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शनि · प्रथम भाव (लग्न)

शनि पहले भाव में

  • केंद्र
  • त्रिकोण
  • दिग्बल शून्य

लग्न में शनि गंभीरता, सहनशक्ति और धीमी शुरुआत देता है: शास्त्रीय ग्रंथ दुबली या नाज़ुक काया, संकोची या उदास स्वभाव और शुरुआती संघर्ष बताते हैं।

भाव
प्रथम भाव (लग्न) — स्वयं, शारीरिक शरीर, रूप, स्वास्थ्य, स्वभाव, अहंकार, जीवन की दिशा।
ग्रह
शनि: नैसर्गिक पाप ग्रह और सबसे धीमा ग्रह — अनुशासन, कर्म, आयु, सेवा, देरी और सहनशक्ति का कारक
भाव का प्रकार
केंद्र भाव और त्रिकोण भाव
दिग्बल
शून्य — इसका सबसे बली भाव सातवाँ है
यहाँ से दृष्टि
तीसरा, सातवाँ, दसवाँ भाव (अपने से तीसरा, सातवाँ, दसवाँ)
इसकी महादशा
19 वर्ष

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

अपवाद तुला, मकर या कुंभ का शनि है, जिसके बारे में ग्रंथ कहते हैं कि यह व्यक्ति को राजा जैसा सम्मान दिलाता है — इन राशियों में यह शश योग बनाता है।

अनुशासन इसका वरदान है; स्वास्थ्य की दिनचर्या, युवावस्था में धैर्य और दीर्घकालीन लक्ष्य उम्र के साथ इसे अधिकार में बदलते हैं।

राशि से कैसे बदलता है — हर लग्न के लिए

पहले भाव की राशि लग्न पर निर्भर है, और उसी से शनि का बल बदलता है। तुला लग्न में यहाँ तुला आती है, जहाँ शनि उच्च है; मेष लग्न में मेष, जहाँ यह नीच है। योगकारक: वृषभ, तुला लग्न।

हर लग्न में शनि पहले भाव में
लग्नइस भाव की राशिबलकिन भावों का स्वामीयोग और भूमिका
मेषमेषनीच10 (करियर और प्रतिष्ठा), 11 (आय और लाभ)नीच — नीचभंग देखें
वृषभवृषभमित्र राशि9 (भाग्य और पिता), 10 (करियर और प्रतिष्ठा)योगकारक — केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामी
मिथुनमिथुनमित्र राशि8 (आयु और अचानक बदलाव), 9 (भाग्य और पिता)—
कर्ककर्कशत्रु राशि7 (विवाह और जीवनसाथी), 8 (आयु और अचानक बदलाव)—
सिंहसिंहशत्रु राशि6 (शत्रु, ऋण और रोग), 7 (विवाह और जीवनसाथी)—
कन्याकन्यामित्र राशि5 (संतान और बुद्धि), 6 (शत्रु, ऋण और रोग)—
तुलातुलाउच्च4 (घर, माता और संपत्ति), 5 (संतान और बुद्धि)शश योग (पंच महापुरुष); योगकारक — केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामी
वृश्चिकवृश्चिकशत्रु राशि3 (पराक्रम और भाई-बहन), 4 (घर, माता और संपत्ति)—
धनुधनुसम राशि2 (धन, वाणी और परिवार), 3 (पराक्रम और भाई-बहन)—
मकरमकरस्वराशि1 (व्यक्तित्व और स्वास्थ्य), 2 (धन, वाणी और परिवार)शश योग (पंच महापुरुष); लग्नेश
कुंभकुंभस्वराशि1 (व्यक्तित्व और स्वास्थ्य), 12 (व्यय और विदेश)शश योग (पंच महापुरुष); लग्नेश
मीनमीनसम राशि11 (आय और लाभ), 12 (व्यय और विदेश)—

यह स्थिति कौन से योग बना सकती है

  • शश योग (पंच महापुरुष): केंद्र में स्वराशि या उच्च का शनि — तुला, मकर, कुंभ लग्न में।

फल कब मिलता है

शनि की महादशा 19 वर्ष चलती है। यह स्थिति सबसे स्पष्ट तब बोलती है — शनि की महादशा में, दूसरी महादशाओं के भीतर इसकी अंतर्दशा में, और पहले भाव के स्वामी की दशा में। शनि और गुरु का गोचर जब इस भाव या जन्म के ग्रह पर से गुज़रता है, तब भी यह जागती है।

शनि की महादशा · अपनी दशा देखें — दशा कैलकुलेटर

उपाय

  • शनि का मंत्र जपें: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — शनिवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 6 माला (648 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 23,000 जप पूरे होते हैं।
  • शनि का दान करें. तिल, उड़द, लोहा का दान शनिवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी श्रमिक, सफ़ाईकर्मी या अत्यंत निर्धन को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • शनि के लिए दैनिक आचरण. काले कुत्तों और कौओं को खिलाएँ; बुज़ुर्गों की सेवा करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · शनि का पूरा मंत्र

अपनी कुंडली में देखें

कुंडली बनाएँ और भावों वाले कार्ड में पहले भाव का कार्ड देखें: वह बताता है कि वहाँ कौन-सी राशि है, उसका स्वामी कहाँ है और कौन से ग्रह बैठे हैं — यानी शनि सचमुच इस भाव में है या नहीं, और किस राशि में। ऊपर की तालिका की वह पंक्ति आपके लग्न की है।

अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँनमूना कुंडली पर इंटरैक्टिव कुंडली देखें

पहले भाव में दूसरे ग्रह

दूसरे भावों में शनि

सामान्य प्रश्न

क्या पहले भाव में शनि शुभ है या अशुभ?

अकेले इससे कोई फ़ैसला नहीं होता। अनुशासन इसका वरदान है; स्वास्थ्य की दिनचर्या, युवावस्था में धैर्य और दीर्घकालीन लक्ष्य उम्र के साथ इसे अधिकार में बदलते हैं। तुला लग्न में यहाँ यह उच्च है। मेष लग्न में नीच।

किस लग्न में पहले भाव का शनि सबसे अच्छा फल देता है?

वृषभ (योगकारक); तुला (उच्च, योगकारक); मकर (स्वराशि); कुंभ (स्वराशि) लग्न। पूरी तालिका ऊपर है।

पहले भाव का शनि फल कब देता है?

शनि की महादशा (19 वर्ष) में, दूसरी दशाओं में इसकी अंतर्दशा में, और इस भाव के स्वामी की दशा में।

पहले भाव के शनि के उपाय क्या हैं?

शनि के मुफ़्त अभ्यास — बीज मंत्र, उसके दिन का दान और एक दैनिक आचरण — ऊपर दिए हैं। केवल एक स्थिति देखकर कोई रत्न नहीं सुझाया जाता।