्र जिसकी प्रतीक प्रह्लाद की कथा है, भागवत पुराण में नारद मुनि का सिखाया हुआ।
कब और कैसे: होलिका की रात को याद करते हुए सुबह की पूजा में 11 या 108 बार।
कथा · कहानी और उसका अर्थ
होली की कथा और महत्व
कथा
होली के रंग श्रीकृष्ण के हैं। ब्रज की कथा है कि साँवले बालक कृष्ण ने माँ यशोदा से पूछा कि राधा इतनी गोरी और वे इतने काले क्यों हैं; यशोदा हँसकर बोलीं कि जो रंग चाहो, राधा के चेहरे पर लगा दो। कृष्ण ने यही किया, और तब से ब्रज के ग्वाल-बाल और गोपियाँ फाल्गुन पूर्णिमा के आसपास के दिनों में बरसाना, नंदगाँव, वृंदावन और मथुरा में रंग खेलते आए हैं।
पिछली रात प्रह्लाद की है। होलिका की आग उस घटना की याद में जलती है जब प्रह्लाद उन लपटों से बच निकले जिनमें उनकी बुआ होलिका जल गई, और होली की सुबह बहुत से परिवार रंगों से पहले उसकी ठंडी राख का थोड़ा तिलक लगाते हैं, जो धुलंडी का पुराना अर्थ है।
पौराणिक परंपरा होली को वसंतोत्सव, यानी वसंत का उत्सव, भी कहती है, और उत्तर भारत की गणना में साल का अंत भी: फाल्गुन पूर्णिमा के साथ खत्म होता है, और होली की सुबह चैत्र कृष्ण पक्ष का पहला दिन है, इसलिए रंग नए मौसम का स्वागत करते हैं।
महत्व
होली रंग, वसंत और मेल-जोल का त्योहार है: एक सुबह के लिए उम्र, पद और पुराने झगड़े किनारे रख दिए जाते हैं, सब एक रंग में रंग जाते हैं, और दिन गले मिलने और मिठाई पर खत्म होता है। यह होलिका की आग में अहंकार पर आस्था की जीत के बाद आती है, और ब्रज में राधा-कृष्ण के प्रेम का उत्सव है।
इसके बाद पर्वों की एक लड़ी चलती है: अगले दिन होली भाई दूज; आग के पाँच दिन बाद रंग पंचमी, जो महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रंगों का मुख्य दिन है; एक हफ्ते बाद शीतला अष्टमी, यानी बसौड़ा; और होली के दस दिन बाद दशा माता, जिसे राजस्थान और मध्य प्रदेश की महिलाएँ मनाती हैं।
उपाय · परंपरा
होली के पारंपरिक उपाय
पहले भगवान को गुलाल
किसी को रंग लगाने से पहले दिन का पहला गुलाल राधा-कृष्ण या कुलदेवता को चढ़ाएँ। परिवार इसे त्योहार की शुरुआत कृतज्ञता से करने के तरीके के रूप में निभाते हैं।
खेलने से पहले आशीर्वाद
खेलने से पहले बड़ों के चरणों में गुलाल रखकर आशीर्वाद लें। परंपरा होली पर बड़ों के आशीर्वाद को साल का पहला आशीर्वाद मानती है।
होलिका की राख का तिलक
लोक-परंपरा के अनुसार आशीर्वाद और रक्षा के लिए सुबह माथे पर होलिका की थोड़ी ठंडी राख लगाएँ।
रूठे को मनाएँ
जिससे अनबन हो, उसे रंग लगाकर गले मिलें; होली की अपनी परंपरा कहती है कि रंग पुराने साल के गिले-शिकवे धो देते हैं।
बाँटें और खिलाएँ
घर में काम करने वालों और ज़रूरतमंदों के साथ गुझिया और भोजन बाँटें; मेल-जोल का त्योहार बाँटने से ही पूरा होता है।
परंपरा, संक्षेप में
होली पर क्या करें, क्या न करें
क्या करें
खेलने से पहले त्वचा और बालों पर तेल लगाएँ और पुराने सूती कपड़े पहनें।
भरोसेमंद जगह से प्राकृतिक या हर्बल रंग लें।
