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विंशोत्तरी दशा

शनि की महादशा

गुरु → शनि → बुध

9 अंतर्दशाएँ

19 वर्ष

विंशोत्तरी दशा में शनि की महादशा 19 वर्ष चलती है — नौ में दूसरी सबसे लंबी। यह गुरु की महादशा के बाद आती है और इसके बाद बुध की आती है; जिनका जन्म-चंद्र पुष्य, अनुराधा या उत्तर भाद्रपदा नक्षत्र में हो, उनका जीवन इसी महादशा से शुरू होता है।

अवधि
19 वर्ष
चक्र में स्थान
गुरु → शनि → बुध
इसके नक्षत्र
पुष्य, अनुराधा, उत्तर भाद्रपदा
अंतर्दशाएँ
9

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

शनि की महादशा कर्म, कर्तव्य और कर्मफल की अवधि है। बली हो — योगकारक हो, या स्वराशि या उच्च राशि में हो — तो ग्रंथ इसे अनुशासन से पद, संपत्ति और अधिकार बनाने वाली मानते हैं; पीड़ित हो तो वे इसे देरी, बिना पहचान की कड़ी मेहनत, पुराने रोगों और धैर्य सिखाने वाली हानियों से जोड़ते हैं।

शनि महादशा की नौ अंतर्दशाएँ

हर अंतर्दशा की अवधि = महादशा के वर्ष × अंतर्दशा स्वामी के वर्ष ÷ 120, और क्रम शनि से ही शुरू होता है। अवधि पारंपरिक तालिकाओं की तरह (12 माह, 30 दिन का माह) दी है; दशा कैलकुलेटर जन्म के अनुसार हर एक की सही तारीख़ देता है।

शनि महादशा की अंतर्दशाएँ, क्रम से
अंतर्दशाअवधिवर्षकब तक
शनि – शनि3 वर्ष 3 दिन3.013 वर्ष 3 दिन
शनि – बुध2 वर्ष 8 माह 9 दिन2.695 वर्ष 8 माह 12 दिन
शनि – केतु1 वर्ष 1 माह 9 दिन1.116 वर्ष 9 माह 21 दिन
शनि – शुक्र3 वर्ष 2 माह3.179 वर्ष 11 माह 21 दिन
शनि – सूर्य11 माह 12 दिन0.9510 वर्ष 11 माह 3 दिन
शनि – चंद्र1 वर्ष 7 माह1.5812 वर्ष 6 माह 3 दिन
शनि – मंगल1 वर्ष 1 माह 9 दिन1.1113 वर्ष 7 माह 12 दिन
शनि – राहु2 वर्ष 10 माह 6 दिन2.8516 वर्ष 5 माह 18 दिन
शनि – गुरु2 वर्ष 6 माह 12 दिन2.5319 वर्ष

हर लग्न के लिए यह क्या जगाती है

महादशा उन भावों के विषय लाती है जिनका उसका स्वामी है। कौन से भाव, यह लग्न पर निर्भर है:

बारह लग्नों के लिए शनि की महादशा
लग्नकिन भावों का स्वामीशास्त्रीय भूमिकाकिन विषयों को आगे लाती है
मेष10, 11तीसरे या ग्यारहवें का स्वामी — मिश्रितकरियर और प्रतिष्ठा; आय और लाभ
वृषभ9, 10योगकारक — केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामीभाग्य और पिता; करियर और प्रतिष्ठा
मिथुन8, 9त्रिकोणेश — शुभआयु और अचानक बदलाव; भाग्य और पिता
कर्क7, 8दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेविवाह और जीवनसाथी; आयु और अचानक बदलाव
सिंह6, 7दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेशत्रु, ऋण और रोग; विवाह और जीवनसाथी
कन्या5, 6त्रिकोणेश — शुभसंतान और बुद्धि; शत्रु, ऋण और रोग
तुला4, 5योगकारक — केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामीघर, माता और संपत्ति; संतान और बुद्धि
वृश्चिक3, 4तीसरे या ग्यारहवें का स्वामी — मिश्रितपराक्रम और भाई-बहन; घर, माता और संपत्ति
धनु2, 3तीसरे या ग्यारहवें का स्वामी — मिश्रितधन, वाणी और परिवार; पराक्रम और भाई-बहन
मकर1, 2लग्नेश — जहाँ भी हो, शुभव्यक्तित्व और स्वास्थ्य; धन, वाणी और परिवार
कुंभ1, 12लग्नेश — जहाँ भी हो, शुभव्यक्तित्व और स्वास्थ्य; व्यय और विदेश
मीन11, 12दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेआय और लाभ; व्यय और विदेश

जिस भाव में यह बैठा है

शनि महादशा में उपाय

  • शनि का मंत्र जपें: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — शनिवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 6 माला (648 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 23,000 जप पूरे होते हैं।
  • शनि का दान करें. तिल, उड़द, लोहा का दान शनिवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी श्रमिक, सफ़ाईकर्मी या अत्यंत निर्धन को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • शनि के लिए दैनिक आचरण. काले कुत्तों और कौओं को खिलाएँ; बुज़ुर्गों की सेवा करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · शनि का पूरा मंत्र

अपनी दशा देखें

आप किस महादशा में हैं, और शनि की महादशा आपके लिए कब शुरू या ख़त्म होती है, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र पर निर्भर है। दशा कैलकुलेटर हर अवधि तारीख़ों के साथ देता है।

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दूसरी महादशाएँ

सामान्य प्रश्न

शनि की महादशा कितने साल की होती है?

19 वर्ष, विंशोत्तरी दशा के 120 वर्ष के चक्र में।

शनि की महादशा में अंतर्दशाओं का क्रम क्या है?

शनि → बुध → केतु → शुक्र → सूर्य → चंद्र → मंगल → राहु → गुरु। पहली अंतर्दशा शनि की अपनी होती है (3 वर्ष 3 दिन)।

क्या शनि की महादशा शुभ है या अशुभ?

यह कुंडली में शनि की स्थिति पर निर्भर है — किस भाव में है, किस राशि में, किस लग्न के लिए किन भावों का स्वामी है। ऊपर की तालिकाएँ यही दिखाती हैं।

कैसे जानें कि शनि की महादशा चल रही है?

दशा कैलकुलेटर में जन्म तिथि, समय और स्थान डालें; वह हर महादशा और अंतर्दशा तारीख़ों के साथ देता है।