मुहूर्त कैलेंडर · नई दिल्ली
सितंबर 2027 में सगाई मुहूर्त
शनि, 18 सितंबर
सुबह 6:07 – शाम 4:47
सितंबर 2027 में सगाई के 4 शुभ मुहूर्त हैं: 18, 22, 27 और 30 सितंबर। पहला मुहूर्त शनिवार, 18 सितंबर 2027 को सुबह 6:07 – शाम 4:47 है।
उसके बाद: बुध, 22 सितंबर · शाम 5:17 – रात 2:00 (23 सितंबर)
| रवि | सोम | मंगल | बुध | गुरु | शुक्र | शनि |
|---|---|---|---|---|---|---|
| सुबह 6:07 | ||||||
| शाम 5:17 | ||||||
| सुबह 10:33 | शाम 6:47 |
मुहूर्तवर्जित अवधि
- नई दिल्ली के लिए सूर्य, चंद्रमा, गुरु और शुक्र की स्थिति से गणना — किसी छपी सूची से नकल नहीं।
- हर मुहूर्त के साथ वह नक्षत्र, तिथि, योग और करण दिया है जिन पर वह शुद्ध निकला, और हर वर्जित अवधि का आरंभ और अंत भी।
- पितृ पक्ष में
शनिवार, 18 सितंबर 2027
सुबह 6:07 – शाम 4:47
- रेवती
- कृष्ण द्वितीया (17 सितंबर, सुबह 5:52 – 18 सितंबर, सुबह 6:44)
कृष्ण तृतीया (18 सितंबर, सुबह 6:44 – 19 सितंबर, सुबह 7:09) - विवाह के नक्षत्र और तिथि, शनिवार; योग और करण शुद्ध
पितृ पक्ष में — श्राद्ध के पखवाड़े में अधिकांश परिवार कोई शुभ कार्य नहीं करते; चातुर्मास में — कई परिवार देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं; कुछ सगाई अभी कर लेते हैं
- पितृ पक्ष में
बुधवार, 22 सितंबर 2027
शाम 5:17 – रात 2:00 (23 सितंबर)
- रोहिणी, मृगशिरा
- कृष्ण सप्तमी (22 सितंबर, सुबह 5:52 – 23 सितंबर, सुबह 4:37)
- विवाह के नक्षत्र और तिथि, बुधवार; योग और करण शुद्ध
पितृ पक्ष में — श्राद्ध के पखवाड़े में अधिकांश परिवार कोई शुभ कार्य नहीं करते; चातुर्मास में — कई परिवार देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं; कुछ सगाई अभी कर लेते हैं
- पितृ पक्ष में
सोमवार, 27 सितंबर 2027
सुबह 10:33 – सुबह 6:12 (28 सितंबर)
- मघा
- कृष्ण द्वादशी (26 सितंबर, शाम 7:49 – 27 सितंबर, शाम 4:55)
कृष्ण त्रयोदशी (27 सितंबर, शाम 4:55 – 28 सितंबर, दोपहर 1:55) - विवाह के नक्षत्र और तिथि, सोमवार; योग और करण शुद्ध
पितृ पक्ष में — श्राद्ध के पखवाड़े में अधिकांश परिवार कोई शुभ कार्य नहीं करते; चातुर्मास में — कई परिवार देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं; कुछ सगाई अभी कर लेते हैं
- पितृ पक्ष में
गुरुवार, 30 सितंबर 2027
शाम 6:47 – रात 2:11 (1 अक्टूबर)
- हस्त
- शुक्ल प्रतिपदा (क्षय) (30 सितंबर, सुबह 8:06 – 1 अक्टूबर, सुबह 5:35)
- विवाह के नक्षत्र और तिथि, गुरुवार; योग और करण शुद्ध
पितृ पक्ष में — श्राद्ध के पखवाड़े में अधिकांश परिवार कोई शुभ कार्य नहीं करते; चातुर्मास में — कई परिवार देवउठनी एकादशी तक रुकते हैं; कुछ सगाई अभी कर लेते हैं

स्वर्ण से पूछें
क्या यह मुहूर्त मेरी कुंडली के लिए शुभ है? स्वर्ण से मुफ़्त पूछें
ये दिन बाकी हर नियम पर शुद्ध हैं, पर गुरु या शुक्र अपनी अंश-सीमा में अस्त है। जो पंचांग अस्त केवल तब मानते हैं जब ग्रह दिखना बंद हो जाए, वे इनमें से कुछ दिन सूची में देते हैं।
| तारीख | ग्रह | सूर्य से दूरी | मुहूर्त |
|---|---|---|---|
| बुधवार, 1 सितंबर 2027 | शुक्र | 5.5° (सीमा 10°) | शाम 7:48 – सुबह 5:59 (2 सितंबर) |
| बुधवार, 1 सितंबर 2027 | गुरु | 0.5° (सीमा 11°) | शाम 7:48 – सुबह 5:59 (2 सितंबर) |
| गुरुवार, 2 सितंबर 2027 | शुक्र | 5.8° (सीमा 10°) | सुबह 5:59 – सुबह 5:59 (3 सितंबर) |
