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शुक्ल पक्ष · दशमी तिथि · ज्येष्ठ

गंगा दशहरा 2027 कब है?

गंगा दशहरा 2027

230 दिन बाद

रवि, 13 जून

2027 में गंगा दशहरा रविवार, 13 जून को है। नई दिल्ली में दशमी तिथि 13 जून, रात 2:45 से 14 जून, रात 2:12 तक रहेगी।

2028: शुक्रवार, 2 जून 2028

गंगा दशहरा कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

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नई दिल्ली के लिए गणना

गंगा दशहरा 2027: तारीख और तिथि का समय

रविवार, 13 जून 2027

तिथि
दशमी, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
ज्येष्ठ
तिथि आरंभ
13 जून, रात 2:45
तिथि समाप्त
14 जून, रात 2:12
दिन का निर्णय
सूर्योदय
नई दिल्ली में सूर्योदय
13 जून, सुबह 5:22

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: गंगा दशहरा का निर्णय सूर्योदय के समय चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

गंगा दशहरा 2027 के सभी मुहूर्त · नई दिल्ली

गंगा दशहरा 2027 शुभ मुहूर्त

गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल दशमी का पर्व है, वह दिन जब राजा भगीरथ की तपस्या से माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरीं। 'दशहरा' का अर्थ है दस पापों को हरने वाला, और यह दिन भोर में गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान, दस-दस वस्तुओं से पूजा और गर्मी के दान के साथ मनाया जाता है। नई दिल्ली में गंगा दशहरा रविवार, 13 जून 2027 को है; स्नान ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:02 से सुबह 4:42 तक) में सबसे शुभ है, और दशमी तिथि रात 2:44 से रात 2:12 (14 जून) तक रहेगी।

गंगा दशहरा 2027 के सभी मुहूर्त — नई दिल्ली
मुहूर्तनई दिल्ली में समयकिसके लिए
ब्रह्म मुहूर्त: गंगा स्नानसुबह 4:02 से सुबह 4:42 तकरात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवाँ, जो सूर्योदय से एक मुहूर्त पहले ख़त्म होता है।

भोर से पहले का समय, इस दिन के स्नान के लिए सबसे शुभ: गंगा या किसी भी नदी में, या घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर। हरिद्वार, काशी और प्रयागराज में श्रद्धालु इसी समय घाटों पर पहुँचते हैं।

हस्त नक्षत्रशाम 4:59 (12 जून) से शाम 5:00 तकगंगा दशहरा के आसपास चंद्रमा हस्त नक्षत्र में कब से कब तक है।

पुराणों की परंपरा इस दिन के लिए दस योग बताती है: ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी, बुधवार, हस्त नक्षत्र, व्यतीपात योग, गर करण, आनंद योग, कन्या राशि में चंद्रमा और वृषभ में सूर्य। जितने अधिक योग मिलें, स्नान का उतना ही अधिक महत्व माना जाता है। किसी साल हस्त नक्षत्र ठीक इसी दिन होता है, तो किसी साल पहले बीत चुका या अगले दिन, जैसा समय में दिखता है।

सूर्योदयसुबह 5:22क्षितिज पर सूर्य का ऊपरी किनारा दिखने का समय।

स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, और पर्व का दिन वही है जिसके सूर्योदय पर दशमी हो।

अभिजीत मुहूर्तसुबह 11:53 से दोपहर 12:49 तकदिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय दोपहर के आसपास।

दोपहर का मुहूर्त, उन परिवारों के लिए जो पूजा और दान सुबह देर से करते हैं। परंपरा के अनुसार बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं होता।

शुभ चौघड़िया (दिन)
  • चर सुबह 7:07 से सुबह 8:51 तक
  • लाभ सुबह 8:51 से सुबह 10:36 तक
  • अमृत सुबह 10:36 से दोपहर 12:21 तक
  • शुभ दोपहर 2:05 से दोपहर 3:50 तक
दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया।

दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया, घर की पूजा और दान के लिए, अगर भोर में न हो सके।

सूर्यास्त: शाम का दीपदानशाम 7:19सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज से ओझल होने का समय।