किसी को रंग लगाने से पहले पूछें, और 'ना' का सम्मान करें।
आँखें बचाएँ; रंग चला जाए तो साफ पानी से धोएँ और दर्द रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ।
पानी कम खर्च करें और खुली जगह में खेलें।
पहले भगवान और बड़ों को गुलाल लगाएँ।
दोपहर तक रुकें, आराम से नहाएँ और शाम को परिवार से मिलें।
क्या न करें
सीसा, पारा, क्रोमियम, अभ्रक, इंजन ऑयल या चाँदी-सुनहरे पेंट वाले रंग न लें।
अजनबियों, पशुओं, बुज़ुर्गों, शिशुओं या चलती गाड़ियों पर रंग या पानी के गुब्बारे न फेंकें।
मना करने वाले पर ज़बरदस्ती रंग न डालें; होली खेल है, छेड़छाड़ नहीं।
नशे में गाड़ी न चलाएँ, और बच्चों या बीमारों को भांग न दें।
रंग ज़ोर से रगड़कर या मिट्टी के तेल से न छुड़ाएँ; तेल और हल्का साबुन बेहतर हैं।
बच्चों को सड़कों या छतों के पास अकेले खेलने न दें।
देश भर में
होली की क्षेत्रीय परंपराएँ और भोग
क्षेत्र के अनुसार
ब्रज (बरसाना, नंदगाँव, वृंदावन, मथुरा)
हफ्ते भर से ज़्यादा की होली: बरसाना की लट्ठमार होली, जिसमें राधा के गाँव की महिलाएँ नंदगाँव के पुरुषों का लाठियों से स्वागत करती हैं, और अगले दिन नंदगाँव में; वृंदावन के मंदिरों में फूलों की होली; और होली के बाद दाऊजी का हुरंगा।
पंजाब (होला मोहल्ला)
होली के अगले दिन सिख समाज आनंदपुर साहिब में गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा शुरू किए होला मोहल्ला के लिए जुटता है: नकली युद्ध, गतका, घुड़सवारी, कीर्तन और लंगर।
पश्चिम बंगाल और ओडिशा (दोल यात्रा)
पूर्णिमा के दिन ही दोल पूर्णिमा, राधा-कृष्ण को झूले पर सजाकर और अबीर के साथ; यह चैतन्य महाप्रभु की जयंती भी है, और शांतिनिकेतन में बसंत उत्सव होता है।
वाराणसी
रंगभरी एकादशी से काशी की होली शुरू होती है, और अगले दिन मणिकर्णिका घाट पर राख से मसान की होली खेली जाती है, होली से पहले।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश
होली की सुबह धुलिवंदन और आग के पाँच दिन बाद रंग पंचमी, जो रंगों का बड़ा दिन है; कोंकण में शिमगा।
मणिपुर (याओसांग)
फाल्गुन पूर्णिमा से पाँच दिन, थाबल चोंगबा नृत्य, खेलों और रंगों के साथ।
उत्तराखंड (कुमाऊँनी होली)
हफ्तों तक होली गायन: घरों में शास्त्रीय गीतों की बैठकी होली और टोलियों में गाई जाने वाली खड़ी होली।
बिहार (फगुआ)
फगुआ के गीत और जोगीरा, मालपुआ और दही-बड़े, और पूरे गाँव के साथ रंग।
नेपाल
फागु पूर्णिमा, पहाड़ों में पूर्णिमा के दिन और तराई में अगले दिन खेली जाती है।
भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन
गुझियाखोया, मेवा और चीनी भरी मिठाई: होली की पहचान।
ठंडाईबादाम, सौंफ, काली मिर्च और गुलाब वाला ठंडा दूध; बच्चों और बीमारों के लिए बिना भांग।
मालपुआ और दही-बड़ेचाशनी वाले मीठे पुए और दही में डूबे बड़े, उत्तर प्रदेश और बिहार का होली का भोजन।
पूरणपोळीमहाराष्ट्र की चने की दाल और गुड़ भरी मीठी रोटी।
नमकीन और मठरीमेहमानों के लिए घर पर बने नमकीन।
