तिथि कैलेंडर · नई दिल्ली
द्वितीया 2027 में कब है
शनि, 9 जनवरी
द्वितीया: 9 जन, सुबह 4:34 → 10 जन, सुबह 7:07
2027 में पहली: शुक्ल द्वितीया — शनिवार, 9 जनवरी 2027
उसके बाद: कृष्ण द्वितीया — रवि, 24 जनवरी
शुक्ल द्वितीया — शनिवार, 9 जनवरी 2027
2027 में द्वितीया 25 बार पड़ती है। नीचे हर तिथि का दिन, आरंभ और समाप्ति का समय और वह महीना दिया है जिसमें वह आती है।
जनवरी 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- शनिवार, 9 जनवरी 2027 शुक्ल पक्ष, पौष। तिथि 9 जन, सुबह 4:34 → 10 जन, सुबह 7:07
- रविवार, 24 जनवरी 2027 कृष्ण पक्ष, माघ। तिथि 23 जन, दोपहर 2:13 → 24 जन, सुबह 10:58
फरवरी 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 8 फरवरी 2027 शुक्ल पक्ष, माघ। तिथि 7 फ़र, रात 11:27 → 9 फ़र, रात 1:07
- सोमवार, 22 फरवरी 2027 कृष्ण पक्ष, फाल्गुन। तिथि 22 फ़र, रात 2:03 → 22 फ़र, रात 11:39
मार्च 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- बुधवार, 10 मार्च 2027 शुक्ल पक्ष, फाल्गुन। तिथि 9 मार्च, दोपहर 3:41 → 10 मार्च, दोपहर 3:53
- बुधवार, 24 मार्च 2027 कृष्ण पक्ष, चैत्र। तिथि 23 मार्च, दोपहर 2:29 → 24 मार्च, दोपहर 1:15
अप्रैल 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 8 अप्रैल 2027 शुक्ल पक्ष, चैत्र। तिथि 8 अप्रै, सुबह 4:29 → 9 अप्रै, रात 3:10
- गुरुवार, 22 अप्रैल 2027 कृष्ण पक्ष, वैशाख। तिथि 22 अप्रै, रात 3:31 → 23 अप्रै, रात 3:38
मई 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- शनिवार, 8 मई 2027 शुक्ल पक्ष, वैशाख। तिथि 7 मई, दोपहर 2:14 → 8 मई, सुबह 11:43
- शनिवार, 22 मई 2027 कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 21 मई, शाम 5:23 → 22 मई, शाम 6:48
जून 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- रविवार, 6 जून 2027 शुक्ल पक्ष, ज्येष्ठ। तिथि 5 जून, रात 9:59 → 6 जून, शाम 6:41
- सोमवार, 21 जून 2027 कृष्ण पक्ष, आषाढ़। तिथि 20 जून, सुबह 8:15 → 21 जून, सुबह 10:35
जुलाई 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 5 जुलाई 2027 शुक्ल पक्ष, आषाढ़। तिथि 5 जुला, सुबह 4:51 → 6 जुला, रात 1:14
- मंगलवार, 20 जुलाई 2027 कृष्ण पक्ष, श्रावण। तिथि 19 जुला, रात 11:48 → 21 जुला, रात 2:22
अगस्त 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- बुधवार, 4 अगस्त 2027 शुक्ल पक्ष, श्रावण। तिथि 3 अग, सुबह 11:52 → 4 अग, सुबह 8:20
- गुरुवार, 19 अगस्त 2027 कृष्ण पक्ष, भाद्रपद। तिथि 18 अग, दोपहर 3:16 → 19 अग, शाम 5:16
सितंबर 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- गुरुवार, 2 सितंबर 2027 शुक्ल पक्ष, भाद्रपद। तिथि 1 सित, शाम 7:51 → 2 सित, शाम 4:51
- शुक्रवार, 17 सितंबर 2027 कृष्ण पक्ष, आश्विन। तिथि 17 सित, सुबह 5:52 → 18 सित, सुबह 6:44 (अगले दिन भी मान्य)
अक्टूबर 2027 में द्वितीया 3 बार पड़ती है।
- शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2027 शुक्ल पक्ष, आश्विन। तिथि 1 अक्टू, सुबह 5:35 → 2 अक्टू, रात 3:34
- रविवार, 17 अक्टूबर 2027 कृष्ण पक्ष, कार्तिक। तिथि 16 अक्टू, शाम 7:13 → 17 अक्टू, शाम 6:44
- रविवार, 31 अक्टूबर 2027 शुक्ल पक्ष, कार्तिक। तिथि 30 अक्टू, शाम 5:52 → 31 अक्टू, शाम 5:13