गोधूलि में नदी पर दीये बहाए जाते हैं और घाटों पर गंगा आरती होती है। घर पर सूर्यास्त के समय गंगाजल के कलश के पास दीपक जलाएँ।

उस दिन के शुभ समय

उस दिन के शुभ समय
मुहूर्तनई दिल्ली में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्तसुबह 11:53 से दोपहर 12:49शुभ
अमृत कालसुबह 11:00 से दोपहर 12:36सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:02 से सुबह 4:42शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
अवधिनई दिल्ली में समय
राहु कालशाम 5:35 से शाम 7:19
यमगण्ड कालदोपहर 12:21 से दोपहर 2:05
दुर्मुहूर्त (पहला)शाम 5:28 से शाम 6:24
वर्ज्यम्रात 1:09 से रात 2:47

ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए रविवार, 13 जून 2027 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।

पूजा विधि · घर पर, क्रम से

गंगा दशहरा पूजा विधि

  1. भोर का स्नान

    ब्रह्म मुहूर्त में गंगा, या किसी नदी या सरोवर में जहाँ सुरक्षित पहुँच सकें, स्नान करें, या घर पर नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर 'गङ्गे च यमुने चैव' श्लोक बोलें। कुछ परिवार दस डुबकियाँ लगाते हैं, उन दस पापों में से हर एक के लिए एक, जिन्हें यह दिन हरता है।

  2. सूर्य को अर्घ्य

    स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, कुछ अक्षत और लाल फूल डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें।

  3. संकल्प लें

    हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र और स्थान बोलें और संकल्प करें कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को आप माँ गंगा की पूजा कर रहे हैं, शरीर, वाणी और मन के दस प्रकार के दोषों से मुक्ति की प्रार्थना के साथ।

  4. चौकी सजाएँ

    साफ चौकी पर गंगाजल से भरा कलश, मकर पर विराजी माँ गंगा का चित्र और भगवान शिव का चित्र रखें, जिनकी जटाओं से होकर गंगा उतरीं। बहुत से लोग भगीरथ का भी स्मरण करते हैं, जिनकी तपस्या से गंगा आईं। घी का दीपक और धूप जलाएँ।

  5. पहले गणेश पूजा

    'ॐ गं गणपतये नमः' बोलकर गणेश जी को जल, रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।

  6. दस-दस वस्तुओं से गंगा पूजा

    माँ गंगा को रोली, हल्दी, अक्षत, सफेद या पीला वस्त्र अर्पित करें, और इस दिन की परंपरा के अनुसार हर चीज़ दस-दस: दस प्रकार के फूल, दस दीपक, दस फल, दस प्रकार का नैवेद्य, दस पान और तिल।

  7. शिव जी का अभिषेक

    घर या मंदिर में शिवलिंग पर 'ॐ नमः शिवाय' बोलते हुए गंगाजल चढ़ाएँ और बेलपत्र अर्पित करें, यह याद करते हुए कि शिव जी ने गंगा को अपनी जटाओं में थामा ताकि उनके वेग से धरती न फटे।

  8. मंत्र और कथा

    'ॐ नमो गङ्गायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः' का 108 बार जप करें, आता हो तो गंगा स्तोत्र पढ़ें, और भगीरथ व गंगा अवतरण की कथा पढ़ें या सुनें।

  9. इस दिन का दान

    जहाँ हो सके दस-दस दान करें: जल के घड़े, हाथ के पंखे, छाते, सत्तू, शरबत, आम और खरबूजे, अनाज, तिल, गुड़ और वस्त्र, दस ज़रूरतमंद लोगों या परिवारों को, या किसी मंदिर में।

  10. आरती

    घी के दीपक या कपूर से 'ॐ जय गंगे माता' आरती गाएँ, घंटी बजाएँ और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें।

  11. शाम का दीपदान

    सूर्यास्त के समय पत्ते के दोने में छोटा दीपक नदी में प्रवाहित करें, या घर पर गंगाजल के पास दीपक जलाएँ। आटे या मिट्टी के दीये और पत्ते ही लें, प्लास्टिक या पन्नी कभी नहीं।

