मुख्य सामग्री पर जाएँ
Swarn Siddhi हिंदी ऐप पाएँ ऐप पाएँ ऐप खोलें
मेन्यू खोलें

शुक्ल पक्ष · दशमी तिथि · आश्विन

दशहरा (विजयादशमी) 2027 कब है?

दशहरा (विजयादशमी) 2027

349 दिन बाद

रवि, 10 अक्टूबर

2027 में दशहरा (विजयादशमी) रविवार, 10 अक्टूबर को है। नई दिल्ली में दशमी तिथि 9 अक्टूबर, सुबह 9:02 से 10 अक्टूबर, सुबह 11:41 तक रहेगी।

2028: बुधवार, 27 सितंबर 2028

दशहरा (विजयादशमी) कोई तय अंग्रेज़ी तारीख नहीं है। यह अमांत गणना में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। बारह चंद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे होते हैं, इसलिए इसकी अंग्रेज़ी तारीख हर साल लगभग एक महीने के दायरे में खिसकती है।

स्वर्ण से पूछें

क्या यह मुहूर्त मेरी कुंडली के लिए शुभ है? स्वर्ण से मुफ़्त पूछें

नई दिल्ली के लिए गणना

दशहरा (विजयादशमी) 2027: तारीख और तिथि का समय

रविवार, 10 अक्टूबर 2027

तिथि
दशमी, शुक्ल पक्ष
हिंदू मास
आश्विन
तिथि आरंभ
9 अक्टूबर, सुबह 9:02
तिथि समाप्त
10 अक्टूबर, सुबह 11:41
दिन का निर्णय
अपराह्न
नई दिल्ली में अपराह्न
दोपहर 1:17 से दोपहर 3:37

ऊपर के दोनों क्षण — तिथि का आरंभ और समाप्ति — खगोल हैं और उन पर कोई विवाद नहीं। दिन उनकी व्याख्या है: दशहरा (विजयादशमी) का निर्णय दोपहर बाद के भाग में चल रही तिथि से होता है, इसलिए यह उस दिन का पर्व है जिसके अपराह्न पर तिथि हो — सिर्फ़ उस दिन का नहीं जिस दिन तिथि शुरू हुई।

दशहरा 2027 के सभी मुहूर्त · नई दिल्ली

दशहरा (विजयादशमी) 2027 शुभ मुहूर्त

दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहते हैं, आश्विन शुक्ल दशमी का पर्व है: इस दिन रावण पर श्रीराम की और महिषासुर पर माँ दुर्गा की विजय का उत्सव मनाया जाता है, और शारदीय नवरात्रि के नौ दिन पूरे होते हैं। दशहरा 2027 नई दिल्ली में रविवार, 10 अक्टूबर 2027 को है। अपराजिता और शमी पूजा दोपहर के अपराह्न काल (इस वर्ष उपलब्ध नहीं, क्योंकि उस समय दशमी तिथि नहीं) या विजय मुहूर्त (दोपहर 2:04 से दोपहर 2:51 तक) में करें; सूर्यास्त के बाद रावण दहन का समय शाम 5:57 से रात 8:25 तक है।

दशहरा 2027 के सभी मुहूर्त — नई दिल्ली
मुहूर्तनई दिल्ली में समयकिसके लिए
विजय मुहूर्तदोपहर 2:04 से दोपहर 2:51 तकविजयादशमी के दिन, दिन के पंद्रह मुहूर्तों में ग्यारहवाँ।

दिन के पंद्रह मुहूर्तों में ग्यारहवाँ, दोपहर बाद का लगभग पौने घंटे का समय। नाम ही विजय है, और मान्यता है कि इसमें शुरू किया गया काम सफल होता है। इसलिए शमी पूजा, शस्त्र पूजा, यात्रा का आरंभ, नई बही खोलना या नई गाड़ी घर लाना इसी में शुभ माना जाता है।

अपराह्न पूजा का समयइस वर्ष इस समय दशमी तिथि नहीं है।

अपराह्न यानी दोपहर बाद का समय, दिन के पाँच भागों में चौथा। परंपरा में अपराजिता पूजा, शमी पूजा और सीमोल्लंघन इसी काल में होते हैं, और विजयादशमी की तारीख भी इसी से तय होती है। अगर दशहरे पर केवल एक पूजा कर सकें, तो इसी समय करें।

रावण दहन (सूर्यास्त के बाद)शाम 5:57 से रात 8:25 तकविजयादशमी पर सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल।

सूर्यास्त के बाद का प्रदोष काल। रामलीला के समापन पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले इसी समय जलाए जाते हैं। हर मैदान की समिति अपना समय खुद तय करती है, इसलिए इसे नई दिल्ली का पारंपरिक समय मानें और स्थानीय घोषणा भी देख लें।

श्रवण नक्षत्रसुबह 10:18 (9 अक्टूबर) से दोपहर 1:25 तकविजयादशमी के आसपास चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में कब से कब तक है।

जब दोपहर में दशमी के साथ श्रवण नक्षत्र हो, तो पंचांग उस विजयादशमी को विशेष शुभ मानते हैं, और कुछ वर्षों में दो दिनों में से किस दिन दशहरा हो, यह भी इसी से तय होता है। इसमें अलग से कुछ नहीं करना होता; यह बस यह समझाने के लिए है कि अलग-अलग कैलेंडर की तारीख क्यों बदलती है।

