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राहु · प्रथम भाव (लग्न)

राहु पहले भाव में

  • केंद्र
  • त्रिकोण

लग्न में राहु व्यक्तित्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता है: महत्वाकांक्षा, अलग या विदेशी झलक वाला स्वभाव, भीड़ से अलग दिखने की चाह और अपनी पहचान को लेकर बेचैनी।

भाव
प्रथम भाव (लग्न) — स्वयं, शारीरिक शरीर, रूप, स्वास्थ्य, स्वभाव, अहंकार, जीवन की दिशा।
ग्रह
राहु: चंद्रमा का उत्तरी पात, बिना अपनी राशि वाला छाया ग्रह — महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक, जुनून और लीक से हटकर चीज़ों का कारक; यह अपनी राशि के स्वामी और अपने भाव के फल देता है
भाव का प्रकार
केंद्र भाव और त्रिकोण भाव
दिग्बल
छाया ग्रहों के लिए नहीं गिना जाता
यहाँ से दृष्टि
पाँचवाँ, सातवाँ, नौवाँ भाव (अपने से पाँचवाँ, सातवाँ, नौवाँ)
इसकी महादशा
18 वर्ष

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

शास्त्रीय ग्रंथ सिर या स्नायु से जुड़ी परेशानियों और दिशा को लेकर भ्रम की बात भी करते हैं; तब केतु सातवें भाव में होता है, इसलिए साझेदारी में व्यक्ति केतु का पाठ — छोड़ देना — सीखता है।

स्पष्ट लक्ष्य और स्थिर दिनचर्या इसकी भूख को उपलब्धि में बदलते हैं; लीक से हटकर करियर इसके अनुकूल हैं।

राशि से कैसे बदलता है — हर लग्न के लिए

पहले भाव की राशि लग्न पर निर्भर है, और उसी से राहु का बल बदलता है। वृषभ लग्न में यहाँ वृषभ आती है, जहाँ राहु उच्च है; वृश्चिक लग्न में वृश्चिक, जहाँ यह नीच है। राहु-केतु की उच्च-नीच राशि पर ग्रंथों में मतभेद है; यहाँ साइट की कुंडली वाला मत लिया गया है।

हर लग्न में राहु पहले भाव में
लग्नइस भाव की राशिबलराशि स्वामीयोग और भूमिका
मेषमेष—मंगल—
वृषभवृषभउच्चशुक्र—
मिथुनमिथुन—बुध—
कर्ककर्क—चंद्र—
सिंहसिंह—सूर्य—
कन्याकन्या—बुध—
तुलातुला—शुक्र—
वृश्चिकवृश्चिकनीचमंगलनीच — नीचभंग देखें
धनुधनु—गुरु—
मकरमकर—शनि—
कुंभकुंभ—शनि—
मीनमीन—गुरु—

यह स्थिति कौन से योग बना सकती है

फल कब मिलता है

राहु की महादशा 18 वर्ष चलती है। यह स्थिति सबसे स्पष्ट तब बोलती है — राहु की महादशा में, दूसरी महादशाओं के भीतर इसकी अंतर्दशा में, और पहले भाव के स्वामी की दशा में। शनि और गुरु का गोचर जब इस भाव या जन्म के ग्रह पर से गुज़रता है, तब भी यह जागती है।

राहु की महादशा · अपनी दशा देखें — दशा कैलकुलेटर

उपाय

  • राहु का मंत्र जपें: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — शनिवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 5 माला (540 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 18,000 जप पूरे होते हैं।
  • राहु का दान करें. उड़द दाल, नीला वस्त्र, कंबल का दान शनिवार को, दोपहर से पहले करें। इसे संसार द्वारा अनदेखे किसी व्यक्ति को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • राहु के लिए दैनिक आचरण. घर में चाँदी या हाथी की आकृति रखें; शयनकक्ष में पुरानी वस्तुएँ न रखें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · राहु का पूरा मंत्र

अपनी कुंडली में देखें

कुंडली बनाएँ और भावों वाले कार्ड में पहले भाव का कार्ड देखें: वह बताता है कि वहाँ कौन-सी राशि है, उसका स्वामी कहाँ है और कौन से ग्रह बैठे हैं — यानी राहु सचमुच इस भाव में है या नहीं, और किस राशि में। ऊपर की तालिका की वह पंक्ति आपके लग्न की है।

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पहले भाव में दूसरे ग्रह

दूसरे भावों में राहु

सामान्य प्रश्न

क्या पहले भाव में राहु शुभ है या अशुभ?

अकेले इससे कोई फ़ैसला नहीं होता। स्पष्ट लक्ष्य और स्थिर दिनचर्या इसकी भूख को उपलब्धि में बदलते हैं; लीक से हटकर करियर इसके अनुकूल हैं। वृषभ लग्न में यहाँ यह उच्च है। वृश्चिक लग्न में नीच।

किस लग्न में पहले भाव का राहु सबसे अच्छा फल देता है?

वृषभ (उच्च) लग्न। पूरी तालिका ऊपर है।

पहले भाव का राहु फल कब देता है?

राहु की महादशा (18 वर्ष) में, दूसरी दशाओं में इसकी अंतर्दशा में, और इस भाव के स्वामी की दशा में।

पहले भाव में राहु हो तो केतु कहाँ होता है?

सदा सातवें भाव में — राहु और केतु ठीक आमने-सामने रहते हैं, इसलिए दोनों भावों को साथ पढ़ा जाता है।

पहले भाव के राहु के उपाय क्या हैं?

राहु के मुफ़्त अभ्यास — बीज मंत्र, उसके दिन का दान और एक दैनिक आचरण — ऊपर दिए हैं। केवल एक स्थिति देखकर कोई रत्न नहीं सुझाया जाता।