  12. भोजन

    पूजा के बाद सात्विक भोजन करें; बहुत से लोग व्रत या एक समय भोजन रखते हैं। अगले दिन सबसे कठिन एकादशी व्रत, निर्जला एकादशी, आती है, इसलिए कई लोग हल्का भोजन करते हैं।

सामग्री · पहले से तैयार रखें

गंगा दशहरा पूजा सामग्री सूची

  • गंगाजल इस दिन का केंद्र: स्नान, कलश और शिव अभिषेक के लिए। न हो तो साफ पानी में इसकी कुछ बूँदें।
  • कलश और तांबे का लोटा कलश चौकी पर गंगाजल के लिए; लोटा सूर्य के अर्घ्य के लिए।
  • माँ गंगा और शिव जी का चित्र मकर पर विराजी गंगा; जटाओं में गंगा लिए शिव; अभिषेक के लिए शिवलिंग।
  • चौकी और सफेद या पीला कपड़ा पूजा की वेदी।
  • रोली, हल्दी और चंदन तिलक और भेंट के लिए।
  • अक्षत साबुत चावल।
  • दस प्रकार के फूल मौसम में जो मिलें; परंपरा दस-दस की है।
  • दस दीपक, घी या तेल और बत्ती पूजा और शाम के दीपदान के लिए मिट्टी के दीये।
  • दस फल आम, खरबूजा, केला, लीची, ककड़ी या जो मौसम में मिले।
  • नैवेद्य मिठाई, खीर या गुड़; हो सके तो दस प्रकार।
  • दस पान और सुपारी नैवेद्य के साथ।
  • काले या सफेद तिल गंगा जी को अर्पित करने और दान के लिए।
  • बेलपत्र शिव अभिषेक के लिए।
  • धूप, कपूर और घंटी पूजा और आरती के लिए।
  • पत्ते के दोने और आटे या मिट्टी के दीये शाम को नदी में दीपदान के लिए; प्लास्टिक और पन्नी से बचें।
  • मिट्टी के घड़े गर्मी में जल दान के लिए।
  • हाथ के पंखे और छाते इस दिन के पारंपरिक गर्मी के दान।
  • सत्तू, शरबत की सामग्री और गुड़ दान और प्याऊ के लिए, जो बहुत से लोग लगाते हैं।
  • दान के लिए अनाज और वस्त्र चावल, गेहूँ या जौ और सादे कपड़े, सामर्थ्य के अनुसार।
  • जनेऊ और लाल या पीला धागा गणेश जी और शिव जी के लिए, जहाँ परंपरा हो।
  • गंगा स्तोत्र या कथा की पुस्तक वैकल्पिक; कथा ऊपर दी गई है।

मंत्र · अर्थ के साथ

गंगा दशहरा के मंत्र और आरती

गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

Om Gam Ganapataye Namah

अर्थ: ॐ, गं: गणों के स्वामी गणपति को नमस्कार।

कब और कैसे: पूजा की शुरुआत में 11 बार।

स्नान मंत्र: पवित्र नदियों का आवाहन

गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति ।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥

Gange cha Yamune chaiva Godavari Sarasvati
Narmade Sindhu Kaveri jale'smin sannidhim kuru

अर्थ: हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी, इस जल में उपस्थित हों।

कब और कैसे: स्नान करते समय, या घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाते हुए एक बार; हर घर इसी श्लोक से स्नान या कलश का जल पवित्र करता है।

गंगा मंत्र

ॐ नमो गङ्गायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः

Om Namo Gangayai Vishvarupinyai Narayanyai Namo Namah

अर्थ: ॐ, उन गंगा को नमस्कार जिनका रूप सारा विश्व है, जो नारायणी हैं; बार-बार नमस्कार।

कब और कैसे: भेंट अर्पित करने के बाद तुलसी या रुद्राक्ष की माला पर 108 बार, या जितनी देर घाट पर बैठें।