अभिजीत मुहूर्तसुबह 11:44 से दोपहर 12:31 तकदिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय दोपहर के आसपास।

दोपहर के आसपास का मुहूर्त, जो कागज़ों पर हस्ताक्षर, खरीदारी का भुगतान या नया काम शुरू करने के लिए सामान्य रूप से शुभ है, अगर विजय मुहूर्त में संभव न हो। परंपरा के अनुसार बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं माना जाता।

शुभ चौघड़िया (दिन)
  • चर सुबह 7:45 से सुबह 9:13 तक
  • लाभ सुबह 9:13 से सुबह 10:40 तक
  • अमृत सुबह 10:40 से दोपहर 12:08 तक
  • शुभ दोपहर 1:35 से दोपहर 3:02 तक
दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया।

दिन के अमृत, शुभ, लाभ और चर चौघड़िया। दशहरा पूरे दिन शुभ माना जाता है, फिर भी व्यापारी और सोना, गाड़ी या घर खरीदने वाले परिवार भुगतान, डिलीवरी या दुकान की पूजा के लिए अक्सर इन्हीं में से कोई समय चुनते हैं।

उस दिन के शुभ समय

उस दिन के शुभ समय
मुहूर्तनई दिल्ली में समयप्रकृति
अभिजित मुहूर्तसुबह 11:44 से दोपहर 12:31शुभ
अमृत कालसुबह 4:41 से सुबह 6:29सर्वाधिक शुभ
ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:39 से सुबह 5:29शुभ

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं

मुहूर्त शास्त्र इन अवधियों को नई शुरुआत के लिए छोड़ता है। यह परंपरा का वर्णन है, चेतावनी नहीं: पर्व अपने दिन मनाया ही जाता है, और इसके लिए कुछ ख़रीदने, सुधारने या उपाय करने की ज़रूरत नहीं।

जिन समयों में नए काम टाले जाते हैं
अवधिनई दिल्ली में समय
राहु कालशाम 4:30 से शाम 5:57
यमगण्ड कालदोपहर 12:08 से दोपहर 1:35
दुर्मुहूर्त (पहला)शाम 4:24 से शाम 5:11
वर्ज्यम्शाम 5:55 से शाम 7:42

ऊपर का हर समय नई दिल्ली के लिए रविवार, 10 अक्टूबर 2027 के आसपास, इसी शहर के सूर्योदय, सूर्यास्त और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति से निकाला गया है। हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी पिछली शाम का ही गिना जाता है; किसी दूसरी तारीख का समय उस तारीख के साथ लिखा है।

पूजा विधि · घर पर, क्रम से

दशहरा पूजा विधि

  1. सुबह स्नान और नवरात्रि का पारण

    सुबह जल्दी स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें और पूजा का स्थान साफ़ करें। अगर आपने नवरात्रि के नौ दिन व्रत रखा और नवमी को नहीं खोला, तो नवमी समाप्त होने के बाद (ऊपर दशमी का समय देखें) छोटी-सी प्रार्थना करके सात्विक भोजन से व्रत खोलें।

  2. नवरात्रि कलश का विसर्जन

    घटस्थापना पर रखे कलश को रोली, चावल और फूल चढ़ाएँ, प्रार्थना करके नारियल उठाएँ। कलश का जल पूरे घर में छिड़कें, कुछ जौ के जवारे पूजा स्थान, तिजोरी या कान पर रखने के लिए रख लें, और बाकी किसी बगीचे, गमले या साफ़ बहते जल में विसर्जित करें।

  3. दोपहर की पूजा की तैयारी

    अपराह्न से पहले लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके रखें, और सामग्री तैयार रखें: राम दरबार की तस्वीर, रोली, चावल, फूल, दीपक, धूप, मिठाई, मौली, और जिनकी पूजा करनी है — औज़ार, गाड़ी की चाबी, किताबें, वाद्य।

  4. संकल्प और गणेश पूजा

    तीन बार आचमन करें, हाथ में जल और चावल लेकर संकल्प करें: अपना नाम, दिन, और यह कि परिवार की सुख-समृद्धि और सफलता के लिए विजयादशमी की पूजा कर रहे हैं। सबसे पहले गणेश जी को रोली, चावल और फूल चढ़ाएँ ताकि पूजा निर्विघ्न हो।

  5. अपराजिता पूजा

    अपराह्न काल में घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में जगह साफ़ करके कुमकुम, चंदन या रंगोली से अष्टदल कमल बनाएँ और बीच में थोड़े चावल रखें। वहाँ ‘ॐ अपराजितायै नमः’ बोलकर देवी अपराजिता का आवाहन करें, दाईं-बाईं ओर जया और विजया का ध्यान करें; फूल (हो सके तो नीले अपराजिता के फूल), चावल, दीप, धूप और मिठाई चढ़ाकर पूरे वर्ष बाधाओं पर विजय की प्रार्थना करें।

  6. राम दरबार की पूजा

    श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी को रोली, चावल, फूल, तुलसी दल, घी का दीपक, धूप और भोग (जलेबी, लड्डू या खीर) अर्पित करें। माला पर 108 बार ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ का जप करें या सुंदरकांड के कुछ अंश पढ़ें।

