गुरु · दशम भाव (कर्म/करियर)
गुरु दसवें भाव में

दशम भाव में गुरु अच्छे आचरण पर बना सम्मानित करियर देता है: ग्रंथ सदाचार, धन, यश और अच्छे कामों में सफलता बताते हैं।
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- भाव
- दशम भाव (कर्म/करियर) — पेशा, करियर, स्थिति, अधिकार, प्रसिद्धि, सरकार, सार्वजनिक जीवन।
- ग्रह
- गुरु: सबसे बड़ा नैसर्गिक शुभ ग्रह — ज्ञान, गुरु, संतान, धन, धर्म और सत्परामर्श का कारक
- भाव का प्रकार
- केंद्र भाव और उपचय भाव
- दिग्बल
- आंशिक — सबसे बली पहले भाव में
- यहाँ से दृष्टि
- दूसरा, चौथा, छठा भाव (अपने से पाँचवाँ, सातवाँ, नौवाँ)
- इसकी महादशा
- 16 वर्ष
अपीड़ित हो तो यह अमल योग बनाता है; कर्क, धनु या मीन में हंस योग।
शिक्षण, कानून, वित्त, प्रबंधन और धार्मिक सेवा इसके अनुकूल हैं; सावधानी आत्मतुष्टि और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ लेने को लेकर है।
दसवें भाव की राशि लग्न पर निर्भर है, और उसी से गुरु का बल बदलता है। तुला लग्न में यहाँ कर्क आती है, जहाँ गुरु उच्च है; मेष लग्न में मकर, जहाँ यह नीच है।
| लग्न | इस भाव की राशि | बल | किन भावों का स्वामी | योग और भूमिका |
|---|---|---|---|---|
| मेष | मकर | नीच | 9 (भाग्य और पिता), 12 (व्यय और विदेश) | नीच — नीचभंग देखें |
| वृषभ | कुंभ | सम राशि | 8 (आयु और अचानक बदलाव), 11 (आय और लाभ) | — |
| मिथुन | मीन | स्वराशि | 7 (विवाह और जीवनसाथी), 10 (करियर और प्रतिष्ठा) | हंस योग (पंच महापुरुष) |
| कर्क | मेष | मित्र राशि | 6 (शत्रु, ऋण और रोग), 9 (भाग्य और पिता) | — |
| सिंह | वृषभ | शत्रु राशि | 5 (संतान और बुद्धि), 8 (आयु और अचानक बदलाव) | — |
| कन्या | मिथुन | शत्रु राशि | 4 (घर, माता और संपत्ति), 7 (विवाह और जीवनसाथी) | — |
| तुला | कर्क | उच्च | 3 (पराक्रम और भाई-बहन), 6 (शत्रु, ऋण और रोग) | हंस योग (पंच महापुरुष) |
| वृश्चिक | सिंह | मित्र राशि | 2 (धन, वाणी और परिवार), 5 (संतान और बुद्धि) | — |
| धनु | कन्या | शत्रु राशि | 1 (व्यक्तित्व और स्वास्थ्य), 4 (घर, माता और संपत्ति) | लग्नेश |
| मकर | तुला | शत्रु राशि | 3 (पराक्रम और भाई-बहन), 12 (व्यय और विदेश) | — |
| कुंभ | वृश्चिक | मित्र राशि | 2 (धन, वाणी और परिवार), 11 (आय और लाभ) | — |
| मीन | धनु | स्वराशि | 1 (व्यक्तित्व और स्वास्थ्य), 10 (करियर और प्रतिष्ठा) | हंस योग (पंच महापुरुष); लग्नेश |
- हंस योग (पंच महापुरुष): केंद्र में स्वराशि या उच्च का गुरु — तुला, मिथुन, मीन लग्न में।
- अमल योग: दशम भाव में शुभ ग्रह — गुरु अपीड़ित हो तो।
गुरु की महादशा 16 वर्ष चलती है। यह स्थिति सबसे स्पष्ट तब बोलती है — गुरु की महादशा में, दूसरी महादशाओं के भीतर इसकी अंतर्दशा में, और दसवें भाव के स्वामी की दशा में। शनि और गुरु का गोचर जब इस भाव या जन्म के ग्रह पर से गुज़रता है, तब भी यह जागती है।
- गुरु का मंत्र जपें: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः. सूर्योदय के बाद पूर्व की ओर मुख करके बैठें — गुरुवार इसके लिए सबसे प्रबल दिन है। प्रतिदिन 5 माला (540 बार) जपें, 108 मनकों की माला पर गिनती रखते हुए। बिना रुके 40 दिन तक यह क्रम निभाएँ — इससे पारंपरिक 19,000 जप पूरे होते हैं।
- गुरु का दान करें. चना दाल, हल्दी, पीला वस्त्र का दान गुरुवार को, दोपहर से पहले करें। इसे किसी शिक्षक, पुरोहित या गुरु को दें, या किसी सच्चे ज़रूरतमंद को। चुपचाप, स्वयं जाकर दें, धन्यवाद की अपेक्षा किए बिना।
- गुरु के लिए दैनिक आचरण. हल्दी का तिलक लगाएँ; गुरुजनों और बड़ों का आदर करें। 40 दिन तक प्रतिदिन निभाएँ — नियमितता ही उपाय है।
कुंडली बनाएँ और भावों वाले कार्ड में दसवें भाव का कार्ड देखें: वह बताता है कि वहाँ कौन-सी राशि है, उसका स्वामी कहाँ है और कौन से ग्रह बैठे हैं — यानी गुरु सचमुच इस भाव में है या नहीं, और किस राशि में। ऊपर की तालिका की वह पंक्ति आपके लग्न की है।
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- 01गुरु पहले भाव में
- 02गुरु दूसरे भाव में (अंग्रेज़ी में)
- 03गुरु तीसरे भाव में (अंग्रेज़ी में)
- 04गुरु चौथे भाव में (अंग्रेज़ी में)
- 05गुरु पांचवें भाव में
- 06गुरु छठे भाव में (अंग्रेज़ी में)
- 07गुरु सातवें भाव में
- 08गुरु आठवें भाव में (अंग्रेज़ी में)
- 09गुरु नौवें भाव में (अंग्रेज़ी में)
- 11गुरु ग्यारहवें भाव में (अंग्रेज़ी में)
- 12गुरु बारहवें भाव में (अंग्रेज़ी में)
सभी 12 भावों में गुरु (अंग्रेज़ी में)
सामान्य प्रश्न
क्या दसवें भाव में गुरु शुभ है या अशुभ?
अकेले इससे कोई फ़ैसला नहीं होता। शिक्षण, कानून, वित्त, प्रबंधन और धार्मिक सेवा इसके अनुकूल हैं; सावधानी आत्मतुष्टि और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ लेने को लेकर है। तुला लग्न में यहाँ यह उच्च है। मेष लग्न में नीच।
किस लग्न में दसवें भाव का गुरु सबसे अच्छा फल देता है?
मिथुन (स्वराशि); तुला (उच्च); मीन (स्वराशि) लग्न। पूरी तालिका ऊपर है।
दसवें भाव का गुरु फल कब देता है?
गुरु की महादशा (16 वर्ष) में, दूसरी दशाओं में इसकी अंतर्दशा में, और इस भाव के स्वामी की दशा में।
दसवें भाव के गुरु के उपाय क्या हैं?
गुरु के मुफ़्त अभ्यास — बीज मंत्र, उसके दिन का दान और एक दैनिक आचरण — ऊपर दिए हैं। केवल एक स्थिति देखकर कोई रत्न नहीं सुझाया जाता।