काँजी बड़ाराई के खट्टे पानी में दाल के बड़े, राजस्थान और दिल्ली का पसंदीदा।
आने वाले वर्षों में होली की तारीख
इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।
आने वाले वर्षों में होली की तारीख
वर्ष
तारीख
स्थिति
2026इस वर्ष
बुधवार, 4 मार्च 2026
बीत गई
2027
मंगलवार, 23 मार्च 2027
आने वाली
2028
शनिवार, 11 मार्च 2028
आने वाली
पंचांगों में होली की तारीख अलग क्यों होती है
दो पंचांग होली की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।
तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: होली का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।
नई दिल्ली में रंगों वाली होली मंगलवार, 23 मार्च 2027 को है। यह होलिका दहन के अगले दिन की सुबह है, जो फाल्गुन पूर्णिमा की रात जलाया जाता है, इसलिए इसकी तारीख पूर्णिमा के साथ चलती है और हर साल बदलती है।
होली की तिथि क्या है?
चैत्र (पूर्णिमांत) / फाल्गुन (अमांत) मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि। नई दिल्ली में यह तिथि 22 मार्च, शाम 4:14 से 23 मार्च, दोपहर 2:29 तक है, और होली का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।
दूसरे कैलेंडर में होली की तारीख अलग क्यों है?
मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।
अगले साल होली कब है?
2028 में शनिवार, 11 मार्च।
होलिका दहन, होली और धुलंडी में क्या अंतर है?
होलिका दहन, जिसे छोटी होली या जलाने वाली होली भी कहते हैं, पूर्णिमा की रात का अलाव है। होली, यानी धुलंडी, धुलेटी या रंगवाली होली, अगली सुबह है, जब रंग खेले जाते हैं। इसलिए खेलने वाली होली हमेशा आग के अगले दिन होती है।
क्या होली खेलने का कोई शुभ मुहूर्त है?
नहीं। रंग खेलने का कोई शास्त्रीय मुहूर्त नहीं है; रंग सुबह से लगभग दोपहर तक खेले जाते हैं। जो परिवार सुबह की पूजा या मंदिर जाने के लिए शुभ समय चाहते हैं, वे दिन का कोई शुभ चौघड़िया (चर: सुबह 9:25 से सुबह 10:56 तक; लाभ: सुबह 10:56 से दोपहर 12:28 तक; अमृत: दोपहर 12:28 से दोपहर 1:59 तक; शुभ: दोपहर 3:31 से शाम 5:02 तक) देखते हैं। पर्व का मुहूर्त पिछली रात होलिका दहन का होता है।
घर पर प्राकृतिक रंग कैसे बनाएँ?
नारंगी-पीले पानी के लिए टेसू (पलाश) के फूल रात भर भिगोकर उबालें; पीले पाउडर के लिए हल्दी में बेसन मिलाएँ; गुलाबी पानी के लिए कसा हुआ चुकंदर उबालें; हरे के लिए मेहंदी पाउडर सूखा लगाएँ; और लाल के लिए सूखे गुड़हल या लाल चंदन का पाउडर। पहले थोड़ा त्वचा पर लगाकर देख लें।
चेहरे से होली का रंग कैसे छुड़ाएँ?
पहले सूखा रंग पोंछें, फिर गुनगुने पानी और हल्के साबुन से, या बेसन और दही के लेप से धोएँ; ज़िद्दी जगहों पर थोड़ा नारियल तेल मलकर फिर धोएँ। ज़ोर से न रगड़ें, मिट्टी का तेल या ब्लीच न लगाएँ, और बाद में मॉइस्चराइज़र लगाएँ। खेलने से पहले तेल लगाने से यह बहुत आसान हो जाता है।
क्या होली के रंग नुकसान करते हैं?
