द्वादश भाव (व्यय/मोक्ष)

हानि, व्यय, विदेश में बसना, अस्पताल, जेल, मोक्ष, शयनकक्ष का सुख।

दुष्ठान · चुनौती क्षेत्र
जीवन क्षेत्रहानि, व्यय, विदेश में बसना, अस्पताल, जेल, मोक्ष, शयनकक्ष का सुख।
प्राकृतिक कारकशनि, केतु, शुक्र
पारंपरिक शारीरिक संबंधपैर, पैर की उंगलियां, बाईं आंख

क्या खर्च, छोड़ा या सार्वजनिक दृष्टि से दूर किया जाता है?

पढ़ने का क्रम

  1. इस भाव की राशि पहचानें और उस राशि के स्वामी को कुंडली में खोजें।
  2. यहाँ स्थित ग्रह और आने वाली दृष्टि जोड़ें; खाली भाव को अनुपस्थित न मानें।
  3. फिर ऊपर दिए प्राकृतिक कारक से इस चित्र की तुलना करें।

विपरीत अक्ष भी पढ़ें

भाव 12 का विषय है: हानि, व्यय, विदेश में बसना, अस्पताल, जेल, मोक्ष, शयनकक्ष का सुख। विपरीत भाव 1 का विषय है: स्वयं, शारीरिक शरीर, रूप, स्वास्थ्य, स्वभाव, अहंकार, जीवन की दिशा। दोनों को साथ पढ़ने से एक पक्ष को अकेला निष्कर्ष नहीं बनाया जाता।

इस भाव को कैसे पढ़ें

पहले इस भाव की राशि, उसके स्वामी की स्थिति और स्थान देखें। फिर स्थित ग्रह, आने वाली दृष्टि और प्राकृतिक कारक जोड़ें। खाली भाव निष्क्रिय नहीं होता; उसका स्वामी और दृष्टियाँ विषय को सक्रिय रखते हैं।

पारंपरिक शारीरिक संबंध

भाव विश्लेषण सही जन्म समय पर निर्भर है क्योंकि लग्न लगभग हर दो घंटे में बदल सकता है। शारीरिक संबंध पारंपरिक प्रतीक हैं, निदान या स्वास्थ्य भविष्यवाणी नहीं।

अपनी कुंडली में भाव देखें

सामान्य प्रश्न

यदि यह भाव खाली हो तो?

अधिकांश कुंडलियों में कुछ भाव खाली होते हैं। भाव स्वामी, राशि, आने वाली दृष्टि और प्राकृतिक कारक देखें; खाली होना जीवन क्षेत्र को समाप्त नहीं करता।

क्या भाव और राशि एक ही हैं?

नहीं। भाव जीवन का क्षेत्र है और राशि वहाँ काम करने की शैली बताती है। पूर्ण-राशि वैदिक कुंडली में लग्न से गिनकर हर भाव में एक पूरी राशि आती है।

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