  7. शस्त्र, औज़ार, वाहन और पुस्तकों की पूजा

    घर में शस्त्र हों तो उन्हें, और औज़ार, वाहन, बही-खाते, किताबें और वाद्य साफ़ करें। हर एक पर रोली या हल्दी का तिलक लगाएँ, मौली बाँधें, फूल-चावल चढ़ाएँ और दीपक दिखाएँ। बहुत से परिवार यह विजय मुहूर्त में करते हैं और उसके बाद कोई नया काम — पढ़ाई, नई बही, गाड़ी की पहली सवारी — शुरू करते हैं।

  8. शमी पूजा

    शमी के पेड़ के पास जाएँ, या गमले में लगे शमी के पौधे के सामने बैठें। जड़ में जल चढ़ाएँ, रोली-चावल लगाएँ, मौली बाँधें, दीपक जलाएँ और शमी का श्लोक पढ़ें। पेड़ से अनुमति माँगकर कुछ पत्तियाँ लें या गिरी हुई पत्तियाँ उठाएँ, उन्हें पूजा स्थान में रखें और परिवार-मित्रों में बाँटें।

  9. आरती और प्रसाद

    श्रीराम की आरती करें — बहुत से घरों में ‘श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन’ गाया जाता है — और फिर परिवार की देवी आरती, क्योंकि यह दिन नवरात्रि का समापन भी है। भोग को प्रसाद के रूप में बाँटें।

  10. सीमोल्लंघन

    पुरानी परंपरा है कि अपराजिता और शमी पूजा के बाद गाँव की सीमा पार की जाए, विजय यात्रा के प्रतीक के रूप में। आजकल परिवार ईशान दिशा में थोड़ी दूर — अक्सर शमी वृक्ष या किसी मंदिर तक — जाकर लौट आते हैं।

  11. शाम को रावण दहन

    सूर्यास्त के बाद पास के रामलीला मैदान में पुतलों का दहन देखें — यह रामलीला का समापन और श्रीराम की विजय का प्रतीक है। घर लौटकर द्वार पर दीपक जलाएँ।

  12. बड़ों का आशीर्वाद और मिलना-जुलना

    बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लें, मिठाई लेकर रिश्तेदारों से मिलें, और जहाँ परंपरा हो वहाँ शमी या आपटा की पत्तियाँ ‘सोना’ कहकर बाँटें।

सामग्री · पहले से तैयार रखें

दशहरा पूजा सामग्री सूची

  • श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति राम दरबार; केवल श्रीराम की तस्वीर भी पर्याप्त है।
  • लकड़ी की चौकी और लाल या पीला कपड़ा देवताओं का आसन; कोई भी साफ़ नीची मेज़ चल जाएगी।
  • रोली या कुमकुम, और हल्दी देवताओं, शमी वृक्ष, औज़ारों और वाहन के तिलक के लिए।
  • अक्षत (साबुत चावल) हर चरण में चढ़ाया जाता है; पहले से धोकर सुखा लें।
  • चंदन तिलक के लिए, और रंगोली न हो तो अष्टदल कमल बनाने के लिए।
  • रंगोली के रंग या चावल का आटा अपराजिता पूजा का अष्टदल कमल बनाने के लिए।
  • फूल और माला गेंदा या कोई भी ताज़े फूल; अपराजिता पूजा में नीले अपराजिता के फूल पारंपरिक हैं।
  • तुलसी दल श्रीराम को और भोग पर चढ़ाने के लिए।
  • मौली (कलावा) शमी वृक्ष, औज़ारों और वाहन पर बाँधने के लिए।
  • घी का दीपक और तेल का दीपक, रुई की बत्ती एक पूजा के लिए, एक शाम को शमी वृक्ष और द्वार के लिए।
  • अगरबत्ती या धूप हर पूजा के लिए।
  • कपूर आरती के लिए।
  • शमी की पत्तियाँ या गमले में शमी का पौधा पास में पेड़ न हो तो नर्सरी से शमी का पौधा ले आएँ और बाद में घर में रखें।
  • आपटा की पत्तियाँ महाराष्ट्र में ‘सोना’ कहकर बाँटी जाती हैं; दूसरी जगह शमी की पत्तियाँ यही काम करती हैं।
  • नवरात्रि कलश के जौ के जवारे देवी को चढ़ाकर आशीर्वाद के रूप में रखे जाते हैं।
  • नारियल पूजा में चढ़ाने के लिए; कई घरों में वाहन के सामने फोड़ा जाता है।
  • नींबू जहाँ वाहन पूजा में यह रिवाज़ हो: पहियों के नीचे रखकर गाड़ी आगे बढ़ाई जाती है।
  • ताँबे का लोटा, जल और थोड़ा गंगाजल आचमन, संकल्प और शमी वृक्ष को जल चढ़ाने के लिए।
  • पान के पत्ते और सुपारी पूजा में चढ़ाने के लिए; हनुमान जी को अक्सर पान चढ़ाया जाता है।
  • भोग: जलेबी, लड्डू, खीर या हलवा जो भी परिवार में दशहरे पर बनता हो; फल भी चलेंगे।
  • मौसमी फल भोग और प्रसाद के लिए।
  • दक्षिणा के सिक्के पूजा में रखकर बाद में दान कर दें।
  • साफ़ कपड़े और पानी पूजा से पहले औज़ार, शस्त्र, वाहन और किताबें पोंछने के लिए।
  • नई कॉपी और कलम ‘श्री राम’ लिखने के लिए, या बच्चे के अक्षरारंभ के लिए।