गंगा स्मरण

गङ्गा गङ्गेति यो ब्रूयात् योजनानां शतैरपि ।
मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति ॥

Ganga Gangeti yo bruyat yojananam shatairapi
Muchyate sarvapapebhyo Vishnulokam sa gachchhati

अर्थ: जो सौ योजन दूर से भी 'गंगा, गंगा' कहता है, वह सब पापों से मुक्त होकर विष्णु लोक को जाता है।

कब और कैसे: गंगा की स्तुति का प्रसिद्ध श्लोक; जो नदी तक नहीं पहुँच सकते, वे हाथ जोड़कर इसे बोलते हैं।

शिव पंचाक्षर मंत्र

ॐ नमः शिवाय

Om Namah Shivaya

अर्थ: ॐ, शिव को नमस्कार। 'नमः शिवाय' शब्द यजुर्वेद के श्रीरुद्रम् से हैं।

कब और कैसे: शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाते हुए 11 या 108 बार।

आरती गंगा जी की आरती: ॐ जय गंगे माता पूरी आरती

ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥

चंद्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पड़ें जो तेरी, सो नर तर जाता॥
ॐ जय गंगे माता॥

पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥
ॐ जय गंगे माता॥

एक ही बार जो तेरी, शरणागति आता।
यम की त्रास मिटा कर, परमगति पाता॥
ॐ जय गंगे माता॥

आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता।
दास वही सहज में, मुक्ति को पाता॥
ॐ जय गंगे माता॥

ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता॥

Om jai Gange Mata, Shri jai Gange Mata.
Jo nar tumko dhyata, manvanchhit phal pata.

Chandra si jot tumhari, jal nirmal aata.
Sharan paden jo teri, so nar tar jata.
Om jai Gange Mata.

Putra Sagar ke tare, sab jag ko gyata.
Kripa drishti tumhari, tribhuvan sukh data.
Om jai Gange Mata.

Ek hi baar jo teri, sharanagati aata.
Yam ki traas mita kar, paramgati pata.
Om jai Gange Mata.

Aarti maat tumhari, jo jan nitya gata.
Das vahi sahaj mein, mukti ko pata.
Om jai Gange Mata.

Om jai Gange Mata, Shri jai Gange Mata.
Jo nar tumko dhyata, manvanchhit phal pata.
Om jai Gange Mata, Shri jai Gange Mata.

यह आरती उसी रूप में है जैसे आम तौर पर गाई जाती है। यह गीता प्रेस के 'आरती-संग्रह' में नहीं है; यहाँ जुड़े छपे 'आरती चालीसा संग्रह' में 'जोत' की जगह 'ज्योति', 'सब जग को ज्ञाता' की जगह 'सब जग की ज्ञाता', 'मात' की जगह 'मातु' और 'नित्य' की जगह 'नित' है। छपा पाठ

कथा · कहानी और उसका अर्थ

गंगा दशहरा की कथा और महत्व

कथा

अयोध्या के राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया, और इंद्र ने यज्ञ का घोड़ा चुराकर कपिल मुनि के आश्रम के पास छोड़ दिया। सगर के साठ हज़ार पुत्र खोदते-खोदते वहाँ पहुँचे, ध्यान में बैठे मुनि के पास घोड़ा चरता देखकर उन पर चोरी का आरोप लगाया; कपिल मुनि ने आँखें खोलीं, तो वे सब भस्म हो गए। उन्हें शांति केवल गंगा के जल से मिल सकती थी, जो तब स्वर्ग में बहती थीं।

सगर के पौत्र अंशुमान और उनके पुत्र दिलीप ने प्रयास किया, पर सफल हुए बिना चल बसे। दिलीप के पुत्र भगीरथ ने राज्य छोड़कर ऐसी कठोर तपस्या की कि ब्रह्मा जी गंगा को धरती पर भेजने को तैयार हो गए। पर स्वर्ग से गंगा के वेग से धरती फट जाती, इसलिए भगीरथ ने शिव जी की आराधना की, और शिव जी ने गंगा को अपनी जटाओं में थामकर धाराओं के रूप में धीरे-धीरे उतारा।