सस्ते रासायनिक रंगों में सीसा, पारा, क्रोमियम, अभ्रक या इंजन ऑयल हो सकता है, जिनसे दाने, आँखों में चोट और साँस की तकलीफ हो सकती है। भरोसेमंद जगह से प्राकृतिक या हर्बल रंग लें, आँख और मुँह से रंग दूर रखें, और आँख में दर्द या न जाने वाले दानों पर डॉक्टर को दिखाएँ।
होली भाई दूज क्या है और कब है?
होली भाई दूज चैत्र कृष्ण द्वितीया को, आम तौर पर होली के अगले दिन, उत्तर भारत के बहुत से परिवारों में मनाई जाती है। बहनें भाइयों को रोली का तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं, उनकी लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं और भोजन कराती हैं, जैसे दिवाली के बाद की भाई दूज पर; तिलक आम तौर पर दोपहर में होता है, उसी भाई दूज की तरह।
होली पर रंग क्यों लगाते हैं?
ब्रज की कथा कहती है कि साँवले बालक कृष्ण इस बात से परेशान थे कि राधा गोरी हैं और वे काले, तो यशोदा ने कहा कि राधा के चेहरे पर रंग लगा दो; उन्होंने लगाया, और तब से ग्वाल-बाल और गोपियाँ रंग खेलते आए हैं। रंग वसंत का प्रतीक भी हैं, और एक सुबह के लिए सबको बराबर कर देते हैं।
होली की सुबह किसकी पूजा होती है?
छोटी-सी पूजा: सुबह स्नान के बाद, जहाँ परंपरा हो, होलिका की ठंडी राख का थोड़ा तिलक लगाया जाता है, राधा-कृष्ण या कुलदेवता को गुलाल, फूल और मिठाई चढ़ाई जाती है, और खेलने से पहले बड़ों के चरणों में गुलाल रखा जाता है। पर्व की मुख्य पूजा पिछली रात की होलिका पूजा है।
होला मोहल्ला क्या है?
होला मोहल्ला होली के अगले दिन पंजाब के आनंदपुर साहिब में मनाया जाने वाला सिख पर्व है, जिसे गुरु गोबिंद सिंह जी ने युद्ध-कौशल के अभ्यास के दिन के रूप में शुरू किया: निहंग सिख गतका और घुड़सवारी दिखाते हैं, नकली युद्ध, कीर्तन, कविता और लाखों लोगों के लिए लंगर होता है।
लट्ठमार होली क्या है?
लट्ठमार होली मथुरा के पास राधा के गाँव बरसाना में होली से पहले के दिनों में खेली जाती है: कृष्ण के गाँव नंदगाँव के पुरुष बरसाना की महिलाओं को रंग लगाने आते हैं, जो उनका लाठियों से स्वागत करती हैं और पुरुष ढाल से बचते हैं; अगले दिन यही खेल नंदगाँव में होता है। यह राधा और सखियों के साथ कृष्ण की छेड़छाड़ की याद है।
क्या होली पर नॉनवेज खा सकते हैं या नशा कर सकते हैं?
होली में उपवास का कोई नियम नहीं है, और परिवारों की परंपरा अलग-अलग है: बहुत से घर गुझिया और मालपुए के साथ दिन शाकाहारी रखते हैं, कुछ दावत बनाते हैं। कुछ जगह भांग वाली ठंडाई परंपरा है, पर बच्चों या बीमारों को कभी न दें, और नशे में कोई गाड़ी न चलाए। अपने परिवार की परंपरा मानें और सुरक्षित रहें।
क्या होली के टोटके और उपाय काम करते हैं?
किसी भी उपाय के साथ गारंटी नहीं जुड़ी है। इस गाइड के उपाय, पहला गुलाल भगवान को चढ़ाने से लेकर रूठे को मनाने तक, कृतज्ञता और सद्भाव के पारंपरिक काम हैं जो त्योहार के भाव से मेल खाते हैं। किसी भी असली समस्या के लिए सही सलाह लें; परंपराओं को उनके भाव के लिए निभाएँ।