मंत्र · अर्थ के साथ

दशहरा के मंत्र और आरती

अपराजिता मंत्र

ॐ अपराजितायै नमः

Om Aparajitayai Namah

अर्थ: कभी पराजित न होने वाली देवी अपराजिता को नमस्कार।

कब और कैसे: दोपहर की अपराजिता पूजा में: हर अर्पण — फूल, चावल, दीप, धूप, मिठाई — के साथ बोलें, या माला पर 108 बार जपें।

शमी श्लोक

शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी ।
अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियवादिनी ॥

Shami Shamayate Papam Shami Shatruvinashini, Arjunasya Dhanurdhari Ramasya Priyavadini

अर्थ: शमी पाप का शमन करती है, शमी शत्रु का नाश करती है; इसने अर्जुन का धनुष धारण किया और यह श्रीराम से प्रिय वचन कहने वाली है। (लोकप्रिय छपाई में अक्सर ‘प्रियदर्शिनी’ मिलता है; इस श्लोक को उद्धृत करने वाले पुराने ग्रंथों में ‘प्रियवादिनी’ है।)

कब और कैसे: शमी वृक्ष के पास परंपरा से पढ़ा जाने वाला श्लोक: जल, रोली, चावल और दीपक चढ़ाने के बाद एक या तीन बार।

श्रीराम तारक मंत्र

श्री राम जय राम जय जय राम

Shri Rama Jaya Rama Jaya Jaya Rama

अर्थ: श्रीराम, राम की जय हो, जय हो, जय हो।

कब और कैसे: राम दरबार की पूजा में माला पर 108 बार, या शाम को कीर्तन के रूप में।

या देवी सर्वभूतेषु (दुर्गा सप्तशती)

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

Ya Devi Sarvabhuteshu Shaktirupena Samsthita, Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah

अर्थ: जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार है।

कब और कैसे: दुर्गा सप्तशती के पाँचवें अध्याय से। नवरात्रि के समापन पर देवी को फूल चढ़ाते हुए तीन या ग्यारह बार पढ़ें।

आरती श्रीराम स्तुति: श्री रामचन्द्र कृपालु (तुलसीदास) पूरी आरती

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं॥१॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं॥३॥

शिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं।
मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं॥५॥

मन जाहि राच्यो मिलहि सो वर सहज सुन्दर सांवरो।
करुणा निधान सुजान शील स्नेह जानत रावरो॥६॥

एहि भांति गौरी असीस सुन सिय सहित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली॥७॥

जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अङ्ग फरकन लगे॥

Shri Ramchandra kripalu bhajuman haran bhavbhay darunam.
Nav kanj lochan kanj mukh kar kanj pad kanjarunam. (1)

Kandarp aganit amit chhavi nav neel neerad sundaram.
Patpeet manahun tadit ruchi shuchi naumi Janak sutavaram. (2)

Bhaju deenbandhu dinesh danav daitya vansh nikandanam.
Raghunand anand kand Koshal chand Dashrath nandanam. (3)

Shir mukut kundal tilak charu udaru ang vibhushanam.
Ajanu bhuj shar chap dhar sangram jit Khardushanam. (4)

Iti vadati Tulsidas Shankar Shesh muni man ranjanam.
Mam hriday kanj nivas kuru kamadi khaldal ganjanam. (5)

Man jahi rachyo milahi so var sahaj sundar sanvaro.
Karuna nidhan sujan sheel sneh janat ravaro. (6)

Ehi bhanti Gauri asees sun Siya sahit hiya harshit ali.
Tulsi Bhavanihi pooji puni-puni mudit man mandir chali. (7)

Jani Gauri anukool Siya hiya harashu na jai kahi.
Manjul mangal mool vam ang pharkan lage.

यह स्तुति उसी रूप में है जैसे आम तौर पर गाई जाती है: तुलसीदास की 'विनय-पत्रिका' (पद ४५) के पाँच छंद, फिर उन्हीं के 'रामचरितमानस' (बालकांड, दोहा २३६, जहाँ गौरी सीता जी को आशीर्वाद देती हैं) के दो छंद और एक सोरठा, जो विनय-पत्रिका के इस पद का हिस्सा नहीं हैं। गीता प्रेस की 'विनय-पत्रिका' में केवल पाँच छंद छपे हैं, इन्हीं शब्दों में। छपा पाठ

कथा · कहानी और उसका अर्थ

दशहरा की कथा और महत्व

कथा

लंका का राजा रावण पंचवटी से सीता जी का हरण कर ले गया। श्रीराम और लक्ष्मण ने हनुमान जी और सुग्रीव की वानर सेना की मदद से उनकी खोज की, समुद्र पर सेतु बाँधा और लंबा युद्ध लड़ा, जिसमें कुंभकर्ण और मेघनाद मारे गए। परंपरा के अनुसार आश्विन शुक्ल दशमी को श्रीराम ने रावण का वध कर सीता जी को मुक्त कराया, और इसी की याद में हर रामलीला रावण दहन से समाप्त होती है।

बंगाल की कृत्तिवासी रामायण बताती है कि अंतिम युद्ध से पहले श्रीराम ने देवी दुर्गा का असमय आवाहन किया — यही ‘अकाल बोधन’ है जिसकी याद में बंगाल की दुर्गा पूजा शरद ऋतु में होती है। पूजा के 108 कमलों में से एक कम पड़ गया, तो ‘कमलनयन’ श्रीराम अपनी एक आँख अर्पित करने को तैयार हो गए; देवी ने उन्हें रोककर विजय का आशीर्वाद दिया।