गंगा भगीरथ के रथ के पीछे-पीछे चलीं। रास्ते में उनके जल ने जह्नु ऋषि का यज्ञ बहा दिया, तो ऋषि ने उन्हें पी लिया, और देवताओं व भगीरथ की प्रार्थना पर फिर छोड़ा; इसीलिए गंगा को जाह्नवी कहते हैं। अंत में गंगा सगर के पुत्रों की भस्म तक पहुँचीं, उसे अपने जल से छुआ, और वे स्वर्ग चले गए। यह कथा वाल्मीकि रामायण में विश्वामित्र सुनाते हैं, और परंपरा गंगा का धरती पर अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मानती है।

भगीरथ के कारण ही गंगा को भागीरथी भी कहते हैं, और किसी बड़े, धैर्य भरे प्रयास को आज भी भगीरथ प्रयास कहा जाता है।

महत्व

यहाँ दशहरा का अर्थ है दश-हरा, यानी दस को हरने वाला: परंपरा मानती है कि इस दिन गंगा स्नान से दस प्रकार के दोष धुल जाते हैं, शरीर के तीन (बिना दिए कुछ लेना, हिंसा और अनुचित संबंध), वाणी के चार (कठोर वचन, झूठ, चुगली और व्यर्थ बात) और मन के तीन (दूसरे के धन का लोभ, किसी का बुरा सोचना और गलत धारणा)। ये दस मनुस्मृति में गिनाए गए हैं; यह दिन इन्हें छोड़ने का संकल्प बनाता है।

पुराणों की परंपरा स्नान के लिए दस योग बताती है, जिनमें हस्त नक्षत्र, बुधवार और वृषभ में सूर्य भी हैं, और जब इनमें से कई मिलें तो दिन का महत्व और बढ़ जाता है; उनका समय ऊपर दिया है। अगले दिन निर्जला एकादशी होती है, और बहुत से पंचांग उसी के साथ गायत्री जयंती भी मानते हैं। यह आश्विन का दशहरा, यानी विजयादशमी, नहीं है, और वैशाख की गंगा सप्तमी से भी अलग है, जो गंगा के जन्म, या जह्नु ऋषि से उनकी मुक्ति, का दिन है।

उपाय · परंपरा

गंगा दशहरा के पारंपरिक उपाय

स्नान, या घर पर गंगाजल

सुबह जल्दी गंगा या किसी नदी में स्नान करें; न हो सके तो नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान मंत्र बोलें। परंपरा स्थान जितना ही भाव को महत्व देती है।

दस-दस दान

किसी उपयोगी चीज़ के दस दान करें, जैसे जल के दस घड़े, दस पंखे, दस हिस्से फल या भोजन, दस ज़रूरतमंद लोगों या परिवारों को। यह संख्या दश-हरा का भाव बनाए रखती है।

ठंडे पानी की प्याऊ

राहगीरों के लिए पानी या शरबत की प्याऊ लगाएँ, जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार के बहुत से कस्बों में इस दिन होता है; ज्येष्ठ सबसे गर्म महीना है।

गंगाजल से शिव अभिषेक

'ॐ नमः शिवाय' बोलते हुए शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएँ; मान्यता है कि इससे गंगा को धारण करने वाले शिव प्रसन्न होते हैं।

घर में ताज़ा गंगाजल

गंगाजल घर लाएँ, उसे पूजा स्थान में साफ तांबे या पीतल के बर्तन में ढककर रखें, और साल भर पवित्रीकरण के लिए पानी में कुछ बूँदें डालें।

नदी के लिए भेंट

किसी घाट की सफाई में हिस्सा लें या उसका सहयोग करें, या कम से कम अपना कचरा वापस ले जाएँ। जिस नदी को माँ माना जाता है, उसकी सबसे अच्छी सेवा उसे साफ रखना है।

पितरों का स्मरण

स्नान के बाद पितरों को तिल मिला जल अर्पित करें, क्योंकि भगीरथ की कथा स्वयं पूर्वजों को शांति देने की कथा है।