नवंबर 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- सोमवार, 15 नवंबर 2027 कृष्ण पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 15 नव, सुबह 7:29 → 16 नव, सुबह 5:42 (क्षय तिथि)
- मंगलवार, 30 नवंबर 2027 शुक्ल पक्ष, मार्गशीर्ष। तिथि 29 नव, सुबह 9:14 → 30 नव, सुबह 10:09
दिसंबर 2027 में द्वितीया 2 बार पड़ती है।
- बुधवार, 15 दिसंबर 2027 कृष्ण पक्ष, पौष। तिथि 14 दिस, शाम 7:02 → 15 दिस, शाम 4:14
- बुधवार, 29 दिसंबर 2027 शुक्ल पक्ष, पौष। तिथि 29 दिस, रात 3:28 → 30 दिस, सुबह 5:41
| तारीख | पक्ष | हिंदू माह (पूर्णिमांत) | तिथि आरंभ | तिथि समाप्त | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|---|
| शनिवार, 9 जनवरी 2027अगली | शुक्ल | पौष | 9 जन, सुबह 4:34 | 10 जन, सुबह 7:07 | — |
| रविवार, 24 जनवरी 2027 | कृष्ण | माघ | 23 जन, दोपहर 2:13 | 24 जन, सुबह 10:58 | — |
| सोमवार, 8 फरवरी 2027 | शुक्ल | माघ | 7 फ़र, रात 11:27 | 9 फ़र, रात 1:07 | — |
| सोमवार, 22 फरवरी 2027 | कृष्ण | फाल्गुन | 22 फ़र, रात 2:03 | 22 फ़र, रात 11:39 | — |
| बुधवार, 10 मार्च 2027 | शुक्ल | फाल्गुन | 9 मार्च, दोपहर 3:41 | 10 मार्च, दोपहर 3:53 | — |
| बुधवार, 24 मार्च 2027 | कृष्ण | चैत्र | 23 मार्च, दोपहर 2:29 | 24 मार्च, दोपहर 1:15 | — |
| गुरुवार, 8 अप्रैल 2027 | शुक्ल | चैत्र | 8 अप्रै, सुबह 4:29 | 9 अप्रै, रात 3:10 | — |
| गुरुवार, 22 अप्रैल 2027 | कृष्ण | वैशाख | 22 अप्रै, रात 3:31 | 23 अप्रै, रात 3:38 | — |
| शनिवार, 8 मई 2027 | शुक्ल | वैशाख | 7 मई, दोपहर 2:14 | 8 मई, सुबह 11:43 | — |
| शनिवार, 22 मई 2027 | कृष्ण | ज्येष्ठ | 21 मई, शाम 5:23 | 22 मई, शाम 6:48 | — |
| रविवार, 6 जून 2027 | शुक्ल | ज्येष्ठ | 5 जून, रात 9:59 | 6 जून, शाम 6:41 | — |
| सोमवार, 21 जून 2027 | कृष्ण | आषाढ़ | 20 जून, सुबह 8:15 | 21 जून, सुबह 10:35 | — |
| सोमवार, 5 जुलाई 2027 | शुक्ल | आषाढ़ | 5 जुला, सुबह 4:51 | 6 जुला, रात 1:14 | — |
| मंगलवार, 20 जुलाई 2027 | कृष्ण | श्रावण | 19 जुला, रात 11:48 | 21 जुला, रात 2:22 | — |
| बुधवार, 4 अगस्त 2027 | शुक्ल | श्रावण | 3 अग, सुबह 11:52 | 4 अग, सुबह 8:20 | — |
| गुरुवार, 19 अगस्त 2027 | कृष्ण | भाद्रपद | 18 अग, दोपहर 3:16 | 19 अग, शाम 5:16 | — |
| गुरुवार, 2 सितंबर 2027 | शुक्ल | भाद्रपद | 1 सित, शाम 7:51 | 2 सित, शाम 4:51 | — |
| शुक्रवार, 17 सितंबर 2027 | कृष्ण | आश्विन | 17 सित, सुबह 5:52 | 18 सित, सुबह 6:44 | अगले दिन भी मान्य |
| शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2027 | शुक्ल | आश्विन | 1 अक्टू, सुबह 5:35 | 2 अक्टू, रात 3:34 | — |
| रविवार, 17 अक्टूबर 2027 | कृष्ण | कार्तिक | 16 अक्टू, शाम 7:13 | 17 अक्टू, शाम 6:44 | — |
| रविवार, 31 अक्टूबर 2027 | शुक्ल | कार्तिक | 30 अक्टू, शाम 5:52 | 31 अक्टू, शाम 5:13 | — |
| सोमवार, 15 नवंबर 2027 | कृष्ण | मार्गशीर्ष | 15 नव, सुबह 7:29 | 16 नव, सुबह 5:42 | क्षय तिथि |
| मंगलवार, 30 नवंबर 2027 | शुक्ल | मार्गशीर्ष | 29 नव, सुबह 9:14 | 30 नव, सुबह 10:09 | — |
| बुधवार, 15 दिसंबर 2027 | कृष्ण | पौष | 14 दिस, शाम 7:02 | 15 दिस, शाम 4:14 | — |
| बुधवार, 29 दिसंबर 2027 | शुक्ल | पौष | 29 दिस, रात 3:28 | 30 दिस, सुबह 5:41 | — |
- यह तालिका नई दिल्ली के लिए चंद्रमा और सूर्य की स्थिति से इसी समय गणना की गई है — किसी छपे कैलेंडर से नकल नहीं की गई।