देवी परंपरा में यह माँ दुर्गा की विजय का दिन है। महिषासुर को कोई देवता नहीं हरा पा रहा था; तब देवताओं की सम्मिलित शक्ति से प्रकट दुर्गा ने उससे युद्ध किया। नवरात्रि की नौ रातें उसी युद्ध की याद हैं और विजयादशमी — ‘विजय की दशमी’ — उसका अंत।

महाभारत में शमी वृक्ष की कथा है। अज्ञातवास का तेरहवाँ वर्ष राजा विराट के दरबार में बिताने से पहले पांडवों ने अपने शस्त्र नगर के बाहर एक शमी वृक्ष पर छिपा दिए थे। वर्ष पूरा होने पर अर्जुन ने उसी वृक्ष से अपना गांडीव धनुष उतारा और कौरव सेना को लौटा दिया — इसीलिए कहा जाता है कि इस दिन शस्त्र और शमी, दोनों पूजे जाते हैं।

महत्व

विजयादशमी का अर्थ है ‘विजय की दशमी’, और दशहरा शब्द ‘दश-हरा’ से बना है — दस का हरण, यानी रावण के दस सिर, जिन्हें बहुत से संत दस बुराइयों के रूप में देखते हैं: क्रोध, लोभ, अहंकार आदि, जिन्हें छोड़ना है। शारदीय नवरात्रि की नौ रातों के ठीक बाद आने से इस दिन में दोनों कथाएँ हैं: श्रीराम की विजय और माँ दुर्गा की विजय।

यह वर्ष के सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है; महाराष्ट्र और दक्कन में यह साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक है, जब नया काम शुरू करने के लिए अलग मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं मानी जाती। बच्चे पढ़ाई और संगीत की शुरुआत करते हैं, व्यापारी नई बही खोलते हैं, और परिवार गाड़ी, सोना और घर खरीदते हैं — फिर भी पूजा अपराह्न या विजय मुहूर्त में ही की जाती है।

देश भर में यह दिन अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है — उत्तर में रावण दहन, बंगाल में बिजया और सिंदूर खेला, मैसूरु में जंबू सवारी, केरल में बच्चों का अक्षरारंभ — पर भाव एक ही है: सत्य की जीत होती है, और वर्ष की नई शुरुआत इसी भाव से की जाती है।

उपाय · परंपरा

दशहरा के पारंपरिक उपाय

शमी वृक्ष के नीचे दीपक

बहुत से परिवार दशहरे की शाम शमी वृक्ष के नीचे घी या सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं। परंपरा में शमी को विजय और शनि देव से जोड़ा जाता है, और माना जाता है कि इससे वर्ष भर के कामों में स्थिरता आती है।

शमी या आपटा की पत्तियाँ पूजा स्थान में

शमी पूजा से लाई गई पत्तियाँ अगले दशहरे तक पूजा स्थान, गल्ले या तिजोरी में रखी जाती हैं; रिवाज़ में ये ‘सोने’ का प्रतीक हैं — ऐसी समृद्धि का, जो बनी रहे।

विजय मुहूर्त में कोई शुभ शुरुआत

पढ़ाई, नई बही, व्यापार की योजना या यात्रा: मान्यता है कि विजयादशमी के विजय मुहूर्त में शुरू हुआ काम पूरा होता है। इसमें खर्च कुछ नहीं, बस सही समय चाहिए।

नीलकंठ के दर्शन

उत्तर भारत में दशहरे पर नीलकंठ पक्षी का दिखना शुभ माना जाता है; उसका नाम ‘नीलकंठ’ भगवान शिव का भी नाम है। उसे खेतों या तारों पर खुले में देखें; पिंजरे में बंद पक्षी कभी न खरीदें, न ‘उड़ाएँ’ — यह कानूनन संरक्षित पक्षी है।

सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ

किसी कठिन काम से पहले साहस और भय से मुक्ति के लिए सुंदरकांड का पाठ, या हनुमान चालीसा सात बार पढ़ना, एक पारंपरिक उपाय है।

राम नाम लेखन

विजयादशमी पर नई कॉपी में 108 बार ‘श्री राम’ लिखना पुरानी भक्ति परंपरा है, और नई पढ़ाई के इस दिन बच्चे के लिखना शुरू करने का सुंदर तरीका भी।

अन्न, वस्त्र या किताबों का दान

भूखे को भोजन, ज़रूरतमंद को कपड़े, या किसी विद्यार्थी की किताबें — यह इस दिन का पारंपरिक दान है, जो चुपचाप और अपनी सामर्थ्य के अनुसार किया जाए।

रावण के साथ एक बुरी आदत भी जलाएँ

रावण दहन का आज का अर्थ, जिसे कई परिवार अपनाते हैं: हर सदस्य एक कमी या बुरी आदत तय करता है जिसे इस वर्ष छोड़ना है, और दहन की शाम से उस पर टिका रहता है।

परंपरा, संक्षेप में

दशहरा पर क्या करें, क्या न करें

क्या करें

  • अपराजिता और शमी पूजा अपराह्न काल या विजय मुहूर्त में करें।
  • अपने औज़ार, वाहन, किताबें और वाद्य साफ़ करके उनकी पूजा करें।
  • नवरात्रि कलश का आदर से विसर्जन करें और कुछ जवारे रख लें।
  • कोई नई शुरुआत — कक्षा, बही, खरीदारी — विजय मुहूर्त में करें।
  • बड़ों के पैर छुएँ, रिश्तेदारों से मिलें और मिठाई बाँटें।
  • रावण दहन बैरिकेड के पीछे से देखें और बच्चों को पास रखें।
  • शाम को द्वार पर और शमी वृक्ष के नीचे दीपक जलाएँ।