परंपरा, संक्षेप में

गंगा दशहरा पर क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • सुबह जल्दी, हो सके तो ब्रह्म मुहूर्त में, नदी में या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें।
  • माँ गंगा की दस-दस वस्तुओं से और शिव जी की गंगाजल से पूजा करें।
  • जल, फल, पंखे और भोजन का दान करें, जहाँ हो सके दस-दस।
  • गंगा मंत्र या स्तोत्र पढ़ें और भगीरथ की कथा सुनें।
  • नदी में केवल आटे या मिट्टी के दीये पत्तों पर बहाएँ, और अपना कचरा साथ ले जाएँ।
  • दिन का भोजन सात्विक रखें।
  • भीड़ वाले घाटों पर बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ रहें, और केवल सुरक्षित जगह स्नान करें।

क्या न करें

  • नदी में प्लास्टिक, पन्नी, मूर्तियाँ, पुराने चित्र या पूजा का कचरा न डालें।
  • नदी में साबुन या शैम्पू का इस्तेमाल न करें।
  • गहरे या तेज़ बहाव वाले पानी में न जाएँ, और जहाँ घाट प्रशासन मना करे वहाँ स्नान न करें।
  • वाणी के दोष छोड़ने के इस दिन झगड़ा या कटु वचन न बोलें।
  • ज़्यादातर परिवारों की परंपरा के अनुसार इस दिन मांस और शराब से दूर रहें।
  • स्नान को छूट न समझें; परंपरा उन दस दोषों को न दोहराने का संकल्प माँगती है।

देश भर में

गंगा दशहरा की क्षेत्रीय परंपराएँ और भोग

क्षेत्र के अनुसार

हरिद्वार और ऋषिकेश
लाखों श्रद्धालु हर की पौड़ी और ऋषिकेश के घाटों पर स्नान करते हैं, शाम की गंगा आरती में भारी भीड़ होती है, और बहुत से लोग नीलकंठ महादेव के दर्शन को भी जाते हैं।
वाराणसी
भोर से पहले दशाश्वमेध और दूसरे घाटों पर स्नान, शाम को नदी पर दीपदान और भव्य गंगा आरती।
प्रयागराज और गढ़मुक्तेश्वर
प्रयागराज में संगम स्नान; पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गंगा किनारे गढ़मुक्तेश्वर में बड़ा मेला और स्नान पर्व।
उत्तराखंड (खासकर कुमाऊँ)
परिवार मुख्य द्वार पर दशहरा द्वार पत्र चिपकाते हैं: रंगीन ज्यामितीय आकृतियों वाला कागज़, जिस पर अगस्त्य, पुलस्त्य, वैशम्पायन, जैमिनि और सुमंतु ऋषियों के नाम वाला श्लोक होता है, जिसे परंपरा से बिजली (वज्रपात) से रक्षा करने वाला माना जाता है। कुल पुरोहित इन्हें बनाकर घर-घर लाते हैं।
बिहार और बंगाल
पटना के घाटों और हुगली के किनारे भीड़ स्नान करती है।

भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन

  • शरबत और ठंडा पानी प्याऊ पर और मेहमानों को; बेल, गुलाब या नींबू का शरबत।
  • सत्तू शरबत या लड्डू के रूप में, और दान में।
  • आम, खरबूजा, ककड़ी और लीची ज्येष्ठ के फल, दस-दस अर्पित और सबके साथ बाँटे जाते हैं।
  • खीर या मिठाई नैवेद्य और परिवार के भोजन के लिए।
  • हल्का सात्विक भोजन अगले दिन निर्जला एकादशी होने के कारण बहुत से लोग एक बार और हल्का भोजन करते हैं।

आने वाले वर्षों में गंगा दशहरा की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

आने वाले वर्षों में गंगा दशहरा की तारीख
वर्षतारीखस्थिति
2026इस वर्षबुधवार, 24 जून 2026बीत गई
2027रविवार, 13 जून 2027आने वाली
2028शुक्रवार, 2 जून 2028आने वाली

पंचांगों में गंगा दशहरा की तारीख अलग क्यों होती है

दो पंचांग गंगा दशहरा की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: गंगा दशहरा का निर्णय सूर्योदय से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

गंगा दशहरा से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में गंगा दशहरा कब है?

