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विंशोत्तरी दशा

चंद्र की महादशा

सूर्य → चंद्र → मंगल

9 अंतर्दशाएँ

10 वर्ष

विंशोत्तरी दशा में चंद्र की महादशा 10 वर्ष चलती है — नौ में छठी सबसे लंबी। यह सूर्य की महादशा के बाद आती है और इसके बाद मंगल की आती है; जिनका जन्म-चंद्र रोहिणी, हस्त या श्रवण नक्षत्र में हो, उनका जीवन इसी महादशा से शुरू होता है।

अवधि
10 वर्ष
चक्र में स्थान
सूर्य → चंद्र → मंगल
इसके नक्षत्र
रोहिणी, हस्त, श्रवण
अंतर्दशाएँ
9

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

चंद्र की महादशा चंद्रमा के विषयों को आगे लाती है: मन, माता, घर, यात्रा और जनता। बली और शुभ स्थिति के चंद्र में ग्रंथ सुख, जन-समर्थन, पारिवारिक प्रसन्नता और स्त्रियों व जनता से लाभ पढ़ते हैं; निर्बल या पीड़ित चंद्र में वे इसे भावनात्मक उथल-पुथल, माता या घर की चिंता और बदलते स्वास्थ्य से जोड़ते हैं।

चंद्र महादशा की नौ अंतर्दशाएँ

हर अंतर्दशा की अवधि = महादशा के वर्ष × अंतर्दशा स्वामी के वर्ष ÷ 120, और क्रम चंद्र से ही शुरू होता है। अवधि पारंपरिक तालिकाओं की तरह (12 माह, 30 दिन का माह) दी है; दशा कैलकुलेटर जन्म के अनुसार हर एक की सही तारीख़ देता है।

चंद्र महादशा की अंतर्दशाएँ, क्रम से
अंतर्दशाअवधिवर्षकब तक
चंद्र – चंद्र10 माह0.8310 माह
चंद्र – मंगल7 माह0.581 वर्ष 5 माह
चंद्र – राहु1 वर्ष 6 माह1.502 वर्ष 11 माह
चंद्र – गुरु1 वर्ष 4 माह1.334 वर्ष 3 माह
चंद्र – शनि1 वर्ष 7 माह1.585 वर्ष 10 माह
चंद्र – बुध1 वर्ष 5 माह1.427 वर्ष 3 माह
चंद्र – केतु7 माह0.587 वर्ष 10 माह
चंद्र – शुक्र1 वर्ष 8 माह1.679 वर्ष 6 माह
चंद्र – सूर्य6 माह0.5010 वर्ष

हर लग्न के लिए यह क्या जगाती है

महादशा उन भावों के विषय लाती है जिनका उसका स्वामी है। कौन से भाव, यह लग्न पर निर्भर है:

बारह लग्नों के लिए चंद्र की महादशा
लग्नकिन भावों का स्वामीशास्त्रीय भूमिकाकिन विषयों को आगे लाती है
मेष4केंद्रेश — स्थिति के अनुसार फलघर, माता और संपत्ति
वृषभ3तीसरे या ग्यारहवें का स्वामी — मिश्रितपराक्रम और भाई-बहन
मिथुन2द्वितीयेश — धन और परिवारधन, वाणी और परिवार
कर्क1लग्नेश — जहाँ भी हो, शुभव्यक्तित्व और स्वास्थ्य
सिंह12दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेव्यय और विदेश
कन्या11तीसरे या ग्यारहवें का स्वामी — मिश्रितआय और लाभ
तुला10केंद्रेश — स्थिति के अनुसार फलकरियर और प्रतिष्ठा
वृश्चिक9त्रिकोणेश — शुभभाग्य और पिता
धनु8दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेआयु और अचानक बदलाव
मकर7केंद्रेश — स्थिति के अनुसार फलविवाह और जीवनसाथी
कुंभ6दुःस्थानेश — फल परिश्रम सेशत्रु, ऋण और रोग
मीन5त्रिकोणेश — शुभसंतान और बुद्धि

जिस भाव में यह बैठा है

चंद्र महादशा में उपाय

  • चंद्र का मंत्र जपें: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — सोमवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 3 माला (324 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 11,000 जप पूरे होते हैं।
  • चंद्र का दान करें. चावल, दूध, श्वेत वस्त्र का दान सोमवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी वृद्ध स्त्री या मातृ-तुल्य व्यक्ति को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • चंद्र के लिए दैनिक आचरण. माता का सम्मान करें; घर में चाँदी रखें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · चंद्र का पूरा मंत्र

अपनी दशा देखें

आप किस महादशा में हैं, और चंद्र की महादशा आपके लिए कब शुरू या ख़त्म होती है, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र पर निर्भर है। दशा कैलकुलेटर हर अवधि तारीख़ों के साथ देता है।

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दूसरी महादशाएँ

सामान्य प्रश्न

चंद्र की महादशा कितने साल की होती है?

10 वर्ष, विंशोत्तरी दशा के 120 वर्ष के चक्र में।

चंद्र की महादशा में अंतर्दशाओं का क्रम क्या है?

चंद्र → मंगल → राहु → गुरु → शनि → बुध → केतु → शुक्र → सूर्य। पहली अंतर्दशा चंद्र की अपनी होती है (10 माह)।

क्या चंद्र की महादशा शुभ है या अशुभ?

यह कुंडली में चंद्र की स्थिति पर निर्भर है — किस भाव में है, किस राशि में, किस लग्न के लिए किन भावों का स्वामी है। ऊपर की तालिकाएँ यही दिखाती हैं।

कैसे जानें कि चंद्र की महादशा चल रही है?

दशा कैलकुलेटर में जन्म तिथि, समय और स्थान डालें; वह हर महादशा और अंतर्दशा तारीख़ों के साथ देता है।