क्या न करें

  • पुतले में आग लगने के समय उसके पास न खड़े हों; अंदर रखे पटाखे बाहर की ओर फट सकते हैं।
  • नीलकंठ पक्षी को न खरीदें, न पिंजरे में रखें, न ‘उड़ाएँ’; यह संरक्षित प्रजाति है।
  • शमी वृक्ष की डालियाँ न काटें, न उसे नोचें — कुछ पत्तियाँ लें या गिरी हुई उठाएँ।
  • जवारे, पूजा की सामग्री या प्लास्टिक नदी में न फेंकें; बगीचे, गमले या नगर के विसर्जन कुंड का उपयोग करें।
  • अगर दोपहर में संभव हो तो अपराजिता और शमी पूजा सूर्यास्त के बाद तक न टालें।
  • पशुओं, अस्पतालों या सूखी घास के पास पटाखे न चलाएँ।
  • नई शुरुआत के दिन घर में झगड़ा न करें; वातावरण शांत रखें।

देश भर में

दशहरा की क्षेत्रीय परंपराएँ और भोग

क्षेत्र के अनुसार

पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और त्रिपुरा
बिजया दशमी: दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होता है, विदाई से पहले विवाहित महिलाएँ सिंदूर खेला करती हैं, और परिवार मिठाई लेकर बड़ों के घर बिजया की शुभकामनाएँ देने जाते हैं।
महाराष्ट्र और गोवा
सीमोल्लंघन और शस्त्र पूजा; आपटा या शमी की पत्तियाँ ‘सोनं घ्या, सोन्यासारखं राहा’ कहकर सोने के रूप में बाँटी जाती हैं। यह दिन नई खरीदारी के साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक है।
कर्नाटक
मैसूरु दशहरा जंबू सवारी के साथ समाप्त होता है, जिसमें हाथी पर देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा की शोभायात्रा निकलती है; शाम को बन्नी (शमी) की पत्तियाँ बाँटी जाती हैं।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश
जम्मी (शमी) पूजा, उसकी पत्तियों का आदान-प्रदान, और पूजा के बाद पालपिट्टा (नीलकंठ) पक्षी के दर्शन।
केरल और तमिलनाडु
विद्यारंभम: छोटे बच्चे चावल या रेत पर पहले अक्षर लिखकर पढ़ाई शुरू करते हैं; आयुध पूजा के लिए रखी किताबें और औज़ार पूजा के बाद वापस उठाए जाते हैं, और गोलू की गुड़ियाँ समेट दी जाती हैं।
हिमाचल प्रदेश
कुल्लू दशहरा विजयादशमी के दिन ही शुरू होकर सप्ताह भर चलता है, जब घाटी के देवता भगवान रघुनाथ के रथ के चारों ओर एकत्र होते हैं।
छत्तीसगढ़
बस्तर दशहरा देश के सबसे लंबे पर्वों में है; यह कई सप्ताह चलता है और रावण वध की जगह माँ दंतेश्वरी को समर्पित है।
पंजाब, हरियाणा और दिल्ली
नवरात्रि के घड़े में उगे जौ (खेतरी) कान के पीछे या पगड़ी में लगाए जाते हैं, और रामलीलाएँ रावण दहन से समाप्त होती हैं।
गुजरात
नौ रातों के गरबे के बाद दशहरे की सुबह फाफड़ा-जलेबी का नाश्ता होता है।

भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन

  • जलेबी उत्तर और पश्चिम भारत में दशहरे पर सबसे ज़्यादा खरीदी जाने वाली मिठाई; गुजरात में फाफड़े के साथ।
  • खीर या हलवा-पूरी राम दरबार का भोग, और नवरात्रि का व्रत खोलने का आम भोजन।
  • नारकेल नाड़ू और निमकी बंगाल में बिजया पर आने वालों को दिए जाने वाले नारियल के लड्डू और नमकीन।
  • श्रीखंड-पूरी महाराष्ट्र के बहुत से घरों में दशहरे का त्योहारी भोजन।
  • पान पूजा में चढ़ाया जाता है; उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में दशहरे की शाम पान खाने का भी रिवाज़ है।

आने वाले वर्षों में दशहरा (विजयादशमी) की तारीख

इस साल और उसके बाद के दो साल। हर पंक्ति नई दिल्ली के लिए उसी गणना से निकली है, किसी सूची से नहीं ली गई।

आने वाले वर्षों में दशहरा (विजयादशमी) की तारीख
वर्षतारीखस्थिति
2026इस वर्षमंगलवार, 20 अक्टूबर 2026बीत गई
2027रविवार, 10 अक्टूबर 2027आने वाली
2028बुधवार, 27 सितंबर 2028आने वाली

पंचांगों में दशहरा (विजयादशमी) की तारीख अलग क्यों होती है

2027 में, नई दिल्ली के लिए: 9 अक्टूबर का पूरा अपराह्न दशमी में है, और कुछ पंचांग दशहरा उसी दिन मनाते हैं। यहाँ यह 10 अक्टूबर को है: उस सूर्योदय पर भी दशमी है और श्रवण नक्षत्र सूर्योदय से अपराह्न तक रहता है, वह योग जो विजयादशमी को दूसरे दिन ले जाता है।