2027 में गंगा दशहरा रविवार, 13 जून को है। नई दिल्ली में दशमी तिथि 13 जून, रात 2:45 से 14 जून, रात 2:12 तक रहेगी।

गंगा दशहरा की तिथि क्या है?

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि। नई दिल्ली में यह तिथि 13 जून, रात 2:45 से 14 जून, रात 2:12 तक है, और गंगा दशहरा का दिन सूर्योदय के समय चल रही तिथि से तय होता है।

दूसरे कैलेंडर में गंगा दशहरा की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल गंगा दशहरा कब है?

2028 में शुक्रवार, 2 जून।

गंगा दशहरा कब है और स्नान कब करें?

नई दिल्ली में गंगा दशहरा रविवार, 13 जून 2027 को, ज्येष्ठ शुक्ल दशमी पर है। स्नान ब्रह्म मुहूर्त, सुबह 4:02 से सुबह 4:42 तक, में या सूर्योदय के तुरंत बाद सबसे शुभ है, और पूजा व दान दशमी रहते, रात 2:44 से रात 2:12 (14 जून) तक, किए जाते हैं। समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए इस पेज पर अपना शहर चुनें।

गंगा दशहरा क्यों मनाया जाता है?

यह स्वर्ग से धरती पर गंगा के अवतरण का पर्व है, जो राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों, सगर के साठ हज़ार पुत्रों, को शांति देने के लिए तपस्या से संभव किया। शिव जी ने गंगा को अपनी जटाओं में थामा ताकि उनके वेग से धरती न फटे। मान्यता है कि इस दिन स्नान, पूजा और दान से दस प्रकार के दोष धुल जाते हैं।

गंगा दशहरा क्या होता है, इसके नाम का अर्थ क्या है?

यह ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को गंगा के अवतरण का पर्व है। यहाँ दशहरा का अर्थ है दश-हरा, दस को हरने वाला: शरीर के तीन, वाणी के चार और मन के तीन दोष, जो मान्यता के अनुसार इस दिन गंगा स्नान से धुल जाते हैं। यह आश्विन के दशहरे (विजयादशमी) से अलग पर्व है।

गंगा दशहरा का क्या महत्व है?

इस दिन गंगा धरती पर उतरीं, इसलिए यह गंगा स्नान, दान और पितरों के स्मरण का एक बड़ा दिन है। पुराण इसके दस योग बताते हैं, और जितने अधिक मिलें, स्नान का उतना अधिक महत्व माना जाता है। यह दिन शरीर, वाणी और मन के दस दोष छोड़ने का संकल्प भी है।

गंगा दशहरा पर क्या करें?

भोर में नदी में या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें, सूर्य को अर्घ्य दें, माँ गंगा की दस-दस वस्तुओं से और शिव जी की गंगाजल से पूजा करें, गंगा मंत्र जपें, भगीरथ की कथा सुनें, जल, फल, पंखे और भोजन का दान करें, और शाम को दीपदान करें। दिन का भोजन सात्विक रखें।

गंगा दशहरा पर क्या दान करना चाहिए?

ज्येष्ठ की गर्मी में काम आने वाली चीज़ें: जल से भरे मिट्टी के घड़े, हाथ के पंखे, छाते, सत्तू, शरबत, आम और खरबूजे, अनाज, तिल, गुड़ और वस्त्र। परंपरा को दस की संख्या प्रिय है, दस दान या दस लोगों को दान, पर सम्मान से दिया कोई भी दान इस दिन के भाव में है।

गंगा दशहरा पर कौन सा मंत्र जपें?

स्नान करते समय 'गङ्गे च यमुने चैव' श्लोक, जो पवित्र नदियों को जल में बुलाता है। पूजा में 'ॐ नमो गङ्गायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः' 108 बार, और शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाते समय 'ॐ नमः शिवाय'। सभी मंत्र अर्थ सहित मंत्र वाले भाग में हैं।

गंगा दशहरा की कथा क्या है?