| गुरुवार, 2 सितंबर 2027 | गुरु | 1.3° (सीमा 11°) | सुबह 5:59 – सुबह 5:59 (3 सितंबर) |
| शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 | शुक्र | 6.0° (सीमा 10°) | सुबह 5:59 – दोपहर 3:53 |
| शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 | गुरु | 2.0° (सीमा 11°) | सुबह 5:59 – दोपहर 3:53 |
| शनिवार, 4 सितंबर 2027 | शुक्र | 6.3° (सीमा 10°) | दोपहर 2:49 – सुबह 6:00 (5 सितंबर) |
| शनिवार, 4 सितंबर 2027 | गुरु | 2.8° (सीमा 11°) | दोपहर 2:49 – सुबह 6:00 (5 सितंबर) |
| रविवार, 5 सितंबर 2027 | शुक्र | 6.6° (सीमा 10°) | सुबह 6:00 – दोपहर 2:30 |
| रविवार, 5 सितंबर 2027 | गुरु | 3.5° (सीमा 11°) | सुबह 6:00 – दोपहर 2:30 |
| बुधवार, 8 सितंबर 2027 | शुक्र | 7.4° (सीमा 10°) | शाम 6:17 – सुबह 6:02 (9 सितंबर) |
| बुधवार, 8 सितंबर 2027 | गुरु | 5.8° (सीमा 11°) | शाम 6:17 – सुबह 6:02 (9 सितंबर) |
| गुरुवार, 9 सितंबर 2027 | शुक्र | 7.7° (सीमा 10°) | सुबह 6:02 – रात 8:52 |
| गुरुवार, 9 सितंबर 2027 | गुरु | 6.6° (सीमा 11°) | सुबह 6:02 – रात 8:52 |
| शुक्रवार, 10 सितंबर 2027 | शुक्र | 7.9° (सीमा 10°) | रात 11:50 – सुबह 6:03 (11 सितंबर) |
| शुक्रवार, 10 सितंबर 2027 | गुरु | 7.3° (सीमा 11°) | रात 11:50 – सुबह 6:03 (11 सितंबर) |
| शनिवार, 11 सितंबर 2027 | शुक्र | 8.2° (सीमा 10°) | शाम 7:36 – रात 2:59 (12 सितंबर) |
| शनिवार, 11 सितंबर 2027 | गुरु | 8.1° (सीमा 11°) | शाम 7:36 – रात 2:59 (12 सितंबर) |
| शुक्रवार, 17 सितंबर 2027 | शुक्र | 9.8° (सीमा 10°) | सुबह 9:27 – सुबह 6:07 (18 सितंबर) |
- 1–5 सितंबर शुक्र 6 जुलाई 2027 से 17 सितंबर 2027 तक अस्त है और गुरु 16 अगस्त 2027 से 15 सितंबर 2027 तक अस्त है।
- 6 सितंबर नक्षत्र और तिथि केवल त्याज्य योग वैधृति और विष्कम्भ में मिलते हैं।
- 7 सितंबर मंगलवार — सगाई मंगलवार को नहीं होता।
- 8–11 सितंबर शुक्र 6 जुलाई 2027 से 17 सितंबर 2027 तक अस्त है और गुरु 16 अगस्त 2027 से 15 सितंबर 2027 तक अस्त है।
- 12–13 सितंबर चंद्रमा श्रवण और धनिष्ठा नक्षत्र में है — इनमें से कोई भी सगाई के 11 शुभ नक्षत्रों में नहीं।
- 14 सितंबर मंगलवार — सगाई मंगलवार को नहीं होता।
- 15 सितंबर चंद्रमा शतभिषा और पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र में है — इनमें से कोई भी सगाई के 11 शुभ नक्षत्रों में नहीं।
- 16 सितंबर नक्षत्र और तिथि केवल त्याज्य योग गण्ड में मिलते हैं।
- 17 सितंबर शुक्र 6 जुलाई 2027 से 17 सितंबर 2027 तक अस्त है।
- 19–20 सितंबर चंद्रमा अश्विनी, भरणी और कृत्तिका नक्षत्र में है — इनमें से कोई भी सगाई के 11 शुभ नक्षत्रों में नहीं।
- 21 सितंबर मंगलवार — सगाई मंगलवार को नहीं होता।
- 23 सितंबर नक्षत्र और तिथि केवल त्याज्य योग व्यतीपात में मिलते हैं।
- 24–26 सितंबर चंद्रमा आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य और आश्लेषा नक्षत्र में है — इनमें से कोई भी सगाई के 11 शुभ नक्षत्रों में नहीं।
- 28 सितंबर मंगलवार — सगाई मंगलवार को नहीं होता।
- 29 सितंबर नक्षत्र और तिथि केवल त्याज्य करण शकुनि में मिलते हैं।
