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केतु · सप्तम भाव (विवाह/साझेदारी)

केतु सातवें भाव में

  • केंद्र

विवाह के भाव में केतु साझेदारी में विरक्ति लाता है: शास्त्रीय ग्रंथ विवाह में गलतफ़हमियाँ, दूरी या अलगाव, आध्यात्मिक, असामान्य या भावनात्मक रूप से दूर रहने वाला जीवनसाथी, और व्यापारिक साझेदारों से कुछ कठिनाई बताते हैं।

भाव
सप्तम भाव (विवाह/साझेदारी) — जीवनसाथी, विवाह, व्यापारिक साझेदारी, सार्वजनिक छवि, खुले शत्रु, विदेश यात्रा।
ग्रह
केतु: चंद्रमा का दक्षिणी पात, छाया ग्रह — विरक्ति, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म, शोध और अचानक अलगाव का कारक; राहु की तरह यह अपनी राशि के स्वामी और अपने भाव के फल देता है
भाव का प्रकार
केंद्र भाव
दिग्बल
छाया ग्रहों के लिए नहीं गिना जाता
यहाँ से दृष्टि
ग्यारहवाँ, पहला, तीसरा भाव (अपने से पाँचवाँ, सातवाँ, नौवाँ)
इसकी महादशा
7 वर्ष

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

तब राहु लग्न में होता है, इसलिए व्यक्ति स्वयं आगे बढ़ने को आतुर रहता है जबकि साथी पीछे हटा-सा लग सकता है।

संवाद, साझा उद्देश्य और धैर्य व्यावहारिक उपाय हैं; यह विरक्ति विवाह को छूती भी है या नहीं, यह शुक्र, सप्तमेश और दशा से तय होता है।

राशि से कैसे बदलता है — हर लग्न के लिए

सातवें भाव की राशि लग्न पर निर्भर है, और उसी से केतु का बल बदलता है। वृषभ लग्न में यहाँ वृश्चिक आती है, जहाँ केतु उच्च है; वृश्चिक लग्न में वृषभ, जहाँ यह नीच है। राहु-केतु की उच्च-नीच राशि पर ग्रंथों में मतभेद है; यहाँ साइट की कुंडली वाला मत लिया गया है।

हर लग्न में केतु सातवें भाव में
लग्नइस भाव की राशिबलराशि स्वामीयोग और भूमिका
मेषतुला—शुक्र—
वृषभवृश्चिकउच्चमंगल—
मिथुनधनु—गुरु—
कर्कमकर—शनि—
सिंहकुंभ—शनि—
कन्यामीन—गुरु—
तुलामेष—मंगल—
वृश्चिकवृषभनीचशुक्रनीच — नीचभंग देखें
धनुमिथुन—बुध—
मकरकर्क—चंद्र—
कुंभसिंह—सूर्य—
मीनकन्या—बुध—

यह स्थिति कौन से योग बना सकती है

फल कब मिलता है

केतु की महादशा 7 वर्ष चलती है। यह स्थिति सबसे स्पष्ट तब बोलती है — केतु की महादशा में, दूसरी महादशाओं के भीतर इसकी अंतर्दशा में, और सातवें भाव के स्वामी की दशा में। शनि और गुरु का गोचर जब इस भाव या जन्म के ग्रह पर से गुज़रता है, तब भी यह जागती है।

केतु की महादशा · अपनी दशा देखें — दशा कैलकुलेटर

उपाय

  • केतु का मंत्र जपें: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — मंगलवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 4 माला (432 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 17,000 जप पूरे होते हैं।
  • केतु का दान करें. कुलथी, रंग-बिरंगा वस्त्र, कंबल का दान मंगलवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी साधु या आवारा कुत्ते को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • केतु के लिए दैनिक आचरण. कुत्तों की देखभाल करें; जो अभी दिखता नहीं उस पर श्रद्धा रखें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · केतु का पूरा मंत्र

अपनी कुंडली में देखें

कुंडली बनाएँ और भावों वाले कार्ड में सातवें भाव का कार्ड देखें: वह बताता है कि वहाँ कौन-सी राशि है, उसका स्वामी कहाँ है और कौन से ग्रह बैठे हैं — यानी केतु सचमुच इस भाव में है या नहीं, और किस राशि में। ऊपर की तालिका की वह पंक्ति आपके लग्न की है।

अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँनमूना कुंडली पर इंटरैक्टिव कुंडली देखें

सातवें भाव में दूसरे ग्रह

दूसरे भावों में केतु

सामान्य प्रश्न

क्या सातवें भाव में केतु शुभ है या अशुभ?

अकेले इससे कोई फ़ैसला नहीं होता। संवाद, साझा उद्देश्य और धैर्य व्यावहारिक उपाय हैं; यह विरक्ति विवाह को छूती भी है या नहीं, यह शुक्र, सप्तमेश और दशा से तय होता है। वृषभ लग्न में यहाँ यह उच्च है। वृश्चिक लग्न में नीच।

किस लग्न में सातवें भाव का केतु सबसे अच्छा फल देता है?

वृषभ (उच्च) लग्न। पूरी तालिका ऊपर है।

सातवें भाव का केतु फल कब देता है?

केतु की महादशा (7 वर्ष) में, दूसरी दशाओं में इसकी अंतर्दशा में, और इस भाव के स्वामी की दशा में।

सातवें भाव में केतु हो तो राहु कहाँ होता है?

सदा पहले भाव में — राहु और केतु ठीक आमने-सामने रहते हैं, इसलिए दोनों भावों को साथ पढ़ा जाता है।

सातवें भाव के केतु के उपाय क्या हैं?

केतु के मुफ़्त अभ्यास — बीज मंत्र, उसके दिन का दान और एक दैनिक आचरण — ऊपर दिए हैं। केवल एक स्थिति देखकर कोई रत्न नहीं सुझाया जाता।