राजा सगर के साठ हज़ार पुत्र कपिल मुनि की दृष्टि से भस्म हो गए, और उन्हें केवल गंगा का जल मुक्त कर सकता था। पीढ़ियों बाद भगीरथ की तपस्या से ब्रह्मा जी ने गंगा को भेजा, और शिव जी ने उनका वेग अपनी जटाओं में थामा। गंगा भगीरथ के रथ के पीछे चलकर भस्म तक पहुँचीं और उनके पूर्वजों को मुक्त किया। पूरी कथा ऊपर दी गई है।

घर पर गंगा दशहरा की पूजा कैसे करें?

पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें, सूर्य को अर्घ्य दें और संकल्प लें। गंगाजल का कलश, माँ गंगा और शिव जी का चित्र रखें, पहले गणेश पूजा करें, फिर गंगा जी को रोली, अक्षत, फूल, दीपक, फल और मिठाई दस-दस अर्पित करें, शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएँ, मंत्र जपें, कथा पढ़ें और 'ॐ जय गंगे माता' आरती गाएँ। अंत में दान करें।

गंगा दशहरा का द्वार पत्र क्या होता है?

उत्तराखंड के पहाड़ों में, खासकर कुमाऊँ में, गंगा दशहरा पर परिवार मुख्य द्वार पर द्वार पत्र चिपकाते हैं: रंगीन ज्यामितीय आकृतियों वाला कागज़, जिस पर अगस्त्य, पुलस्त्य, वैशम्पायन, जैमिनि और सुमंतु, इन पाँच ऋषियों के नाम वाला संस्कृत श्लोक होता है, जिसे परंपरा से घर को बिजली गिरने से बचाने वाला माना जाता है। कुल पुरोहित इसे बनाकर घर लाते हैं।

इस पेज पर हस्त नक्षत्र का समय क्यों दिया है?

इस दिन के पौराणिक श्लोक में दस योग बताए गए हैं: ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष, दशमी, बुधवार, हस्त नक्षत्र, व्यतीपात योग, गर करण, आनंद योग, कन्या में चंद्रमा और वृषभ में सूर्य। इनमें हस्त नक्षत्र सबसे ज़्यादा देखा जाता है। नई दिल्ली में हस्त नक्षत्र शाम 4:59 (12 जून) से शाम 5:00 तक रहेगा; दशमी के साथ मिले तो स्नान का महत्व और बढ़ता है, पर पर्व हर हाल में मनाया जाता है।

क्या गंगा दशहरा और दशहरा एक ही हैं?

नहीं। गंगा दशहरा ज्येष्ठ में, शुरुआती गर्मी की शुक्ल दशमी को, गंगा के अवतरण का पर्व है; इसका अर्थ है दस पापों को हरने वाला। दशहरा या विजयादशमी आश्विन की दशमी को, नवरात्रि के बाद, रावण पर श्रीराम और महिषासुर पर माँ दुर्गा की विजय का पर्व है।

गंगा दशहरा और गंगा सप्तमी में क्या अंतर है?

वैशाख शुक्ल सप्तमी की गंगा सप्तमी गंगा के जन्म, या एक दूसरी कथा के अनुसार जह्नु ऋषि से उनकी मुक्ति, का दिन है, जिसे गंगा जयंती भी कहते हैं। लगभग एक महीने बाद ज्येष्ठ शुक्ल दशमी का गंगा दशहरा धरती पर उनके अवतरण का दिन है। दोनों दिन नदी स्नान और गंगा पूजा होती है।

क्या निर्जला एकादशी गंगा दशहरा के अगले दिन होती है?

आम तौर पर हाँ: निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी है, यानी अगली तिथि, इसलिए यह ज़्यादातर गंगा दशहरा के अगले दिन पड़ती है; तिथियों के खिसकने से कभी-कभी उसी दिन भी। निर्जल व्रत की तैयारी में बहुत से लोग गंगा दशहरा पर हल्का भोजन करते हैं। तिथि और पारण के लिए निर्जला एकादशी का पेज देखें।