दो पंचांग दशहरा (विजयादशमी) की तारीख में एक दिन का अंतर दिखाएँ, तो ज़रूरी नहीं कि उनमें से एक ग़लत हो। लगभग सारा अंतर चार कारणों से आता है।

  1. तिथि सूर्योदय पर शुरू नहीं होती। तिथि औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, इसलिए वह कभी दो दिनों के निर्णायक क्षण को छूती है और कभी किसी को नहीं। ऐसे में अलग नियम अलग दिन चुनते हैं।
  2. महीने की गणना। उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत में अमांत पद्धति चलती है। कृष्ण पक्ष का वही पखवाड़ा दोनों में अलग महीने के नाम से जाना जाता है, इसलिए "अमुक मास की कृष्ण तिथि" वाला पर्व एक महीने के अंतर पर भी पढ़ा जा सकता है।
  3. दिन कौन-सा क्षण तय करता है। अधिकतर व्रत उस दिन के होते हैं जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, पर सब नहीं: दशहरा (विजयादशमी) का निर्णय अपराह्न से होता है। जो पंचांग हर पर्व पर सूर्योदय का नियम लगाते हैं, वे कई पर्वों को एक दिन खिसका देते हैं।
  4. शहर। सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं — भारत के भीतर एक घंटे से भी ज़्यादा। दिल्ली के लिए निकाली गई तारीख किसी दूसरे शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।

इसीलिए यह पेज अपनी गणना दिखाता है। अगर आपके पंडित या घर के पंचांग में दूसरा दिन लिखा है, तो ऊपर दिए तिथि के क्षण आम तौर पर बता देंगे कि क्यों — और बिना कारण बताए दी गई तारीख से यह ज़्यादा काम का है।

आगे आने वाले त्योहार

दशहरा (विजयादशमी) से जुड़े सामान्य प्रश्न

2027 में दशहरा (विजयादशमी) कब है?

2027 में दशहरा (विजयादशमी) रविवार, 10 अक्टूबर को है। नई दिल्ली में दशमी तिथि 9 अक्टूबर, सुबह 9:02 से 10 अक्टूबर, सुबह 11:41 तक रहेगी।

दशहरा (विजयादशमी) की तिथि क्या है?

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि। नई दिल्ली में यह तिथि 9 अक्टूबर, सुबह 9:02 से 10 अक्टूबर, सुबह 11:41 तक है, और दशहरा (विजयादशमी) का दिन दोपहर बाद के भाग में चल रही तिथि से तय होता है।

नई दिल्ली में दशहरा (विजयादशमी) का शुभ मुहूर्त क्या है?

दशहरा 2027 रविवार, 10 अक्टूबर 2027 को है। नई दिल्ली में विजय मुहूर्त दोपहर 2:04 से दोपहर 2:51 तक है और अपराह्न पूजा का समय इस वर्ष उपलब्ध नहीं, क्योंकि उस समय दशमी तिथि नहीं; दशमी तिथि सुबह 9:02 (9 अक्टूबर) से सुबह 11:41 तक है।

दूसरे कैलेंडर में दशहरा (विजयादशमी) की तारीख अलग क्यों है?

मुख्य रूप से चार कारणों से। तिथि निर्णायक क्षण पर दो दिन चल सकती है या किसी दिन नहीं; उत्तर भारत पूर्णिमांत और दक्षिण व पश्चिम भारत अमांत महीने मानता है, जिससे कृष्ण पक्ष का नाम बदल जाता है; पंचांग इस पर भी अलग हैं कि दिन का कौन-सा क्षण पर्व तय करता है; और सूर्योदय व चंद्रोदय हर शहर में अलग होते हैं। ऊपर दिए तिथि के क्षण खगोल हैं; दिन उनकी व्याख्या है।

अगले साल दशहरा (विजयादशमी) कब है?

2028 में बुधवार, 27 सितंबर।

रावण दहन कितने बजे होगा?

रावण दहन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होता है: नई दिल्ली में रविवार, 10 अक्टूबर 2027 को शाम 5:57 से रात 8:25 तक। हर रामलीला समिति इसी समय के आसपास अपना कार्यक्रम घोषित करती है, इसलिए अपने मैदान की सूचना देखें और जगह पाने के लिए जल्दी पहुँचें।

दशहरा एक दिन का है या दस दिन का?

दशहरा स्वयं एक दिन, रविवार, 10 अक्टूबर 2027, का पर्व है। लोग जो ‘दस दिन’ गिनते हैं वे शारदीय नवरात्रि की नौ रातें और विजयादशमी हैं; ज़्यादातर शहरों में रामलीला इन्हीं रातों में चलती है और रावण दहन पर खत्म होती है। मैसूरु दशहरा भी यही दस दिन चलता है, जबकि कुल्लू दशहरा विजयादशमी से शुरू होकर सप्ताह भर चलता है।

दशहरा पूजा घर पर कैसे करें?

संक्षेप में: सुबह स्नान करके नवरात्रि कलश का विसर्जन करें; अपराह्न में गणेश पूजा, ईशान कोण में अष्टदल कमल पर अपराजिता पूजा, राम दरबार की पूजा, औज़ार-वाहन-किताबों की पूजा और शमी पूजा करें; आरती करें; और शाम को रावण दहन देखकर बड़ों का आशीर्वाद लें। पूरी विधि ऊपर क्रम से दी गई है।

शस्त्र पूजा क्या है और कैसे करें?