- ये नियम कहाँ से: मुहूर्त ग्रंथों के विवाह नियम, जिन्हें सगाई वहाँ तक मानती है जहाँ ग्रंथ और प्रकाशित सूचियाँ एकमत हैं — इस साइट की विवाह सूची वाले ही नक्षत्र, तिथियाँ, योग, करण और वर्जित अवधियाँ, नीचे लिखे दो अंतरों के साथ। कोई बड़ा पंचांग पूरे साल की गणना-आधारित सगाई सूची नहीं छापता, इसलिए नियम यहाँ पूरे लिखे हैं, किसी और की तारीखों से मिलाए नहीं गए।
- खरमास वर्जित: धनु या मीन राशि में सूर्य रहते कोई मुहूर्त नहीं (16 दिसंबर 2026 – 14 जनवरी 2027, 15 मार्च 2027 – 14 अप्रैल 2027 और 16 दिसंबर 2027 – 15 जनवरी 2028)।
- वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार या रविवार (वैदिक वार, जो सूर्योदय से बदलता है)। मंगलवार कभी नहीं।
- नक्षत्र: चंद्रमा इन 11 में से किसी में हो — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपदा और रेवती।
- तिथि: अमावस्या को छोड़कर कोई भी तिथि, दोनों पक्षों में।
- योग और करण: मुहूर्त में ये 9 त्याज्य योग न हों — अतिगण्ड, गण्ड, परिघ, शूल, वैधृति, वज्र, विष्कम्भ, व्याघात और व्यतीपात — और न ये करण — चतुष्पाद, किंस्तुघ्न, नाग, शकुनि और विष्टि।
- गुरु और शुक्र उदित हों: जब तक गुरु सूर्य से 11° के भीतर हो या शुक्र 10° के भीतर (वक्री हो तो 8°), वह ग्रह अस्त है और कोई मुहूर्त नहीं।
- अधिक मास वर्जित: 2027 में कोई अधिक मास नहीं है।
- चातुर्मास — चिह्नित, वर्जित नहीं: चातुर्मास (13 जुलाई 2027 – 9 नवंबर 2027) विवाह को बंद करता है। सगाई पर परंपराएँ अलग हैं: कुछ पंचांग इसे भी बंद रखते हैं, कुछ इसके भीतर की तारीखें देते हैं, और कई परिवार चातुर्मास में सगाई कर विवाह देवउठनी एकादशी के बाद रखते हैं। ये तारीखें सूची में चिह्नित होकर रहती हैं — 2027 में 21।
- रिक्ता तिथियाँ: चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी मान्य हैं, जैसे प्रकाशित विवाह सूचियाँ इन्हें मान्य रखती हैं, और चिह्नित हैं — 2027 की 25 तारीखों पर इनमें से कोई तिथि है।
- पितृ पक्ष: श्राद्ध का पखवाड़ा (15 सितंबर 2027 – 30 सितंबर 2027) चातुर्मास के भीतर पड़ता है; इसमें अधिकांश परिवार कोई शुभ कार्य नहीं करते, इसलिए इसकी तारीखों पर अलग चिह्न है — 2027 में 4।
- यह किस रस्म के लिए: अंगूठी की रस्म, रोका, तिलक या चुन्नी — जिस रस्म को परिवार सगाई मानता है, वही इस मुहूर्त में होती है।
- दिन: सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, नई दिल्ली के अनुसार। जिस दिन को कोई वर्जित अवधि ज़रा भी छूती है, वह पूरा दिन छोड़ दिया जाता है; बाकी दिनों में मुहूर्त वह समय है जब ऊपर की सारी शर्तें एक साथ पूरी हों, और कम से कम 20 मिनट चले।
- जो यहाँ नहीं जाँचा गया: वर-वधू की अपनी कुंडलियाँ — कुंडली मिलान, और दोनों की जन्म राशि से चंद्र और गुरु का बल — और रस्म के समय का लग्न। ये पंडित दोनों कुंडलियों से जाँचते हैं।
सामान्य प्रश्न
क्या सितंबर 2027 में सगाई मुहूर्त है?
हाँ, 4 दिन: 18, 22, 27 और 30 सितंबर।
शनिवार, 18 सितंबर 2027 को मुहूर्त का समय क्या है?
सुबह 6:07 – शाम 4:47 — नई दिल्ली के समय अनुसार, रेवती नक्षत्र में।
सितंबर 2027 के बाद अगला सगाई मुहूर्त कब है?
रविवार, 3 अक्टूबर 2027 को।
कुछ पंचांग सितंबर 2027 में और तारीखें क्यों दिखाते हैं?
1, 2, 3, 4, 5, 8, 9, 10, 11 और 17 सितंबर बाकी सब नियमों पर शुद्ध हैं, पर उस समय शुक्र अपनी अंश-सीमा में अस्त है। जो पंचांग अस्त को ग्रह के दिखना बंद होने से गिनते हैं, वे इनमें से कुछ दिन दे सकते हैं।