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राहु · दशम भाव (कर्म/करियर)

राहु दसवें भाव में

  • केंद्र
  • उपचय

करियर के दशम भाव में राहु महत्वाकांक्षी और सबकी नज़र में रहता है: शास्त्रीय ग्रंथ प्रसिद्धि, तेज़ उन्नति और सार्वजनिक जीवन में निडरता देते हैं — और नैतिकता छूटे तो अचानक गिरावट का जोखिम भी; आधुनिक परंपरा इसमें राजनीति, तकनीक, मीडिया और विदेशी कंपनियाँ जोड़ती है।

भाव
दशम भाव (कर्म/करियर) — पेशा, करियर, स्थिति, अधिकार, प्रसिद्धि, सरकार, सार्वजनिक जीवन।
ग्रह
राहु: चंद्रमा का उत्तरी पात, बिना अपनी राशि वाला छाया ग्रह — महत्वाकांक्षा, विदेश, तकनीक, जुनून और लीक से हटकर चीज़ों का कारक; यह अपनी राशि के स्वामी और अपने भाव के फल देता है
भाव का प्रकार
केंद्र भाव और उपचय भाव — उपचय भाव में पाप ग्रह अच्छा फल देते हैं
दिग्बल
छाया ग्रहों के लिए नहीं गिना जाता
यहाँ से दृष्टि
दूसरा, चौथा, छठा भाव (अपने से पाँचवाँ, सातवाँ, नौवाँ)
इसकी महादशा
18 वर्ष

शास्त्रीय ग्रंथ क्या कहते हैं

केतु तब चौथे भाव में होता है, इसलिए घर का जीवन अस्थिर लग सकता है।

महत्वाकांक्षा के साथ ईमानदारी जोड़ें; दीर्घकालीन लक्ष्य और अच्छे मार्गदर्शक उन्नति को स्थिर रखते हैं।

राशि से कैसे बदलता है — हर लग्न के लिए

दसवें भाव की राशि लग्न पर निर्भर है, और उसी से राहु का बल बदलता है। सिंह लग्न में यहाँ वृषभ आती है, जहाँ राहु उच्च है; कुंभ लग्न में वृश्चिक, जहाँ यह नीच है। राहु-केतु की उच्च-नीच राशि पर ग्रंथों में मतभेद है; यहाँ साइट की कुंडली वाला मत लिया गया है।

हर लग्न में राहु दसवें भाव में
लग्नइस भाव की राशिबलराशि स्वामीयोग और भूमिका
मेषमकर—शनि—
वृषभकुंभ—शनि—
मिथुनमीन—गुरु—
कर्कमेष—मंगल—
सिंहवृषभउच्चशुक्र—
कन्यामिथुन—बुध—
तुलाकर्क—चंद्र—
वृश्चिकसिंह—सूर्य—
धनुकन्या—बुध—
मकरतुला—शुक्र—
कुंभवृश्चिकनीचमंगलनीच — नीचभंग देखें
मीनधनु—गुरु—

यह स्थिति कौन से योग बना सकती है

फल कब मिलता है

राहु की महादशा 18 वर्ष चलती है। यह स्थिति सबसे स्पष्ट तब बोलती है — राहु की महादशा में, दूसरी महादशाओं के भीतर इसकी अंतर्दशा में, और दसवें भाव के स्वामी की दशा में। शनि और गुरु का गोचर जब इस भाव या जन्म के ग्रह पर से गुज़रता है, तब भी यह जागती है।

राहु की महादशा · अपनी दशा देखें — दशा कैलकुलेटर

उपाय

  • राहु का मंत्र जपें: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — शनिवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 5 माला (540 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 18,000 जप पूरे होते हैं।
  • राहु का दान करें. उड़द दाल, नीला वस्त्र, कंबल का दान शनिवार को, दोपहर से पहले करें। इसे संसार द्वारा अनदेखे किसी व्यक्ति को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
  • राहु के लिए दैनिक आचरण. घर में चाँदी या हाथी की आकृति रखें; शयनकक्ष में पुरानी वस्तुएँ न रखें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।

नौ ग्रहों के उपाय · राहु का पूरा मंत्र

अपनी कुंडली में देखें

कुंडली बनाएँ और भावों वाले कार्ड में दसवें भाव का कार्ड देखें: वह बताता है कि वहाँ कौन-सी राशि है, उसका स्वामी कहाँ है और कौन से ग्रह बैठे हैं — यानी राहु सचमुच इस भाव में है या नहीं, और किस राशि में। ऊपर की तालिका की वह पंक्ति आपके लग्न की है।

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दसवें भाव में दूसरे ग्रह

दूसरे भावों में राहु

सामान्य प्रश्न

क्या दसवें भाव में राहु शुभ है या अशुभ?

अकेले इससे कोई फ़ैसला नहीं होता। महत्वाकांक्षा के साथ ईमानदारी जोड़ें; दीर्घकालीन लक्ष्य और अच्छे मार्गदर्शक उन्नति को स्थिर रखते हैं। सिंह लग्न में यहाँ यह उच्च है। कुंभ लग्न में नीच।

किस लग्न में दसवें भाव का राहु सबसे अच्छा फल देता है?

सिंह (उच्च) लग्न। पूरी तालिका ऊपर है।

दसवें भाव का राहु फल कब देता है?

राहु की महादशा (18 वर्ष) में, दूसरी दशाओं में इसकी अंतर्दशा में, और इस भाव के स्वामी की दशा में।

दसवें भाव में राहु हो तो केतु कहाँ होता है?

सदा चौथे भाव में — राहु और केतु ठीक आमने-सामने रहते हैं, इसलिए दोनों भावों को साथ पढ़ा जाता है।

दसवें भाव के राहु के उपाय क्या हैं?

राहु के मुफ़्त अभ्यास — बीज मंत्र, उसके दिन का दान और एक दैनिक आचरण — ऊपर दिए हैं। केवल एक स्थिति देखकर कोई रत्न नहीं सुझाया जाता।