- हर तिथि का आरंभ और समाप्ति समय दिया गया है, ताकि आप दिन स्वयं जाँच सकें।
समय नई दिल्ली के अनुसार हैं। जिस पंक्ति पर क्षय तिथि लिखा है, वह तिथि किसी सूर्योदय पर नहीं थी — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो गई, और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। जिस पर अगले दिन भी मान्य लिखा है, वहाँ तिथि दो सूर्योदय तक चलती है, इसलिए दो परंपराएँ दो अलग दिन लेती हैं।
तिथि एक चंद्रमास का तीसवाँ भाग है — चंद्रमा का सूर्य से 12° आगे बढ़ना — इसलिए यह औसतन 23 घंटे 37 मिनट की होती है, जबकि दिन 24 घंटे का। इसीलिए तिथि लगभग कभी सूर्योदय पर आरंभ नहीं होती। यह पृष्ठ सामान्य नियम मानता है: सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो, दिन उसी का कहलाता है। ऊपर की तालिका में इसके दो परिणाम दिखते हैं और दोनों त्रुटि नहीं हैं। जब कोई तिथि लगातार दो सूर्योदय पर चलती है, तब दोनों दिन सचमुच उसके होते हैं और परंपराएँ बँट जाती हैं। जब वह किसी सूर्योदय को नहीं छूती, तब वह क्षय तिथि है और व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन वह चली। आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं; दिन उनकी व्याख्या है।
सामान्य प्रश्न
द्वितीया कब है 2027 में?
2027 में अगली द्वितीया शनिवार, 9 जनवरी 2027 को है। तिथि 9 जन, सुबह 4:34 → 10 जन, सुबह 7:07 तक चलती है (नई दिल्ली के समय अनुसार)। पूरे वर्ष की 25 तिथियाँ ऊपर तालिका में दी गई हैं।
2027 में द्वितीया कितनी बार आती है?
25 बार — शुक्ल पक्ष में 13 और कृष्ण पक्ष में 12। संख्या हर वर्ष बदलती है क्योंकि बारह चंद्रमास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे पड़ते हैं, और अधिक मास इसे और बदल देता है।
शुक्ल द्वितीया और कृष्ण द्वितीया में क्या अंतर है?
दोनों एक ही तिथि संख्या हैं, अलग पक्ष की। शुक्ल पक्ष अमावस्या के बाद का उजाला पखवाड़ा है और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद का। द्वितीया हर चंद्रमास में दो बार आती है, एक बार प्रत्येक पक्ष में, और ऊपर की तालिका में पक्ष का स्तंभ बताता है कि कौन-सी कौन है।
मेरे कैलेंडर में द्वितीया की तारीख अलग क्यों है?
क्योंकि तिथि शायद ही कभी सूर्योदय पर आरंभ या समाप्त होती है। जब वह दो दिन के सूर्योदय पर चल रही हो, या किसी पर भी न हो, तब परंपराएँ बँट जाती हैं। ऊपर दिए आरंभ और समाप्ति के क्षण खगोल हैं और उन पर विवाद नहीं — दिन उनकी व्याख्या है, और यह पृष्ठ बताता है कि उसने कौन-सी व्याख्या ली।
क्या द्वितीया पूरे भारत में एक ही दिन होती है?
हमेशा नहीं। दिन सूर्योदय से तय होता है और भारत में सूर्योदय एक घंटे से अधिक अंतर रखता है, इसलिए एक तिथि जो नई दिल्ली में सूर्योदय के ठीक बाद समाप्त होती है, पश्चिम के किसी शहर में उससे पहले समाप्त हो सकती है और दिन बदल जाता है। ऊपर शहर बदलकर देखिए।
द्वितीया को और किन नामों से खोजा जाता है?
दूज, बीज — ये सब एक ही तिथि हैं। इस पृष्ठ का पता एक ही है ताकि उत्तर एक जगह रहे।
क्षय द्वितीया क्या होती है?
2027 में 1 बार द्वितीया क्षय तिथि है: सोमवार, 15 नवंबर 2027। क्षय तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती — वह एक सूर्योदय के बाद आरंभ होकर अगले से पहले समाप्त हो जाती है। व्रत फिर भी रखा जाता है, उसी दिन जिस दिन वह चली, पर सामान्य सूर्योदय नियम वहाँ लागू नहीं होता।