मंत्र और जप
मंत्र संग्रह: ग्रह मंत्र, देव मंत्र और दिव्य नाम

यहाँ हर ग्रह मंत्र के साथ उसकी पारंपरिक जप संख्या, 40 दिन के मंडल में उसे पूरा करने वाला रोज़ का जप, और आपके शहर में आज उस ग्रह की अगली होरा दी गई है, जो स्थानीय सूर्योदय से निकाली जाती है। देव मंत्र और नामावलियाँ पारंपरिक संस्कृत पाठ हैं, जिन्हें प्रकाशित करने से पहले दो स्वतंत्र संस्करणों से मिलाकर जाँचा गया है।
हर ग्रह का एक बीज मंत्र, उसकी पारंपरिक जप संख्या और उसका दिन। किसी ग्रह को खोलें और उसका रोज़ का जप, नवग्रह स्तोत्र का श्लोक और आज की होरा देखें।
सूर्यॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
सूर्य मंत्र
7,000 जप · रविवार चंद्रॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
चंद्र मंत्र
11,000 जप · सोमवार मंगलॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
मंगल मंत्र
10,000 जप · मंगलवार बुधॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
बुध मंत्र
9,000 जप · बुधवार गुरुॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
गुरु मंत्र
19,000 जप · गुरुवार शुक्रॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
शुक्र मंत्र
16,000 जप · शुक्रवार शनिॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
शनि मंत्र
23,000 जप · शनिवार राहुॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
राहु मंत्र
18,000 जप · शनिवार केतुॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
केतु मंत्र
17,000 जप · मंगलवार
हर देवता के सबसे अधिक जपे जाने वाले मंत्र और श्लोक — संस्कृत, आसान लिप्यंतरण, हर पाठ का स्रोत और उसका अर्थ।
शिव मंत्र
ॐ नमः शिवाय, महामृत्युंजय, शिव गायत्रीगणेश मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः, गणेश गायत्री, वक्रतुण्डहनुमान मंत्र
मनोजवं, अतुलितबलधामं, बीज मंत्रदुर्गा मंत्र
सर्वमंगल मांगल्ये, या देवी सर्वभूतेषुलक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः, लक्ष्मी गायत्रीविष्णु मंत्र
ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो भगवते वासुदेवायकृष्ण मंत्र
हरे राम हरे कृष्ण, कृष्णाय वासुदेवायराम मंत्र
श्री राम जय राम जय जय राम, राम रामेतिसरस्वती मंत्र
सरस्वति नमस्तुभ्यं, या कुन्देन्दु, ॐ ऐंकुबेर मंत्र
वैदिक कुबेर मंत्र, ॐ यक्षाय कुबेरायगायत्री मंत्र
ऋग्वेद 3.62.10, हर शब्द के अर्थ सहित
हर सूची पारंपरिक नामावली है, उसी क्रम में जिसमें उसका पाठ होता है, और हर नाम का अर्थ इस साइट के लिए लिखा गया है।
शिव के 108 नाम
श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामावलिःविष्णु के 108 नाम
श्रीविष्ण्वष्टोत्तरशतनामावलिःलक्ष्मी के 108 नाम
श्रीलक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामावलिःदुर्गा के 108 नाम
श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामावलिःगणेश के 108 नाम
श्रीविनायकाष्टोत्तरशतनामावलिःहनुमान के 108 नाम
श्रीमदाञ्जनेयाष्टोत्तरशतनामावलिःकृष्ण के 108 नाम
श्रीकृष्णाष्टोत्तरशतनामावलिःराम के 108 नाम
श्रीरामाष्टोत्तरशतनामावलिःसरस्वती के 108 नाम
श्रीसरस्वत्यष्टोत्तरशतनामावलिःहनुमान के 12 नाम
हनुमद्द्वादशनामस्तोत्रम्दुर्गा के 32 नाम
श्रीदुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला
जप 108 मनकों की माला पर गिना जाता है, जिसमें एक बड़ा मनका — सुमेरु — गिनती में नहीं आता। माला का एक चक्र एक माला है: 108 जप। सुमेरु पर माला को लाँघा नहीं जाता, पलटकर अगला चक्र शुरू किया जाता है।
किसी ग्रह मंत्र की कुल संख्या — सूर्य के लिए 7,000, शनि के लिए 23,000 — परंपरा से 40 दिन के एक मंडल में पूरी की जाती है। इसलिए हर सुबह जो संख्या मायने रखती है वह रोज़ का जप है, और हर ग्रह पेज उसे बताता है: कुल संख्या को 40 दिनों में बाँटकर पूरी मालाओं तक बढ़ाया गया।
मंत्र साधना चिंतन और अनुशासन की परंपरा का हिस्सा है। यह चिकित्सा, कानूनी या आर्थिक सहायता का विकल्प नहीं है।





