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केतु · पंचम भाव (संतान/विद्या)

केतु पांचवें भाव में

  • त्रिकोण

संतान, बुद्धि और पूर्व पुण्य के भाव में केतु को संतान (देरी या चिंता) और पाचन के मामले में सावधानी से पढ़ा जाता है, पर यह तीक्ष्ण अंतर्ज्ञानी बुद्धि और मंत्र, ज्योतिष व आध्यात्मिक अध्ययन की योग्यता देता है।

भाव
पंचम भाव (संतान/विद्या) — संतान, बुद्धि, रोमांस, रचनात्मकता, सट्टा, पूर्व जन्म के कर्म (पूर्व पुण्य)।
ग्रह
केतु: चंद्रमा का दक्षिणी पात, छाया ग्रह — विरक्ति, अंतर्ज्ञान, अध्यात्म, शोध और अचानक अलगाव का कारक; राहु की तरह यह अपनी राशि के स्वामी और अपने भाव के फल देता है
भाव का प्रकार
त्रिकोण भाव
दिग्बल
छाया ग्रहों के लिए नहीं गिना जाता
यहाँ से दृष्टि
नौवाँ, ग्यारहवाँ, पहला भाव (अपने से पाँचवाँ, सातवाँ, नौवाँ)
इसकी महादशा
7 वर्ष

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

राहु तब ग्यारहवें भाव में होता है, जो लाभ में मदद करता है।

शोध और आध्यात्मिक अध्ययन इसके अनुकूल हैं; संतान के प्रश्न अकेले केतु से नहीं, पंचमेश और गुरु से तय होते हैं।

राशि से कैसे बदलता है — हर लग्न के लिए

पांचवें भाव की राशि लग्न पर निर्भर है, और उसी से केतु का बल बदलता है। कर्क लग्न में यहाँ वृश्चिक आती है, जहाँ केतु उच्च है; मकर लग्न में वृषभ, जहाँ यह नीच है। राहु-केतु की उच्च-नीच राशि पर ग्रंथों में मतभेद है; यहाँ साइट की कुंडली वाला मत लिया गया है।

हर लग्न में केतु पांचवें भाव में
लग्नइस भाव की राशिबलराशि स्वामीयोग और भूमिका
मेषसिंह—सूर्य—
वृषभकन्या—बुध—
मिथुनतुला—शुक्र—
कर्कवृश्चिकउच्चमंगल—
सिंहधनु—गुरु—
कन्यामकर—शनि—
तुलाकुंभ—शनि—
वृश्चिकमीन—गुरु—
धनुमेष—मंगल—
मकरवृषभनीचशुक्रनीच — नीचभंग देखें
कुंभमिथुन—बुध—
मीनकर्क—चंद्र—

यह स्थिति कौन से योग बना सकती है

फल कब मिलता है

केतु की महादशा 7 वर्ष चलती है। यह स्थिति सबसे स्पष्ट तब बोलती है — केतु की महादशा में, दूसरी महादशाओं के भीतर इसकी अंतर्दशा में, और पांचवें भाव के स्वामी की दशा में। शनि और गुरु का गोचर जब इस भाव या जन्म के ग्रह पर से गुज़रता है, तब भी यह जागती है।

केतु की महादशा · अपनी दशा देखें — दशा कैलकुलेटर

उपाय

  • केतु का मंत्र जपें: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — मंगलवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 4 माला (432 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 17,000 जप पूरे होते हैं।
  • केतु का दान करें. कुलथी, रंग-बिरंगा वस्त्र, कंबल का दान मंगलवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी साधु या आवारा कुत्ते को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • केतु के लिए दैनिक आचरण. कुत्तों की देखभाल करें; जो अभी दिखता नहीं उस पर श्रद्धा रखें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · केतु का पूरा मंत्र

अपनी कुंडली में देखें

कुंडली बनाएँ और भावों वाले कार्ड में पांचवें भाव का कार्ड देखें: वह बताता है कि वहाँ कौन-सी राशि है, उसका स्वामी कहाँ है और कौन से ग्रह बैठे हैं — यानी केतु सचमुच इस भाव में है या नहीं, और किस राशि में। ऊपर की तालिका की वह पंक्ति आपके लग्न की है।

अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँनमूना कुंडली पर इंटरैक्टिव कुंडली देखें

पांचवें भाव में दूसरे ग्रह

दूसरे भावों में केतु

सामान्य प्रश्न

क्या पांचवें भाव में केतु शुभ है या अशुभ?

अकेले इससे कोई फ़ैसला नहीं होता। शोध और आध्यात्मिक अध्ययन इसके अनुकूल हैं; संतान के प्रश्न अकेले केतु से नहीं, पंचमेश और गुरु से तय होते हैं। कर्क लग्न में यहाँ यह उच्च है। मकर लग्न में नीच।

किस लग्न में पांचवें भाव का केतु सबसे अच्छा फल देता है?

कर्क (उच्च) लग्न। पूरी तालिका ऊपर है।

पांचवें भाव का केतु फल कब देता है?

केतु की महादशा (7 वर्ष) में, दूसरी दशाओं में इसकी अंतर्दशा में, और इस भाव के स्वामी की दशा में।

पांचवें भाव में केतु हो तो राहु कहाँ होता है?

सदा ग्यारहवें भाव में — राहु और केतु ठीक आमने-सामने रहते हैं, इसलिए दोनों भावों को साथ पढ़ा जाता है।

पांचवें भाव के केतु के उपाय क्या हैं?

केतु के मुफ़्त अभ्यास — बीज मंत्र, उसके दिन का दान और एक दैनिक आचरण — ऊपर दिए हैं। केवल एक स्थिति देखकर कोई रत्न नहीं सुझाया जाता।