विजयादशमी पर शस्त्रों और औज़ारों की पूजा को शस्त्र पूजा कहते हैं; सैनिक, पुलिस, राजपूत और मराठा परिवार और कारीगर इसे विशेष रूप से करते हैं। शस्त्र या औज़ार साफ़ करें, रोली या हल्दी का तिलक लगाएँ, मौली बाँधें, फूल-चावल चढ़ाएँ, दीपक दिखाएँ और प्रार्थना करें कि ये केवल धर्म के काम आएँ; बहुत से लोग यह विजय मुहूर्त (नई दिल्ली में दोपहर 2:04 से दोपहर 2:51 तक) में करते हैं।

क्या दशहरा और विजयादशमी एक ही हैं?

हाँ, ये एक ही दिन — आश्विन शुक्ल दशमी — के दो नाम हैं। उत्तर भारत में इसे ज़्यादातर दशहरा कहते हैं और रावण पर श्रीराम की विजय याद करते हैं; दक्षिण, पूर्व और धर्मशास्त्र इसे विजयादशमी कहते हैं और महिषासुर पर देवी की विजय भी याद करते हैं।

क्या गंगा दशहरा और दशहरा एक ही त्योहार हैं?

नहीं। गंगा दशहरा ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को, मई या जून में, गंगा अवतरण की याद में स्नान-दान का पर्व है; दशहरा या विजयादशमी आश्विन शुक्ल दशमी को, सितंबर या अक्टूबर में, नवरात्रि के ठीक बाद आता है। दोनों में बस दशमी और ‘दश’ शब्द एक है।

विजयादशमी क्यों मनाई जाती है?

यह अधर्म पर धर्म की दो विजयों का दिन है: परंपरा के अनुसार इसी दिन श्रीराम ने रावण का वध किया, और माँ दुर्गा ने नौ रातों के युद्ध के बाद महिषासुर का अंत किया। महाभारत की शमी वृक्ष वाली कथा — जहाँ से अर्जुन ने अपना धनुष वापस लिया — इस दिन की शस्त्र पूजा से जुड़ी है।

दशहरे पर शमी की पूजा क्यों और कैसे की जाती है?

पांडवों ने अज्ञातवास से पहले अपने शस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे और अर्जुन ने वहीं से धनुष उतारकर कौरव सेना को लौटाया; शमी का श्लोक भी कहता है कि इसने श्रीराम से प्रिय वचन कहे। इसलिए दशहरे पर शमी को जल, रोली, चावल, मौली और दीपक अर्पित करके श्लोक पढ़ा जाता है, और कुछ पत्तियाँ विजय और समृद्धि के प्रतीक के रूप में घर लाई जाती हैं।

दशहरा पूजा का मंत्र क्या है?

अपराजिता पूजा के लिए ‘ॐ अपराजितायै नमः’; शमी वृक्ष के पास शमी श्लोक ‘शमी शमयते पापं’; और श्रीराम के लिए 108 बार ‘श्री राम जय राम जय जय राम’। तीनों ऊपर अर्थ सहित दिए गए हैं।

नवरात्रि का व्रत नवमी को खोलें या दशहरे को?

दोनों परंपराएँ चलती हैं। बहुत से परिवार नवमी को हवन और कन्या पूजन के बाद व्रत खोलते हैं; धर्मशास्त्र पारण दशमी को, नवमी समाप्त होने के बाद, बताते हैं। अगर आपके घर दूसरी परंपरा है, तो रविवार, 10 अक्टूबर 2027 को सुबह की पूजा के बाद भोजन करें; नई दिल्ली में दशमी सुबह 9:02 (9 अक्टूबर) से सुबह 11:41 तक है।

क्या दशहरे पर गाड़ी, सोना या घर खरीद सकते हैं?

हाँ। विजयादशमी वर्ष के सबसे शुभ दिनों में गिनी जाती है, और महाराष्ट्र में यह साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक है, जब खरीदारी और नए काम के लिए अलग मुहूर्त ज़रूरी नहीं माना जाता। फिर भी बहुत से परिवार भुगतान या डिलीवरी विजय मुहूर्त (दोपहर 2:04 से दोपहर 2:51 तक) या दिन के शुभ चौघड़िया में करते हैं, और पहली सवारी से पहले छोटी-सी वाहन पूजा करते हैं।

क्या गर्भवती महिलाएँ रावण दहन देख सकती हैं?

परंपरा में इसकी कोई मनाही नहीं है। असली चिंता धुएँ, बहुत तेज़ पटाखों, गर्मी और धक्का-मुक्की वाली भीड़ की है — इसलिए जाएँ तो काफ़ी दूर से या छत से देखें, पानी और मास्क साथ रखें और भीड़ छँटने से पहले लौट आएँ। टीवी पर देखना भी उत्सव का उतना ही हिस्सा है।

विजय मुहूर्त क्या होता है?

दिन को पंद्रह मुहूर्तों में बाँटें तो ग्यारहवाँ मुहूर्त विजय मुहूर्त कहलाता है, जो दोपहर बाद पड़ता है। मान्यता है कि इसमें शुरू किया गया काम सफल होता है, इसलिए दशहरे पर शमी पूजा, शस्त्र पूजा और नई शुरुआत इसी में की जाती है; नई दिल्ली में यह दोपहर 2:04 से दोपहर 2:51 तक है।